CBSE Board class 12 Hindi aroh ch-19
यह स्रोत सिंधु घाटी सभ्यता के दो सबसे प्राचीन और नियोजित शहरों, मोहनजोदड़ो और हड़प्पा, की ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प विशेषताओं का वर्णन करता है। लेखक ओम थानवी ने इन खंडहरों के माध्यम से तत्कालीन नगर नियोजन, ग्रिड प्रणाली पर आधारित सड़कों और आधुनिक जल निकासी व्यवस्था की बारीकियों को विस्तार से समझाया है। यहाँ बौद्ध स्तूप, विशाल स्नानागार, अन्न भंडार और उन्नत कृषि संस्कृति के प्रमाणों का उल्लेख है जो इस सभ्यता की संपन्नता को दर्शाते हैं। पाठ में इस बात पर जोर दिया गया है कि हज़ारों साल पुराने होने के बावजूद यहाँ के शहरी ढाँचे और निर्माण कौशल आज के आधुनिक वास्तुकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। अंततः, यह लेख पाठक को एक प्राचीन दुनिया की यात्रा पर ले जाता है जहाँ कला, व्यापार और नागरिक अनुशासन का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर:
प्रश्न 1: सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था। कैसे?
उत्तर: सिंधु-सभ्यता यद्यपि बहुत समृद्ध और साधन-संपन्न थी, लेकिन वहाँ अन्य प्राचीन सभ्यताओं (जैसे मिस्र) की तरह भव्यता का दिखावा नहीं था । मुअनजो-दड़ो में न तो विशाल राजमहल मिले हैं, न मंदिर, न राजाओं या महंतों की भव्य समाधियाँ और न ही विशालकाय मूर्तियाँ । यहाँ तक कि मुअनजो-दड़ो के ‘नरेश’ के सिर का मुकुट भी बहुत छोटा है और उनकी नावें भी आकार में छोटी होती थीं । इस सभ्यता में आकार की भव्यता के स्थान पर कला और उपयोगिता का महत्व अधिक था । इसलिए इसे 'लो-प्रोफाइल' या लघुता में भी महत्ता का अनुभव करने वाली संस्कृति कहा गया है ।
प्रश्न 2: 'सिंधु-सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध है जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।' ऐसा क्यों कहा गया?
उत्तर: ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि मुअनजो-दड़ो से प्राप्त वस्तुओं में कला और सुरुचि का बहुत महत्व दिखाई देता है । नगर-नियोजन, वास्तुकला, धातु और पत्थर की मूर्तियाँ, मिट्टी के बर्तन और उन पर चित्रित पशु-पक्षियों की छवियाँ, सुनिर्मित मुहरें, खिलौने, आभूषण और सुघड़ अक्षरों वाली लिपि यह सिद्ध करती है कि यह सभ्यता तकनीक से ज्यादा कला-सिद्ध थी । यह सौंदर्य-बोध किसी राजा के रौब या धर्म के प्रभाव से नहीं थोपा गया था, बल्कि यह पूरे समाज द्वारा पोषित और विकसित था ।
प्रश्न 3: पुरातत्व के किन चिह्नों के आधार पर आप यह कह सकते हैं कि—"सिंधु-सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी।"
उत्तर: मुअनजो-दड़ो से लेकर हरियाणा तक फैली समूची सिंधु सभ्यता की खुदाई में कोई भी ऐसे हथियार नहीं मिले हैं जो किसी राजतंत्र या सैन्य सत्ता का प्रतीक हों । यहाँ सैन्य सत्ता का कोई प्रमाण नहीं है । इसके बावजूद, वहाँ नगर योजना, वास्तुकला, मुहरों, जल व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाओं में एकरूपता और कड़ा अनुशासन दिखाई देता है । इससे स्पष्ट होता है कि यह अनुशासन सेना या हथियारों की ताकत के बल पर नहीं, बल्कि समाज की आपसी समझ और सहमति पर आधारित था ।
प्रश्न 4: 'यह सच है कि यहाँ किसी आँगन की टूटी-फूटी सीढ़ियाँ अब आपको कहीं नहीं ले जातीं; वे आकाश की तरफ़ अधूरी रह जाती हैं। लेकिन उन अधूरे पायदानों पर खड़े होकर अनुभव किया जा सकता है कि आप दुनिया की छत पर हैं, वहाँ से आप इतिहास को नहीं उसके पार झाँक रहे हैं।' इस कथन के पीछे लेखक का क्या आशय है?
उत्तर: लेखक का आशय यह है कि मुअनजो-दड़ो दुनिया के सबसे पुराने नियोजित शहरों में से एक है । जब कोई व्यक्ति इन पाँच हज़ार साल पुराने खंडहरों की अधूरी सीढ़ियों पर खड़ा होता है, तो वह केवल एक टूटे हुए घर को नहीं देख रहा होता, बल्कि वह मानव सभ्यता के सबसे शुरुआती और परिपक्व दौर को महसूस कर रहा होता है । यहाँ खड़ा होकर व्यक्ति इतिहास की सीमाओं से परे जाकर मानव जाति के अत्यंत प्राचीन काल की जीवनशैली और उसकी जड़ों के दर्शन कर सकता है ।
प्रश्न 5: टूटे-फूटे खंडहर, सभ्यता और संस्कृति के इतिहास के साथ-साथ धड़कती ज़िंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज़ होते हैं— इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस कथन का भाव यह है कि खंडहर केवल ईंट और पत्थरों के ढेर नहीं होते, बल्कि वे अपने भीतर हजारों साल पहले रहने वाले लोगों की जीवित स्मृतियों को समेटे होते हैं । जब हम इन खंडहरों में चलते हैं, तो हम रसोई की खिड़की से आती गंध, बैलगाड़ी की रुन-झुन और सुनसान रास्तों पर हवा की लयबद्ध आवाज़ की कल्पना कर सकते हैं । ये खंडहर हमें उस काल के लोगों के रहन-सहन, उनकी कला और उनकी दैनिक गतिविधियों का सजीव अनुभव कराते हैं ।
प्रश्न 6: इस पाठ में एक ऐसे स्थान का वर्णन है जिसे बहुत कम लोगों ने देखा होगा, परंतु इससे आपके मन में उस नगर की एक तसवीर बनती है। किसी ऐसे ऐतिहासिक स्थल, जिसको आपने नज़दीक से देखा हो, का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर: (ध्यान दें: मेरे द्वारा दिए गए स्रोत पाठ में किसी अन्य ऐतिहासिक स्थल का वर्णन नहीं है, इसलिए यह उत्तर बाहरी जानकारी पर आधारित है)
मैंने राजस्थान के आमेर किले को नज़दीक से देखा है। जयपुर की पहाड़ियों पर स्थित यह किला लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बना है। जब आप इसकी घुमावदार प्राचीरों और विशाल दरवाजों (जैसे सूरज पोल) से प्रवेश करते हैं, तो राजपूत राजाओं के वैभव की स्पष्ट तस्वीर जेहन में उभर आती है। दीवान-ए-आम की नक्काशीदार छतें और 'शीश महल' के छोटे-छोटे दर्पणों में टिमटिमाती रोशनी आज भी उस काल की कलात्मक समृद्धि की कहानी कहती है। इसके गलियारों में घूमते हुए ऐसा लगता है मानो रानियों की पायल की झंकार और दरबारियों की आवाज़ें आज भी वहाँ गूंज रही हों।
प्रश्न 7: नदी, कुएँ, स्नानागार और बेजोड़ निकासी व्यवस्था को देखते हुए लेखक पाठकों से प्रश्न पूछता है कि क्या हम सिंधु घाटी सभ्यता को जल-संस्कृति कह सकते हैं? आपका जवाब लेखक के पक्ष में है या विपक्ष में? तर्क दें।
उत्तर: मेरा जवाब लेखक के पक्ष में है; सिंधु सभ्यता को निश्चित रूप से 'जल-संस्कृति' कहा जा सकता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
सिंधु सभ्यता संसार की पहली ज्ञात संस्कृति है जिसने कुएँ खोदकर भू-जल तक पहुँच बनाई; अकेले मुअनजो-दड़ो में लगभग 700 कुएँ मिले हैं ।
यहाँ एक विशाल अनुष्ठानिक महाकुंड है, जिसे पक्की ईंटों, चूने, चिरोड़ी के गारे और डामर (Bitumen) से पूरी तरह वाटरप्रूफ बनाया गया था ।
जल निकासी का बेजोड़ प्रबंध था। हर घर में स्नानागार था, घरों का पानी नालियों के जाल से जुड़ता था और सड़क के किनारे की नालियाँ पक्की ईंटों से ढकी हुई होती थीं । ऐसा सुव्यवस्थित बंदोबस्त इतिहास में इससे पहले कहीं नहीं मिलता ।
प्रश्न 8: सिंधु घाटी सभ्यता का कोई लिखित साक्ष्य नहीं मिला है। सिर्फ़ अवशेषों के आधार पर ही धारणा बनाई है। इस लेख में मुअनजो-दड़ो के बारे में जो धारणा व्यक्त की गई है। क्या आपके मन में इससे कोई भिन्न धारणा या भाव भी पैदा होता है? इन संभावनाओं पर कक्षा में समूह-चर्चा करें।
उत्तर: (ध्यान दें: यह उत्तर आंशिक रूप से बाहरी तर्क और पाठ की जानकारी पर आधारित है)
लेखक ने मुअनजो-दड़ो को हथियारों से मुक्त, शांतिपूर्ण और समझ से अनुशासित सभ्यता माना है क्योंकि वहाँ कोई हथियार नहीं मिले । लेकिन मन में यह भिन्न धारणा भी पैदा होती है कि क्या वास्तव में कोई समाज पूरी तरह से सैन्य शक्ति के बिना बाहरी आक्रमणों से सुरक्षित रह सकता था? हो सकता है कि उन्होंने लकड़ी या किसी ऐसे नष्ट होने वाले पदार्थ के हथियार बनाए हों जो अब तक मिट्टी में गल गए हों । या यह भी संभव है कि जलवायु परिवर्तन, वर्षा की कमी, और अत्यधिक जल दोहन के कारण उत्पन्न हुए सूखे ने इस समृद्ध समाज को अंदर से कमजोर कर दिया हो और आपसी संघर्ष को जन्म दिया हो ।
पाठ पर आधारित पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs):
प्रश्न 1: मुअनजो-दड़ो शहर की आबादी लगभग कितनी मानी जाती है?
(A) पचास हज़ार
(B) पचहत्तर हज़ार
(C) पचासी हज़ार
(D) एक लाख
उत्तर: (C) पचासी हज़ार
प्रश्न 2: मुअनजो-दड़ो में स्थित महाकुंड की गहराई कितनी है?
(A) पाँच फुट
(B) सात फुट
(C) दस फुट
(D) पच्चीस फुट
उत्तर: (B) सात फुट
प्रश्न 3: 1922 में मुअनजो-दड़ो में बौद्ध स्तूप की खोजबीन के लिए कौन आए थे?
(A) जॉन मार्शल
(B) राखालदास बनर्जी
(C) ग्रेगरी पोसेल
(D) काशीनाथ दीक्षित
उत्तर: (B) राखालदास बनर्जी
प्रश्न 4: भू-जल तक पहुँचने के लिए अकेले मुअनजो-दड़ो में लगभग कितने कुएँ खोदे गए थे?
(A) तीन सौ
(B) पाँच सौ
(C) सात सौ
(D) नौ सौ
उत्तर: (C) सात सौ
प्रश्न 5: मेसोपोटामिया के शिलालेखों में मुअनजो-दड़ो के लिए किस शब्द का संभावित प्रयोग किया गया है?
(A) सुमेर
(B) मेलुहा
(C) अजरक
(D) मिस्र
उत्तर: (B) मेलुहा

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें