CBSE Board class 12 Hindi antra ch-1
यह पाठ प्रसिद्ध साहित्यकार जयशंकर प्रसाद के जीवन और उनकी दो महत्वपूर्ण कविताओं का सार प्रस्तुत करता है। लेखक ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय गौरव और मानवीय भावनाओं को अत्यंत सूक्ष्मता से उकेरा है। पहली कविता "देवसेना का गीत" उनके नाटक 'स्कंदगुप्त' से प्रेरित है, जो जीवन के संघर्षों, असफल प्रेम और अंतिम समय की वेदना को दर्शाती है। दूसरी ओर, "कार्नेलिया का गीत" उनके नाटक 'चंद्रगुप्त' का हिस्सा है, जिसमें भारत की प्राकृतिक सुंदरता, उदारता और यहाँ की शांतिपूर्ण छवि का गुणगान किया गया है। कुल मिलाकर, यह स्रोत प्रसाद जी की काव्यात्मक शैली और उनके ऐतिहासिक नाटकों के माध्यम से व्यक्त होने वाली सांस्कृतिक चेतना को उजागर करता है।
यहाँ आपके द्वारा दिए गए पाठ के आधार पर "प्रश्न-अभ्यास" के सभी प्रश्नों के उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं:
पाठ के प्रश्नों के उत्तर
देवसेना का गीत :
1. "मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई"- पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि देवसेना जीवन के अंतिम मोड़ (जीवन की संध्या बेला) पर अपने अतीत को याद कर रही है । उसने यौवन के समय भ्रम में पड़कर जो प्रेम और आशाएँ (स्कंदगुप्त को पाने की चाह) संचित की थीं, उन्हें वह अब अपनी नादानियों और भ्रमवश किए गए कार्यों की श्रेणी में रख रही है । उसे पछतावा है कि उसने अपनी संचित पूँजी को भीख की तरह लुटा दिया है ।
2. कवि ने आशा को बावली क्यों कहा है?
उत्तर: देवसेना ने जीवन भर स्कंदगुप्त की चाह की, लेकिन यौवन काल में स्कंदगुप्त मालवा के धनकुबेर की कन्या विजया का स्वप्न देखते थे । आशा को बावली (पागल) इसलिए कहा गया है क्योंकि देवसेना असंभव की उम्मीद लगाए बैठी थी और इसी बावली आशा के कारण उसने अपने जीवन की सारी वास्तविक कमाई और सुखों को खो दिया ।
3. "मैंने निज दुर्बल .... होड़ लगाई" इन पंक्तियों में 'दुर्बल पद बल' और 'हारी होड़' में निहित व्यंजना स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: देवसेना का जीवन प्रलय के समान भयंकर संकटों से घिरा है और प्रलय उसके जीवन-रथ पर सवार है ।
'दुर्बल पद बल' का अर्थ है उसकी अपनी द्रुतमान दुर्बलताएँ और यह ज्ञान कि उसके पास परिस्थितियों से लड़ने की ताकत कम है ।
'हारी होड़' का अर्थ है हार निश्चित होने के बावजूद प्रलय (विपरीत भाग्य) से लगातार लोहा लेना या संघर्ष करना ।
4. काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
(क) श्रमित स्वप्न की मधुमाया ..... तान उठाई।
उत्तर: इन पंक्तियों में वेदना और प्रकृति के संबंध को दर्शाया गया है । थके हुए (श्रमित) स्वप्न की अवस्था में नींद से भरी (उनींदी) आँखों के बीच किसी के द्वारा विहाग (आधी रात में गाया जाने वाला राग) गाने से जो बेचैनी और पीड़ा होती है, उसी वेदना का सुंदर चित्रण यहाँ किया गया है ।
(ख) लौटा लो ..... लाज गँवाई।
उत्तर: यहाँ देवसेना की चरम निराशा और समर्पण का भाव है। वह संसार (विश्व) से अपनी अमानत या धरोहर (थाती) वापस लेने को कह रही है, क्योंकि अब वह अपनी करुणा और वेदना को सँभाल नहीं पा रही है और इस संघर्ष में उसने अपने मन की लाज भी गँवा दी है ।
5. देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?
उत्तर: देवसेना की निराशा के मुख्य कारण हैं: हूणों के आक्रमण में उसके भाई बंधुवर्मा सहित पूरे परिवार का वीरगति को प्राप्त हो जाना । दूसरा कारण स्कंदगुप्त का मालवा की कन्या विजया को चाहना, जिसके कारण देवसेना को यौवन में उसका प्रेम नहीं मिला । जब अंत में स्कंदगुप्त उसे पाना चाहता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और वह पर्णदत्त के साथ आश्रम में भिक्षा माँगती है ।
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कार्नेलिया का गीत :
1. कार्नेलिया का गीत कविता में प्रसाद ने भारत की किन विशेषताओं की ओर संकेत किया है?
उत्तर: प्रसाद जी ने भारत को एक मधुमय (मिठास से भरा) देश बताया है । इस देश की यह सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ अनजान क्षितिज को भी सहारा मिलता है । साथ ही यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और वह करुणा जल से भरे बादल, जो दूसरों का दुख देखकर पिघलते हैं, भारत की महानता को दर्शाते हैं ।
2. 'उड़ते खग' और 'बरसाती आँखों के बादल' में क्या विशेष अर्थ व्यंजित होता है?
उत्तर: 'उड़ते खग' से यह अर्थ व्यंजित होता है कि पक्षी भी अपने प्यारे घोंसले (नीड़) की कल्पना करके जिस ओर मुँह करके उड़ते हैं, वही आश्रय देने वाला प्यारा भारतवर्ष है । 'बरसाती आँखों के बादल' करुणा और सहानुभूति का प्रतीक हैं, जो यह बताते हैं कि भारतीयों के हृदय में दूसरों के दुख के प्रति हमेशा करुणा जल भरा रहता है ।
3. काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए- हेम कुंभ ले उषा सवेरे ..... रजनी भर तारा।
उत्तर: इस पद्यांश में उषा (प्रातःकाल) और तारों का सुंदर मानवीकरण किया गया है। कवि कल्पना करते हैं कि प्रातःकाल रूपी नायिका सूर्य रूपी सुनहरे घड़े (हेम कुंभ) से सुख लुढ़का रही है, जबकि रात भर जागने के कारण तारे अब मस्ती में ऊँघते (नींद में) हुए छिपने जा रहे हैं ।
4. 'जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा'- पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि भारत देश की संस्कृति इतनी महान है कि यहाँ अजनबी और अनजान व्यक्ति को भी सहारा (आश्रय) और लहरों को भी किनारा मिल जाता है ।
5. कविता में व्यक्त प्रकृति-चित्रों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: कविता में सिंधु नदी के किनारे का मनोहर और प्रशांत वातावरण चित्रित किया गया है । सुबह का लाल सूर्य (तामरस) ऐसा प्रतीत होता है जैसे हरियाली पर मंगल कुमकुम बिखेर दिया गया हो । ठंडी सुगन्धित हवा (शीतल मलय समीर) बह रही है, आसमान में इंद्रधनुष के समान रंग-बिरंगे पंख फैलाए पक्षी उड़ रहे हैं और भोर होने पर तारे छिप रहे हैं ।
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पाठ के आधार पर निर्मित पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ हुआ था?
(A) प्रयागराज
(B) काशी
(C) मथुरा
(D) अयोध्या
उत्तर: (B) काशी
प्रश्न 2: 'देवसेना का गीत' जयशंकर प्रसाद के किस नाटक से लिया गया है?
(A) अजातशत्रु
(B) चंद्रगुप्त
(C) ध्रुवस्वामिनी
(D) स्कंदगुप्त
उत्तर: (D) स्कंदगुप्त
प्रश्न 3: देवसेना मालवा के किस राजा की बहन थी जो हूणों के आक्रमण में वीरगति को प्राप्त हुए?
(A) पर्णदत्त
(B) सेल्यूकस
(C) बंधुवर्मा
(D) स्कंदगुप्त
उत्तर: (C) बंधुवर्मा
प्रश्न 4: कार्नेलिया (सेल्यूकस की बेटी) किस नदी के किनारे ग्रीक शिविर के पास पेड़ के नीचे बैठी हुई है?
(A) सिंधु नदी
(B) गंगा नदी
(C) यमुना नदी
(D) नर्मदा नदी
उत्तर: (A) सिंधु नदी
प्रश्न 5: 'देवसेना का गीत' में प्रयुक्त शब्द 'विहाग' का क्या अर्थ है?
(A) सुबह चलने वाली ठंडी हवा
(B) आधी रात में गाया जाने वाला राग
(C) तांबे के समान लाल रंग
(D) एक प्रकार का छोटा पक्षी
उत्तर: (B) आधी रात में गाया जाने वाला राग

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