रोजाना योग करने के 10 चमत्कारी फायदे
- शारीरिक लचीलेपन (Flexibility) और मजबूती में सुधार।
- तनाव (Stress) और चिंता (Anxiety) में कमी।
- मानसिक शांति और एकाग्रता (Concentration) में वृद्धि।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) का मजबूत होना।
- पाचन तंत्र (Digestive System) का स्वस्थ रहना।
- बेहतर नींद (Improved Sleep) आना।
- शरीर का सही संतुलन और मुद्रा (Posture) बनाए रखना।
- रक्तचाप (Blood Pressure) और शुगर को नियंत्रित करने में सहायक।
- ऊर्जा के स्तर (Energy Level) में वृद्धि।
- हृदय (Heart) स्वास्थ्य में सुधार।
प्रमुख योगासन: विधि, लाभ और समय अवधि
1. ताड़ासन (Tadasana - Mountain Pose)
कैसे करें: सीधे खड़े हो जाएं, पैरों के बीच थोड़ा फासला रखें। सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और उंगलियों को आपस में फंसा लें। हथेलियों को ऊपर की ओर मोड़ें। एड़ियों को ऊपर उठाते हुए पंजों पर खड़े हो जाएं, पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचें। सामान्य श्वास लेते हुए संतुलन बनाए रखें। सांस छोड़ते हुए वापस आ जाएं।
लाभ: यह आसन शरीर को खींचकर लंबा करता है, रीढ़ को मजबूत बनाता है, संतुलन सुधारता है और फ्लैट फीट की समस्या में लाभप्रद है। यह एकाग्रता भी बढ़ाता है।
कितनी देर करें: 30 सेकंड से 1 मिनट (शुरुआत में 3 बार दोहराएं)
2. वृक्षासन (Vrikshasana - Tree Pose)
कैसे करें: सीधे खड़े हों। दाएं पैर को मोड़कर उसकी एड़ी को बाएं पैर की जांघ के अंदरूनी हिस्से पर रखें। बाएं पैर को सीधा रखें। सांस लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाकर नमस्कार की मुद्रा बनाएं। सामने एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें। सामान्य श्वास लेते रहें। कुछ देर रुकने के बाद, सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस आ जाएं और दूसरे पैर से दोहराएं।
लाभ: यह आसन पैरों को मजबूत करता है, कूल्हों को खोलता है, संतुलन और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की स्थिरता में सुधार करता है।
कितनी देर करें: प्रत्येक पैर से 30 सेकंड से 1 मिनट (या जितनी देर संतुलन बनाए रख सकें)
3. भुजंगासन (Bhujangasana - Cobra Pose)
कैसे करें: पेट के बल लेट जाएं। माथे को जमीन पर रखें। पैरों को एक साथ रखें। हथेलियों को कंधों के नीचे, कोहनियों को शरीर के पास रखें। सांस लेते हुए धीरे-धीरे सिर, छाती और पेट को नाभि तक ऊपर उठाएं। कोहनियों को थोड़ा मोड़कर रखें, कंधों को कान से दूर और पीछे की ओर ले जाएं। ऊपर देखते रहें। सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस आ जाएं।
लाभ: यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है, पीठ दर्द में आराम देता है, फेफड़ों और छाती को खोलता है, और तनाव कम करने में मदद करता है।
कितनी देर करें: 15 से 30 सेकंड तक रुकें (3 से 5 बार दोहराएं)
4. कपालभाति प्राणायाम (Kapalbhati Pranayama)
कैसे करें: किसी आरामदायक आसन (जैसे पद्मासन, सुखासन) में बैठ जाएं, रीढ़ सीधी रखें। गहरी सांस अंदर लें। फिर पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ते हुए बलपूर्वक और जल्दी से सांस बाहर छोड़ें। सांस अंदर लेना प्राकृतिक रूप से और निष्क्रिय तरीके से होता है। यह क्रिया लगातार करते रहें।
लाभ: यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, रक्त संचार में सुधार करता है, पाचन क्रिया को उत्तेजित करता है, और मानसिक तनाव को दूर कर मन को शांत करता है।
कितनी देर करें: शुरुआत में 1 से 5 मिनट तक (धीरे-धीरे 10 मिनट तक बढ़ा सकते हैं)
सामान्य योगाभ्यास की अवधि
योग की शुरुआत करने वालों को रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट का अभ्यास करना चाहिए, जिसमें वार्म-अप, आसन और अंत में शवासन या ध्यान शामिल हो। विशेषज्ञ और अनुभवी साधक 45 मिनट से 1 घंटे तक योग कर सकते हैं। प्राणायाम और ध्यान के लिए अलग से समय देना बहुत फायदेमंद होता है।
ध्यान दें: योग आसनों को हमेशा किसी योग्य गुरु की देखरेख में शुरू करें और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें।