CBSE Board class 12 Hindi aroh ch-10

 यह पाठ प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा द्वारा रचित एक मार्मिक संस्मरण है, जो उनकी परिचारिका भक्तिन के संघर्षमय जीवन पर केंद्रित है। इसमें लेखिका ने एक ग्रामीण महिला के स्वाभिमान, अटूट कर्मठता और पितृसत्तात्मक समाज की कुरीतियों के विरुद्ध उसके साहसी संघर्ष का सजीव चित्रण किया है। भक्तिन का व्यक्तित्व अपनी विशिष्टताओं और कमियों के साथ उभरता है, जो शहर में रहकर भी अपनी देहाती सरलता और मर्यादा को बनाए रखती है। यह रचना न केवल एक स्वामी और सेवक के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाती है, बल्कि स्त्री-अस्तित्व की लड़ाई को भी मुखर करती है। लेखिका ने अपनी पैनी दृष्टि से एक साधारण पात्र के भीतर छिपे असाधारण तत्वों को पहचानकर उसे साहित्यिक गरिमा प्रदान की है। कुल मिलाकर, यह स्रोत मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक विसंगतियों का एक गहरा और प्रभावशाली विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

यहाँ 'भक्तिन' पाठ के अभ्यास में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर और पाठ पर आधारित पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं:

पाठ के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर:


1. भक्तिन अपना वास्तविक नाम लोगों से क्यों छुपाती थी? भक्तिन को यह नाम किसने और क्यों दिया होगा?

भक्तिन का वास्तविक नाम 'लछमिन' अर्थात् लक्ष्मी था । वह अपना नाम इसलिए छुपाती थी क्योंकि लक्ष्मी का अर्थ धन-संपत्ति और समृद्धि होता है, परंतु उसके जीवन में केवल गरीबी और संघर्ष ही था, जो उसके नाम का सीधा विरोधाभास था । जब वह लेखिका के पास नौकरी खोजने आई, तो उसने अपनी कहानी बताई और प्रार्थना की कि उसके नाम का उपयोग न किया जाए । लेखिका (महादेवी वर्मा) ने उसके गले में कंठी माला और उसका वैरागी जैसा वेश देखकर उसका नया नाम 'भक्तिन' रख दिया था ।

2. दो कन्या-रत्न पैदा करने पर भक्तिन पुत्र-महिमा में अंधी अपनी जिठानियों द्वारा घृणा व उपेक्षा का शिकार बनी। ऐसी घटनाओं से ही अकसर यह धारणा चलती है कि स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है। क्या इससे आप सहमत हैं?

हाँ, इस पाठ के प्रसंग से यह पूरी तरह स्पष्ट होता है। भक्तिन द्वारा कन्याओं को जन्म देने पर उसकी सास और जिठानियों ने उसकी बहुत उपेक्षा की । जिठानियों के काले-कलूटे बेटे थे, इसलिए वे घर में मजे से रहती थीं और अपने बेटों को दूध की मलाई खिलाती थीं, जबकि भक्तिन और उसकी बेटियों को चने-बाजरे की घुघरी और मोटा अनाज खाना पड़ता था । घर का सारा कठोर काम जैसे चक्की पीसना, खाना बनाना, और गोबर उठाना भी भक्तिन से ही कराया जाता था । यह दर्शाता है कि पितृसत्तात्मक सोच और पुत्र-मोह के कारण स्त्रियाँ ही दूसरी स्त्रियों का शोषण करने लगती हैं।


3. भक्तिन की बेटी पर पंचायत द्वारा 'ज़बरन' पति थोपा जाना एक दुर्घटना भर नहीं, बल्कि विवाह के संदर्भ में स्त्री के मानवाधिकार (विवाह करें या न करें अथवा किससे करें) इसकी स्वतंत्रता को कुचलते रहने की सदियों से चली आ रही सामाजिक परंपरा का प्रतीक है। कैसे?

भक्तिन की बड़ी बेटी के विधवा होने पर उसके बड़े जेठ ने अपनी संपत्ति के लालच में अपने साले (तीतरबाज युवक) को बुलाया । लड़की ने उस युवक को नापसंद कर दिया था, फिर भी एक दिन वह जबरन लड़की की कोठरी में घुस गया । लड़की ने उस युवक की खूब मरम्मत की, लेकिन पंचायत ने इस समस्या का कारण 'कलियुग' को बताते हुए बिना अपील का यह फैसला सुनाया कि अब दोनों को पति-पत्नी के रूप में ही रहना होगा । यह घटना प्रतीक है कि पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री की अपनी पसंद या नापसंद का कोई महत्व नहीं समझा जाता और उस पर जबरन फैसले थोप दिए जाते हैं ।


4. भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा?

लेखिका ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि भक्तिन में कई खामियां थीं। वह लेखिका के इधर-उधर पड़े रुपये-पैसों को चुपचाप अपनी मटकी में छिपा देती थी और उसे चोरी मानने के बजाय अपना धर्म मानती थी । वह लेखिका को प्रसन्न रखने के लिए बातों को बदलकर बोलने या झूठ बोलने से भी परहेज नहीं करती थी । भक्तिन दूसरों को अपने अनुसार ढाल लेना चाहती थी, परंतु खुद के स्वभाव या आदतों में कोई परिवर्तन नहीं लाना चाहती थी । इसके अतिरिक्त, वह अपनी सुविधा के लिए शास्त्रों के नियमों को भी मनमाने ढंग से गढ़ लेती थी ।

5. भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या उदाहरण लेखिका ने दिया है?

लेखिका को स्त्रियों का सिर घुटाना (मुंडाना) पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने भक्तिन को ऐसा करने से रोका । लेकिन भक्तिन ने इस बात को टालने के लिए तुरंत एक शास्त्र का हवाला देते हुए कहा कि "तीरथ गए मुंडाए सिद्ध" । यह कौन-से शास्त्र का रहस्यमय सूत्र है, यह जानना लेखिका के लिए संभव नहीं था । इस तरह भक्तिन ने शास्त्र के नाम पर अपनी सुविधा का रास्ता निकाल लिया और हर बृहस्पतिवार को नाई से अपना सिर मुंडवाती रही ।

6. भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती कैसे हो गईं?

भक्तिन के आने के बाद लेखिका की भोजन व्यवस्था और जीवनशैली ग्रामीण हो गई । भक्तिन उन्हें रात का बना मकई का दलिया, तिल लगे बाजरे के पुए, ज्वार के भुने हुए दानों की खिचड़ी और सफेद महुए की लपसी बनाकर खिलाने लगी । देहाती वृद्धा की जीवन की सरलता के कारण लेखिका अपनी असुविधाएं छिपानी भी सीख गईं । भक्तिन ने लेखिका को अपनी भाषा की अनेक ग्रामीण दंतकथाएं भी कंठस्थ करा दीं । इसके विपरीत, भक्तिन शहर में रहकर भी शहरी नहीं बन सकी ।


पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ):

प्रश्न 1: भक्तिन का वास्तविक नाम क्या था?

(A) पार्वती

(B) सरस्वती

(C) लछमिन (लक्ष्मी)

(D) सीता

उत्तर: (C) लछमिन (लक्ष्मी)


प्रश्न 2: 'भक्तिन' संस्मरणात्मक रेखाचित्र महादेवी वर्मा की किस पुस्तक में संकलित है?

(A) श्रृंखला की कड़ियाँ

(B) स्मृति की रेखाएँ

(C) पथ के साथी

(D) अतीत के चलचित्र

उत्तर: (B) स्मृति की रेखाएँ


प्रश्न 3: भक्तिन का विवाह उसके पिता द्वारा किस उम्र में कर दिया गया था?

(A) पाँच वर्ष

(B) नौ वर्ष

(C) पंद्रह वर्ष

(D) बारह वर्ष

उत्तर: (A) पाँच वर्ष


प्रश्न 4: लेखिका ने जब भक्तिन को सिर मुंडाने से रोका, तो उसने क्या कहकर अपना बचाव किया?

(A) भगवान की यही इच्छा है

(B) यह मेरे गाँव का रिवाज है

(C) तीरथ गए मुंडाए सिद्ध

(D) शास्त्रों में इसका वर्णन है

उत्तर: (C) तीरथ गए मुंडाए सिद्ध


प्रश्न 5: जब भक्तिन के पति का देहांत हुआ, तब भक्तिन की आयु कितने वर्ष थी?

(A) पच्चीस वर्ष

(B) उनतीस वर्ष

(C) छत्तीस वर्ष

(D) चालीस वर्ष

उत्तर: (B) उनतीस वर्ष

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट