CBSE Board class 12 Flamingo ch-7

यह पाठ क्रिस्टोफर सिल्वेस्टर द्वारा संपादित द पेंग्विन बुक ऑफ इंटरव्यूज की भूमिका और उम्बर्टो इको के एक साक्षात्कार का संकलन है। इसके पहले भाग में साक्षात्कार की विधा पर चर्चा की गई है, जहाँ इसे सत्य का स्रोत और संचार का एक सशक्त माध्यम माना गया है, हालांकि कई प्रसिद्ध लेखक इसे अपने निजी जीवन में हस्तक्षेप मानकर इसकी आलोचना करते हैं। दूसरे भाग में प्रसिद्ध विद्वान और उपन्यासकार उम्बर्टो इको के साथ हुई बातचीत को दिखाया गया है, जिसमें वे अपने लेखन दर्शन और समय के प्रबंधन के बारे में बताते हैं। इको स्पष्ट करते हैं कि वे स्वयं को मूलतः एक अकादमिक शोधकर्ता मानते हैं जो खाली समय का उपयोग कहानियाँ लिखने के लिए करते हैं। वे अपने उपन्यास द नेम ऑफ द रोज़ की वैश्विक सफलता को एक रहस्य बताते हैं जो सही समय पर प्रकाशित होने के कारण संभव हुई। अंत में, यह स्रोत पाठकों को साक्षात्कार के दौरान इस्तेमाल होने वाले भाषाई जुड़ाव और संकेतों को समझने में मदद करता है।

यहाँ पाठ (स्रोत) में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न उनके उत्तरों के साथ दिए गए हैं:


भाग I: पाठ्यपुस्तक के भीतर पूछे गए प्रश्न


प्रश्न 1: साक्षात्कारों (interviews) पर कुछ सकारात्मक दृष्टिकोण क्या हैं?

उत्तर: सकारात्मक दृष्टिकोण के अनुसार, अपने उच्चतम रूप में साक्षात्कार सच्चाई का एक स्रोत है और इसके अभ्यास को एक कला माना जाता है । यह संचार का एक अत्यंत उपयोगी माध्यम है और समकालीनों के बारे में हमारी सबसे स्पष्ट और जीवंत धारणाएँ साक्षात्कारों के माध्यम से ही बनती हैं ।


प्रश्न 2: अधिकांश प्रसिद्ध लेखक साक्षात्कार दिए जाने से घृणा क्यों करते हैं?

उत्तर: अधिकांश प्रसिद्ध हस्तियां साक्षात्कार को अपने जीवन में एक अनुचित हस्तक्षेप (unwarranted intrusion) मानती हैं । उन्हें लगता है कि यह उनकी निजता का हनन करता है और किसी तरह से उनके महत्व को कम करता है । कुछ लोग इसे अनैतिक, व्यक्ति पर हमले के समान और एक अपराध मानते हैं ।


प्रश्न 3: कुछ आदिम संस्कृतियों में तस्वीर खींचे जाने के बारे में क्या मान्यता है?

उत्तर: कुछ आदिम संस्कृतियों में यह माना जाता है कि यदि कोई किसी व्यक्ति की तस्वीर (photographic portrait) लेता है, तो वह वास्तव में उस व्यक्ति की आत्मा चुरा रहा है ।


प्रश्न 4 (पाठ में संख्या 6): "उसकी श्वासनली पर अंगूठे के निशान" (thumbprints on his windpipe) अभिव्यक्ति से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: लेखक शाऊल बेलो (Saul Bellow) द्वारा इस्तेमाल की गई इस अभिव्यक्ति का अर्थ है कि साक्षात्कार देना अत्यधिक घुटन भरा और असहज करने वाला अनुभव हो सकता है, ठीक वैसे ही जैसे कोई आपकी श्वासनली (विंडपाइप) पर अंगूठा रखकर आपका दम घोंटने की कोशिश कर रहा हो ।


प्रश्न 5: आज की दुनिया में, हस्तियों के बारे में जानकारी का हमारा मुख्य स्रोत कौन है?

उत्तर: आज की दुनिया में, किसी भी व्यक्तित्व के बारे में जानकारी का मुख्य स्रोत साक्षात्कारकर्ता (interviewer) होता है । लगभग हर महत्वपूर्ण जानकारी हम तक एक व्यक्ति (साक्षात्कारकर्ता) द्वारा दूसरे व्यक्ति से सवाल पूछने के माध्यम से ही पहुंचती है ।


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भाग II: 'पाठ को समझना' (Understanding the Text) के प्रश्न


प्रश्न 1: क्या आपको लगता है कि अम्बर्टो इको को साक्षात्कार देना पसंद है? अपनी राय के कारण दें।

उत्तर: हाँ, ऐसा प्रतीत होता है कि अम्बर्टो इको को साक्षात्कार देना पसंद है। वे साक्षात्कारकर्ता मुकुंद के सवालों का बहुत ही सहजता, धैर्य और हास्य के साथ जवाब देते हैं । वे अपने काम करने के तरीकों, जैसे समय के 'खाली स्थानों' (interstices) का उपयोग करना, खुशी-खुशी साझा करते हैं ।


प्रश्न 2: इको को इतना सब लिखने का समय कैसे मिल जाता है?

उत्तर: इको अपने समय के 'खाली स्थानों' (empty spaces या interstices) का उपयोग करके इतना सब लिखने का समय निकालते हैं । उदाहरण के लिए, जब वे किसी के लिफ्ट से उनके फ्लोर तक आने का इंतजार कर रहे होते हैं, उस छोटे से अंतराल में ही वे एक लेख लिख लेते हैं ।


प्रश्न 3: इको की अकादमिक लेखन शैली के बारे में क्या विशिष्ट था?

उत्तर: इको की अकादमिक लेखन शैली नियमित अकादमिक शैली की तरह नीरस और उबाऊ नहीं थी, बल्कि इसमें एक कथात्मक (narrative) और व्यक्तिगत स्पर्श था । वे अपने शोध (research) के निष्कर्ष सीधे बताने के बजाय, अपने परीक्षण और त्रुटियों (trials and errors) सहित पूरे शोध की कहानी सुनाते थे ।


प्रश्न 4: क्या अम्बर्टो इको खुद को पहले एक उपन्यासकार मानते थे या एक अकादमिक विद्वान?

उत्तर: अम्बर्टो इको खुद को पहले एक अकादमिक विद्वान (विश्वविद्यालय का प्रोफेसर) मानते थे । वे कहते हैं कि वे केवल रविवार को उपन्यास लिखते हैं और वे लेखकों की बैठकों के बजाय अकादमिक सम्मेलनों में भाग लेना पसंद करते थे ।


प्रश्न 5: 'द नेम ऑफ द रोज़' (The Name of the Rose) उपन्यास की भारी सफलता का क्या कारण है?

उत्तर: इको के अनुसार, इस उपन्यास की अपार सफलता एक रहस्य (mystery) है और कोई भी इसकी भविष्यवाणी नहीं कर सकता था । हालांकि, उनका मानना है कि दुनिया में पाठकों का एक ऐसा वर्ग है जो हमेशा आसान और हल्की चीजें पढ़ना पसंद नहीं करता, बल्कि उन्हें कठिन पढ़ने के अनुभव भी चाहिए होते हैं । यह उपन्यास गंभीर था और इसमें तत्त्वमीमांसा, धर्मशास्त्र और मध्ययुगीन इतिहास का मिश्रण था, जिसने शायद इस विशिष्ट पाठक वर्ग को आकर्षित किया ।


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इस पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित):


प्रश्न 1: 'द नेम ऑफ द रोज़' (The Name of the Rose) नामक उपन्यास के लेखक कौन हैं?

A) क्रिस्टोफर सिल्वेस्टर

B) मुकुंद पद्मनाभन

C) अम्बर्टो इको

D) डेविड लॉज

उत्तर: C) अम्बर्टो इको


प्रश्न 2: कुछ आदिम संस्कृतियों में किसी व्यक्ति की तस्वीर खींचने को किसके समान माना जाता है?

A) सम्मान देना

B) आत्मा चुराना

C) आशीर्वाद लेना

D) अपराध करना

उत्तर: B) आत्मा चुराना


प्रश्न 3: अम्बर्टो इको अपने जीवन के 'खाली स्थानों' (empty spaces) को क्या कहकर पुकारते हैं?

A) वैक्यूम (Vacuum)

B) फ्री टाइम (Free time)

C) हॉलिडे (Holiday)

D) इंटरस्टिसेस (Interstices)

उत्तर: D) इंटरस्टिसेस (Interstices)


प्रश्न 4: प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने साक्षात्कार (interview) के बारे में क्या विचार व्यक्त किए?

A) यह एक उत्कृष्ट कला है

B) यह संचार का सबसे अच्छा माध्यम है

C) यह अनैतिक है और एक अपराध है

D) यह सत्य का स्रोत है

उत्तर: C) यह अनैतिक है और एक अपराध है


प्रश्न 5: अम्बर्टो इको खुद को मुख्य रूप से क्या मानते थे?

A) एक उपन्यासकार

B) एक पत्रकार

C) एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर

D) एक प्रकाशक

उत्तर: C) एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर

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