प्रस्तुत पाठ्यपुस्तक का अंश सरकारी बजट की अवधारणा और अर्थव्यवस्था में इसकी महत्ता को स्पष्ट करता है। इसमें बताया गया है कि सरकार सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं को उपलब्ध कराकर समाज के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेखक ने राजस्व और पूंजीगत प्राप्तियों के साथ-साथ सरकारी खर्चों के विभिन्न प्रकारों का विस्तृत वर्गीकरण प्रस्तुत किया है। यह स्रोत बजट घाटे, उसके प्रकारों और अर्थव्यवस्था के स्थिरीकरण में सरकार के हस्तक्षेप की प्रक्रिया को भी समझाता है। इसके अतिरिक्त, पाठ में लैंगिक बजट और वित्तीय उत्तरदायित्व जैसे आधुनिक नीतिगत पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। अंततः, यह स्पष्ट किया गया है कि बजट केवल आय-व्यय का विवरण नहीं, बल्कि देश की आर्थिक दिशा निर्धारित करने वाला एक सशक्त दस्तावेज है।
पाठ्यपुस्तक में दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
2. राजस्व व्यय और पूँजीगत व्यय में भेद कीजिए।
राजस्व व्यय: यह केंद्र सरकार का वह व्यय है जो भौतिक या वित्तीय परिसंपत्तियों के सृजन के अतिरिक्त अन्य उद्देश्यों (जैसे- सरकारी विभागों के सामान्य कार्य, ब्याज अदायगी, वेतन, और अनुदान) के लिए किया जाता है ।
पूँजीगत व्यय: यह सरकार का वह व्यय है जिसके परिणामस्वरूप भौतिक या वित्तीय परिसंपत्तियों का सृजन होता है (जैसे- भूमि अधिग्रहण, भवन निर्माण, मशीनरी) या वित्तीय दायित्वों में कमी आती है ।
3. राजकोषीय घाटा से सरकार को ऋण-ग्रहण की आवश्यकता होती है, समझाइए।
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और ऋण-ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों (राजस्व प्राप्तियां + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियां) का अंतर होता है । क्योंकि इस घाटे का वित्तपोषण केवल ऋण-ग्रहण (उधार) के द्वारा ही किया जाता है, इसलिए राजकोषीय घाटा स्पष्ट रूप से सभी स्रोतों से सरकार की ऋण-ग्रहण संबंधी आवश्यकताओं को दर्शाता है ।
4. राजस्व घाटा और राजकोषीय घाटा में संबंध बताइए।
राजस्व घाटा राजकोषीय घाटे का ही एक भाग होता है । इसका सूत्र है: राजकोषीय घाटा = राजस्व घाटा + पूँजीगत व्यय – गैर-ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ । राजकोषीय घाटे में राजस्व घाटे का बड़ा अंश यह दर्शाता है कि सरकार अपने उपभोग व्यय को पूरा करने के लिए उधार ले रही है, न कि निवेश के लिए ।
5. (गणितीय प्रश्न का हल):
दिया गया है: I = 200, G = 150, T = 100, C = 100 + 0.75Y_d (जहाँ Y_d = Y - T)
(a) संतुलन आय (Y): Y = C + I + G के अनुसार, Y = 100 + 0.75(Y - 100) + 200 + 150 । हल करने पर: Y = 450 + 0.75Y - 75 => 0.25Y = 375, इसलिए संतुलन आय Y = 1500 होगी।
(b) गुणक: सरकारी व्यय गुणक = 1 / (1 - c) = 1 / (1 - 0.75) = 4 । कर गुणक = -c / (1 - c) = -0.75 / 0.25 = -3 ।
(c) यदि G में 200 की वृद्धि हो: आय में परिवर्तन (ΔY) = सरकारी व्यय गुणक × ΔG = 4 × 200 = 800 ।
6. (गणितीय प्रश्न का हल):
दिया गया है: C = 20 + 0.80Y, I = 30, G = 50, TR = 100.
(a) संतुलन आय और गुणक: कुल स्वायत्त व्यय (A) = 20 + 0.80(100) + 30 + 50 = 180. Y = 180 + 0.80Y => 0.20Y = 180 => Y = 900 । स्वायत्त व्यय गुणक = 1 / (1 - c) = 1 / 0.20 = 5 ।
(b) यदि G में 30 की वृद्धि हो: ΔY = गुणक × ΔG = 5 × 30 = 150 । संतुलन आय 900 + 150 = 1050 हो जाएगी।
(c) यदि G (30) की भरपाई के लिए एकमुश्त कर (T) 30 जोड़ दिया जाए: यह संतुलित बजट का मामला है जहाँ ΔG = ΔT। संतुलित बजट गुणक 1 होता है । अतः आय में ठीक उतनी ही वृद्धि होगी जितनी सरकारी व्यय में हुई है, यानी ΔY = 30 ।
7. (प्रश्न 6 के आधार पर) अंतरण (TR) और कर (T) में 10 की वृद्धि का प्रभाव:
अंतरण भुगतान (TR) गुणक = c / (1 - c) = 0.80 / 0.20 = 4 । अतः ΔTR = 10 से आय में वृद्धि = 4 × 10 = 40।
कर (T) गुणक = -c / (1 - c) = -4 । अतः ΔT = 10 से आय में कमी = -4 × 10 = -40।
तुलना: दोनों का शुद्ध प्रभाव शून्य (40 - 40 = 0) होगा क्योंकि दोनों एक-दूसरे को संतुलित कर देंगे।
8. (गणितीय प्रश्न का हल):
दिया गया है: C = 70 + 0.70YD, I = 90, G = 100, T = 0.10Y (यहाँ कर अनुपातिक है)।
(a) संतुलन आय: Y = 70 + 0.70(Y - 0.10Y) + 90 + 100 = 260 + 0.70(0.90Y) = 260 + 0.63Y । 0.37Y = 260 => Y = 702.7 (लगभग)।
(b) कर राजस्व और बजट की स्थिति: कर राजस्व T = 0.10 × 702.7 = 70.27। सरकार का बजट घाटे में है (घाटा = G - T = 100 - 70.27 = 29.73) क्योंकि व्यय कर प्राप्तियों से अधिक है ।
9. (गणितीय प्रश्न का हल):
दिया गया है: c = 0.75, t = 0.20. अनुपातिक कर के साथ गुणक = 1 / (1 - c(1 - t)) = 1 / (1 - 0.75(1 - 0.20)) = 1 / (1 - 0.60) = 1 / 0.40 = 2.5 ।
(a) G में 20 की वृद्धि: ΔY = 2.5 × 20 = 50 ।
(b) TR में 20 की कमी: अंतरण में कमी से स्वायत्त व्यय में cΔTR की कमी आती है। ΔY = 2.5 × (0.75 × -20) = 2.5 × -15 = -37.5 ।
10. निरपेक्ष मूल्य में कर गुणक सरकारी व्यय गुणक से छोटा क्यों होता है?
सरकारी व्यय में वृद्धि से कुल व्यय पर प्रत्यक्ष और पूरा प्रभाव पड़ता है । इसके विपरीत, करों का प्रभाव प्रयोज्य आय के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है; जब कर कम किये जाते हैं, तो लोग पूरी कर-बचत को खर्च नहीं करते, बल्कि उसका एक हिस्सा (सीमांत उपभोग प्रवृत्ति 'c' के अनुसार) खर्च करते हैं और शेष बचा लेते हैं ।
11. सरकारी घाटे और सरकारी ऋण-ग्रहण में क्या संबंध है?
घाटे और ऋण की संकल्पनाओं में निकट संबंध है; घाटे को एक प्रवाह माना जा सकता है जिससे सरकारी ऋण के स्टॉक में वृद्धि होती है । जब सरकार लगातार घाटे का बजट बनाती है और ऋण लेती है, तो ऋण का संचय होता है और सरकार को ब्याज के रूप में अधिक भुगतान करना पड़ता है, जो स्वयं ऋण की मात्रा को और बढ़ा देता है ।
12. क्या सार्वजनिक ऋण बोझ बनता है?
परंपरागत रूप से ऋण को आने वाली पीढ़ी पर 'बोझ' माना जाता है क्योंकि आज लिए गए ऋण और उसके ब्याज को चुकाने के लिए भविष्य में करों में वृद्धि करनी पड़ती है, जिससे भविष्य की पीढ़ी की प्रयोज्य आय कम होती है । यदि ऋण विदेशियों से लिया गया है, तो ब्याज चुकाने के लिए वस्तुएं विदेश भेजनी पड़ती हैं जो सीधा बोझ है । लेकिन यदि ऋण का उपयोग आधारभूत संरचना और निवेश में किया जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था की उत्पादकता और आय बढ़ती है, तो इसे बोझ नहीं माना जाता ।
13. क्या राजकोषीय घाटा आवश्यक रूप से स्फीतिकारी है?
नहीं, राजकोषीय घाटा हमेशा स्फीतिकारी (महंगाई बढ़ाने वाला) नहीं होता । यदि अर्थव्यवस्था में संसाधनों का पूरी तरह से उपयोग नहीं हुआ है, तो सरकारी व्यय (घाटे) से उत्पादन और आय में वृद्धि हो सकती है । स्फीति (महंगाई) तब बढ़ती है जब मांग, वर्तमान में उपलब्ध उत्पादन क्षमता से अधिक हो जाए ।
14. घाटे में कटौती के विषय पर विमर्श कीजिए।
घाटे में कटौती करने के लिए सरकार करों में वृद्धि कर सकती है (विशेष रूप से प्रत्यक्ष करों में) या सरकारी व्यय में कटौती कर सकती है । सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों की बिक्री (विनिवेश) के माध्यम से भी प्राप्तियां बढ़ाई जा सकती हैं । हालांकि, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और निर्धनता निवारण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकारी कार्यक्रमों को रोकने या व्यय कम करने से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है ।
15. वस्तु एवं सेवाकर (GST) से आप क्या समझते हैं? पुरानी कर व्यवस्था के मुकाबले यह कितना श्रेष्ठ है?
GST वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया गया एक एकल, व्यापक और गंतव्य आधारित अप्रत्यक्ष कर है ।
यह पुरानी व्यवस्था से श्रेष्ठ है क्योंकि इसने केंद्र और राज्यों के कई अप्रत्यक्ष करों (जैसे उत्पाद कर, वैट, सेवा कर, प्रवेश कर आदि) को एक कर में मिला दिया है । इसके लागू होने से करों पर कर लगने (cascading effect) की समस्या खत्म हो गई है क्योंकि इसमें आपूर्ति श्रृंखला के हर स्तर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा उपलब्ध है । इससे पूरे देश में एक 'कॉमन बाजार' बना है और कर प्रणाली में पारदर्शिता आई है ।
GST की श्रेणियां (दरें): वर्तमान में GST के अंतर्गत पूरे देश में मानक दरें 0%, 5%, 12%, 18% और 28% लागू हैं ।
इस पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर और विकल्पों के साथ):
प्रश्न 1: सार्वजनिक वस्तुओं (Public Goods) की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
A) ये केवल उन्हीं लोगों को मिलती हैं जो इसके लिए भुगतान करते हैं।
B) इनका उपभोग प्रतिस्पर्धी होता है (एक के उपभोग से दूसरे के लिए कमी)।
C) ये गैर-अपवर्जनीय होती हैं और बिना भुगतान किए भी लाभ उठाने वालों को रोका नहीं जा सकता।
D) इनका उत्पादन केवल निजी क्षेत्र द्वारा किया जाता है।
उत्तर: C) ये गैर-अपवर्जनीय होती हैं और बिना भुगतान किए भी लाभ उठाने वालों को रोका नहीं जा सकता।
प्रश्न 2: निम्नलिखित में से किसे पूँजीगत प्राप्ति (Capital Receipt) माना जाएगा?
A) सरकार द्वारा एकत्र किया गया आयकर।
B) सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के शेयरों की बिक्री (विनिवेश)।
C) विदेशों से प्राप्त नकद सहायता अनुदान।
D) सरकार द्वारा प्रदान की गई सेवाओं से प्राप्त शुल्क।
उत्तर: B) सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के शेयरों की बिक्री (विनिवेश)।
प्रश्न 3: राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) ज्ञात करने का सही सूत्र क्या है?
A) राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियां
B) कुल व्यय - (राजस्व प्राप्तियां + गैर-ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियां)
C) कुल प्राप्तियां - कुल व्यय
D) राजकोषीय घाटा - निवल ब्याज अदायगी
उत्तर: B) कुल व्यय - (राजस्व प्राप्तियां + गैर-ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियां)
प्रश्न 4: संतुलित बजट गुणक (Balanced Budget Multiplier) का मान हमेशा किसके बराबर होता है?
A) शून्य (0)
B) सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (c) के बराबर
C) अनंत
D) इकाई (1) के बराबर
उत्तर: D) इकाई (1) के बराबर
प्रश्न 5: वस्तु एवं सेवा कर (GST) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A) यह एक प्रत्यक्ष कर है जो व्यक्ति की आय पर लगता है।
B) वर्तमान में पेट्रोलियम पदार्थों को GST के दायरे में रखा गया है।
C) यह एक गंतव्य आधारित उपभोग कर है जिस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा है।
D) यह केवल राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाता है।
उत्तर: C) यह एक गंतव्य आधारित उपभोग कर है जिस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा है।