CBSE Board class 12 Hindi aroh ch-14
यह पाठ आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के साहित्यिक योगदान और उनके प्रसिद्ध ललित निबंध 'शिरीष के फूल' का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करता है। लेखक ने शिरीष के वृक्ष को एक अडिग संन्यासी के रूप में चित्रित किया है, जो भीषण गर्मी और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपनी कोमलता और जीवनशक्ति को बनाए रखता है। इस प्रतीक के माध्यम से वे मनुष्य को संघर्षों के बीच धैर्यपूर्वक कर्तव्यशील रहने और मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देते हैं। द्विवेदी जी का लेखन सांस्कृतिक इतिहास, प्राचीन साहित्य और आधुनिक मानवतावाद के गहरे समन्वय को दर्शाता है। वे साहित्य को केवल कला नहीं बल्कि मनुष्य की आत्मा को आलोकित करने और उसे सामाजिक संकीर्णताओं से मुक्त करने का माध्यम मानते हैं। अंततः, यह अंश गांधीवादी मूल्यों, समय की गतिशीलता और पुराने के स्थान पर नए के स्वागत की अनिवार्य आवश्यकता पर बल देता है।
पाठ 'शिरीष के फूल' (हजारी प्रसाद द्विवेदी) के आधार पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पाठ के साथ
1. लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत (संन्यासी) की तरह क्यों माना है?
उत्तर: लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत इसलिए कहा है क्योंकि जिस प्रकार संन्यासी सांसारिक मोह-माया, सुख-दुख में समान रहता है, उसी प्रकार शिरीष प्रचंड गर्मी, लू, आँधी और भीषण वर्षा में भी अविचल खड़ा रहता है । जब धरती निर्धूम अग्निकुंड बनी होती है और लू से हृदय सूखता रहता है, तब भी यह अवधूत की तरह वायुमंडल से रस खींचकर फूलों से लदा रहता है और जीवन की अजेयता का मंत्र प्रचार करता है ।
2. हृदय की कोमलता को बचाने के लिए व्यवहार की कठोरता भी कभी-कभी ज़रूरी हो जाती है— प्रस्तुत पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
उत्तर: पाठ के अनुसार, शिरीष का फूल अत्यंत कोमल होता है और वह केवल भौंरों के पदों का कोमल दबाव ही सह सकता है, पक्षियों का नहीं । परंतु शिरीष के फल इतने कठोर और मजबूत होते हैं कि जब तक नए फूल-पत्ते मिलकर उन्हें धकिया कर बाहर नहीं निकाल देते, तब तक वे अपना स्थान नहीं छोड़ते । इसका अर्थ है कि अपने भीतर की कोमलता और संवेदना को सुरक्षित रखने के लिए मनुष्य को बाहरी दुनिया के आघात सहने के लिए कठोर आवरण (व्यवहार) अपनाना आवश्यक हो जाता है।
3. द्विवेदी जी ने शिरीष के माध्यम से कोलाहल व संघर्ष से भरी जीवन-स्थितियों में अविचल रह कर जिजीविषु बने रहने की सीख दी है। स्पष्ट करें।
उत्तर: शिरीष का फूल जेठ की जलती धूप और भीषण कोलाहल के बीच भी धैर्यपूर्वक लहलहाता रहता है । लेखक स्पष्ट करते हैं कि चाहे देश में मार-काट, अग्निलाह, लूट-पाट और खून-खच्चर का बवंडर बह रहा हो, ऐसे भीषण कोलाहल और संघर्ष में भी स्थिर रहा जा सकता है । शिरीष हमें यह सीख देता है कि बाहरी परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए और कर्तव्यशील व जिजीविषु (जीने की इच्छा रखने वाला) बने रहना चाहिए ।
4. हाय, वह अवधूत आज कहाँ है! ऐसा कहकर लेखक ने आत्मबल पर देह-बल के वर्चस्व की वर्तमान सभ्यता के संकट की ओर संकेत किया है। कैसे?
उत्तर: यहाँ 'अवधूत' शब्द से लेखक का तात्पर्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से है । शिरीष की तरह ही गांधीजी भी कोमल और कठोर दोनों थे और उन्होंने वायुमंडल से रस खींचकर विपरीत परिस्थितियों में भी अपना आत्मबल बनाए रखा । आज के युग में मार-काट और लूट-पाट मची है, जहाँ शारीरिक बल (देह-बल) और हिंसा को आत्मबल से श्रेष्ठ माना जाने लगा है । इसी हिंसक और गांधीवादी मूल्यों के अभाव वाली सभ्यता के संकट को देखकर लेखक के मन से पीड़ास्वरूप निकलता है कि आत्मबल का वह महान अवधूत (गांधीजी) आज कहाँ है ।
5. कवि (साहित्यकार) के लिए अनासक्त योगी की स्थिर प्रज्ञता और विदग्ध प्रेमी का हृदय— एक साथ आवश्यक है। ऐसा विचार प्रस्तुत कर लेखक ने साहित्य-कर्म के लिए बहुत ऊँचा मानदंड निर्धारित किया है। विस्तारपूर्वक समझाएँ।
उत्तर: लेखक के अनुसार, एक सच्चा कवि वही हो सकता है जो योगी की तरह अनासक्त (जिसमें सांसारिक मोह न हो) हो और साथ ही एक प्रेमी की तरह उसका हृदय सरस और कोमल हो । जो कवि सांसारिक हिसाब-किताब में उलझा रहता है, वह कभी सच्चा साहित्य नहीं रच सकता । कबीर और कालिदास में यही गुण थे । वे प्राकृतिक और मानवीय सौंदर्य का पूरा आनंद लेते थे, लेकिन उसमें लिप्त नहीं होते थे । इसी कारण वे अपनी रचनाओं में सच्ची भावनाएँ उकेर पाए।
6. सर्वग्रासी काल की मार से बचते हुए वही दीर्घजीवी हो सकता है, जिसने अपने व्यवहार में जड़ता छोड़कर नित बदल रही स्थितियों में निरंतर अपनी गतिशीलता बनाए रखी है। पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
उत्तर: लेखक बताते हैं कि महाकाल देवता निरंतर अपने कोड़े चला रहे हैं, जिसमें जीर्ण और दुर्बल झड़ जाते हैं । जो मूर्ख यह समझते हैं कि वे जहां हैं, वहीं लंबे समय तक टिके रहेंगे, वे काल देवता की मार से नहीं बच सकते । शिरीष के पुराने फल इसी जड़ता का प्रतीक हैं जो नए फूलों द्वारा धक्का दिए जाने पर ही गिरते हैं । दीर्घजीवी केवल वही हो सकता है जो हिलता-डुलता रहे, समय के साथ अपना स्थान बदलता रहे और निरंतर आगे की ओर बढ़ता रहे ।
7. आशय स्पष्ट कीजिए—
(क) दुरंत प्राणधारा और सर्वव्यापक कालाग्नि का संघर्ष निरंतर चल रहा है... ते कि मरे।
आशय: समय (काल) परिवर्तनशील है और मृत्यु अटल है। जो व्यक्ति एक ही स्थान पर या एक ही विचारधारा पर जड़ होकर अड़ जाता है, उसका पतन निश्चित है । समय की मार से बचने के लिए निरंतर प्रगतिशील रहना और स्वयं को बदलना आवश्यक है ।
(ख) जो कवि अनासक्त नहीं रह सका, जो फक्कड़ नहीं बन सका... मैं कहता हूँ कवि बनना है मेरे दोस्तो, तो फक्कड़ बनो।
आशय: सच्चे कवि के लिए सांसारिक मोह-माया से मुक्त होना और फक्कड़पन बहुत जरूरी है । जो लाभ-हानि का हिसाब रखता है, वह गहराई से सौंदर्य और भावनाओं को नहीं समझ सकता । कबीर और कालिदास ऐसे ही फक्कड़ कवि थे ।
(ग) फूल हो या पेड़, वह अपने-आप में समाप्त नहीं है। वह किसी अन्य वस्तु को दिखाने के लिए उठी हुई अँगुली है। वह इशारा है।
आशय: प्रकृति की कोई भी वस्तु (फूल या पेड़) अपनी सुंदरता में ही सीमित नहीं है, बल्कि वह किसी अनंत सौंदर्य और उच्च लक्ष्य की ओर संकेत करने का एक माध्यम मात्र है ।
पाठ के आस-पास
1. शिरीष के पुष्प को 'शीतपुष्प' भी कहा जाता है। ज्येष्ठ माह की प्रचंड गरमी में फूलने वाले फूल को शीतपुष्प संज्ञा किस आधार पर दी गई होगी?
उत्तर: जब धरती भीषण गर्मी में अग्निकुंड बन जाती है और लू चलने लगती है, तब केवल शिरीष ही ऐसा पेड़ है जो वायुमंडल से रस खींचकर हरा-भरा रहता है और लहलहाते फूलों से भर जाता है । भीषण गर्मी में लोगों को शीतलता और आनंद प्रदान करने के इसी गुण के कारण इसे 'शीतपुष्प' कहा गया होगा।
2. कोमल और कठोर दोनों भाव किस प्रकार गांधीजी के व्यक्तित्व की विशेषता बन गए?
उत्तर: गांधीजी शिरीष के फूल की भांति ही भीतर से अत्यंत कोमल और संवेदनशील थे जो दूसरों का दुख देखकर पिघल जाते थे । वहीं दूसरी ओर, सत्य, अहिंसा और अपने सिद्धांतों के प्रति वे अत्यंत कठोर और अडिग थे, जिसके बल पर वे अंग्रेजी साम्राज्य की मार-काट और बवंडर के बीच भी स्थिर रह सके ।
(नोट: पाठ में दिए गए वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं अन्य लेखकों के निबंध खोजने वाले प्रश्न व्यावहारिक कक्षा-गतिविधियाँ हैं, अतः उनका उत्तर यहाँ नहीं दिया गया है।)
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पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) उत्तर सहित:
प्रश्न 1: 'शिरीष के फूल' नामक ललित निबंध के रचयिता कौन हैं?
(A) महादेवी वर्मा
(B) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
(C) सुमित्रानंदन पंत
(D) मुंशी प्रेमचंद
उत्तर: (B) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
प्रश्न 2: लेखक ने शिरीष के फूल की तुलना किसके साथ की है?
(A) एक राजा से
(B) एक सैनिक से
(C) एक कालजयी अवधूत (संन्यासी) से
(D) एक व्यापारी से
उत्तर: (C) एक कालजयी अवधूत (संन्यासी) से
प्रश्न 3: संस्कृत साहित्य में शिरीष के फूल को बहुत कोमल माना गया है। कालिदास के अनुसार यह किसके पदों का दबाव सह सकता है?
(A) केवल पक्षियों का
(B) केवल भौंरों (भ्रमर) का
(C) केवल तितलियों का
(D) केवल हवा का
उत्तर: (B) केवल भौंरों (भ्रमर) का
प्रश्न 4: "हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!" प्रस्तुत पंक्ति में 'अवधूत' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(A) कबीरदास
(B) सुमित्रानंदन पंत
(C) रवींद्रनाथ टैगोर
(D) महात्मा गांधी
उत्तर: (D) महात्मा गांधी
प्रश्न 5: एक सच्चा साहित्यकार या कवि बनने के लिए लेखक के अनुसार सबसे पहली शर्त क्या है?
(A) उसका योगी की तरह अनासक्त और फक्कड़ होना
(B) उसका धनवान और अमीर होना
(C) उसका बहुत अधिक ज्ञानी और हिसाब-किताब रखने वाला होना
(D) उसका राजनीति का जानकार होना
उत्तर: (A) उसका योगी की तरह अनासक्त और फक्कड़ होना

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