CBSE Board class 12 Hindi antra ch-2

यह स्रोत हिंदी साहित्य के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के जीवन और उनकी प्रसिद्ध रचनाओं का संक्षिप्त परिचय देते हैं। इसमें निराला जी के पारिवारिक संघर्षों, उनकी आर्थिक कठिनाइयों और उनके स्वाभिमानी स्वभाव के बारे में बताया गया है। विशेष रूप से, यह पाठ उनकी मर्मस्पर्शी कविता 'सरोज स्मृति' पर केंद्रित है, जो उन्होंने अपनी दिवंगत पुत्री की याद में लिखी थी। इस कविता के माध्यम से एक पिता के विलाप, उसकी विवशता और समाज के साथ उसके संबंधों को गहराई से दर्शाया गया है। अंत में, यह सामग्री विद्यार्थियों के लिए अभ्यास प्रश्न और कठिन शब्दों के अर्थ भी प्रदान करती है ताकि वे निराला जी के काव्य-संसार को बेहतर ढंग से समझ सकें।

यहाँ 'सरोज स्मृति' पाठ में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर और पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं:


पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के उत्तर:


1. सरोज के नव-वधू रूप का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

सरोज अपने विवाह के समय अत्यंत सुंदर और पवित्र नव-वधू लग रही थी। उस पर विवाह का शुभ जल डाला गया था । वह मंद-मंद मुस्कुरा रही थी और उसके होठों पर बिजली जैसी चमक (स्पंदन) थी । उसके अंगों में एक नया विश्वास और उच्छ्वास दिखाई दे रहा था। रति (कामदेव की पत्नी) के समान सुंदर लगने वाली सरोज के झुके हुए नेत्रों से प्रकाश उतरकर उसके होंठों पर काँप रहा था ।


2. कवि को अपनी स्वर्गीया पत्नी की याद क्यों आई?

कवि को अपनी स्वर्गीया पत्नी की याद इसलिए आई क्योंकि बेटी सरोज के रूप-रंग में उन्हें अपनी पत्नी का रूप-रंग दिखाई पड़ रहा था । जब कवि ने सरोज को नव-वधू के रूप में देखा, तो उन्हें ऐसा लगा मानो शृंगार का जो भाव उन्होंने अपनी कविताओं में और अपनी पत्नी के साथ जिया था, वही आज साकार होकर धरती पर उतर आया है ।


3. 'आकाश बदल कर बना मही' में 'आकाश' और 'मही' शब्द किनकी ओर संकेत करते हैं?

इस पंक्ति में 'आकाश' शब्द कवि की स्वर्गीया पत्नी (और उनके साथ बिताए गए अतीत की निराकार स्मृतियों) की ओर संकेत करता है, जबकि 'मही' (पृथ्वी) शब्द उनकी पुत्री सरोज के साकार रूप की ओर संकेत करता है । कवि को नव-वधू सरोज को देखकर ऐसा प्रतीत हुआ मानो उनकी स्वर्गीया पत्नी ही स्वर्ग (आकाश) से उतरकर पृथ्वी (मही) पर सरोज का रूप धारण करके आ गई हो ।


4. सरोज का विवाह अन्य विवाहों से किस प्रकार भिन्न था?

सरोज का विवाह बिल्कुल सादगीपूर्ण और शांत था। इसमें कोई आत्मीय स्वजन उपस्थित नहीं थे और न ही किसी को आमंत्रण भेजा गया था । घर में रात-दिन गाए जाने वाले विवाह के गीत (विवाह-राग) भी नहीं गाए गए । माँ के न होने के कारण माँ द्वारा दी जाने वाली शिक्षा और पुष्प-सेज सजाने का कार्य स्वयं पिता (कवि) ने ही किया । चारों ओर बस एक मौन संगीत भरा हुआ था ।


5. 'वह लता वहीं की, जहाँ कली तू खिली' पंक्ति के द्वारा किस प्रसंग को उद्घाटित किया गया है?

इस पंक्ति के माध्यम से सरोज के अपने ननिहाल से गहरे जुड़ाव और वहीं हुए उसके पालन-पोषण के प्रसंग को उद्घाटित किया गया है। कवि कहते हैं कि सरोज की माता (लता) उसी ननिहाल से थीं और सरोज (कली) का पालन-पोषण भी नानी की स्नेहिल गोद और मामा-मामी के प्यार के बीच वहीं हुआ । अंत समय में सरोज ने उसी गोद में अपने प्राण भी त्यागे ।


6. 'मुझ भाग्यहीन की तू संबल' निराला की यह पंक्ति क्या 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे कार्यक्रम की माँग करती है।

हाँ, यह पंक्ति परोक्ष रूप से इस कार्यक्रम की माँग और आवश्यकता को दर्शाती है। कवि स्वयं को 'भाग्यहीन' कहते हैं क्योंकि वे गरीबी और जीवन-संघर्षों के कारण अपनी बेटी के लिए बहुत कुछ नहीं कर पाए । 'तू संबल' (तू ही मेरा सहारा है) पंक्ति यह स्पष्ट करती है कि बेटियाँ माता-पिता का बहुत बड़ा सहारा होती हैं । समाज में आर्थिक और सामाजिक विषमताओं के कारण जो पिता अपनी बेटियों को सुविधाएँ नहीं दे पाते, उनकी पीड़ा इस कविता में है। इसलिए समाज को 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे कार्यक्रमों को अपनाना चाहिए ताकि बेटियाँ सशक्त हों और परिवार का मज़बूत संबल बन सकें।


7. निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए -

(क) नत नयनों से आलोक उतर: सरोज के झुके हुए (नत) नेत्रों से शील और प्रसन्नता का प्रकाश उतरकर उसके होंठों पर थरथरा रहा था ।

(ख) शृंगार रहा जो निराकार: कवि के मन में शृंगार का जो अमूर्त (निराकार) भाव था और जिसे उन्होंने अपनी कविताओं में रस-धार के रूप में उकेरा था, वह आज सरोज के रूप में उनके सामने साकार खड़ा था ।

(ग) पर पाठ अन्य यह, अन्य कला: शकुंतला की विदाई के समय महर्षि कण्व ने जो शिक्षा दी थी, उसकी तुलना में कवि द्वारा अपनी बेटी को दी गई शिक्षा का तरीका और परिस्थितियाँ बिल्कुल भिन्न और अनूठी थीं ।

(घ) यदि धर्म, रहे नत सदा माथ: कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु, यदि मैं जीवन में धर्म (सच्चाई और कर्त्तव्य) के मार्ग पर हूँ, तो मेरे ऊपर चाहे कितनी भी विपत्तियाँ (वज्रपात) आएँ, मेरा मस्तक हमेशा विनम्रता से झुका रहे ।


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पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs):


प्रश्न 1: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म बंगाल के किस गाँव में हुआ था?

(A) गढ़ाकोला

(B) महिषादल

(C) उन्नाव

(D) इलाहाबाद

सही उत्तर: (B) महिषादल


प्रश्न 2: कवि निराला के बचपन का क्या नाम था?

(A) सूर्य कुमार

(B) राम कुमार

(C) चंद्र कुमार

(D) नवल कुमार

सही उत्तर: (A) सूर्य कुमार


प्रश्न 3: इनमें से कौन-सा उपन्यास सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी द्वारा लिखा गया है?

(A) परिमल

(B) कुकुरमुत्ता

(C) बिल्लेसुर बकरिहा

(D) राम की शक्ति पूजा

सही उत्तर: (C) बिल्लेसुर बकरिहा


प्रश्न 4: 'सरोज स्मृति' कविता में कवि को अपनी दिवंगत बेटी को देखकर किसकी याद आती है?

(A) अपनी माँ की

(B) अपनी स्वर्गीया पत्नी की

(C) अपनी बहन की

(D) अपनी नानी की

सही उत्तर: (B) अपनी स्वर्गीया पत्नी की


प्रश्न 5: निराला जी को किस प्रकार के छंद का प्रवर्तक माना जाता है?

(A) मात्रिक छंद

(B) वर्णिक छंद

(C) सवैया

(D) मुक्त छंद

सही उत्तर: (D) मुक्त छंद

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