CBSE Board class 12 Hindi antra ch-7
यह पाठ प्रसिद्ध कवि मलिक मोहम्मद जायसी की उत्कृष्ट रचना पद्मावत के 'बारहमासा' खंड पर आधारित है। इसमें जायसी की अवधी भाषा और दोहा-चौपाई शैली की विशेषताओं को रेखांकित किया गया है, जो लोक संस्कृति और गहन अनुभवों से ओत-प्रोत है। मुख्य रूप से यहाँ नायिका नागमती के विरह का हृदयस्पर्शी चित्रण है, जिसमें वह अपने पति के वियोग में तड़प रही है। लेखक ने दिखाया है कि कैसे अगहन, माघ और फागुन जैसे विभिन्न महीनों की ऋतुएँ और प्राकृतिक बदलाव विरह की अग्नि को और अधिक बढ़ा देते हैं। नागमती पक्षियों के माध्यम से अपना संदेश प्रियतम तक पहुँचाने की कोशिश करती है और अपनी शारीरिक व मानसिक व्यथा को प्रकृति के साथ जोड़कर व्यक्त करती है। अंततः, यह संकलन जायसी की काव्यात्मक परिपक्वता और मानवीय भावनाओं के प्रति उनकी गहरी समझ को प्रस्तुत करता है।
पाठ्यपुस्तक (प्रश्न-अभ्यास) के प्रश्नों के उत्तर:
1. अगहन मास की विशेषता बताते हुए विरहिणी (नागमती) की व्यथा-कथा का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।
अगहन मास में दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं । नागमती के लिए विरह के कारण ये लंबी रातें काटना अत्यंत कठिन हो गया है । जहाँ सभी लोग सर्दी से बचने के लिए गर्म कपड़ों की व्यवस्था कर रहे हैं, वहीं नागमती अपने पति (रत्नसेन) के बिना वियोग की अग्नि में जल रही है । उसे अपनी जवानी और सुंदरता भस्म होती हुई प्रतीत होती है । वह भँवरे और कौए के माध्यम से अपने प्रिय तक संदेश पहुँचाना चाहती है कि उसकी पत्नी विरह की आग में जलकर मर गई है और उसी के धुएँ से उनका रंग काला हो गया है ।
2. 'जीयत खाइ मुएँ नहिं छाँडा' पंक्ति के संदर्भ में नायिका की विरह-दशा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
यह पंक्ति पूस (पौष) महीने के वर्णन से ली गई है जिसमें कड़ाके की ठंड पड़ती है और शरीर काँपने लगता है । नागमती कहती है कि उसका विरह एक सचान (बाज़ पक्षी) के समान हो गया है जो लगातार उसके शरीर पर मँडरा रहा है और उसे जीवित ही खा रहा है । विरह रूपी यह बाज़ उसे मरने के बाद भी नहीं छोड़ेगा । प्रियतम के बिना वह एकाकी है और यह विरह की पीड़ा उसके शरीर को भीतर ही भीतर नोंच रही है ।
3. माघ महीने में विरहिणी को क्या अनुभूति होती है?
माघ महीने में अत्यधिक पाला पड़ने लगता है और ठंड इतनी बढ़ जाती है कि रुई के वस्त्र भी शरीर को गर्म नहीं कर पाते । नागमती को अनुभूति होती है कि इस भयंकर शीत से केवल उसके पति का सान्निध्य ही उसे बचा सकता है । विरह के कारण उसकी आँखों से आँसू महावट (माघ की वर्षा) की तरह बह रहे हैं और वे आँसू ठंड के कारण ओलों के समान गिर रहे हैं । विरह की हवा उसे झकझोर रही है और वह सूखकर धागे के समान अत्यंत क्षीण हो गई है ।
4. वृक्षों से पत्तियाँ तथा वनों से ढाँखें किस माह में गिरते हैं? इससे विरहिणी का क्या संबंध है?
वृक्षों से पत्तियाँ और वनों से ढाँखें फागुन (फाल्गुन) माह में गिरते हैं । इस महीने में चलने वाली हवाओं के झकोरों से पत्ते पीले होकर झड़ने लगते हैं । विरहिणी नागमती का इससे गहरा संबंध है क्योंकि प्रियतम के वियोग में उसका शरीर भी वृक्ष के उन सूखे पत्तों के समान पीला और प्राणहीन हो गया है । जिस प्रकार बसंत के उल्लास में प्रकृति पुराने पत्ते त्यागती है, उसी प्रकार नागमती का शरीर भी विरह-ताप में सूखकर जीर्ण-शीर्ण हो चुका है ।
5. निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
(क) पिय सौं कहेहु सँदेसड़ा, ऐ भँवरा ऐ काग। सो धनि बिरहैं जरि मुई, तेहिक धुआँ हम लाग॥
व्याख्या: नागमती भँवरे और कौए को संबोधित करते हुए कहती है कि हे भँवरे और हे कौए! तुम मेरे प्रियतम के पास जाकर मेरा यह संदेश देना कि तुम्हारी पत्नी वियोग की आग में जलकर मर गई है और उसी चिता का धुआँ लगने के कारण हम (भँवरा और कौआ) काले हो गए हैं ।
(ख) रकत ढरा माँसू गरा, हाड भए सब संख। धनि सारस होइ ररि मुई, आइ समेटहु पंख॥
व्याख्या: नागमती कहती है कि विरह की पीड़ा में मेरा सारा रक्त बह गया है (सूख गया है), माँस गल गया है और हड्डियाँ सूखकर शंख के समान खोखली हो गई हैं । तुम्हारी यह पत्नी सारस पक्षी के समान रट-रट कर (तुम्हें पुकारते हुए) मर गई है, अब तुम आकर कम-से-कम इसके पंख (अवशेष) तो समेट लो ।
(ग) तुम्ह बिनु कंता धनि हरुई, तन तिनुवर भा डोल। तेहि पर बिरह जराइ कै, चहै उड़ावा झोल॥
व्याख्या: नागमती अपने पति से कहती है कि हे स्वामी! तुम्हारे बिना तुम्हारी पत्नी अत्यंत हल्की हो गई है और उसका शरीर तिनके के समान हिलने और काँपने लगा है । उस पर यह विरह की अग्नि उसे जलाकर राख कर देना चाहती है और उस राख को भी हवा में उड़ा देना चाहती है ।
(घ) यह तन जारौं छार कै, कहौं कि पवन उड़ाउ। मकु तेहि मारग होइ परौं, कंत धरैं जहँ पाउ॥
व्याख्या: विरह से व्याकुल नागमती कहती है कि मैं अपने इस शरीर को जलाकर राख (छार) कर दूँ और पवन (हवा) से प्रार्थना करूँ कि वह इस राख को उड़ाकर उस मार्ग पर बिछा दे, जहाँ से मेरे प्रियतम अपने कदम रखते हुए गुजरें। कम-से-कम इसी बहाने मुझे अपने प्रिय के चरणों का स्पर्श प्राप्त हो जाएगा ।
6. प्रथम दो छंदों में से अलंकार छाँटकर लिखिए और उनसे उत्पन्न काव्य-सौंदर्य पर टिप्पणी कीजिए।
प्रथम दो छंद (अगहन और पूस मास के वर्णन) में निम्नलिखित अलंकार प्रमुख हैं:
पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार: 'घर घर', 'फिरै फिरै', 'सुलगि सुलगि', 'कँपि कँपि' शब्दों में एक ही शब्द की आवृत्ति होने से यह अलंकार है ।
विरोधाभास अलंकार: 'सियरी अगिनि' (ठंडी अग्नि) - यहाँ अग्नि को ठंडा बताया गया है जो वियोग की विचित्र स्थिति का वर्णन करता है ।
अतिशयोक्ति अलंकार: 'रकत ढरा माँसू गरा, हाड भए सब संख' में विरह की पीड़ा का अत्यंत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है ।
मानवीकरण / अनुप्रास: काग और भँवरे को संदेशवाहक बनाना प्रकृत्ति का मानवीकरण है । 'भँवरा ऐ काग' में अनुप्रास की भी छटा है।
काव्य-सौंदर्य: ठेठ अवधी भाषा का प्रयोग किया गया है। विप्रलंभ (वियोग) शृंगार रस का अत्यंत मार्मिक और हृदयस्पर्शी चित्रण है । बारहमासा शैली के कारण प्रकृति के उद्दीपन रूप का सुंदर प्रयोग हुआ है जो नागमती की पीड़ा को और अधिक सजीव बना देता है ।
पाठ पर आधारित पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) उत्तर सहित:
प्रश्न 1: मलिक मुहम्मद जायसी हिंदी साहित्य की किस काव्यधारा के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं?
(A) रामभक्ति शाखा
(B) ज्ञानाश्रयी शाखा
(C) सूफी प्रेमाख्यानक (प्रेमामार्गी) शाखा
(D) कृष्णभक्ति शाखा
उत्तर: (C) सूफी प्रेमाख्यानक (प्रेमामार्गी) शाखा
प्रश्न 2: अगहन मास के वर्णन में नागमती अपना संदेश पति तक पहुँचाने के लिए किनसे निवेदन करती है?
(A) सखी और दासी से
(B) तोता और मैना से
(C) भँवरा और काग (कौए) से
(D) कोयल और चकवी से
उत्तर: (C) भँवरा और काग (कौए) से
प्रश्न 3: 'पूष जाड़ थरथर तन काँपा' पंक्ति के अनुसार नागमती के शरीर को कौन विरह रूपी पक्षी नोंच कर खा रहा है?
(A) सचान (बाज़)
(B) गिद्ध
(C) चील
(D) गरुड़
उत्तर: (A) सचान (बाज़)
प्रश्न 4: 'पद्मावत' किस प्रकार का काव्य है जिसमें जायसी ने लौकिक कथा के माध्यम से अलौकिक सत्ता का आभास कराया है?
(A) मुक्तक काव्य
(B) प्रबंध काव्य
(C) खंड काव्य
(D) गीति काव्य
उत्तर: (B) प्रबंध काव्य
प्रश्न 5: फागुन मास में चलने वाले पवन के झकोरों के कारण नागमती का शरीर किसके समान हो गया है?
(A) सूखे और पीले पत्ते के समान
(B) शंख के समान
(C) राख के समान
(D) रुई के समान
उत्तर: (A) सूखे और पीले पत्ते के समान

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