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CBSE Board class 12 macro economics ch-6

यह पाठ खुली अर्थव्यवस्था के अंतर्गत समष्टि अर्थशास्त्र के मूलभूत सिद्धांतों की व्याख्या करता है। इसमें मुख्य रूप से भुगतान संतुलन (BOP) की संरचना को समझाया गया है, जो चालू खाते और पूंजी खाते के माध्यम से देशों के बीच होने वाले व्यापार और परिसंपत्तियों के आदान-प्रदान को दर्ज करता है। लेख में विदेशी विनिमय बाजार और विनिमय दर के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है, जो अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को सुगम बनाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह स्पष्ट किया गया है कि आयात और निर्यात किस प्रकार घरेलू मांग और राष्ट्रीय आय के प्रवाह को प्रभावित करते हैं। अंत में, यह भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपनाए गए लेखांकन मानकों और आधिकारिक आरक्षित लेनदेन की भूमिका का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करता है।

यहाँ आपके द्वारा पूछे गए पाठ के सभी प्रश्नों के विस्तृत उत्तर और पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न दिए गए हैं:


अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर:


1. संतुलित व्यापार शेष और चालू खाता संतुलन में अंतर स्पष्ट कीजिए।

व्यापार संतुलन (Trade Balance) में केवल वस्तुओं के निर्यात और आयात के मूल्यों का अंतर शामिल होता है । इसके विपरीत, चालू खाता संतुलन (Current Account Balance) अधिक व्यापक है, जिसमें वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ सेवाओं का व्यापार (जैसे शिपिंग, बैंकिंग) और निवल अंतरण (जैसे उपहार, प्रेषित धन) का विवरण भी शामिल होता है [2-4]।


2. आधिकारिक आरक्षित निधि का लेन-देन क्या है? अदायगी-संतुलन में इनके महत्त्व का वर्णन कीजिए।

जब किसी देश के अदायगी-संतुलन (BOP) में घाटा या आधिक्य होता है, तो केंद्रीय बैंक (जैसे रिज़र्व बैंक) अपने विदेशी विनिमय कोष का उपयोग करके उस अंतर को पाटता है, जिसे आधिकारिक आरक्षित निधि का लेन-देन (Official Reserve Transaction) कहते हैं । इसका बहुत महत्त्व है क्योंकि अदायगी-संतुलन में मौद्रिक अधिकारी ही अंतिम वित्तपोषक होते हैं, जो घाटे के समय विदेशी विनिमय बेचते हैं ताकि संतुलन स्थापित हो सके ।


3. मौद्रिक विनिमय दर और वास्तविक विनिमय दर में भेद कीजिए।

मौद्रिक विनिमय दर एक देश की मुद्रा की किसी दूसरे देश की मुद्रा के रूप में कीमत है (जैसे 1 डॉलर = 50 रुपये) । वास्तविक विनिमय दर घरेलू वस्तु के रूप में विदेशी वस्तुओं की सापेक्ष कीमत को दर्शाती है [8-10]। यदि आपको यह तय करना हो कि घरेलू वस्तु खरीदें या विदेशी, तो वास्तविक विनिमय दर अधिक प्रासंगिक होगी क्योंकि यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में देश की वास्तविक प्रतिस्पर्द्धा का मूल्यांकन करती है ।


4. वास्तविक विनिमय दर की गणना:

मौद्रिक विनिमय दर ($e$) को रुपये में येन की कीमत के रूप में निकालने पर: 1 रुपये = 1.25 येन, इसलिए 1 येन = $1 \div 1.25$ = 0.8 रुपये ।

विदेशी कीमत (जापान) $P_f = 3$ और घरेलू कीमत (भारत) $P = 1.2$ ।

वास्तविक विनिमय दर ($R$) = $\frac{e \times P_f}{P}$ = $\frac{0.8 \times 3}{1.2}$ = $\frac{2.4}{1.2}$ = 2 ।

अतः जापानी वस्तु, भारतीय वस्तु की तुलना में दोगुनी महँगी है।


5. स्वचालित युक्ति जिसके द्वारा स्वर्णमान के अंतर्गत अदायगी-संतुलन प्राप्त किया जाता था:

स्वर्णमान प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक सहभागी देश अपनी राष्ट्रीय मुद्रा को एक निश्चित कीमत पर स्वतंत्र रूप से स्वर्ण में परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध रहता था । इससे विभिन्न देशों की मुद्राओं की विनिमय दरें स्वर्ण के माध्यम से स्थिर रहती थीं और व्यापार में असंतुलन आने पर स्वर्ण के प्रवाह द्वारा अदायगी-संतुलन स्वतः ही समायोजित हो जाता था ।


7. अवमूल्यन और मूल्यह्रास में अंतर स्पष्ट कीजिए।

मूल्यह्रास (Depreciation) लोचशील (तिरती) विनिमय दर प्रणाली के अंतर्गत बाज़ार की शक्तियों द्वारा विदेशी मुद्रा के रूप में घरेलू मुद्रा की कीमत में स्वतः होने वाली कमी है । जबकि, अवमूल्यन (Devaluation) स्थिर विनिमय दर प्रणाली के अंतर्गत आधिकारिक सरकारी कार्रवाई द्वारा जानबूझकर घरेलू मुद्रा के मूल्य को घटाना है ।


8. क्या केंद्रीय बैंक प्रबंधित तिरती व्यवस्था में हस्तक्षेप करेगा?

हाँ, प्रबंधित तिरती (Managed Floating) व्यवस्था में केंद्रीय बैंक विनिमय दर को अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचाने और उसे उदार बनाने के लिए विदेशी मुद्रा का क्रय-विक्रय करके बाज़ार में हस्तक्षेप करता है [16-18]।


9. क्या देशी वस्तुओं की माँग और वस्तुओं की देशी माँग की संकल्पनाएँ एक समान हैं?

नहीं, ये समान नहीं हैं। 'वस्तुओं की देशी माँग' में घरेलू स्तर पर उपभोग, निवेश और सरकारी खर्च शामिल होते हैं। वहीं, 'देशी (घरेलू) वस्तुओं की माँग' में देशी माँग के साथ-साथ विदेशी माँग (निर्यात) भी जुड़ती है और उसमें से विदेशी वस्तुओं की माँग (आयात) को घटा दिया जाता है ।


10. जब $M = 60 + 0.06Y$ हो, तो आयात की सीमांत प्रवृत्ति क्या होगी?

आयात फलन $M = \bar{M} + mY$ के अनुसार, यहाँ आयात की सीमांत प्रवृत्ति ($m$) 0.06 है । आयात की सीमांत प्रवृत्ति का समस्त माँग फलन पर विपरीत (नकारात्मक) प्रभाव पड़ता है क्योंकि यह आय के वर्तुल प्रवाह से रिसाव पैदा करती है, जिससे खुली अर्थव्यवस्था का गुणक छोटा हो जाता है [21-23]।


11. खुली अर्थव्यवस्था स्वायत्त व्यय खर्च गुणक बंद अर्थव्यवस्था के गुणक की तुलना में छोटा क्यों होता है?

क्योंकि खुली अर्थव्यवस्था में घरेलू आय का एक हिस्सा विदेशी वस्तुओं (आयात) पर खर्च होता है, जो घरेलू माँग से एक रिसाव (Leakage) का कार्य करता है । इस रिसाव के कारण स्वायत्त व्यय में वृद्धि से घरेलू उत्पादन में कम वृद्धि होती है ।


12. $T = tY$ के साथ खुली अर्थव्यवस्था गुणक की गणना:

खुली अर्थव्यवस्था का संतुलन आय समीकरण: $Y = C + c(Y - T) + I + G + X - M - mY$ ।

$T = tY$ रखने पर और स्वायत्त घटकों को $\bar{A}$ मान लेने पर:

$Y = \bar{A} + c(Y - tY) - mY$ ।

$Y - c(1-t)Y + mY = \bar{A}$

$Y [1 - c(1-t) + m] = \bar{A}$

अतः नया गुणक = $\frac{1}{1 - c(1-t) + m}$ होगा ।


13. मान लीजिए C = 40 + 0.8YD, T = 50, I = 60, G = 40, X = 90, M = 50 + 0.05Y.

(a) संतुलन आय ($Y$): $Y = C + I + G + X - M$ ।

$Y = 40 + 0.8(Y - 50) + 60 + 40 + 90 - (50 + 0.05Y)$ ।

$Y = 40 + 0.8Y - 40 + 190 - 50 - 0.05Y = 140 + 0.75Y$

$Y - 0.75Y = 140 \Rightarrow 0.25Y = 140 \Rightarrow$ $Y = 560$ ।

(b) निवल निर्यात संतुलन (NX): $X - M = 90 - (50 + 0.05 \times 560) = 90 - (50 + 28) = 90 - 78 =$ 12 ।

(c) G में 40 से 50 की वृद्धि होने पर:

कुल स्वायत्त व्यय 10 से बढ़ जाएगा।

नया $Y = 560 + \frac{10}{0.25} = 560 + 40 =$ 600 ।

नया निवल निर्यात (NX) $= 90 - (50 + 0.05 \times 600) = 90 - 80 =$ 10 ।


14. यदि निर्यात $X = 100$ का परिवर्तन हो (प्रश्न 13 में):

यहाँ भी स्वायत्त व्यय में 10 की वृद्धि हो रही है (90 से 100)।

अतः नया संतुलन आय ($Y$) = 600 होगा ।

नया निवल निर्यात (NX) $= 100 - (50 + 0.05 \times 600) = 100 - 80 =$ 20 ।


15. व्याख्या कीजिए कि $G - T = (S_g - I) - (X - M)$:

राष्ट्रीय आय तादात्म्य $Y = C + I + G + X - M$ होता है ।

चूँकि प्रयोज्य आय $Y_D = Y - T = C + S_g$ (जहाँ $S_g$ बचत है), इसलिए $C = Y - T - S_g$ ।

इसे समीकरण में रखने पर: $Y = (Y - T - S_g) + I + G + X - M$ ।

हल करने पर: $0 = - T - S_g + I + G + X - M \Rightarrow$ $G - T = (S_g - I) - (X - M)$। यह दर्शाता है कि सरकारी बजट घाटा, निजी बचत-निवेश अंतर और निवल निर्यात के अंतर के बराबर होता है ।


16. यदि देश B से देश A में मुद्रास्फीति ऊँची हो और विनिमय दर स्थिर हो:

क्रय-शक्ति समता सिद्धांत के अनुसार, देश A में मुद्रास्फीति अधिक होने से उसकी वस्तुएँ महँगी हो जाएँगी । स्थिर विनिमय दर के कारण , देश B के लोग देश A से कम आयात करेंगे और देश A के लोग देश B से सस्ती वस्तुएँ अधिक आयात करेंगे। परिणामस्वरूप, देश A का व्यापार शेष घाटे में चला जाएगा और देश B का व्यापार शेष आधिक्य में रहेगा ।


17. क्या चालू पूँजीगत (व्यापार) घाटा खतरे का संकेत होगा?

नहीं, यह हमेशा खतरे का संकेत नहीं होता । यदि किसी देश में ऋण ली गई निधियों पर ब्याज दर की तुलना में विकास दर अधिक है, तो यह घाटा कोई खतरा नहीं है क्योंकि देश भविष्य में बढ़ी हुई आय से अपना ऋण चुका सकता है ।


18. मान लीजिए C = 100 + 0.75YD, I = 500, G = 750, T = 0.2Y, X = 150, M = 100 + 0.2Y.

$Y = C + I + G + X - M$ ।

$Y = 100 + 0.75(Y - 0.2Y) + 500 + 750 + 150 - (100 + 0.2Y)$ ।

$Y = 1500 + 0.75(0.8Y) - 100 - 0.2Y = 1400 + 0.6Y - 0.2Y = 1400 + 0.4Y$

$Y - 0.4Y = 1400 \Rightarrow 0.6Y = 1400 \Rightarrow$ संतुलन आय ($Y$) = 2333.33 ।

बजट घाटा $= G - T = 750 - 0.2(2333.33) = 750 - 466.67 =$ 283.33 (घाटा) ।

व्यापार घाटा $= M - X = (100 + 0.2(2333.33)) - 150 = 566.67 - 150 =$ 416.67 (घाटा) ।


19. बाह्य खाते में स्थायित्व लाने वाली विनिमय दर व्यवस्थाएँ:

देशों ने स्थायित्व के लिए मुख्यतः तीन व्यवस्थाएँ अपनाई हैं:

1. स्थिर विनिमय दर (Fixed Exchange Rate): सरकार द्वारा विनिमय दर का एक स्तर निर्धारित किया जाता है और उसे बनाए रखने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया जाता है ।

2. लोचशील/तिरती विनिमय दर (Floating Exchange Rate): विनिमय दर बाजार की माँग और पूर्ति की शक्तियों द्वारा स्वतंत्र रूप से निर्धारित होती है ।

3. प्रबंधित तिरती (Managed Floating): यह दोनों का मिश्रण है, जहाँ दर बाज़ार तय करता है लेकिन झटकों (shocks) और भारी उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक हस्तक्षेप करता है ।


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पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs):


प्रश्न 1: खुली अर्थव्यवस्था का गुणक, बंद अर्थव्यवस्था के गुणक की तुलना में कैसा होता है?

A. हमेशा बड़ा होता है

B. हमेशा छोटा होता है

C. बिलकुल बराबर होता है

D. शून्य होता है

सही उत्तर: B. हमेशा छोटा होता है


प्रश्न 2: जब एक देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच एक निश्चित समयावधि में वस्तुओं, सेवाओं और परिसंपत्तियों के लेनदेन का विवरण रखा जाता है, तो उसे क्या कहते हैं?

A. व्यापार संतुलन

B. चालू खाता

C. पूँजी खाता

D. अदायगी-संतुलन (BOP)

सही उत्तर: D. अदायगी-संतुलन (BOP)


प्रश्न 3: स्थिर विनिमय दर प्रणाली के अंतर्गत आधिकारिक सरकारी कार्रवाई द्वारा घरेलू मुद्रा की कीमत में जानबूझकर की गई कमी को क्या कहा जाता है?

A. मूल्यह्रास

B. पुनर्मूल्यन

C. अवमूल्यन

D. मुद्रास्फीति

सही उत्तर: C. अवमूल्यन


प्रश्न 4: 'प्रबंधित तिरती' (Managed Floating) विनिमय दर व्यवस्था में अस्थिरता को कम करने के लिए विदेशी मुद्रा बाज़ार में हस्तक्षेप कौन करता है? [16-18]

A. विश्व बैंक

B. वाणिज्यिक बैंक

C. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष

D. केंद्रीय बैंक

सही उत्तर: D. केंद्रीय बैंक


प्रश्न 5: यदि विदेशी आय में वृद्धि होती है, तो घरेलू देश के निर्यात पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

A. निर्यात में कमी आएगी

B. निर्यात में वृद्धि होगी

C. निर्यात अपरिवर्तित रहेगा

D. निर्यात पूरी तरह शून्य हो जाएगा

सही उत्तर: B. निर्यात में वृद्धि होगी


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