CBSE Board class 12 Hindi antra ch-9

यह पाठ प्रसिद्ध रीतिकाल के कवि घनानंद के जीवन, उनके साहित्य और उनकी काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डालता है। कवि का प्रेम सुजान नामक महिला से था, और उनके वियोग ने ही उनके काव्य में पीड़ा और भक्ति का गहरा समावेश किया। उनकी रचनाएँ मुख्य रूप से ब्रजभाषा में हैं, जो अपनी कोमलता, माधुर्य और कलात्मक बारीकियों के लिए जानी जाती हैं। यहाँ प्रस्तुत कवित्त घनानंद की विरह वेदना और अपनी प्रेमिका के दर्शन की व्याकुलता को अत्यंत भावुकता के साथ चित्रित करते हैं। अंत में, छात्रों के अभ्यास के लिए कुछ प्रश्न और शब्दार्थ भी दिए गए हैं ताकि वे काव्य के गूढ़ अर्थों को बेहतर ढंग से समझ सकें। यह स्रोत एक शैक्षणिक सामग्री है जो हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण कवि की रचनात्मक यात्रा का परिचय कराती है।

दिए गए स्रोतों के आधार पर, आपके द्वारा मांगे गए पाठ के प्रश्न-उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) नीचे दिए गए हैं:


पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के उत्तर


1. कवि ने 'चाहत चलन ये संदेसो ले सुजान को' क्यों कहा है?

उत्तर: कवि ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि उसके प्राण अब शरीर से निकलने वाले हैं (अर्थात मृत्यु समीप है) और वह मरने से पहले अपनी प्रेमिका सुजान के दर्शन करना चाहता है। कवि के प्राण सुजान के दर्शन की अभिलाषा में ही अब तक शरीर में अटके हुए हैं ।

2. कवि मौन होकर प्रेमिका के कौन से प्रण पालन को देखना चाहता है?

उत्तर: सुजान ने कवि की उपेक्षा करने और न बोलने का जो प्रण (पैज) ले रखा है, कवि मौन होकर उसी प्रण के पालन को देखना चाहता है। कवि कहता है कि "मैं भी मौन धारण करके देखूँगा कि तुम कब तक अपना यह खामोश रहने का प्रण निभाती हो" ।

3. कवि ने किस प्रकार की पुकार से 'कान खोलि है' की बात कही है?

उत्तर: कवि ने अपनी 'कूकभरी मूकता' (पीड़ा और दर्द से भरी खामोशी) की पुकार से सुजान के कान खोलने की बात कही है । कवि का मानना है कि उसकी यह दर्दभरी खामोशी ही सुजान को पुकारेगी और कभी न कभी उसकी यह पुकार सुजान के कानों तक जरूर पहुँचेगी ।

4. घनानंद की रचनाओं की भाषिक विशेषताओं को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:
घनानंद की भाषा परिष्कृत और साहित्यिक ब्रजभाषा है ।
उनकी भाषा में कोमलता और मधुरता का चरम विकास दिखाई देता है ।
उनकी कविता में लाक्षणिकता, वक्रोक्ति, वाग्विदग्धता के साथ अलंकारों का कुशल प्रयोग मिलता है ।
उनकी काव्य-कला में सहजता के साथ वचन-वक्रता (कथन की वक्रता) का अद्भुत मेल है ।

5. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।

(नोट: अलंकारों के नाम स्रोतों में दी गई पंक्तियों के काव्यात्मक विश्लेषण पर आधारित हैं)
(क) कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दै दै सनमान को।
उत्तर: 'कहि कहि', 'गहि गहि' और 'दै दै' में एक ही शब्द की आवृत्ति होने के कारण यहाँ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
(ख) कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलि है।
उत्तर: 'कूक' (पुकार) और 'मूकता' (खामोशी) दोनों विपरीत शब्द एक साथ प्रयोग हुए हैं, इसलिए यहाँ विरोधाभास अलंकार है।
(ग) अब न घिरत घन आनंद निदान को।
उत्तर: 'घिरत घन' में 'घ' वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है। 'घन आनंद' में श्लेष अलंकार है क्योंकि इसके दो अर्थ हैं- आनंद के बादल और कवि घनानंद।

6. निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

(क) बहुत दिनान को अवधि आसपास परे / खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को

उत्तर: इसका आशय यह है कि सुजान के लौटकर आने का जो समय (अवधि) तय था, वह अब खत्म होने को है। अब कवि के प्राण अत्यंत व्याकुल हैं और शरीर छोड़कर जाने (मृत्यु) के लिए तत्पर हैं ।

(ख) मौन हू सौं देखिहौं कितेक पन पालिहौ जू / कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै।

उत्तर: इसका आशय यह है कि कवि कहता है कि मैं भी चुप रहकर देखूँगा कि तुम (सुजान) कब तक मुझसे न बोलने की जिद पूरी करती हो। मेरी यह पीड़ा से भरी खामोशी ही इतनी प्रभावशाली होगी कि वह खुद तुम्हें पुकारने पर मजबूर कर देगी ।

7. संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-

(क) झूठी बतियानि की पत्यानि तें उदास है, कै ------ चाहत चलन ये संदेसो लै सुजान को।

व्याख्या: कवि कहता है कि वह सुजान की झूठी बातों पर विश्वास (पत्यानि) करके अत्यंत उदास और निराश हो गया है। सुजान की बेवफाई के कारण अब आनंद के बादल नहीं घिरते। विरह की इस पीड़ा में उसके प्राण होंठों तक आ गए हैं और शरीर से निकलने वाले हैं। वे जाते-जाते सुजान तक यह संदेश ले जाना चाहते हैं कि वह अंतिम समय में दर्शन दे दे ।

(ख) जान घनानंद यों मोहिं तुम्हें पैज परी ------ कबहुँ तौ मेरियै पुकार कान खोलि है।

व्याख्या: कवि सुजान से कहता है कि हम दोनों के बीच एक जिद (पैज) ठन गई है। तुम आनाकानी करती हो और मैं भी मौन रहकर देखूँगा कि तुम कब तक अपने इस प्रण को निभाती हो। तुम चाहे कितनी ही रूई कानों में डालकर बहरी क्यों न बन जाओ, कभी न कभी तो मेरी सच्ची पुकार तुम्हारे कानों तक जरूर पहुँचेगी और तुम्हें मेरी पुकार सुननी ही पड़ेगी ।

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पाठ पर आधारित पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)


प्रश्न 1: घनानंद मूलतः किस काल और किस काव्यधारा के कवि हैं?

(A) भक्तिकाल, सगुण काव्यधारा
(B) रीतिकाल, रीतिबद्ध काव्यधारा
(C) रीतिकाल, रीतिमुक्त काव्यधारा
(D) आधुनिक काल, छायावादी काव्यधारा
सही उत्तर: (C) रीतिकाल, रीतिमुक्त काव्यधारा

प्रश्न 2: घनानंद की कविताओं में मुख्य रूप से किस भाषा का प्रयोग किया गया है?

(A) अवधी
(B) परिष्कृत और साहित्यिक ब्रजभाषा
(C) खड़ी बोली हिंदी
(D) मैथिली
सही उत्तर: (B) परिष्कृत और साहित्यिक ब्रजभाषा

प्रश्न 3: बादशाह के दरबार से निकाले जाने के बाद घनानंद ने वृंदावन जाकर किस संप्रदाय में दीक्षा ली?

(A) वल्लभ संप्रदाय
(B) सखी संप्रदाय
(C) निम्बार्क संप्रदाय
(D) राधावल्लभ संप्रदाय
सही उत्तर: (C) निम्बार्क संप्रदाय

प्रश्न 4: कवि घनानंद ने अपनी रचनाओं में 'सुजान' नाम का प्रतीकात्मक प्रयोग किसके लिए किया है?

(A) अपनी प्रेमिका के लिए
(B) ईश्वर के लिए
(C) प्रकृति के लिए
(D) अपने गुरु के लिए
सही उत्तर: (A) अपनी प्रेमिका के लिए

प्रश्न 5: निम्नलिखित में से कौन सी रचना घनानंद की नहीं है?

(नोट: यह प्रश्न दिए गए स्रोत में उपस्थित रचनाओं की सूची पर आधारित है)
(A) सुजान सागर
(B) विरह लीला
(C) रसकेलि वल्ली
(D) विनय पत्रिका
सही उत्तर: (D) विनय पत्रिका

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