CBSE Board class 12 Hindi antra ch-5

यह पाठ प्रसिद्ध कवि रघुवीर सहाय के साहित्यिक योगदान और उनकी दो प्रमुख कविताओं, 'वसंत आया' तथा 'तोड़ो', की व्याख्या प्रस्तुत करता है। कवि अपनी पत्रकारिता की दृष्टि का उपयोग करते हुए अखबार की खबरों के पीछे दबी मानवीय पीड़ा को कविता के माध्यम से व्यक्त करते हैं। 'वसंत आया' आज के मनुष्य के प्रकृति से टूटते जुड़ाव पर एक तीखा व्यंग्य है, जहाँ ऋतु परिवर्तन का अनुभव अब प्राकृतिक दृश्यों के बजाय कैलेंडर और दफ्तर की छुट्टियों से होता है। दूसरी ओर, 'तोड़ो' एक आह्वानपरक कविता है जो सृजन की बाधाओं को दूर करने के लिए बंजर जमीन और मन की ऊब दोनों को तोड़ने की प्रेरणा देती है। लेखक ने अपनी रचनाओं में सरल भाषा, सटीक बिंबों और प्रतीकों के जरिए आधुनिक जीवन की विडंबनाओं को सफलतापूर्वक चित्रित किया है। अंत में, यह स्रोत विद्यार्थियों के लिए अभ्यास प्रश्न और कठिन शब्दों के अर्थ भी प्रदान करता है ताकि विषय की समझ गहरी हो सके।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के उत्तर


'वसंत आया' कविता पर आधारित प्रश्न:


1. वसंत आगमन की सूचना कवि को कैसे मिली?

कवि को वसंत आगमन की सूचना कैलेंडर देखकर और दफ़्तर में छुट्टी होने से मिली । कविता पढ़ते रहने से उसे यह भी पता था कि वसंत ऋतु में ढाक के जंगल दहकेंगे और भँवरे-कोयल मस्त होकर अपना कार्य करेंगे, लेकिन उसने वास्तव में प्रकृति को देखकर वसंत का अनुभव नहीं किया ।


2. 'कोई छह बजे सुबह... फिरकी सी आई, चली गई' - पंक्ति में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।

इस पंक्ति का भाव यह है कि वसंत ऋतु की सुबह की हवा ताज़ा और हल्की गर्म होती है, ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह अभी-अभी गरम पानी से नहाकर आई हो । यह हवा एक 'फिरकी' (गोल घूमने वाले खिलौने) की तरह चंचलता से गोल-गोल घूमती हुई आती है और कुछ ही पल में चली जाती है ।


3. अलंकार बताइए:

(क) बड़े-बड़े पियराए पत्ते: इसमें 'बड़े-बड़े' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार और 'पियराए पत्ते' में 'प' वर्ण की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है ।

(ख) कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो: इसमें हवा का मानवीकरण किया गया है इसलिए मानवीकरण अलंकार है, और 'जैसे' वाचक शब्द के प्रयोग के कारण उत्प्रेक्षा अलंकार है ।

(ग) खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई, चली गई: यहाँ हवा की तुलना 'फिरकी' से की गई है इसलिए उपमा अलंकार ('फिरकी-सी') और मानवीकरण अलंकार है ।

(घ) कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल: 'दहर-दहर' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार और 'दहर-दहर दहकेंगे' में 'द' वर्ण की लगातार आवृत्ति होने से अनुप्रास अलंकार है ।


4. किन पंक्तियों से ज्ञात होता है कि आज मनुष्य प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य की अनुभूति से वंचित है?

निम्नलिखित पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है:

"और यह कैलेंडर से मालूम था / अमुक दिन अमुक बार मदनमहीने की होवेगी पंचमी / दफ़्तर में छुट्टी थी - यह था प्रमाण" और "यही नहीं जाना था कि आज के नगण्य दिन जानूँगा / जैसे मैंने जाना, कि वसंत आया।"


5. 'प्रकृति मनुष्य की सहचरी है' इस विषय पर विचार व्यक्त करते हुए आज के संदर्भ में इस कथन की वास्तविकता पर प्रकाश डालिए।

कवि रघुवीर सहाय के अनुसार, आज के आधुनिक मनुष्य का प्रकृति से रिश्ता टूट गया है । पहले ऋतुओं का परिवर्तन (पत्ते झड़ना, हवा बहना, ढाक के जंगलों का दहकना) मनुष्य के जीवन का स्वाभाविक हिस्सा होता था, लेकिन आज की आधुनिक जीवन शैली के कारण मनुष्य प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य से निरपेक्ष हो गया है और उसकी अनुभूति से पूरी तरह वंचित हो गया है ।


6. 'वसंत आया' कविता में कवि की चिंता क्या है?

कवि की मुख्य चिंता यह है कि आज के मनुष्य का प्रकृति से नाता पूरी तरह टूट चुका है । मनुष्य को अब ऋतुओं में होने वाले स्वाभाविक परिवर्तनों का एहसास नहीं होता, बल्कि उसे कैलेंडर या दफ़्तर की छुट्टियों के माध्यम से ऋतु परिवर्तन (जैसे वसंत का आना) का ज्ञान होता है ।


'तोड़ो' कविता पर आधारित प्रश्न:


1. 'पत्थर' और 'चट्टान' शब्द किसके प्रतीक हैं?

कविता में 'पत्थर' और 'चट्टान' धरती पर मौजूद ऊसर और बंजर भूमि के प्रतीक हैं । इसके साथ ही, ये मानव मन में व्याप्त ऊब, खीझ और सृजन में बाधक झूठे बंधनों के भी प्रतीक हैं ।


2. भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए: "मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को / हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीझ को? / गोड़ो गोड़ो गोड़ो"

इन पंक्तियों का भाव यह है कि नवसृजन के लिए जिस प्रकार बंजर मिट्टी को गोड़कर (खुरपच कर) उपजाऊ बनाया जाता है ताकि वह बीज को पोषित कर सके, उसी प्रकार मनुष्य को अपने मन की ऊब और खीझ को बाहर निकाल देना चाहिए । मन की यह खीझ सृजन में बाधक होती है, अतः नवसृजन के लिए मन का उर्वर होना अत्यंत आवश्यक है ।


3. कविता का आरंभ 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से हुआ है और अंत 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' से। विचार कीजिए कि कवि ने ऐसा क्यों किया?

'तोड़ो' ध्वंस या बाधाओं को नष्ट करने का प्रतीक है और 'गोड़ो' नवसृजन या निर्माण का । सृजन के लिए सबसे पहले बंजर भूमि, चट्टानों और मन की ऊब रूपी बाधाओं को तोड़ना ज़रूरी है । बाधाएँ दूर होने के बाद ही सृजन के लिए मिट्टी को तैयार करने की प्रक्रिया ('गोड़ो') शुरू होती है, इसलिए कवि पहले विध्वंस (तोड़ने) और फिर सृजन (गोड़ने) का आह्वान करता है ।


4. ये झूठे बंधन टूटें तो धरती को हम जानें— यहाँ पर झूठे बंधनों और धरती को जानने से क्या अभिप्राय है?

यहाँ 'झूठे बंधनों' का अभिप्राय ज़मीन के बंजरपन और मन में छाई ऊब तथा खीझ से है । 'धरती को जानने' का अर्थ धरती की वास्तविक उत्पादन और सृजन क्षमता को पहचानना है ।


5. 'आधे-आधे गाने' के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

'आधे-आधे गाने' के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि जब तक मनुष्य के मन में ऊब और खीझ छाई रहती है, तब तक कोई भी रचनात्मक कार्य पूर्ण नहीं हो सकता । मन की बाधाएँ दूर होने पर ही पूर्णता के साथ गीत गाए जा सकते हैं या सृजन किया जा सकता है।

पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर और विकल्पों के साथ)


प्रश्न 1: 'वसंत आया' और 'तोड़ो' कविताओं के रचयिता कौन हैं?

(A) अज्ञेय

(B) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

(C) रघुवीर सहाय

(D) सुमित्रानंदन पंत

उत्तर: (C) रघुवीर सहाय


प्रश्न 2: कवि को वसंत के आगमन का सबसे पुख्ता प्रमाण कहाँ से मिला?

(A) कोयल के कूकने से

(B) ढाक के जंगलों के दहकने से

(C) हवा के चलने से

(D) कैलेंडर और दफ़्तर की छुट्टी से

उत्तर: (D) कैलेंडर और दफ़्तर की छुट्टी से


प्रश्न 3: 'तोड़ो' कविता में कवि नवसृजन के लिए मन की किस भावना को दूर करने (तोड़ने) का आह्वान करता है?

(A) दया और करुणा को

(B) ऊब और खीझ को

(C) प्रेम और उत्साह को

(D) घृणा और ईर्ष्या को

उत्तर: (B) ऊब और खीझ को


प्रश्न 4: शब्दार्थ के अनुसार 'मदनमहीना' का क्या अर्थ है?

(A) पतझड़ का महीना

(B) कामदेव का महीना (वसंत)

(C) सर्दी का महीना

(D) वर्षा ऋतु

उत्तर: (B) कामदेव का महीना (वसंत)


प्रश्न 5: 'तोड़ो' कविता में सृजन की आरंभिक लेकिन अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया किसे बताया गया है?

(A) चट्टानों पर बीज बोने को

(B) परती भूमि को खेत में बदलने को

(C) आधे-आधे गाने गाने को

(D) जंगलों को काटने को

उत्तर: (B) परती भूमि को खेत में बदलने को


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