CBSE Board class 12 Hindi antra ch-12
यह पाठ प्रसिद्ध कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व और उनकी मार्मिक कहानी 'संवदिया' का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करता है। लेखक ने अपनी रचनाओं में ग्रामीण समाज की मानवीय संवेदनाओं और क्षेत्रीय परिवेश को बहुत गहराई से चित्रित किया है। कहानी का मुख्य पात्र हरगोबिन एक संदेशवाहक है, जो एक असहाय और दुखी 'बड़ी बहुरिया' का करुण संदेश लेकर उसके मायके जाता है। वह विधवा स्त्री अपनी गरीबी और अकेलेपन से तंग आकर अपनी माँ की शरण में जाना चाहती है, लेकिन हरगोबिन गाँव की मर्यादा और सम्मान की खातिर यह दुखद संदेश नहीं सुना पाता। अंत में, वह अपनी गलती सुधारने का संकल्प लेकर वापस लौटता है और स्वयं को उस स्त्री की सेवा में समर्पित करने का निर्णय लेता है। यह संपूर्ण वृत्तांत ग्रामीण जीवन की विडंबनाओं और मानवीय भावनाओं के द्वंद्व को बहुत ही सुंदरता से उजागर करता है।
पाठ 'संवदिया' के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर:
1. संवदिया की क्या विशेषताएँ हैं और गाँववालों के मन में संवदिया की क्या अवधारणा है?
संवदिया की मुख्य विशेषता यह होती है कि वह केवल एक संदेशवाहक नहीं होता, बल्कि संवाद के प्रत्येक शब्द को याद रखता है और जिस सुर तथा स्वर में संवाद सुनाया गया है, ठीक उसी ढंग से जाकर सुनाता है । संवदिया भावनाओं को समझता है। गाँव वालों की यह गलत अवधारणा है कि निठल्ला, कामचोर और पेटू आदमी ही संवदिया का काम करता है, जिसके आगे-पीछे कोई जिम्मेदारी नहीं होती ("न आगे नाथ, न पीछे पगहा")। गाँव वाले यह भी मानते हैं कि जो बिना मजदूरी लिए गाँव-गाँव संवाद पहुँचाए और औरतों की जरा-सी मीठी बोली सुनकर नशे में आ जाए, वह औरतों का गुलाम होता है ।
2. बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन के मन में किस प्रकार की आशंका हुई?
हरगोबिन को अचरज हुआ कि आज के ज़माने में जब गाँव-गाँव में डाकघर खुल गए हैं और लोग घर बैठे लंका तक की खबर मँगा सकते हैं, तो किसी को संवदिया की ज़रूरत क्यों पड़ गई । बड़ी हवेली की टूटी ड्योढ़ी पार करते हुए उसने वातावरण को सूँघकर अंदाजा लगाया कि निश्चय ही कोई ऐसा गुप्त समाचार ले जाना है, जिसकी भनक चाँद-सूरज और परिंदों तक को न लगे ।
3. बड़ी बहुरिया अपने मायके संदेश क्यों भेजना चाहती थी?
बड़े भैया के मरने के बाद तीनों देवरों ने आपस में लड़ाई-झगड़ा करके बँटवारा कर लिया और वे गाँव छोड़कर शहर जा बसे । अकेली रह गई बड़ी बहुरिया बहुत ही कष्ट और गरीबी में बथुआ-साग खाकर अपना जीवन बिताने को मजबूर थी । उसे गाँव की मोदिआइन की कड़वी बातें भी सुननी पड़ती थीं । देवर-देवरानियाँ आकर फसलें और आम ले जाते थे लेकिन उसका हाल नहीं पूछते थे । इस असहनीय कष्ट से तंग आकर उसने तय किया कि वह अब अपनी माँ के पास मायके चली जाएगी, अन्यथा गले में घड़ा बाँधकर पोखरे में डूब मरेगी ।
4. हरगोबिन बड़ी हवेली में पहुँचकर अतीत की किन स्मृतियों में खो जाता है?
बड़ी हवेली की दुर्दशा देखकर हरगोबिन को वे दिन याद आते हैं जब वहाँ दिन-रात नौकर-नौकरानियों और जन-मज़दूरों की भीड़ लगी रहती थी । उस समय बड़ी बहुरिया केवल अपने हाथों में मेंहदी लगाकर ही गाँव की नाइन का परिवार पालती थी । वह उन दर्दनाक स्मृतियों में भी खो जाता है जब बड़े भैया की मृत्यु के बाद निर्दयी भाइयों ने बँटवारे के समय द्रौपदी के चीर-हरण जैसी लीला की थी और बनारसी साड़ी के भी तीन टुकड़े करके बाँटे थे ।
5. संवाद कहते वक्त बड़ी बहुरिया की आँखें क्यों छलछला आईं?
बड़ी बहुरिया अत्यंत कष्ट, लाचारी और भुखमरी का सामना कर रही थी। जब वह हरगोबिन को अपना संदेश बता रही थी कि वह कैसे बथुआ-साग खाकर गुजारा कर रही है और अपने भाइयों-भाभियों की नौकरी करके और बच्चों की जूठन खाकर एक कोने में पड़ी रहेगी, तो अपने इन हृदयविदारक दुःखों का वर्णन करते हुए उसकी आँखें छलछला आईं ।
6. गाड़ी पर सवार होने के बाद संवदिया के मन में काँटे की चुभन का अनुभव क्यों हो रहा था? उससे छुटकारा पाने के लिए उसने क्या उपाय सोचा?
गाड़ी में बैठते ही हरगोबिन को बड़ी बहुरिया का करुण संवाद याद आने लगा । बहुरिया का वह संवाद कि "किसके भरोसे यहाँ रहूँगी... मैं किसके लिए इतना दुख झेलूँ" उसके मन में काँटे की तरह चुभ रहा था । जब वह यह सोच-सोच कर बेचैन हो रहा था, तभी गाड़ी में निर्गुन गाने वाला एक सूरदास आ गया, जिसके गीतों ("नहरा को सुख सपन भयो अब...") को सुनकर उसका मन थोड़ा स्थिर हुआ ।
7. बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन क्यों नहीं सुना सका?
बड़ी बहुरिया के मायके पहुँचने पर हरगोबिन का मन कलपने लगा कि गाँव की 'लक्ष्मी' अपना गाँव छोड़कर चली जाएगी । वह सोचने लगा कि वह किस मुँह से कहेगा कि बड़ी बहुरिया बथुआ-साग खाकर गुजारा कर रही है । उसे लगा कि यह सुनकर सब उसके गाँव के नाम पर थूकेंगे कि वहाँ लक्ष्मी जैसी बहुरिया दुःख भोग रही है । अपने गाँव की इज़्ज़त बचाने और बड़ी बहुरिया को गाँव से न जाने देने की इच्छा के कारण वह संवाद नहीं सुना सका ।
8. 'संवदिया डटकर खाता है और अफर कर सोता है' से क्या आशय है?
यह एक प्रचलित लोकोक्ति और धारणा है जिसका अर्थ है कि संवदिया जब किसी के घर संदेश लेकर जाता है, तो वहाँ खूब पेट भरकर (डटकर) स्वादिष्ट भोजन खाता है और बिना किसी चिंता के गहरी नींद (अफर कर) सोता है । किंतु प्रस्तुत पाठ में हरगोबिन को स्वादिष्ट भोजन मिलने के बावजूद बड़ी बहुरिया की दयनीय स्थिति की याद आने के कारण न तो कुछ खाया गया और न ही नींद आई ।
9. जलालगढ़ पहुँचने के बाद बड़ी बहुरिया के सामने हरगोबिन ने क्या संकल्प लिया?
गाँव वापस पहुँचकर हरगोबिन ने बड़ी बहुरिया के पैर पकड़ लिए और संवाद न सुना पाने के लिए माफी माँगी । उसने संकल्प लिया कि अब वह निठल्ला बैठा नहीं रहेगा, बल्कि एक बेटे की तरह बड़ी बहुरिया का सारा काम करेगा और उन्हें कोई कष्ट नहीं होने देगा, बस वह गाँव छोड़कर न जाए ।
10. 'डिजिटल इंडिया' के दौर में संवदिया की क्या कोई भूमिका हो सकती है?
यद्यपि आज के दौर में इंटरनेट और फोन से "आदमी घर बैठे ही लंका तक खबर भेज सकता है" , लेकिन डिजिटल माध्यम केवल सूचना पहुँचाते हैं। संवदिया संवाद के साथ प्रेषक की भावना, "किस सुर और स्वर में संवाद सुनाया गया है", उसे भी उसी रूप में सामने रखता है । एक संवदिया केवल डाकिया नहीं बल्कि भावनाओं का संवाहक और रक्षक (जैसे हरगोबिन ने गाँव की इज़्ज़त बचाई) होता है । इसलिए तकनीकी रूप से इसका काम खत्म हो गया हो, पर मानवीय संवेदनाओं के स्तर पर ऐसी भूमिका की प्रासंगिकता हमेशा रहती है।
भाषा-शिल्प के प्रश्नों के उत्तर:
अर्थ स्पष्ट करें:
काबुली-कायदा: इसका अर्थ उधार दी गई रकम को कठोरता और ज़ुल्म के साथ वसूलने के तरीके से है। पाठ में पाँच साल पहले गाँव आए 'काबुली आगा' के प्रसंग से यह जुड़ा है, जो उधार देते समय मीठा बोलता था और वसूली के समय ज़ोर-ज़ुल्म करता था ।
रोम-रोम कलपने लगा: इसका अर्थ है शरीर के हर हिस्से में अत्यधिक दुःख और पीड़ा का अनुभव होना। बड़ी बहुरिया के दुखड़े को सुनकर हरगोबिन की यही स्थिति हुई थी ।
अगहनी धान: अगहन के महीने में तैयार होने वाली धान की फसल। इस समय समृद्धि होती है, इसीलिए देवर-देवरानियाँ इसी समय हिस्सा लेने गाँव आते थे ।
व्याख्या करें:
(क) बड़ी हवेली अब नाममात्र को ही बड़ी हवेली है: यह पंक्ति हवेली की वर्तमान दुर्दशा को दर्शाती है। जहाँ पहले दिन-रात नौकर-मज़दूरों की भीड़ रहती थी, वहाँ अब बँटवारे के बाद बड़ी बहुरिया अकेली अपने हाथों से सूप में अनाज फटकने को मजबूर है ।
(ख) हरगोबिन ने देखी अपनी आँखों से द्रौपदी की चीरहरण लीला: यह पंक्ति देवरों की निर्दयता को दर्शाती है जिन्होंने बँटवारे के समय बड़ी बहुरिया के गहने छीन लिए और यहाँ तक कि एक बनारसी साड़ी को भी तीन टुकड़ों में फाड़ डाला ।
(ग) बथुआ साग खाकर कब तक जिऊँ?: यह बड़ी बहुरिया की अत्यंत गरीबी और लाचारी को बयां करता है कि घर में अन्न का दाना तक नहीं है और उसे जंगली घास (बथुआ) उबालकर पेट भरना पड़ रहा है ।
(घ) किस मुँह से वह ऐसा संवाद सुनाएगा: यह हरगोबिन के मानसिक द्वंद्व को दर्शाता है। उसे लगता है कि अगर वह यह दुखद संदेश सुनाएगा, तो उसके गाँव की इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी कि उन्होंने अपने गाँव की 'लक्ष्मी' को खाने तक को नहीं दिया ।
पाठ पर आधारित पाँच वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न:
प्रश्न 1: प्रस्तुत पाठ 'संवदिया' के लेखक का क्या नाम है?
(A) प्रेमचंद
(B) फणीश्वरनाथ 'रेणु'
(C) महादेवी वर्मा
(D) जयशंकर प्रसाद
उत्तर: (B) फणीश्वरनाथ 'रेणु'
प्रश्न 2: संवदिया का काम करने वाले व्यक्ति का क्या नाम था?
(A) हरगोबिन
(B) रामगोबिन
(C) सूरदास
(D) काबुली आगा
उत्तर: (A) हरगोबिन
प्रश्न 3: बड़ी बहुरिया ने हरगोबिन को राह-खर्च के लिए कितने रुपये का नोट दिया था?
(A) दस रुपये
(B) दो रुपये
(C) पाँच रुपये
(D) बीस रुपये
उत्तर: (C) पाँच रुपये
प्रश्न 4: बड़ी बहुरिया अपना संवाद किसके पास भेजना चाहती थी?
(A) अपने देवर के पास
(B) अपनी ननद के पास
(C) गाँव के सरपंच के पास
(D) अपनी माँ के पास
उत्तर: (D) अपनी माँ के पास
प्रश्न 5: हरगोबिन के अनुसार, संवाद पहुँचाने का काम कौन करता है और गाँव वालों की नज़र में संवदिया कैसा होता है?
(A) संवदिया समझदार और मेहनती होता है
(B) संवदिया निठल्ला, कामचोर और पेटू आदमी होता है
(C) संवदिया बहुत अमीर व्यक्ति होता है
(D) संवदिया गाँव का मुखिया होता है
उत्तर: (B) संवदिया निठल्ला, कामचोर और पेटू आदमी होता है

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