CBSE Board class 12 Hindi antra ch-8

यह पाठ प्रसिद्ध कवि विद्यापति के साहित्यिक योगदान और उनकी काव्य कला का परिचय देता है। उन्हें आदिकाल और भक्तिकाल का संधि-कवि माना जाता है, जिनकी रचनाओं में दरबारी संस्कृति और लोक-संस्कृति का अनूठा संगम मिलता है। मुख्य रूप से, यह स्रोत उनके पदों में निहित विरह, मानवीय प्रेम और भक्ति की गहन अनुभूतियों की व्याख्या करता है। इसमें नायक-नायिका के माध्यम से अलगाव के दुख, शाश्वत प्रेम और प्रकृति के मनोरम चित्रण को रेखांकित किया गया है। कवि की पदावली मिथिला की लोक-संस्कृति में इतनी गहराई से रची-बसी है कि उनकी पंक्तियाँ आज वहाँ के मुहावरे बन चुकी हैं। अंततः, यह सामग्री विद्यापति की कल्पनाशीलता और उनकी भाषा के सौंदर्य को उजागर करती है।

यहाँ आपके द्वारा उपलब्ध कराए गए स्रोतों के आधार पर पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) दिए गए हैं:


पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर


1. प्रियतमा के दुख के क्या कारण हैं?

उत्तर: प्रियतमा (विरहिणी नायिका) के दुख का मुख्य कारण उसके प्रियतम का उसे छोड़कर चले जाना है । उसके प्रियतम गोकुल छोड़कर मधुपुर (मथुरा) में जाकर बस गए हैं और जाते समय वे नायिका का हृदय भी अपने साथ ले गए हैं । सावन के महीने में बिना प्रियतम के अकेले भवन में रहना उसके लिए अत्यंत कष्टदायक और असहनीय हो गया है ।


2. कवि 'नयन न तिरपित भेल' के माध्यम से विरहिणी नायिका की किस मनोदशा को व्यक्त करना चाहता है?

उत्तर: कवि इस पंक्ति के माध्यम से विरहिणी नायिका के सच्चे और अगाध प्रेम की अतृप्त लालसा को व्यक्त करना चाहता है । नायिका कहती है कि उसने जन्म-जन्मांतर तक अपने प्रियतम के रूप को निहारा है, परंतु फिर भी उसकी आँखें उन्हें देखने के लिए तृप्त नहीं हुई हैं । यह प्रेम की उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ मिलन के बाद भी प्यास कभी शांत नहीं होती।


3. नायिका के प्राण तृप्त न हो पाने का कारण अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: नायिका के प्राण इसलिए तृप्त नहीं हो पाते क्योंकि उसका प्रेम हर पल नया (नूतन) और ताज़ा बना रहता है । वह प्रियतम के रूप को हमेशा देखती रही है और उनकी मीठी वाणी सुनती रही है, फिर भी उसे ऐसा प्रतीत होता है मानो मिलन का सुख अभी भी अधूरा है । प्रेम का अनुभव ज्यों-ज्यों बढ़ता है, उसे और अधिक पाने की इच्छा प्रबल होती जाती है।


4. 'सेह पिरित अनुराग बखानिय तिल-तिल नूतन होए' से लेखक का क्या आशय है?

उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि सच्चे प्रेम (अनुराग) का पूरी तरह से वर्णन या बखान नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह हर पल (तिल-तिल) नया होता रहता है । सच्चा प्रेम समय के साथ कभी पुराना नहीं पड़ता, बल्कि उसकी गहराई और आकर्षण हर क्षण नवीन प्रतीत होते हैं ।


5. कोयल और भौरों के कलरव का नायिका पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: कोयल की मधुर आवाज़ और भौरों की गुंजन (ध्वनि) सुनकर नायिका अपने कानों को हाथों से बंद कर लेती है । विरह की अवस्था में प्रकृति के ये सुंदर दृश्य और मनमोहक ध्वनियाँ उसे आनंद देने के बजाय उसके दुख और प्रियतम की याद को और अधिक बढ़ा देते हैं ।


6. कातर दृष्टि से चारों तरफ प्रियतम को ढूँढने की मनोदशा को कवि ने किन शब्दों में व्यक्त किया है?

उत्तर: विरह में तड़पती नायिका द्वारा प्रियतम को खोजने की इस दयनीय मनोदशा को कवि विद्यापति ने इन शब्दों में व्यक्त किया है: "कातर दिठि करि, चौदिस हेरि-हेरि नयन गरए जल-धारा" । इसका अर्थ है कि वह दुखी दृष्टि से चारों दिशाओं में अपने प्रिय को देखती है और उसकी आँखों से लगातार आँसुओं की धारा बह रही है ।


7. निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए— तिरपित, छन, बिदगध, निहारल, पिरित, साओन, अपजस, छिन, तोहारा, कातिक

उत्तर:

तिरपित - तृप्ति / तृप्त

छन - क्षण

बिदगध - विदग्ध

निहारल - दृष्ट (निहारना/देखना)

पिरित - प्रीति

साओन - श्रावण

अपजस - अपयश

छिन - क्षीण

तोहारा - तुम्हारा (तव)

कातिक - कार्तिक


8. निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए—

(क) एक्सर भवन पिया बिनु रे मोहि रहलो न जाए। सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।।

आशय: विरहिणी नायिका अपनी सखी से कहती है कि प्रियतम के बिना इस घर में अब मुझसे अकेले नहीं रहा जाता । हे सखी! इस संसार में दूसरों के भयंकर और दारुण दुख पर कोई भी व्यक्ति आसानी से विश्वास नहीं करता ।


(ख) जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।। सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।।

आशय: नायिका अपने प्रेम की गहराई बताते हुए कहती है कि मैंने जन्म-जन्मांतर (संपूर्ण जीवन) तक अपने प्रियतम के मनमोहक रूप को देखा है, फिर भी मेरी आँखें तृप्त (संतुष्ट) नहीं हुई हैं । मैंने उनकी मीठी बोली अपने कानों से सुनी है, पर ऐसा लगता है कि वह अभी तक मेरे कानों (श्रुति पथ) को स्पर्श ही नहीं कर पाई है अर्थात् उसे और सुनने की लालसा बाकी है ।


(ग) कुसुमित कानन हेरि कमलमुखि, मूदि रहए दु नयान। कोकिल-कलरव, मधुकर-धुनि सुनि, कर देइ झाँपि कान।।

आशय: फूलों से खिले हुए सुंदर वन (कानन) को देखकर कमलमुखी नायिका अपनी दोनों आँखें बंद कर लेती है । कोयल का मधुर कलरव और भौरों की गुंजन सुनकर वह अपने कानों को हाथों से ढँक लेती है । आशय यह है कि प्रियतम के वियोग में प्रकृति का सौंदर्य उसे सुख देने के बजाय कष्ट पहुँचाता है।


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पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)


प्रश्न 1: विद्यापति का जन्म बिहार के किस गाँव में हुआ था?

(क) मधुपुर

(ख) बिस्फी

(ग) दरभंगा

(घ) गोकुल

उत्तर: (ख) बिस्फी


प्रश्न 2: विद्यापति को किन कालों के बीच का 'संधिकवि' कहा जाता है?

(क) भक्तिकाल और रीतिकाल

(ख) आदिकाल और रीतिकाल

(ग) आदिकाल और भक्तिकाल

(घ) आधुनिक काल और भक्तिकाल

उत्तर: (ग) आदिकाल और भक्तिकाल


प्रश्न 3: विद्यापति किस राजा के अभिन्न मित्र और राजकवि थे?

(क) राजा जयसिंह

(ख) राजा मानसिंह

(ग) राजा शिवसिंह

(घ) राजा रामसिंह

उत्तर: (ग) राजा शिवसिंह


प्रश्न 4: कवि के अनुसार, नायिका के प्रियतम (कृष्ण) गोकुल छोड़कर कहाँ जाकर बस गए हैं?

(क) मधुपुर

(ख) अयोध्या

(ग) मिथिला

(घ) वृंदावन

उत्तर: (क) मधुपुर


प्रश्न 5: विद्यापति ने अपनी रचनाएँ मुख्य रूप से किन तीन भाषाओं में की हैं?

(क) ब्रजभाषा, अवधी और खड़ी बोली

(ख) संस्कृत, अवहट्ठ (अपभ्रंश) और मैथिली

(ग) संस्कृत, पालि और प्राकृत

(घ) मैथिली, भोजपुरी और मगही

उत्तर: (ख) संस्कृत, अवहट्ठ (अपभ्रंश) और मैथिली

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