CBSE Board class 12 Hindi antra ch-16

यह स्रोत प्रसिद्ध लेखिका ममता कालिया के संक्षिप्त जीवन परिचय और उनकी प्रसिद्ध कहानी 'दूसरा देवदास' का विवरण प्रस्तुत करते हैं। लेखिका का जन्म मथुरा में हुआ था और वे अपनी सटीक भाषा-शैली एवं मानवीय संवेदनाओं के चित्रण के लिए जानी जाती हैं। उनकी यह कहानी हरिद्वार के धार्मिक परिवेश और हर की पौड़ी पर होने वाली भव्य आरती की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें युवा पात्रों, संभव और पारो, के बीच मन की हलचल और पहली मुलाकात से उपजे आकस्मिक प्रेम को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया गया है। यह रचना स्पष्ट करती है कि सच्चा अनुराग किसी विशेष समय या स्थान का मोहताज नहीं होता, बल्कि किसी भी परिस्थिति में अंकुरित हो सकता है। अंततः, यह पाठ प्रेम को केवल फिल्मी रूढ़ियों से अलग कर उसे एक पवित्र और स्थायी स्वरूप प्रदान करता है।

यहाँ आपके द्वारा दिए गए पाठ "दूसरा देवदास" (लेखिका: ममता कालिया) के सभी प्रश्नों के सरल उत्तर और 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (विकल्प और उत्तर सहित) दिए गए हैं:


पाठ के प्रश्नों के उत्तर:


1. पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगा जी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर: शाम के समय हर की पौड़ी पर गंगा आरती का दृश्य बहुत ही भव्य और मनमोहक होता है। पूरे घाट पर दीप जल उठते हैं और पानी में उनकी परछाई झिलमिलाती है । पुजारी पीतल की नीलिमा लिए हुए हजारों बत्तियों वाले दीयों से आरती करते हैं । 'जय गंगे माता' और 'ओम जय जगदीश हरे' के स्वर से पूरा वातावरण गूंज उठता है । भक्त दीयों से सजी फूलों की छोटी-छोटी किश्तियाँ गंगा की लहरों पर तैराते हैं । आरती के समय पूरे वातावरण में चंदन और अगरबत्ती की पवित्र सुगंध फैल जाती है ।


2. 'गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है'- इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।

उत्तर: गोताखोरों या 'गंगापुत्रों' का पूरा जीवन और रोजगार गंगा नदी पर ही निर्भर करता है । जब भक्त आरती के बाद दोने गंगा में बहाते हैं और उनमें चढ़ावे का पैसा रखते हैं, तो ये गंगापुत्र पानी में छलांग लगाकर उन पैसों को उठाकर अपने मुँह में दबा लेते हैं । वे अपनी जान की परवाह किए बिना आग की लपटों वाले दीयों के बीच से भी सिक्के निकाल लाते हैं । पूरे दिन में वे गंगा से रेज़गारी (छुट्टे पैसे) बटोरते हैं और उनकी घर की औरतें घाटों पर इन पैसों को बदलकर नोट कमाने का काम करती हैं ।


3. पुजारी ने लड़की के 'हम' को युगल अर्थ में लेकर क्या आशीर्वाद दिया और पुजारी द्वारा आशीर्वाद देने के बाद लड़के और लड़की के व्यवहार में अटपटापन क्यों आया?

उत्तर: लड़की ने पुजारी से कहा था कि "हम कल आरती की बेला आएँगे", जिस पर पुजारी ने 'हम' शब्द को प्रेमी-प्रेमिका या पति-पत्नी (युगल) के अर्थ में ले लिया । पुजारी ने आशीर्वाद दिया- "सुखी रहो, फूलो-फलो, जब भी आओ साथ ही आना, गंगा मैया मनोरथ पूरे करें" । इस आशीर्वाद को सुनकर दोनों में अटपटापन और घबराहट आ गई क्योंकि वे दोनों एक-दूसरे के लिए बिल्कुल अजनबी थे, और अनजाने में ही उनके बीच एक ऐसा रिश्ता जोड़ दिया गया था ।


4. उस छोटी सी मुलाकात ने संभव के मन में क्या हलचल उत्पन्न कर दी, इसका सूक्ष्म विवेचन कीजिए।

उत्तर: उस छोटी सी मुलाकात ने संभव के मन में पहली नज़र के प्रेम की गहरी हलचल पैदा कर दी । वह उस लड़की की सादगी, गुलाबी साड़ी और भीगे बालों वाली छवि को भूल नहीं पा रहा था । रात भर उसे नींद नहीं आई और वह बेचैन होकर सोचता रहा कि अगले दिन उससे कैसे बात करेगा, उससे क्या कहेगा और उसका नाम-पता कैसे पूछेगा ।


5. मंसा देवी जाने के लिए केबिलकार में बैठे हुए संभव के मन में जो कल्पनाएँ उठ रही थीं, उनका वर्णन कीजिए।

उत्तर: मंसा देवी जाने के लिए गुलाबी रंग की केबिल कार में बैठा संभव उस अजनबी लड़की के ख्यालों में खोया हुआ था । उसे सब कुछ गुलाबी लग रहा था और उसने मन ही मन उस लड़की के माथे पर एक बिंदिया सजा दी थी । उसके सामने बैठे जोड़े को देखकर उसे अफ़सोस हो रहा था कि वह भी कुछ चढ़ावा लेकर क्यों नहीं आया । उसके मन में "माँग में तारे भर दूँ" जैसे फिल्मी गीत गूँज रहे थे ।


6. "पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है--- उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिठान का मधुर स्मरण हो आया।" कथन के आधार पर कहानी के संकेतपूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: यह कथन कहानी के अंत में दोनों के बीच पनप रहे प्रेम का संकेत देता है । जब मन्नू ने लड़की को 'पारो बुआ' कहा, तो संभव को उसका नाम पता चल गया और उसने तुरंत अपना नाम 'संभव देवदास' बताकर शरतचंद्र के उपन्यास 'देवदास' और 'पारो' की प्रेम कहानी की तरफ इशारा किया । इसके साथ ही उसे मंसा देवी पर बाँधा गया मनोकामना का वह धागा याद आ गया, जो उसने पारो से दोबारा मिलने की इच्छा से बाँधा था ।


7. 'मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।' कथन के आधार पर पारो की मनोदशा का वर्णन कीजिए।

उत्तर: पारो भी संभव के प्रति मन ही मन आकर्षित हो चुकी थी । जब पारो को पता चला कि इस लड़के (संभव) ने मंसा देवी के दरबार में उसी के लिए मन्नत का धागा बाँधा था, तो वह खुशी और शर्म से गुलाबी हो गई । वह मन ही मन सोचती है कि मन्नत का धागा भले ही संभव ने बाँधा था, लेकिन उसका सीधा असर पारो के दिल पर हुआ है और दोनों एक-दूसरे से जुड़ गए हैं ।


8. निम्नलिखित वाक्यों का आशय स्पष्ट कीजिए-

(क) 'तुझे तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।'

उत्तर: यह कथन संभव की नानी का है, जो उसे लेकर चिंतित थीं । संभव को तैरना नहीं आता था, इसलिए नानी कह रही हैं कि अगर गंगा के घाट पर भीड़ में उसका पैर फिसल जाता और वह डूब जाता, तो वे संभव की माँ को क्या जवाब देतीं ।

(ख) 'उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम् त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनित कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।'

उत्तर: यह कथन उस भक्त के लिए है जो गंगा की जलधारा के बीच सूर्य की ओर हाथ जोड़े खड़ा था । इसका आशय है कि वह व्यक्ति पूरी तरह से ईश्वर की सच्ची भक्ति में लीन था । उसके मन में कोई घमंड या सांसारिक कुंठा नहीं बची थी, बल्कि उसे एक पवित्र आत्मिक शांति प्राप्त हो गई थी ।

(ग) 'एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धारिणी मंसादेवी स्थापित थीं। व्यापार यहाँ भी था।'

उत्तर: इस वाक्य का आशय है कि मंसा देवी के मुख्य मंदिर के अंदर जहाँ देवी की मूर्ति स्थापित थी, वहाँ भी भगवान की आस्था के नाम पर व्यवसाय चल रहा था । वहाँ लाल-पीले मन्नत के धागे सवा रुपये में बेचे जा रहे थे ।


9. 'दूसरा देवदास' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कहानी का शीर्षक 'दूसरा देवदास' पूरी तरह से सटीक और सार्थक है। जिस तरह शरतचंद्र के प्रसिद्ध उपन्यास 'देवदास' का नायक अपनी प्रेमिका 'पारो' के प्रेम में पागल रहता है, उसी तरह इस कहानी का नायक संभव भी एक अनजान लड़की को देखकर पहली नज़र में अपना दिल दे बैठता है । जब उसे पता चलता है कि उस लड़की का नाम भी 'पारो' है, तो वह अपना नाम 'संभव देवदास' बताता है । यह शीर्षक आधुनिक समय में पवित्र और अचानक पनपे प्रेम को बखूबी दर्शाता है ।


10. 'हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा'- आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: संभव ने मंसा देवी के मंदिर में पारो से मिलने की जो मन्नत माँगी थी और धागा बाँधा था, वह इतनी जल्दी पूरी हो जाएगी, यह उसने सपने में भी नहीं सोचा था । जब पारो उसे केबिल कार के पास वापस मिल गई, तो वह हैरान रह गया। इस पंक्ति का आशय यही है कि सच्चे मन से माँगी गई मुराद का फल उसे तुरंत और इतने सुखद रूप में मिल गया ।

5 वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न (उत्तर सहित):


प्रश्न 1: 'दूसरा देवदास' कहानी की लेखिका का क्या नाम है?

A) महादेवी वर्मा

B) मन्नू भंडारी

C) ममता कालिया

D) शिवानी

उत्तर: C) ममता कालिया


प्रश्न 2: 'गंगापुत्र' नदी से पैसे निकालने के लिए क्या करते हैं?

A) पानी में जाल डालते हैं

B) डुबकी लगाकर सिक्कों को मुँह में दबा लेते हैं

C) नाव का इस्तेमाल करते हैं

D) चुंबक का इस्तेमाल करते हैं

उत्तर: B) डुबकी लगाकर सिक्कों को मुँह में दबा लेते हैं


प्रश्न 3: मंसा देवी जाने के लिए संभव किस रंग की केबिल कार (रोपवे) में बैठा था?

A) लाल

B) पीली

C) नीली

D) गुलाबी

उत्तर: D) गुलाबी


प्रश्न 4: कहानी के अंत में मन्नू (बच्चे) के साथ आई लड़की का क्या नाम पता चलता है?

A) राधा

B) चामुंडा

C) पारो

D) सविता

उत्तर: C) पारो


प्रश्न 5: जब लड़की ने कहा कि "हम कल आएँगे", तो पुजारी ने 'हम' शब्द का क्या अर्थ निकाल लिया था?

A) भाई-बहन

B) पति-पत्नी (युगल)

C) केवल दो दोस्त

D) अजनबी

उत्तर: B) पति-पत्नी (युगल)

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