CBSE Board class 12 Hindi antra ch-10
यह पाठ मुख्य रूप से महान आलोचक और साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान और उनके व्यक्तित्व के विकास पर केंद्रित है। इसमें शुक्ल जी की गद्य शैली, उनके द्वारा लिखे गए हिंदी साहित्य के इतिहास और उनके महत्वपूर्ण ग्रंथों की विस्तृत जानकारी दी गई है। लेखक ने अपने बचपन के सांस्कृतिक परिवेश और भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसी महान हस्तियों के प्रति अपने शुरुआती आकर्षण को बड़ी ही आत्मीयता से चित्रित किया है। संस्मरण के माध्यम से बदरीनाथ चौधरी 'प्रेमघन' के साथ उनके अनुभवों और उनके स्वच्छंद व्यक्तित्व की विशेषताओं को भी रेखांकित किया गया है। अंततः, यह लेख यह समझने में मदद करता है कि कैसे एक युवा जिज्ञासु पाठक धीरे-धीरे हिंदी जगत का एक प्रतिष्ठित विद्वान बन गया।
यहाँ आपके द्वारा दिए गए पाठ (आचार्य रामचंद्र शुक्ल कृत 'प्रेमघन की छाया-स्मृति') के प्रश्न-अभ्यास के सभी उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं:
पाठ के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर:
1. लेखक ने अपने पिता जी की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर: लेखक ने अपने पिताजी की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है:
वे फारसी के अच्छे ज्ञाता और पुरानी हिंदी कविता के बड़े प्रेमी थे ।
वे फारसी कवियों की उक्तियों को हिंदी कवियों की उक्तियों के साथ मिलाने में आनंदित होते थे ।
वे रात को परिवार के सभी लोगों को इकट्ठा करके रामचरितमानस और रामचंद्रिका बहुत ही आकर्षक ढंग से पढ़कर सुनाया करते थे ।
आधुनिक हिंदी साहित्य में उन्हें भारतेंदु जी के नाटक बहुत प्रिय थे ।
2. बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के संबंध में कैसी भावना जगी रहती थी?
उत्तर: बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के संबंध में एक अपूर्व मधुर भावना जगी रहती थी । वे 'सत्य हरिश्चंद्र' नाटक के नायक राजा हरिश्चंद्र और कवि भारतेंदु हरिश्चंद्र में अपनी बाल-बुद्धि के कारण कोई भेद (अंतर) नहीं कर पाते थे । 'हरिश्चंद्र' शब्द से उनके मन में दोनों की एक मिली-जुली और अपूर्व माधुर्य की भावना का संचार होता था ।
3. उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झलक लेखक ने किस प्रकार देखी?
उत्तर: लेखक अपने मित्रों (लड़कों की मंडली) के साथ प्रेमघन जी का मकान देखने गए थे, जिसका ऊपरी बरामदा सघन लताओं के जाल से ढका हुआ था । बीच-बीच में खुली जगह थी। तभी एक लड़के ने ऊपर की ओर इशारा किया, और लेखक ने लता-प्रतान के बीच एक मूर्ति खड़ी देखी जिसके दोनों कंधों पर बाल बिखरे हुए थे और एक हाथ खंभे पर था; देखते ही देखते यह झलक आँखों से ओझल हो गई ।
4. लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव किस तरह बढ़ता गया?
उत्तर: जैसे-जैसे लेखक सयाने (बड़े) होते गए, उनका झुकाव नूतन (आधुनिक) हिंदी साहित्य की ओर बढ़ता गया । वे पं. केदारनाथ जी पाठक के हिंदी पुस्तकालय से पुस्तकें लाकर पढ़ने लगे । 16 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते उनकी समवयस्क हिंदी-प्रेमियों की एक मंडली बन गई जिसमें वे आपस में हिंदी साहित्य और लेखकों की चर्चा करते थे, जिससे हिंदी के प्रति उनका झुकाव और पक्का हो गया ।
5. 'निस्संदेह' शब्द को लेकर लेखक ने किस प्रसंग का ज़िक्र किया है?
उत्तर: लेखक और उनकी मित्र-मंडली जब आपस में बातचीत करती थी, तो वे शुद्ध हिंदी का प्रयोग करते थे जिसमें 'निस्संदेह' जैसे शब्द अक्सर आया करते थे । लेखक जिस मोहल्ले में रहते थे, वहाँ अधिकतर वकील, मुख्तार और कचहरी के अफसर रहते थे, जिन्हें उर्दू बोलने और सुनने की आदत थी । उनके कानों में लेखक की मंडली की हिंदी अनोखी लगती थी, इसी कारण उन लोगों ने लेखक और उनके मित्रों का नाम ही 'निस्संदेह' लोग रख दिया था ।
6. पाठ में कुछ रोचक घटनाओं का उल्लेख है। ऐसी तीन घटनाएँ चुनकर उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: पाठ की तीन रोचक घटनाएँ निम्नलिखित हैं:
वामनाचार्य जी की कविता: एक दिन कवि वामनाचार्य गिरि जी सड़क पर चलते हुए चौधरी प्रेमघन जी पर कविता बना रहे थे। अंतिम पंक्ति बाकी थी कि तभी उन्होंने चौधरी साहब को बरामदे में खंभे के सहारे बाल बिखराए खड़े देखा और तुरंत कविता पूरी कर दी— "खंभा टेकि खड़ी जैसे नारि मुगलाने की" ।
घनचक्कर का अर्थ: एक दिन एक पड़ोसी ने चौधरी साहब से पूछा कि 'घनचक्कर' का क्या अर्थ है? चौधरी साहब ने मज़ाक में कहा— "एक दिन-रात सोने से पहले, सवेरे से लेकर रात तक जो-जो काम किए हों, सब कागज़ पर लिख जाइए और पढ़ जाइए, वही घनचक्कर है" ।
लैम्प की चिमनी का टूटना: एक बार चौधरी साहब के पास रखा लैम्प भभकने लगा। वे नौकरों को आवाज़ देते रहे, लेकिन खुद लैम्प को बुझाने के लिए हाथ नहीं बढ़ाया। अंततः लैम्प की चिमनी चूर-चूर हो गई, पर वे यही कहते रहे कि "अरे! जब फूट जाई तबै चलत आवह", और अपने हाथ से उसे नहीं बुझाया ।
7. 'इस पुरातत्त्व की दृष्टि में प्रेम और कुतूहल का अद्भुत मिश्रण रहता था।' यह कथन किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यह कथन बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' जी के संदर्भ में कहा गया है । लेखक और उनकी मित्र-मंडली नई उम्र के हिंदी लेखक थे, जबकि चौधरी साहब भारतेंदु मंडल के पुराने और प्रसिद्ध कवि थे । इसलिए लेखक की मंडली उन्हें एक 'पुरानी चीज़' (पुरातत्त्व) समझती थी । उनके प्रति नई पीढ़ी के मन में आदर (प्रेम) भी था और उनके जीवन और व्यक्तित्व को जानने की गहरी उत्सुकता (कुतूहल) भी थी ।
8. प्रस्तुत संस्मरण में लेखक ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व के किन-किन पहलुओं को उजागर किया है?
उत्तर: संस्मरण में चौधरी साहब को एक 'खासे हिंदुस्तानी रईस' के रूप में दिखाया गया है । उनकी हर अदा से रियासत और तबीयतदारी झलकती थी । उनके कंधों तक बाल लटकते रहते थे । उनकी बातचीत में एक विलक्षण वक्रता (व्यंग्य और कलात्मकता) रहती थी और वे अक्सर लोगों को 'बनाया' (मज़ाक किया) करते थे । वे अपनी बात के इतने पक्के थे कि लैम्प की चिमनी टूट जाने पर भी उसे खुद नहीं छुआ । वे भाषा को लेकर भी प्रयोगशील थे, जैसे 'मिर्ज़ापुर' को अर्थपूर्ण रूप में 'मीरजापुर' लिखते थे ।
9. समवयस्क हिंदी प्रेमियों की मंडली में कौन-कौन से लेखक मुख्य थे?
उत्तर: लेखक की समवयस्क हिंदी प्रेमियों की मंडली में मुख्य रूप से श्रीयुत् काशीप्रसाद जी जायसवाल, बा. भगवानदास जी हालना, पं. बदरीनाथ गौड़ और पं. उमाशंकर द्विवेदी शामिल थे ।
10. 'भारतेंदु जी के मकान के नीचे का यह हृदय-परिचय बहुत शीघ्र गहरी मैत्री में परिणत हो गया।' कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जब लेखक को पता चला कि चौखंभा में एक मकान भारतेंदु जी का है, तो वे उस मकान की ओर बहुत ही भावुकता, चाह और कुतूहल से देखते रह गए । पं. केदारनाथ जी पाठक लेखक की इस भावुकता और साहित्य के प्रति उनके सच्चे प्रेम को देखकर बहुत प्रभावित हुए । भारतेंदु जी के मकान के सामने दोनों के बीच बिना बोले ही साहित्य-प्रेम के आधार पर जो आत्मिक जुड़ाव (हृदय-परिचय) हुआ, उसी ने जल्दी ही दोनों के बीच एक गहरी मित्रता का रूप ले लिया ।
पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) उत्तर सहित:
प्रश्न 1: 'प्रेमघन की छाया-स्मृति' पाठ के रचयिता कौन हैं?
(A) बदरीनारायण चौधरी
(B) भारतेंदु हरिश्चंद्र
(C) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
(D) केदारनाथ पाठक
उत्तर: (C) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
प्रश्न 2: बचपन में लेखक किन दो 'हरिश्चंद्र' नामों के बीच भेद नहीं कर पाते थे?
(A) राजा हरिश्चंद्र और भारतेंदु हरिश्चंद्र
(B) कवि हरिश्चंद्र और उनके पिता
(C) राजा हरिश्चंद्र और कवि भारतेंदु हरिश्चंद्र
(D) सत्य हरिश्चंद्र और केदारनाथ हरिश्चंद्र
उत्तर: (C) राजा हरिश्चंद्र और कवि भारतेंदु हरिश्चंद्र
प्रश्न 3: मोहल्ले के उर्दू भाषी लोगों ने लेखक और उनकी मित्र-मंडली का क्या नाम रख दिया था?
(A) साहित्य प्रेमी
(B) निस्संदेह लोग
(C) घनचक्कर
(D) पुरातत्त्व की मंडली
उत्तर: (B) निस्संदेह लोग
प्रश्न 4: बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' 'मिर्ज़ापुर' को किस रूप में लिखना पसंद करते थे?
(A) मीरपुर
(B) मिर्ज़ापुरम्
(C) मीरजापुर
(D) मिर्ज़ा नगर
उत्तर: (C) मीरजापुर
प्रश्न 5: लेखक के पिताजी किस भाषा के अच्छे ज्ञाता और पुरानी हिंदी कविता के प्रेमी थे?
(A) अंग्रेज़ी
(B) उर्दू
(C) संस्कृत
(D) फारसी
उत्तर: (D) फारसी

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