CBSE Board class 12 Hindi antral ch-2
यह पाठ विश्वनाथ त्रिपाठी की आत्मकथा का एक अंश है, जिसमें उन्होंने अपने गाँव बिसकोहर की यादों को संजोया है। लेखक ने ग्रामीण जीवन की सादा जीवनशैली, लोक मान्यताओं और वहां के प्राकृतिक परिवेश का सजीव वर्णन किया है। इस वृत्तांत में विभिन्न प्रकार के फूलों, वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के साथ लेखक के गहरे जुड़ाव को दिखाया गया है, जो शहरी चकाचौंध से दूर प्रकृति पर निर्भर हैं। यहाँ माँ के ममतामयी स्वरूप की तुलना एक सुरक्षात्मक बत्तख से की गई है, जो अपने बच्चों को हर खतरे से बचाती है। पूरी रचना क्षेत्रीय सौंदर्य और बचपन के उन अनुभवों को उजागर करती है जहाँ डर और आकर्षण साथ-साथ चलते हैं। अंततः, यह लेख पाठक को गाँव की मिट्टी और वहां के नैसर्गिक जीवन की सच्चाई से रूबरू कराता है।
यहाँ 'बिस्कोहर की माटी' पाठ के अंत में दिए गए 'प्रश्न-अभ्यास' और 'योग्यता-विस्तार' के सभी प्रश्नों के उत्तर और पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) दिए गए हैं:
प्रश्न-अभ्यास के उत्तर:
1. कोइयाँ किसे कहते हैं? उसकी विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: 'कोइयाँ' एक प्रकार का जलपुष्प है जिसे कुमुद या कोका-बेली भी कहा जाता है ।
विशेषताएँ: यह फूल शरद ऋतु में खिलता है और जहाँ भी गड्ढों (गड़हों) में पानी भरा होता है, वहाँ यह उग आता है । शरद पूर्णिमा की चाँदनी रात में जब यह खिलता है, तो पानी में चाँद का प्रतिबिंब और कोइयाँ की पत्तियाँ मिलकर एक जैसी प्रतीत होती हैं और इसकी गंध बहुत मनमोहक होती है ।
2. 'बच्चे का माँ का दूध पीना सिर्फ दूध पीना नहीं, माँ से बच्चे के सारे संबंधों का जीवन-चरित होता है' - टिप्पणी कीजिए।
उत्तर: लेखक का मानना है कि जब एक बच्चा माँ का दूध पीता है, तो वह केवल अपना पेट नहीं भरता, बल्कि वह माँ के स्पर्श और उसकी गंध को महसूस करता है । बच्चा माँ की गोद में रोता है, उसे मारता है, उससे लिपटता है और माँ भी उसे प्यार से चिपकाए रखती है । माँ के आँचल में दूध पीने से बच्चे को जो सुख और ममता मिलती है, वह माँ-बच्चे के बीच के संपूर्ण भावनात्मक और आत्मीय संबंधों का आधार और जीवन-चरित बन जाती है ।
3. बिसनाथ पर क्या अत्याचार हो गया?
उत्तर: बिसनाथ पर यह अत्याचार हुआ कि जब वे माँ का दूध पीने वाले ही थे, तब उनके छोटे भाई का जन्म हो गया । इस कारण उनका दूध कट गया और छोटे भाई का माँ के दूध पर कब्ज़ा हो गया । बिसनाथ को बेस्वाद गाय का दूध पीना पड़ा और उनका पालन-पोषण पड़ोस में रहने वाली कइसेरिन दाई ने किया ।
4. गरमी और लू से बचने के उपायों का विवरण दीजिए। क्या आप भी उन उपायों से परिचित हैं?
उत्तर: गरमी और लू से बचने के लिए पाठ में निम्नलिखित उपाय बताए गए हैं:
माँ लू से बचाने के लिए धोती या कमीज़ में गाँठ लगाकर प्याज़ बाँध देती थीं ।
कच्चे आम को भूनकर या उबालकर उसका पन्ना (शरबत) बनाया जाता था, जिसे गुड़ या चीनी में मिलाकर पिया जाता था ।
आम के पन्ने का शरीर पर लेप किया जाता था और उसी से नहाया तथा सिर धोया जाता था ।
(हाँ, मैं भी इन उपायों से परिचित हूँ, क्योंकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आज भी गर्मी में लू से बचने के लिए आम के पन्ने और प्याज़ का इस्तेमाल घरेलू नुस्खे के तौर पर किया जाता है।)
5. लेखक बिसनाथ ने किन आधारों पर अपनी माँ की तुलना बत्तख से की है?
उत्तर: लेखक ने ममता और सतर्कता के आधार पर अपनी माँ की तुलना बत्तख से की है । जिस प्रकार एक बत्तख अपने अंडों को कौवे आदि से बचाने के लिए उन्हें अपने पंखों में छिपा लेती है और अगर कोई अंडा बाहर छिटक जाता है तो उसे अपनी चोंच से अत्यंत कोमलता और सतर्कता से वापस समेट लेती है , ठीक उसी प्रकार एक माँ भी अपने बच्चे को हर बाहरी खतरे से बचाकर अपने आँचल में छिपाकर दूध पिलाती है । दोनों में बच्चे के प्रति सुरक्षा और ममता का भाव समान है ।
6. बिस्कोहर में हुई बरसात का जो वर्णन बिसनाथ ने किया है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: बिस्कोहर में बरसात एकाएक नहीं आती थी। पहले बादल घिरते, गड़गड़ाहट होती और दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा जाता था । बारिश के आने की आवाज़ ऐसी होती थी मानो दूर से घोड़ों की कतार दौड़ती चली आ रही हो । आंधी में टिन के छप्पर उड़ जाते थे और लगातार बारिश होने पर दीवारें और घर धँस जाते थे । बारिश के बाद कुत्ते, बकरी और मुर्गे खुशी से इधर-उधर भागते थे । इस दौरान जोंक, मच्छर, केंचुआ और डाँस जैसे कीड़े-मकोड़े बहुत बढ़ जाते थे । वहीं, बरसात के बाद आकाश, दिशाएँ, तालाब और पूरी प्रकृति निखर उठती थी ।
7. 'फूल केवल गंध ही नहीं देते दवा भी करते हैं', कैसे?
उत्तर: ग्रामीण जीवन में प्राकृतिक वनस्पतियों का प्रयोग औषधियों के रूप में किया जाता है ।
नीम के फूल और पत्ते: चेचक निकलने पर रोगी के पास रखे जाते थे ।
बेर के फूल: इनकी गंध सूँघने से बर्रै और ततैया का डंक झड़ जाता है ।
भरभंडा (सत्यानाशी) के फूल: आँखें दुखने (आँख आने) पर माँ इस फूल का दूध आँखों में लगाती थीं ।
8. 'प्रकृति सजीव नारी बन गई' - इस कथन के संदर्भ में लेखक की प्रकृति, नारी और सौंदर्य संबंधी मान्यताएँ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखक के लिए नारी, प्रकृति और सौंदर्य तीनों एक-दूसरे में घुले-मिले हैं। जब लेखक ने चाँदनी रात में जूही के फूलों की सुगंध के बीच एक औरत को देखा, तो वह औरत उन्हें एक सामान्य स्त्री न लगकर जूही की लता और चाँदनी का रूप प्रतीत हुई । लेखक का मानना है कि प्रकृति अपने आप में सजीव है । उनका सौंदर्य बोध भौतिक नहीं बल्कि रसात्मक है, जहाँ एक नारी के रूप में उन्हें समूची प्रकृति, आकाश, चाँदनी और सुगंध के दर्शन होते हैं ।
9. ऐसी कौन सी स्मृति है जिसके साथ लेखक को मृत्यु का बोध अजीब तौर से जुड़ा मिलता है?
उत्तर: लेखक को उस नारी (रिश्तेदार) की स्मृति के साथ मृत्यु का बोध जुड़ा हुआ मिलता है । वह औरत, जिसे उन्होंने बिस्कोहर में देखा था, जो उन्हें जूही की लता और चाँदनी जैसी लगती थी , और जिसके प्रति वे अपना प्रेम व्यक्त करने में उम्र भर शर्माते रहे । इस अप्राप्ति और बड़े गुलाम अली खाँ की ठुमरी के संगीत से उपजी व्याकुलता के साथ ही उन्हें मृत्यु का अजीब बोध जुड़ा हुआ महसूस होता है ।
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योग्यता-विस्तार के उत्तर:
1. पाठ में आए फूलों के नाम, साँपों के नाम छाँटिए और उनके रूप, रंग, विशेषताओं के बारे में लिखिए।
उत्तर:
फूल:
कोइयाँ (कुमुद): सफेद रंग का जलपुष्प जो पानी में खिलता है और जिसकी गंध बहुत अच्छी होती है ।
कमल: तालाब में खिलने वाला सुंदर फूल ।
हरसिंगार: शरद ऋतु में खिलने वाले फूल जो अपने आप बड़ी मात्रा में झरते हैं ।
भरभंडा (सत्यानाशी): पीली तितली के जैसा दिखने वाला फूल जिसका दूध आँखों की दवा है ।
जूही: सफेद रंग की लता वाला फूल जिसकी खुशबू प्राणों में बस जाती है ।
साँप:
ढोंड़हा और मजगिदवा: ये विषहीन (बिना ज़हर वाले) साँप होते हैं। ढोंड़हा को ब्राह्मण (वामन) जाति का माना जाता है और इसे मारा नहीं जाता ।
धामिन: यह भी विषहीन है लेकिन बहुत लंबी होती है। मान्यता है कि यह मुँह से कुश पकड़कर पूंछ से मार दे तो अंग सड़ जाता है ।
गोहुअन (फेंटारा): यह बहुत खतरनाक और विषैला साँप होता है ।
घोर कड़ाइच: बहुत विषैला साँप, जिसके काटने पर आदमी घोड़े की तरह हिनहिना कर मरता है ।
भटिहा: यह दो मुँह वाला साँप होता है ।
2. इस पाठ से गाँव के बारे में आपको क्या-क्या जानकारियाँ मिलीं? लिखिए।
उत्तर: इस पाठ से हमें बिस्कोहर गाँव के ग्रामीण जीवन की गहरी जानकारी मिलती है। हमें वहाँ की प्राकृतिक संपदा, तालाबों में खिलने वाले कमल और सिंघाड़े , ग्रामीण खान-पान (जैसे अकाल में कमल-ककड़ी खाना) और गर्मी, बरसात व शरद ऋतु के जनजीवन पर प्रभाव के बारे में पता चलता है । साथ ही गाँव के लोगों के लोक-विश्वासों (साँपों के बारे में) , और प्रकृति से मिलने वाली देसी दवाइयों (नीम, बेर के फूल) के प्रयोग की भी जानकारी मिलती है ।
3. वर्तमान समय-समाज में माताएँ नवजात शिशु को दूध नहीं पिलाना चाहतीं। आपके विचार से माँ और बच्चे पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है?
(यह एक विचारात्मक प्रश्न है, पाठ के आधार पर विचार)
उत्तर: पाठ में लेखक ने माँ के दूध को 'माँ-बच्चे के संबंधों का जीवन-चरित' कहा है । वर्तमान में यदि माताएँ बच्चों को दूध नहीं पिलाती हैं, तो बच्चे उस प्राकृतिक सुरक्षा, पोषण और भावनात्मक जुड़ाव से वंचित रह जाते हैं जो माँ की गोद में मिलता है। इससे न केवल शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमज़ोर होती है, बल्कि माँ और शिशु के बीच का वह गहरा और आत्मीय ममतामयी रिश्ता भी उतना प्रगाढ़ नहीं हो पाता जो शारीरिक स्पर्श और निकटता से बनता है।
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पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
प्रश्न 1. बिस्कोहर की माटी पाठ के लेखक कौन हैं?
A) हजारीप्रसाद द्विवेदी
B) रामविलास शर्मा
C) फणीश्वरनाथ रेणु
D) विश्वनाथ त्रिपाठी
उत्तर: D) विश्वनाथ त्रिपाठी
प्रश्न 2. गाँव के लोग अकाल पड़ने पर तालाब से क्या निकालकर खाते थे?
A) कमल-ककड़ी (भसीन)
B) मछलियाँ
C) सिंघाड़ा
D) जोंक
उत्तर: A) कमल-ककड़ी (भसीन)
प्रश्न 3. लेखक के गाँव में 'फेंटारा' किस खतरनाक साँप को कहा जाता था?
A) धामिन
B) गोहुअन
C) मजगिदवा
D) ढोंड़हा
उत्तर: B) गोहुअन
प्रश्न 4. 'कोइयाँ' (कुमुद) का फूल मुख्य रूप से किस ऋतु में खिलता है?
A) वसंत ऋतु में
B) ग्रीष्म ऋतु (गर्मी) में
C) शरद ऋतु में
D) वर्षा ऋतु में
उत्तर: C) शरद ऋतु में
प्रश्न 5. पाठ के अनुसार बर्रै और ततैया का डंक झाड़ने के लिए किस फूल को सूँघा जाता था?
A) गुड़हल के फूल को
B) बेर के फूल को
C) नीम के फूल को
D) सत्यानाशी के फूल को
उत्तर: B) बेर के फूल को
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