CBSE Board class 12 Hindi aroh ch-13
यह पाठ प्रसिद्ध साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु के जीवन और उनकी कालजयी कहानी 'पहलवान की ढोलक' का विस्तृत परिचय देता है। लेखक ने ग्रामीण परिवेश की सांस्कृतिक जीवंतता और आंचलिक भाषा को केंद्र में रखकर आधुनिक भारत में लुप्त होती लोक कलाओं के संकट को रेखांकित किया है। मुख्य कथा लुट्टन पहलवान के संघर्ष की है, जो व्यवस्था बदलने के बाद राजसी संरक्षण खो देता है और अंततः गरीबी व महामारी से लड़ते हुए दम तोड़ देता है। ढोलक की आवाज इस कहानी में जीजीविषा का प्रतीक है, जो मृत्यु के सन्नाटे के बीच मरणासन्न ग्रामीणों को साहस प्रदान करती है। अंत में, यह स्रोत सत्ता परिवर्तन के कारण कलाकारों की अप्रासंगिकता और पुरानी व्यवस्था के ढहने से उत्पन्न त्रासदपूर्ण मानवीय स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
पाठ 'पहलवान की ढोलक' (फणीश्वरनाथ रेणु) के प्रश्न-उत्तर:
1. कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज़ आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए।
उत्तर: कुश्ती के समय लुट्टन पहलवान ढोल की आवाज़ को ही अपना गुरु मानता था और उसी के अनुसार अपने दाँव-पेंच लगाता था। ढोल की ताल से उसे संजीवनी शक्ति और ऊर्जा मिलती थी [1-4]। पाठ में आए ढोल के ध्वन्यात्मक शब्द और उनके अर्थ निम्नलिखित हैं:
चट्-धा, गिड़-धा: 'आ जा भिड़ जा' ।
चटाक्-चट्-धा: 'उठाकर पटक दे' ।
ढाक्-धिना, ढाक्-धिना: 'वाह पट्ठे! वाह पट्ठे!' ।
धाक-धिना, तिरकट-तिना: 'दाँव काटो, बाहर हो जा' ।
धिना-धिना, धिक-धिना: 'चित करो, चित करो' ।
ये ध्वन्यात्मक शब्द मन में उत्साह, संघर्ष और वीर रस की ध्वनि पैदा करते हैं।
2. कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?
उत्तर: लुट्टन के जीवन में कई महत्वपूर्ण मोड़ आए:
बचपन: नौ वर्ष की आयु में ही अनाथ हो गया, पत्नी (विवाह हो चुका था) और सास ने पाला ।
जवानी: सास को सताने वालों से बदला लेने के लिए कसरत करके पहलवान बना ।
राज-पहलवान बनना: श्यामनगर के मेले में 'शेर के बच्चे' (चाँद सिंह) को हराकर उसने ख्याति प्राप्त की और राजा श्यामानंद ने उसे राज-पहलवान बना दिया [7-9]।
पारिवारिक जीवन: उसकी पत्नी दो बेटों को जन्म देकर स्वर्ग सिधार गई। उसने 15 वर्ष तक अजेय पहलवान के रूप में जीवन बिताया ।
बुरा दौर: वृद्ध राजा की मृत्यु के बाद नए राजकुमार ने सत्ता संभाली और कुश्ती की जगह घोड़े की रेस को दे दी। लुट्टन को दरबार से निकाल दिया गया ।
त्रासदी: गाँव लौटने के बाद उसने गाँव के लड़कों को कुश्ती सिखाई। गाँव में मलेरिया और हैजा फैलने से उसके दोनों बेटे मारे गए [12-14]। अंततः ढोल बजाते हुए महामारी से लड़ते-लड़ते उसकी भी मृत्यु हो गई ।
3. लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है?
उत्तर: लुट्टन ने कुश्ती के दाँव-पेंच किसी मानवीय गुरु से नहीं सीखे थे। दंगल के दौरान ढोल की विभिन्न थाप और आवाज़ ही उसे निर्देश देती प्रतीत होती थीं (जैसे- 'उठाकर पटक दे', 'दाँव काटो' आदि) । ढोल की आवाज़ ही उसकी रगों में बिजली दौड़ाती थी और उसे लड़ने की प्रेरणा देती थी, इसलिए उसने ढोल को ही अपना गुरु माना ।
4. गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?
उत्तर: महामारी से पूरा गाँव मौत के मुँह में समा रहा था और चारों ओर निराशा थी। ऐसे में ढोल की आवाज़ गाँव के अर्धमृत और भयभीत लोगों में संजीवनी शक्ति भरती थी । अपने बेटों की मृत्यु के दुख को सहते हुए भी वह रात भर ढोल बजाता रहा ताकि मरते हुए लोगों की आँखों के सामने दंगल का दृश्य नाचे और उन्हें मृत्यु से लड़ने की प्रेरणा व शांति मिले, जिससे वे मौत से न डरें [14-16]।
5. ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?
उत्तर: रात की डरावनी निस्तब्धता में ढोलक की आवाज़ गाँव वालों के लिए संजीवनी बूटी का काम करती थी । ढोलक की ताल से शक्तिहीन और बीमार लोगों की नसों में बिजली सी दौड़ जाती थी। यद्यपि ढोल की आवाज़ में हैजा या मलेरिया ठीक करने की शक्ति नहीं थी, लेकिन इससे लोगों में मौत का डर कम हो जाता था और मरते हुए लोगों को शांति मिलती थी ।
6. महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?
उत्तर:
सूर्योदय: दिन के समय लोग खाँसते-कराहते अपने घरों से बाहर आते थे और रोने-कलपने के बावजूद एक-दूसरे को ढांढस बंधाते थे ।
सूर्यास्त: सूर्यास्त होते ही भयानक सन्नाटा छा जाता था। लोग झोपड़ियों में घुस जाते थे और उनमें बोलने की शक्ति भी नहीं रहती थी। माताएँ अपने मरते हुए बच्चे को पुकारने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाती थीं ।
7. कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था...
(ध्यान दें: इस प्रश्न के ख और ग भाग का उत्तर पाठ्येतर सामान्य ज्ञान व वर्तमान परिस्थितियों पर आधारित है, क्योंकि स्रोत में केवल घोड़े की रेस का ज़िक्र है।)
(क) ऐसी स्थिति अब क्यों नहीं है? राजशाही व्यवस्था समाप्त हो गई है और अब राजाओं का संरक्षण पहलवानों को नहीं मिलता है। राजकुमार के विलायत से आते ही कुश्ती का स्थान अन्य खेलों ने ले लिया ।
(ख) इसकी जगह अब किन खेलों ने ले ली है? पाठ के अनुसार कुश्ती की जगह 'घोड़े की रेस' ने ले ली है । वर्तमान में क्रिकेट (जिसका जिक्र अभ्यास में है), फुटबॉल, टेनिस आदि खेलों ने इसकी जगह ले ली है ।
(ग) कुश्ती को फिर से प्रिय खेल बनाने के लिए क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं? सरकार को अखाड़ों का निर्माण कराना चाहिए, खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना चाहिए और पहलवानों को आर्थिक व खेल सुविधाएँ देनी चाहिए।
8. आशय स्पष्ट करें - आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता...
उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि गाँव में हैजा और मलेरिया के कारण मृत्यु का इतना गहरा और भयानक सन्नाटा था कि प्रकृति भी असहाय थी । यदि कोई तारा गाँव वालों के दुख से दुखी होकर उनकी मदद करने के लिए टूटकर गिरता भी, तो वह धरती तक पहुँचने से पहले ही अपनी रोशनी खो बैठता। यह गाँव के निराशाजनक और दुखद माहौल का प्रतीकात्मक चित्रण है ।
9. पाठ में अनेक स्थलों पर प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। पाठ में से ऐसे अंश चुनिए और उनका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अंश: "मलेरिया और हैजे से पीड़ित गाँव भयार्त्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था।"
आशय: गाँव के लोगों के डर का मानवीकरण डरे हुए बच्चे से किया गया है।
अंश: "अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी। निस्तब्धता करुण सिसकियों और आहों को बलपूर्वक अपने हृदय में ही दबाने की चेष्टा कर रही थी।"
आशय: यहाँ रात और सन्नाटे (निस्तब्धता) का मानवीकरण किया गया है, जो यह दर्शाता है कि गाँव का माहौल इतना करुण था कि मानो रात स्वयं रो रही हो और अपने दुख को छिपाने का प्रयास कर रही हो।
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पाठ पर आधारित पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs):
प्रश्न 1: 'शेर के बच्चे' के नाम से प्रसिद्ध पहलवान का असली नाम क्या था?
(A) बादल सिंह
(B) काला खाँ
(C) चाँद सिंह
(D) सूरज सिंह
उत्तर: (C) चाँद सिंह
प्रश्न 2: लुट्टन सिंह पहलवान ने कुश्ती के दाँव-पेंच किससे सीखे थे?
(A) राजा श्यामानंद से
(B) ढोलक की आवाज़ से
(C) बादल सिंह से
(D) गाँव के बूढ़े पहलवानों से
उत्तर: (B) ढोलक की आवाज़ से
प्रश्न 3: नए राजकुमार ने राजकाज सँभालने के बाद दंगल (कुश्ती) का स्थान किस खेल को दे दिया?
(A) क्रिकेट की प्रतियोगिता
(B) शतरंज का खेल
(C) घोड़े की रेस
(D) निशानेबाज़ी
उत्तर: (C) घोड़े की रेस
प्रश्न 4: महामारी के समय पहलवान की ढोलक की आवाज़ गाँव वालों के लिए क्या काम करती थी?
(A) उन्हें सुलाने का काम
(B) बीमारी ठीक करने की दवा का काम
(C) संजीवनी शक्ति भरने का काम
(D) उन्हें डराने का काम
उत्तर: (C) संजीवनी शक्ति भरने का काम
प्रश्न 5: लुट्टन पहलवान के परिवार में महामारी (हैजा और मलेरिया) का शिकार कौन हुआ?
(A) उसकी सास
(B) उसकी पत्नी
(C) उसके दोनों बेटे
(D) राजा श्यामानंद
उत्तर: (C) उसके दोनों बेटे

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