Class 12 cbse ncert all chapters Summary and Q&A solution
हम अपने इस ब्लॉग पोस्ट में अपने पाठक विद्यार्थियों को यह आश्वासन देते हैं कि हम आपको क्लास 12 के सीबीएसई बोर्ड एनसीईआरटी प्रशासन से संबंधित पुस्तक बायोलॉजी अर्थात जीव विज्ञान के संपूर्ण अध्याय का संक्षेपण और अध्याय में निहित सभी प्रश्नों का समाधान प्रदान करेंगे।
अध्याय पहला: जीवो में जनन
अध्याय का संक्षेपण (Summary of the Chapter)
यह अध्याय जीव विज्ञान के मूलभूत सिद्धांत "जनन" (Reproduction) पर केंद्रित है, जिसके द्वारा प्रजातियों की निरंतरता पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहती है। हालांकि प्रत्येक व्यक्ति जीव का अंत निश्चित है, प्रजातियाँ लाखों वर्षों तक अस्तित्व में रहती हैं। जन्म से प्राकृतिक मृत्यु तक की अवधि को जीवन अवधि कहते हैं । एककोशिकीय जीवों को छोड़कर कोई भी जीव अमर नहीं है।
जनन के प्रकार: जनन एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें एक जीव अपने समान एक छोटी संतति को जन्म देता है। जनन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है :
1: अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction):
इसमें संतति की उत्पत्ति **एकल जनक** द्वारा होती है, जिसमें युग्मक निर्माण की भागीदारी हो भी सकती है या नहीं भी। उत्पन्न संतति न केवल एक-दूसरे के समरूप होती है, बल्कि अपने जनक के भी एकदम समान होती है। इन्हें *क्लोन* कहते हैं। यह सरल शारीरिक संरचना वाले जीवों जैसे कवक (fungi), शैवाल (algae), तथा कुछ अकशेरुकी प्राणियों में सामान्य रूप से पाया जाता है।
विधियाँ और उदाहरण: एककोशिकीय जीवों (प्रोटिस्टा और मोनेरा) में जनक कोशिका दो भागों में विभक्त होकर नए जीवों को जन्म देती है, जैसे अमीबा और पैरामीशियम में *द्विखंडन* (fission)। यीस्ट में विभाजन असमान होता है और छोटी कलिकाएँ (bud) बनती हैं, जिसे *मुकुलन* (budding) कहते हैं। यह हाइड्रा में भी पाया जाता है । कवक और शैवाल में *अलैंगिक चल बीजाणु* (zoospores)। पेनिसिलियम में *कोनिडिया*। स्पंज में *जेम्यूल* (gemmule)।
अमीबा विषम परिस्थितियों में त्रिस्तरीय कठोर आवरण (पुटी/Cyst) स्रावित करता है (पुटीभवन)। अनुकूल परिस्थितियों में पुटीकृत अमीबा बहुखंडन द्वारा विभाजित होता है और बीजाणु अमीबाह (Pseudopodiospores) उत्पन्न करता है, जिसे *बीजाणुजनन* कहते हैं।
पुनरुद्भवन (Regeneration): पुनरुद्भवन (Regeneration) एक और अलैंगिक विधि है, जहाँ शरीर अनेक टुकड़ों में विभक्त हो जाता है और प्रत्येक टुकड़ा नए जीव में विकसित हो जाता है (उदाहरण: हाइड्रा)।
कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): यह पौधों में एक प्रकार का अलैंगिक जनन है।
कायिक प्रवर्ध (propagule) की इकाइयाँ: ऊपरी भूस्तारी, प्रकंद (अदरक), सककंद, बल्ब, भूस्तरी (जल हायसिंथ), आलू की आँख, ब्रायोफिलम की पर्ण कलिकाएँ। जल हायसिंथ ("बंगाल का आतंक") ठहरे जल में सर्वाधिक वृद्धि करने वाला खरपतवार है और यह कायिक प्रवर्धन द्वारा तीव्र गति से फैलता है।
2: लैंगिक जनन (Sexual Reproduction):
इसमें विपरीत लिंग वाले दो जनकों द्वारा नर तथा मादा युग्मकों का निर्माण शामिल है, जो आपस में मिलकर युग्मनज (Zygote) बनाते हैं। यह अलैंगिक जनन की तुलना में अधिक विस्तृत, जटिल और धीमी प्रक्रिया है। लैंगिक जनन से उत्पन्न संतति अपने जनकों के समरूप नहीं होती है, क्योंकि यह *नए रूपभेद* (variation) विकसित करने में सहायक होती है, जिससे उत्तरजीविता लाभ की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
जीवन की प्रावस्थाएँ : सभी जीव अपने जीवन में निश्चित वृद्धि और परिपक्वता तक पहुँचते हैं:
1. किशोरावस्था/कायिक प्रावस्था (Juvenile/Vegetative phase): वृद्धि का काल, जिसके बाद लैंगिक जनन शुरू होता है।
2. प्रजनक प्रावस्था (Reproductive phase): इस अवस्था में जीव जनन के लिए सक्रिय होता है। यह प्राणियों में शारीरिक और आकारिकीय बदलावों से प्रकट होती है। नॉन-प्राइमेट स्तनधारियों (गाय, भेड़, चूहा, कुत्ता) में चक्र को *मदचक्र* (oestrus cycle) कहते हैं, जबकि प्राइमेटों (बंदर, मनुष्य) में इसे *ऋतुस्राव चक्र* (menstrual cycle) कहते हैं। कुछ स्तनधारी केवल अनुकूल परिस्थितियों/मौसम में प्रजनन करते हैं (*ऋतुनिष्ठ प्रजनक*), जबकि अधिकांश स्तनधारी पूरे जनन काल में सक्रिय होते हैं (*सतत प्रजनक*)।
3. **जीर्णता/वृद्धावस्था (Senescence):** जनन आयु की समाप्ति को जीर्णता माना जाता है। इसमें उपापचयों की गति धीमी हो जाती है और अंततः यह मृत्यु की ओर ले जाती है [19]।
लैंगिक जनन की घटनाएँ: लैंगिक जनन की घटनाओं को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है:
निषेचन-पूर्व घटनाएँ (Pre-fertilization Events):
1. युग्मक जनन (Gametogenesis): नर और मादा युग्मकों (हैप्लोइड कोशिकाएँ) के निर्माण की प्रक्रिया।
युग्मक प्रकार: समयुग्मकी (Isogametes) - देखने में समान (जैसे क्लैडोफोरा); विषमयुग्मकी (Heterogametes) - नर (पुमणु/शुक्राणु) और मादा (अंड/डिंब) अलग होते हैं (जैसे मानव)।
लैंगिकता: जीव द्विलिंगी (उभयलिंगी - केंचुआ, स्पंज, जोंक) हो सकते हैं, या एकलिंगी (तिलचट्टा)। पुष्पीय पौधों में द्विलिंगी (उभयलिंगाश्रयी - कुकुरबिट्स, नारियल) या एकलिंगी (एकलिंगाश्रयी - पपीता, खजूर) हो सकते हैं।
कोशिका विभाजन: अगुणित (n) जनक समसूत्री विभाजन द्वारा युग्मक बनाते हैं। द्विगुणित (2n) जनक अर्धसूत्री विभाजन (न्यूनकारी विभाजन) द्वारा अगुणित युग्मक बनाते हैं।
युग्मक स्थानांतरण (Gamete Transfer): अधिकांश जीवों में नर युग्मक चलनशील होते हैं और मादा युग्मक अचल [26]। शैवाल, ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा में स्थानांतरण के लिए जल माध्यम होता है। बीजीय पौधों में, पराग कण (परागकोश से उत्पन्न) नर युग्मक के वाहक के रूप में कार्य करते हैं और वर्तिकाग्र तक स्थानांतरित होते हैं—इस प्रक्रिया को *परागण* (Pollination) कहते हैं। निषेचन (Fertilization) युग्मकों का संलयन (Syngamy), जिसके परिणामस्वरूप *द्विगुणित युग्मनज* (Zygote) का निर्माण होता है।
अनिषेक जनन (Parthenogenesis): कुछ जीवों (रोटिफर्स, मधुमक्खियाँ, कुछ छिपकलियाँ, टर्की) में मादा युग्मक बिना निषेचन के नए जीव में विकसित होने लगता है।
निषेचन का स्थान: बाह्य निषेचन (External Fertilization): जीव के शरीर के बाहर (आमतौर पर जल में) होता है (जैसे अधिकांश शैवाल, मछली, जल-स्थलचर)। इसमें बड़ी संख्या में युग्मक मुक्त होते हैं।
आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization): जीव शरीर के भीतर होता है (जैसे कवक, सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी, और अधिकांश पौधे)।
निषेचन-पश्च घटनाएँ (Post-fertilization Events)
1. युग्मनज (Zygote): द्विगुणित युग्मनज का निर्माण सार्वभौमिक है। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी है।
2. भ्रूणोद्भव (Embryogenesis): युग्मनज से भ्रूण के विकास की प्रक्रिया। इसमें कोशिका विभाजन (समसूत्रण) और कोशिका विभेदीकरण (ऊतकों और अंगों का निर्माण) होता है।
प्राणियों में,
अंडप्रजक (Oviparous): कठोर कैल्शियम युक्त कवच वाले निषेचित अंडे देते हैं (सरीसृप, पक्षी)।
सजीवप्रजक (Viviparous): युग्मनज मादा शरीर के भीतर विकसित होकर शिशु को जन्म देता है (अधिकांश स्तनधारी, मानव)। सजीवप्रजक जीवों में भ्रूणीय देखभाल के कारण उत्तरजीविता के अवसर बढ़ जाते हैं।
पुष्पीय पौधों में: निषेचन के बाद अंडाशय (ovary) *फल* में विकसित होता है, बीजांड (ovule) *बीज* में विकसित होता है। फल की भित्ति को फलभित्ति (pericarp) कहते हैं, जो फल को सुरक्षा प्रदान करती है।
🔷️ अभ्यास प्रश्नों के उत्तर (Answers to Practice Questions)
1. जीवों के लिए जनन क्यों अनिवार्य है?
उतर: जनन एक अनिवार्य प्रक्रिया है क्योंकि यह एक प्रजाति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी *जीवित रहने योग्य* बनाता है। यह प्रजाति में एक पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी में निरंतरता बनाए रखती है। जनन के बिना प्रजातियाँ लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि पृथ्वी पर पौधों और पशु-पक्षियों की विशाल संख्या हजारों वर्षों से विद्यमान है।
2. जनन की अच्छी विधि कौन-सी है और क्यों?
उतर: लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) जनन की बेहतर विधि मानी जाती है क्योंकि लैंगिक जनन की क्रियाविधि *नए रूपभेद* (variation) को विकसित करने में सहायक होती है। नए रूपभेद उत्पन्न होने से जीवों की *उत्तरजीविता लाभ* की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। अलैंगिक जनन से उत्पन्न संतति क्लोन होती है (आनुवंशिक रूप से समान), जबकि लैंगिक जनन से उत्पन्न संतति माता-पिता या आपस में भी समरूप नहीं होती है, जिससे *विविधता* आती है।
3. अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न हुई संतति को क्लोन क्यों कहा गया है?
उतर: अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न संतति को क्लोन इसलिए कहा गया है क्योंकि वे *आकारिकीय* (morphologically) तथा *आनुवंशिक* (genetically) रूप से एक-दूसरे के और अपने जनक के *एकदम समान* होती हैं।
4. लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप बने संतति को जीवित रहने के अच्छे अवसर होते हैं। क्यों? क्या यह कथन हर समय सही होता है?क्यों?
उतर: लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप नए रूपभेद (विविधता) उत्पन्न होते हैं। विविधता प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवों को सफल होने में मदद करती है, जिससे उनकी उत्तरजीविता के अवसर बढ़ जाते हैं, क्या यह कथन हर समय सही होता है? लैंगिक जनन अनुकूलन क्षमता प्रदान करता है। हालांकि, अलैंगिक जनन भी सरल जीवों को अनुकूल परिस्थितियों में तेजी से बहुगुणित होने का लाभ देता है।
5. अलैंगिक जनन द्वारा बनी संतति लैंगिक जनन द्वारा बनी संतति से किस प्रकार से भिन्न है?
| विशेषता | अलैंगिक जनन द्वारा बनी संतति | लैंगिक जनन द्वारा बनी संतति |
| :--- | :--- | :--- |
| विशेषता | अलैंगिक जनन द्वारा बनी संतति | लैंगिक जनन द्वारा बनी संतति |
|---|---|---|
| जनक संख्या | एकल जनक से उत्पन्न | दो जनकों (विपरीत लिंग) के युग्मन से उत्पन्न |
| समरूपता | क्लोन कहलाती है; आकारिकीय और आनुवंशिक रूप से समान | अपने जनकों के या आपस में समरूप नहीं होती है |
| विविधता | विविधता नहीं होती है (आनुवंशिक रूप से समान) | नए रूपभेद (विविधता) विकसित करती है |
| उत्पादन गति | तेज प्रक्रिया | विस्तृत, जटिल और धीमी प्रक्रिया |
6. अलैंगिक तथा लैंगिक जनन के मध्य विभेद स्थापित करो। कायिक जनन को प्रारूपिक अलैंगिक जनन क्यों माना गया है?
अलैंगिक तथा लैंगिक जनन के मध्य विभेद: (देखें प्रश्न 5 की तालिका, मुख्य अंतर एकल जनक बनाम दो जनक, और क्लोन बनाम रूपभेद हैं)।
7. कायिक जनक प्रारूपिक अलैंगिक जनन क्यों माना गया है?
कायिक जनन को प्रारूपिक अलैंगिक जनन माना जाता है क्योंक यह ऐसी संरचनाओं (जैसे प्रकंद, भूस्तरी, कंद) द्वारा होता है, जिनके निर्माण में *दो जनक भाग नहीं लेते*। यह युग्मक (gamete) या युग्मकों के संलयन (fusion) को शामिल नहीं करता है। इससे उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से जनक पौधे के समान होती है (हालांकि स्रोत में सीधे 'क्लोन' शब्द का उपयोग कायिक जनन के लिए नहीं किया गया है, यह पूछा गया है कि क्या क्लोन शब्द उपयोग्य है , और अलैंगिक जनन के परिणाम क्लोन होते हैं )।
8. कायिक प्रवर्धन से क्या समझते हैं? कोई दो उपयुक्त उदाहरण दो।
उतर: कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) जनन की एक अलैंगिक विधि है जो पौधों में देखी जाती है, जहाँ पौधे की कायिक प्रवर्ध (Propagule) नामक इकाइयाँ नई संतति पैदा करने की क्षमता रखती हैं।
दो उपयुक्त उदाहरण:
1. *आलू की आँख*(कलिका)।
2. *अदरक का प्रकंद*।
3. *जल हायसिंथ की भूस्लतिका* (Offset)।
9. व्याख्या करें: (क) किशोरावस्था चरण (ख) प्रजनक चरण (ग) जीर्णता चरण या जीर्णावस्था:
उतर: (क) किशोरावस्था चरण (Juvenile Phase): यह जीव के जीवन में *वृद्धि का काल* है। इस प्रावस्था की समाप्ति के पश्चात् ही जीव लैंगिक जनन कर सकता है । पौधों में इसे *कायिक प्रावस्था* कहते हैं।
(ख) प्रजनक चरण (Reproductive Phase): यह किशोरावस्था/कायिक प्रावस्था की समाप्ति के बाद शुरू होता है। इस अवस्था में जीव प्रजनन के लिए सक्रिय हो जाता है। उच्च पौधों में, यह आसानी से तब देखा जा सकता है जब उनमें पुष्प आने लगते हैं।
(ग) जीर्णता चरण या जीर्णावस्था (Senescence Phase): जनन आयु की समाप्ति को जीर्णता या वृद्धावस्था के मापदंड के रूप में माना जा सकता है। यह जीवन की अवधि के अंतिम चरण में होता है, जहाँ शरीर में सहवर्ती परिवर्तन (जैसे उपापचयों का मंद गति से होना) होने लगते हैं, और अंततः यह मृत्यु तक ले जाती है।
10. अपनी जटिलता के बावजूद बड़े जीवों ने लैंगिक प्रजनन को क्यों अपनाया है?
अपनी जटिलता, विस्तृत और धीमी प्रक्रिया होने के बावजूद, बड़े जीवों ने लैंगिक प्रजनन को अपनाया है क्योंकि लैंगिक जनन नए रूपभेद (विविधता) उत्पन्न करता है। यह विविधता उत्तरजीविता लाभ की संभावनाओं को बढ़ाती है, विशेषकर बदलते या प्रतिकूल पर्यावरण में।
11. व्याख्या करके बताएं कि अर्धसूत्री विभाजन तथा युग्मकजनन सदैव अंतर्संबंधित (अंतर्बद्ध) होते हैं।
उतर: युग्मकजनन* (Gametogenesis) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा युग्मकों का गठन होता है। युग्मक सदैव अगुणित (haploid, n) होते हैं। जब जनक काय *द्विगुणित* (diploid, 2n) होती है (जैसे उच्च श्रेणी के प्राणी और पौधे), तो युग्मकों को अगुणित बनाने के लिए एक *न्यूनकारी विभाजन* की आवश्यकता होती है।*अर्धसूत्री विभाजन* (Meiosis) वह न्यूनकारी विभाजन है जो द्विगुणित कोशिका से अगुणित युग्मक उत्पन्न करता है। इसलिए, द्विगुणित जीवों में, अर्धसूत्री विभाजन ही युग्मकजनन की प्रक्रिया को संभव बनाता है, और ये दोनों प्रक्रियाएँ सदैव अंतर्संबंधित होती हैं।
12. प्रत्येक पुष्पीय पादप के भाग को पहचानें तथा लिखें कि वह अगुणित (n) है या द्विगुणित (2n)।
उतर: (क) अंडाशय (Ovary): द्विगुणित (2n) (यह जनक की काय का हिस्सा है)
(ख) परागकोश (Anther): द्विगुणित (2n) (यह जनक की काय का हिस्सा है)
(ग) अंडा (या डिंब) (Egg/Ovum): अगुणित (n) (यह एक मादा युग्मक है)
(घ) पराग (Pollen): अगुणित (n) (यह नर युग्मक का वाहक है, युग्मक अगुणित होते हैं)
(च) नर युग्मक (Male Gamete): अगुणित (n)
(छ)युग्मनज (Zygote): द्विगुणित (2n) (यह युग्मक संलयन का परिणाम है)
13. बाह्य निषेचन की व्याख्या करें। इसके नुकसान बताएं।
बाह्य निषेचन (External Fertilization): यह वह प्रक्रिया है जिसमें युग्मक संलयन (फ्यूजन) बाहरी माध्यम (आमतौर पर जल) में, *जीव के शरीर के बाहर* संपन्न होता है। यह अधिकांश शैवालों, मछलियों, और जल-स्थलचर प्राणियों में पाया जाता है।
नुकसान:
1. उत्तरजीविता जोखिम: बाह्य निषेचन करने वाले जीवों की संतति (लारवा या छोटे जीव) शिकारियों का शिकार होने जैसी *नाजुक स्थिति* से गुजरती हैं।
2. उच्च जोखिम: वयस्क होने तक उनकी उत्तरजीविता काफी *जोखिम पूर्ण* होती है।
3. विशाल संख्या: युग्मक संलयन के अवसर को बढ़ाने के लिए मादा और नर दोनों को बाहरी माध्यम में *काफी संख्या में युग्मक* मुक्त करने पड़ते हैं।
14. ज़ूस्पोर (अलैंगिक चल बीजाणु) तथा युग्मनज के बीच विभेद करें।
| विशेषता | ज़ूस्पोर (चल बीजाणु) (Zoospore) | युग्मनज (Zygote) |
| :--- | :--- | :--- |
| **जनन का प्रकार** | अलैंगिक जनन संरचना [8] | लैंगिक जनन का परिणाम [30, 33] |
| **उत्पत्ति** | जनक जीव में कोशिका विभाजन से बनता है (समसूत्रण) [7, 8] | नर और मादा युग्मकों के संलयन (निषेचन) से बनता है [30] |
| **गुणसूत्र संख्या** | अगुणित (n) या द्विगुणित (2n) हो सकता है (आमतौर पर अगुणित सरल जीवों में) [20, 24] | **सदैव द्विगुणित** (2n) होता है [30, 33] |
| **चलनशीलता** | चलनशील सूक्ष्मदर्शीय संरचनाएँ होती हैं [8] | आमतौर पर अचल, एकल कोशिका [30] |
15. युग्मक जनन एवं भ्रूणोद्भव के बीच अंतर स्पष्ट करें।
| विशेषता | युग्मक जनन (Gametogenesis) | भ्रूणोद्भव (Embryogenesis) |
| :--- | :--- | :--- |
| **परिभाषा** | नर तथा मादा युग्मकों के **गठन** की प्रक्रिया [20] | युग्मनज से **भ्रूण** के विकास की प्रक्रिया [34, 35] |
| **समय** | निषेचन-पूर्व घटना [12, 20] | निषेचन-पश्च घटना [12, 33] |
| **कोशिका प्रक्रिया** | इसमें समसूत्री या अर्धसूत्री विभाजन शामिल हो सकता है [24, 25] | इसमें कोशिका विभाजन (समसूत्रण) और कोशिका **विभेदीकरण** शामिल है [34] |
| **परिणामी संरचना** | अगुणित युग्मक (n) का निर्माण होता है [20, 28] | नए जीव/शिशु का निर्माण होता है [34] |
16. एक पुष्प में निषेचन-पश्च परिवर्तनों की व्याख्या करें। [40]
पुष्पीय पौधों में निषेचन के बाद निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:
1.बाह्य दल (sepals), पंखुड़ी (petals) तथा पुंकेसर (stamen): ये मुरझाकर झड़ जाते हैं। (हालांकि कुछ पौधों में बाह्य दल पुष्प से जुड़े रहते हैं)।
2. स्त्रीकेसर (Pistil): यह पौधे से जुड़ा रहता है।
3. युग्मनज (Zygote): यह भ्रूण (embryo) में विकसित होता है।
4. बीजांड (Ovule): यह परिपक्व होकर बीज (seed) में विकसित हो जाता है।
5. अंडाशय (Ovary): यह फल (fruit) के रूप में विकसित होती है।
6. फलभित्ति (Pericarp): अंडाशय की भित्ति फल की भित्ति का निर्माण करती है, जो फल को सुरक्षा प्रदान करती है।
17. एक द्विलिंगी पुष्प क्या है? अपने आस-पास से पाँच द्विलिंगी पुष्पों को एकत्रित करें और अपने शिक्षक की सहायता से इनके सामान्य (स्थानीय) एवं वैज्ञानिक नाम पता करें।
उतर: द्विलिंगी पुष्प (Bisexual Flower): द्विलिंगी पुष्प वह है जिसमें पुंकेसर (नर लैंगिक अंग) और अंडप (मादा लैंगिक अंग) दोनों एक ही पुष्प में पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, शकरकंद का पुष्प द्विलिंगी होता है।
द्विलिंगी पुष्पों के नाम: इस अध्याय में केवल एक ही उदाहरण है "शकरकंद" का उदाहरण दिया गया है।
18. किसी भी कुकुरबिट पादप के कुछ पुष्पों की जाँच करें और पुंकेसरी एवं स्त्रीकेसरी पुष्पों को पहचानने की कोशिश करें। क्या आप अन्य एकलिंगी पौधों के नाम जानते हैं?
उतर: पुंकेसरी एवं स्त्रीकेसरी पुष्पों को पहचानना: कुकुरबिट पादप (जैसे ककड़ी, लौकी) *उभयलिंगाश्रयी* होते हैं (एक ही पौधे पर नर और मादा दोनों लिंग होते हैं), लेकिन उनमें पैदा होने वाले पुष्प *एकलिंगी* (Unisexual) हो सकते हैं।
पुंकेसरी पुष्प (Staminate flower): वह पुष्प जो पुंकेसर (पराग कण वहन करने वाला) धारण करता है (नर पुष्प)।
स्त्रीकेसरी पुष्प (Pistillate flower): वह पुष्प जो स्त्रीकेसर (अंडप धारण करने वाला) धारण करता है (मादा पुष्प) [21]।
अन्य एकलिंगी पौधों के नाम:
अध्याय के अनुसार एकलिंगाश्रयी (Dioecious) पौधों के उदाहरण हैं:
1. पपीता (Papaya)।
2. खजूर (Date palm)।
3. मार्केन्शिया (एक एकलिंगाश्रयी पादप)।
19. अंडप्रजक प्राणियों की संतानों का उत्तर जीवन (सर्वाइवल) सजीव प्रजक प्राणियों की तुलना में अधिक जोखिमयुक्त क्यों होता है? व्याख्या करें।
अंडप्रजक प्राणियों (जैसे सरीसृप और पक्षी) की संतानों का उत्तर जीवन सजीव प्रजक (जैसे स्तनधारी) की तुलना में अधिक जोखिमयुक्त होता है क्योंकि
1. बाह्य विकास: अंडप्रजक प्राणियों में निषेचित अंडे बाहरी वातावरण में सुरक्षित स्थानों पर दिए जाते हैं।
2. सुरक्षा की कमी: भ्रूण का विकास (या तो बाह्य निषेचन के मामले में या अंडे के भीतर) मादा शरीर के बाहर होता है, जिससे वे शिकारियों का शिकार होने और पर्यावरणीय कारकों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
3. आंतरिक देखभाल का अभाव: सजीव प्रजक जीवों में, युग्मनज विकसित होकर शिशु का विकास मादा शरीर के भीतर करता है। इस आंतरिक भ्रूणीय देखभाल तथा संरक्षण के कारण सजीव प्रजक जीवों के जीवित रहने के सुअवसर बढ़ जाते हैं, जबकि अंडप्रजक जीवों में यह सुरक्षा उपलब्ध नहीं होती। (यह बाह्य निषेचन के नुकसानों जैसा ही है, जहाँ जीवित रहने का जोखिम काफी होता है।)