प्रस्तुत पाठ्यसामग्री मुद्रा और बैंकिंग के मूलभूत सिद्धांतों की विस्तृत व्याख्या करती है। इसमें बताया गया है कि कैसे मुद्रा ने वस्तु विनिमय प्रणाली की कठिनाइयों को दूर कर लेन-देन के माध्यम और मूल्य के संचय के रूप में अपनी जगह बनाई है। स्रोत स्पष्ट करते हैं कि व्यावसायिक बैंक जमा स्वीकार करके और ऋण देकर अर्थव्यवस्था में साख का सृजन करते हैं, जिसे मुद्रा गुणक के माध्यम से समझा जा सकता है। इसके साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला गया है, जो नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और खुले बाजार की प्रक्रियाओं जैसे उपकरणों से मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करता है। अंततः, यह पाठ आधुनिक युग में डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन के बढ़ते महत्त्व को भी रेखांकित करता है।
पाठ के अंत में दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
1. वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है? इसकी क्या कमियाँ हैं?
मुद्रा के माध्यम के बिना आर्थिक विनिमय को वस्तु विनिमय कहा जाता है । इसकी सबसे बड़ी कमी आवश्यकताओं के उभय (दोहरे) संयोग की असंभाव्यता है, अर्थात् किसी ऐसे व्यक्ति को खोजना बहुत मुश्किल होता है जिसकी मांग आपके पास उपलब्ध वस्तु की हो और जिसके पास आपकी जरूरत की वस्तु हो । इसके अलावा, वस्तु विनिमय प्रणाली में भविष्य के लिए संपत्ति (मूल्य) का संचय करना कठिन होता है क्योंकि वस्तुएं नाशवान हो सकती हैं, उन्हें संचित करने के लिए अधिक स्थान चाहिए होता है, और भविष्य में विनिमय के लिए फिर से जरूरतमंद व्यक्ति को खोजने में समय और साधन लगते हैं ।
2. मुद्रा के प्रमुख कार्य क्या-क्या हैं? मुद्रा किस प्रकार वस्तु विनिमय प्रणाली की कमियों को दूर करता है?
मुद्रा की सर्वप्रथम भूमिका यह है कि यह विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करती है जिससे वस्तुओं का लेन-देन सरल हो जाता है । यह एक सुविधाजनक लेखा की इकाई है जिसमें सभी वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य व्यक्त किया जा सकता है । इसके अतिरिक्त, मुद्रा मूल्य संचय का कार्य करती है क्योंकि यह नाशवान नहीं है और इसकी संचय लागत बहुत कम होती है । एक मध्यवर्ती वस्तु के रूप में कार्य करके मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की खोज की समस्या और समय की बर्बादी को समाप्त कर देती है ।
3. संव्यवहार के लिए मुद्रा की माँग क्या है? किसी निर्धारित समयावधि में संव्यवहार मूल्य से यह किस प्रकार संबंधित है?
मुद्रा धारण करने का मुख्य प्रयोजन संव्यवहारों (लेन-देन) को सुचारू रूप से जारी रखना है क्योंकि लोगों की आय प्राप्ति और व्यय के समय में अंतर होता है । संव्यवहार के लिए मुद्रा की मांग ($M_T^d$) किसी निश्चित समयावधि में अर्थव्यवस्था में होने वाले संव्यवहार के कुल मूल्य का एक अंश मात्र होती है । इसका संबंध सूत्र $M_T^d = k.T$ से दर्शाया जाता है, जहाँ T संव्यवहार का कुल मौद्रिक मूल्य है और k एक धनात्मक अंश है । सामान्यतः संव्यवहार के लिए मुद्रा की मांग का अर्थव्यवस्था की वास्तविक आय (Y) और उसके औसत कीमत स्तर (P) के बीच धनात्मक संबंध होता है ($M_T^d = kPY$) ।
4. भारत में मुद्रा पूर्ति की वैकल्पिक परिभाषा क्या है?
भारतीय रिज़र्व बैंक मुद्रा की पूर्ति के वैकल्पिक मापों को चार रूपों (M1, M2, M3 और M4) में प्रकाशित करता है :
M1 = CU (जनता द्वारा रखी गई करेंसी) + DD (व्यावसायिक बैंकों की निवल माँग जमा) ।
M2 = M1 + डाकघर बचत बैंकों में बचत जमाएँ ।
M3 = M1 + व्यावसायिक बैंकों की निवल आवधिक जमाएँ ।
M4 = M3 + डाकघर बचत संस्थाओं में कुल जमाएँ (राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्रों को छोड़कर) ।
5. वैधानिक पत्र क्या है? कागज़ी मुद्रा क्या है?
देश के मौद्रिक प्राधिकरण (जैसे रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी करेंसी नोट और सिक्कों को कागज़ी मुद्रा कहते हैं । इनका सोने या चाँदी की तरह अपना कोई आंतरिक मूल्य नहीं होता । इन्हें वैधानिक पत्र (लीगल टेंडर) भी कहा जाता है क्योंकि देश के किसी भी नागरिक द्वारा इसके माध्यम से किए गए किसी भी प्रकार के संव्यवहार (लेन-देन) को अस्वीकार नहीं किया जा सकता है ।
6. उच्च शक्तिशाली मुद्रा क्या है?
केंद्रीय बैंक द्वारा निर्मित करेंसी, जो जनता के पास होती है अथवा व्यावसायिक बैंकों के पास आरक्षित कोष के रूप में होती है, उसे 'उच्च शक्ति द्रव्य' या 'रिज़र्व द्रव्य' अथवा 'मौद्रिक आधार' कहा जाता है क्योंकि यह बैंकों के साख निर्माण का आधार होती है ।
7. व्यावसायिक बैंक के कार्यों का वर्णन कीजिए।
व्यावसायिक बैंक द्रव्य निर्माण अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं जो उन व्यक्तियों और फर्मों के बीच मध्यस्थता करते हैं जिनके पास अतिरिक्त कोष हैं और जिन्हें कोष की आवश्यकता है । इनके मुख्य कार्य जनता से जमा (डिपॉजिट) स्वीकार करना और उस जमा राशि का उपयोग ज़रूरतमंदों को ऋण (उधार) देने के लिए करना है । बैंक जमाकर्ताओं को कम ब्याज देते हैं और उधार लेने वालों से अधिक ब्याज वसूलते हैं, और इसी ब्याज का अंतर ('स्प्रेड') बैंक का लाभ होता है ।
8. मुद्रा गुणक क्या है? गुणक का मूल्य क्या निर्धारित करता है?
मुद्रा गुणक वह अनुपात है जो बताता है कि बैंक अपने पास रखे नकद कोष के आधार पर कितनी कुल जमाओं (मुद्रा) का सृजन कर सकते हैं । इसका सूत्र है: मुद्रा गुणक = 1 / नकद कोष अनुपात (CRR) । नकद कोष अनुपात (CRR) का मूल्य मुद्रा गुणक को निर्धारित करता है; यदि CRR 20% (0.2) है, तो मुद्रा गुणक 5 होगा, जिसका अर्थ है कि 100 रुपये का कोष 500 रुपये की जमाओं का सृजन करेगा ।
9. भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति के कौन-कौन से उपकरण हैं?
भारतीय रिज़र्व बैंक मुद्रा पूर्ति को नियंत्रित करने के लिए परिमाणात्मक और गुणात्मक उपकरणों का प्रयोग करता है । इसके प्रमुख परिमाणात्मक उपकरणों में शामिल हैं:
नकद कोष अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) में परिवर्तन ।
बैंक दर में परिवर्तन ।
खुले बाज़ार की क्रियाएँ (सरकारी बांड्स का क्रय-विक्रय) ।
रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के माध्यम से अल्पकालिक तरलता नियंत्रण ।
10. क्या आप ऐसा मानते हैं कि अर्थव्यवस्था में व्यावसायिक बैंक ही 'मुद्रा का निर्माण करते हैं'?
हाँ, व्यावसायिक बैंक साख सृजन के माध्यम से मुद्रा का निर्माण करते हैं । जब वे किसी को ऋण देते हैं, तो नया जमा खाता खोलते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति (पुरानी जमाएँ + नई जमाएँ) बढ़ जाती है । हालाँकि, उनके मुद्रा सृजन की एक सीमा होती है जो केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित नकद कोष अनुपात (CRR) पर निर्भर करती है । बैंक असीमित मुद्रा का निर्माण नहीं कर सकते ।
11. भारतीय रिज़र्व बैंक की किस भूमिका को अंतिम ऋणदाता कहा जाता है?
जब व्यावसायिक बैंकों को साख सृजन के लिए या ग्राहकों को भुगतान करने के लिए अतिरिक्त कोषों की आवश्यकता होती है, तो वे केंद्रीय बैंक (रिज़र्व बैंक) के पास ऋण के लिए जा सकते हैं । रिज़र्व बैंक की हर समय व्यावसायिक बैंकों को कोष प्रदान करने के लिए तैयार रहने की इसी भूमिका को 'अंतिम शरण ऋणदाता' (Lender of Last Resort) कहा जाता है ।
पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) और उनके उत्तर:
प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था में वस्तु विनिमय (Barter System) का क्या अर्थ है?
A) डिजिटल माध्यम से वस्तुओं का लेन-देन
B) कागज़ी मुद्रा के माध्यम से वस्तुओं की खरीद
C) मुद्रा के माध्यम के बिना वस्तुओं का वस्तुओं से विनिमय
D) केंद्रीय बैंक द्वारा वस्तुओं का वितरण
उत्तर: C) मुद्रा के माध्यम के बिना वस्तुओं का वस्तुओं से विनिमय ।
प्रश्न 2. 'उच्च शक्ति द्रव्य' (High Powered Money) में क्या शामिल होता है?
A) केवल बैंक के चालू खाते
B) केंद्रीय बैंक द्वारा निर्मित करेंसी जो जनता या व्यावसायिक बैंकों के पास है
C) केवल व्यावसायिक बैंकों द्वारा दिए गए ऋण
D) डाकघर की बचत जमाएँ
उत्तर: B) केंद्रीय बैंक द्वारा निर्मित करेंसी जो जनता या व्यावसायिक बैंकों के पास है ।
प्रश्न 3. बैंक दर (Bank Rate) या नकद कोष अनुपात (CRR) में वृद्धि होने पर अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A) मुद्रा की पूर्ति बहुत तेज़ी से बढ़ जाती है
B) मुद्रा की पूर्ति अपरिवर्तित रहती है
C) मुद्रा की पूर्ति कम (गिर) जाती है
D) व्यावसायिक बैंक असीमित ऋण देने लगते हैं
उत्तर: C) मुद्रा की पूर्ति कम (गिर) जाती है ।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से किसे 'वैधानिक पत्र' (Legal Tender) माना जाता है क्योंकि इसे लेन-देन में अस्वीकार नहीं किया जा सकता?
A) व्यावसायिक बैंकों के चेक
B) करेंसी नोट और सिक्के
C) सावधि जमा (Fixed Deposit) रसीद
D) कंपनियों के बांड
उत्तर: B) करेंसी नोट और सिक्के ।
प्रश्न 5. मुद्रा की पूर्ति की माप 'M1' (संकुचित मुद्रा) में क्या-क्या शामिल होता है?
A) जनता द्वारा रखी गई करेंसी (CU) + बैंकों की निवल माँग जमा (DD)
B) M1 + डाकघर बचत बैंकों में जमाएँ
C) M1 + बैंकों की आवधिक (सावधि) जमाएँ
D) केवल रिज़र्व बैंक के पास जमा स्वर्ण
उत्तर: A) जनता द्वारा रखी गई करेंसी (CU) + बैंकों की निवल माँग जमा (DD) ।