CBSE Board class 12 Hindi antra ch-4

यह पाठ प्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह के साहित्यिक व्यक्तित्व और उनकी विशिष्ट कविताओं का एक संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करता है। इसमें उनकी रचनाओं में दिखने वाली सहज भाषा, बिंब विधान और मानवीय संवेदनाओं पर गहराई से प्रकाश डाला गया है। मुख्य रूप से, कविता 'बनारस' के माध्यम से इस प्राचीन शहर की आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक वैभव और वहाँ के जीवन की धीमी लय का सजीव वर्णन किया गया है। साथ ही, 'दिशा' कविता एक बच्चे के माध्यम से बाल-सुलभ नजरिए और यथार्थ के बोध को रेखांकित करती है। यह संकलन कवि की लेखन शैली और उनकी महत्वपूर्ण साहित्यिक उपलब्धियों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह स्पष्ट करता है कि कैसे उनकी कविताएँ अतीत और आधुनिकता के बीच एक गहरा संबंध स्थापित करती हैं।

यहाँ आपके द्वारा दिए गए पाठ (केदारनाथ सिंह द्वारा रचित 'बनारस' और 'दिशा' कविताएँ) के आधार पर सभी प्रश्नों के उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न दिए गए हैं:


कविता 'बनारस' के प्रश्न-उत्तर


1. बनारस में वसंत का आगमन कैसे होता है और उसका क्या प्रभाव इस शहर पर पड़ता है?

उत्तर: बनारस में वसंत का आगमन अचानक होता है । लहरतारा या मडुआडीह की तरफ से धूल का एक बवंडर उठता है, जिससे इस महान और पुराने शहर की 'जीभ किरकिराने' लगती है । इसके प्रभाव से शहर में जो है वह सुगबुगाने लगता है, बंदरों की आँखों में नमी आ जाती है और भिखारियों के खाली कटोरों में एक अजीब सी चमक भर उठती है ।


2. 'खाली कटोरों में वसंत का उतरना' से क्या आशय है?

उत्तर: 'खाली कटोरों में वसंत का उतरना' का आशय भिखारियों के कटोरों का भिक्षा से भर जाना है । वसंत के आगमन पर जब घाटों पर लोगों और दर्शनार्थियों की भीड़ बढ़ती है, तो भिखारियों को भिक्षा मिलने लगती है। उनके सूने कटोरों में जो चमक आती है, कवि ने उसे ही 'वसंत का उतरना' कहा है ।


3. बनारस की पूर्णता और रिक्तता को कवि ने किस प्रकार दिखाया है?

उत्तर: कवि ने बनारस की पूर्णता को वसंत के आगमन, घाटों पर भीड़, और लोगों की चहल-पहल से दिखाया है जहाँ शहर 'खुलता है' और 'भरता है' । वहीं रिक्तता को श्मशान घाट की ओर जाते 'अनंत शव' के रूप में दिखाया गया है, जहाँ हर रोज़ कंधे पर शव अंधेरी गली से चमकती हुई गंगा की तरफ ले जाए जाते हैं, जिससे यह शहर 'खाली होता है' ।


4. बनारस में धीरे-धीरे क्या-क्या होता है। 'धीरे-धीरे' से कवि इस शहर के बारे में क्या कहना चाहता है?

उत्तर: बनारस में धीरे-धीरे धूल उड़ती है, लोग धीरे-धीरे चलते हैं, घंटे धीरे-धीरे बजते हैं और शाम भी धीरे-धीरे होती है । कवि 'धीरे-धीरे' के माध्यम से इस शहर की प्राचीनता, शांति, और स्थिरता को दर्शाना चाहता है । यहाँ हर कार्य अपनी एक विशेष 'रौ' (गति) में होता है जो शहर के चरित्र और उसकी सुदृढ़ सामूहिक लय को प्रदर्शित करता है ।


5. धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय में क्या-क्या बँधा है?

उत्तर: धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय ने समूचे शहर को इस तरह दृढ़ता से बाँध रखा है कि यहाँ कुछ भी गिरता या हिलता नहीं है । जो चीज़ जहाँ थी, वह वहीं रखी है; जैसे गंगा वहीं है, नाव वहीं बँधी है और तुलसीदास की खड़ाऊँ सैकड़ों वर्षों से उसी स्थान पर रखी हुई है ।


6. 'सई-साँझ' में घुसने पर बनारस की किन-किन विशेषताओं का पता चलता है?

उत्तर: 'सई-साँझ' (शाम के समय) बिना किसी सूचना के बनारस में घुसने पर आरती के आलोक (प्रकाश) में इसकी अद्भुत बनावट का पता चलता है । यह शहर आधा जल में, आधा मंत्र में, आधा फूल में, आधा शव में, आधा नींद में और आधा शंख में दिखाई देता है । यह एक साथ कई रहस्यों और मिथकों को समेटे हुए प्रतीत होता है।


7. बनारस शहर के लिए जो मानवीय क्रियाएँ इस कविता में आई हैं, उनका व्यंजनार्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कविता में 'शहर की जीभ किरकिराना', 'सुगबुगाना', और 'एक टाँग पर खड़ा होना' जैसी मानवीय क्रियाओं का प्रयोग हुआ है । इनका व्यंजनार्थ यह है कि कवि बनारस को केवल एक निर्जीव स्थान नहीं, बल्कि एक जीवंत, जागृत और तपस्या में लीन मानवीय व्यक्तित्व (तपस्वी) के रूप में देखता है ।


8. शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए—

(क) 'यह धीरे-धीरे होना ----------- समूचे शहर को'

उत्तर: यहाँ 'धीरे-धीरे' शब्द की पुनरावृत्ति (पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार) से कविता में एक विशेष लय और प्रवाह उत्पन्न हुआ है । यह शिल्प बनारस शहर की ठहराव, शांति और सदियों से चली आ रही एकरसता को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त करता है ।


(ख) 'अगर ध्यान से देखो ----------- और आधा नहीं है'

उत्तर: इस काव्यांश में विरोधाभास और दार्शनिकता का सुंदर प्रयोग है। 'आधा है और आधा नहीं है' के माध्यम से कवि ने बनारस की भौतिकता और आध्यात्मिकता, जीवन और मृत्यु दोनों के सह-अस्तित्व को बहुत ही रहस्यमयी और गहरे अर्थों में प्रस्तुत किया है ।


(ग) 'अपनी एक टाँग पर ----------- बेखबर'

उत्तर: यहाँ बनारस शहर का मानवीकरण किया गया है । शहर को एक ऐसे योगी या तपस्वी के रूप में चित्रित किया गया है जो सदियों से गंगा जल में एक टाँग पर खड़े होकर किसी अलक्षित सूर्य को अर्घ्य दे रहा है और दूसरी टाँग (दुनियावी बातों) से पूरी तरह बेखबर है । यह काशी की आध्यात्मिक भव्यता को दर्शाता है ।


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कविता 'दिशा' के प्रश्न-उत्तर


1. बच्चे का उधर-उधर कहना क्या प्रकट करता है?

उत्तर: बच्चे का 'उधर-उधर' कहना बाल-मनोविज्ञान को प्रकट करता है । हर व्यक्ति का अपना एक यथार्थ होता है और बच्चे दुनिया को अपने ही मासूम ढंग से देखते हैं । बच्चे के लिए हिमालय उधर ही है, जिधर उसकी पतंग भागी जा रही है ।


2. 'मैं स्वीकार करूँ मैंने पहली बार जाना हिमालय किधर है'—प्रस्तुत पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि कवि ने पहली बार बच्चे के दृष्टिकोण से दुनिया को देखा । कवि को यह अहसास हुआ कि बच्चों का अपना एक अलग यथार्थ और देखने का नज़रिया होता है । उसने सहर्ष स्वीकार किया कि बच्चे की बाल-सुलभ दृष्टि से उसे जीवन की एक नई 'दिशा' का ज्ञान हुआ ।

पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)


प्रश्न 1. केदारनाथ सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के किस गाँव में हुआ था?

A) मडुआडीह

B) लहरतारा

C) चकिया

D) शिवपुर

सही उत्तर: C) चकिया


प्रश्न 2. 'बनारस' कविता के अनुसार शहर में धूल का बवंडर किस तरफ से उठता है?

A) दशाश्वमेध घाट की तरफ से

B) लहरतारा या मडुआडीह की तरफ से

C) गंगा नदी की तरफ से

D) काशी विश्वनाथ की तरफ से

सही उत्तर: B) लहरतारा या मडुआडीह की तरफ से


प्रश्न 3. सैकड़ों वर्षों से बनारस में उसी स्थान पर किसकी खड़ाऊँ रखी हुई है?

A) कबीरदास की

B) तुलसीदास की

C) रैदास की

D) सूरदास की

सही उत्तर: B) तुलसीदास की


प्रश्न 4. 'दिशा' कविता में बच्चा स्कूल के बाहर क्या कर रहा था?

A) खेल रहा था

B) हिमालय की ओर देख रहा था

C) पतंग उड़ा रहा था

D) दौड़ रहा था

सही उत्तर: C) पतंग उड़ा रहा था


प्रश्न 5. बनारस शहर गंगा के जल में किसकी तरह एक टाँग पर खड़ा है?

A) तपस्वी की तरह सूर्य को अर्घ्य देते हुए

B) नाविक की तरह

C) भिखारी की तरह

D) मंदिर के स्तंभ की तरह

सही उत्तर: A) तपस्वी की तरह सूर्य को अर्घ्य देते हुए

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