CBSE Board class 12 Hindi aroh ch-2
यह पाठ मुख्य रूप से प्रसिद्ध हिंदी कवि आलोक धन्वा के जीवन और उनकी लोकप्रिय कविता 'पतंग' पर केंद्रित है। इसमें कवि के साहित्यिक परिचय, उनके द्वारा प्राप्त सम्मानों और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान का उल्लेख किया गया है। स्रोत के अनुसार, 'पतंग' कविता बच्चों की कोमल इच्छाओं, उमंगों और उनके साहसी स्वभाव का सुंदर चित्रण करती है। इसमें शरद ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति में होने वाले बदलावों और बच्चों की पतंगबाजी के उत्साह को सजीव बिंबों के माध्यम से दर्शाया गया है। अंत में, छात्रों के बोध को गहरा करने के लिए कविता के भावार्थ और प्रतीकों से संबंधित महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न भी दिए गए हैं।
यहाँ आपके द्वारा दिए गए पाठ (आलोक धन्वा की 'पतंग' कविता) के आधार पर सभी प्रश्नों के उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) प्रश्न दिए गए हैं:
कविता के साथ (पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर)
1. 'सबसे तेज़ बौछारें गयीं, भादो गया' के बाद प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने दिखाया है, उसका वर्णन अपने शब्दों में करें।
उत्तर: कवि बताते हैं कि भादो मास की तेज़ बारिश खत्म होने के बाद शरद ऋतु का आगमन होता है । इसके बाद सवेरा खरगोश की आँखों के समान लाल और चमकीला हो जाता है । शरद ऋतु अपने साथ एक नई चमक लाती है और आकाश को इतना मुलायम (साफ़ और सुहावना) बना देती है कि दुनिया की सबसे हल्की चीज़ (पतंग) ऊपर उठ सके ।
2. सोचकर बताएँ कि पतंग के लिए सबसे हल्की और रंगीन चीज़, सबसे पतला कागज़, सबसे पतली कमानी जैसे विशेषणों का प्रयोग क्यों किया है?
उत्तर: कवि ने इन विशेषणों का प्रयोग बच्चों की कोमल भावनाओं, उनकी बाल-सुलभ इच्छाओं और उमंगों को दर्शाने के लिए किया है । पतंग बच्चों की उमंगों का रंग-बिरंगा सपना है और बच्चों का बाल-मन भी पतंग के कागज़ व कमानी की तरह ही अत्यंत नाज़ुक, हल्का और पारदर्शी होता है ।
3. बिंब स्पष्ट करें - सबसे तेज़ बौछारें गयीं भादो गया...
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि ने दृश्य, श्रव्य और स्पर्श बिंबों का अत्यंत सुंदर प्रयोग किया है:
दृश्य बिंब: 'खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा', 'चमकीली साइकिल', और 'चमकीले इशारे' ।
श्रव्य बिंब: 'ज़ोर-ज़ोर से घंटी बजाते हुए' (साइकिल की घंटी की आवाज़) ।
स्पर्श बिंब: 'आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए' (मुलायम का अहसास) ।
4. जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास - कपास के बारे में सोचें कि कपास से बच्चों का क्या संबंध बन सकता है।
उत्तर: कपास बहुत हल्की, कोमल और मुलायम होती है। बच्चों का शरीर और उनका स्वभाव भी जन्म से ही कपास की तरह ही अत्यंत नाज़ुक, कोमल और लचीला होता है । इसी कोमलता और हल्केपन के कारण वे बेसुध होकर कठोर छतों पर भी आसानी से दौड़ पाते हैं ।
5. पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं - बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है?
उत्तर: पतंग बच्चों की उमंगों का प्रतीक है और आसमान में उड़ती पतंग ऊँचाइयों की वह हद है जिसे बाल-मन छूना चाहता है । जब पतंग आसमान में उड़ती है, तो बच्चों की कल्पनाएँ और भावनाएँ भी उसी के साथ उड़ान भरती हैं और वे अपने शरीर के रंध्रों (रोमछिद्रों) के सहारे पतंग के साथ-साथ उड़ने का अनुभव करते हैं ।
6. निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़ कर प्रश्नों का उत्तर दीजिए:
(क) दिशाओं को मृदंग की तरह बजाने का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इसका तात्पर्य यह है कि जब बच्चे पतंग उड़ाते हुए बेसुध होकर छतों पर दौड़ते हैं, तो उनके पदचापों (पैरों की थाप) से जो ध्वनि उत्पन्न होती है, वह ऐसी लगती है मानो चारों दिशाओं में मृदंग (एक वाद्य यंत्र) बज रहे हों ।
(ख) जब पतंग सामने हो तो छतों पर दौड़ते हुए क्या आपको छत कठोर लगती है?
उत्तर: नहीं, जब बच्चों का पूरा ध्यान आसमान में उड़ती पतंग पर केंद्रित होता है, तो उनका शरीर उस रोमांच में डूब जाता है। इस मग्न अवस्था में उन्हें छतों की कठोरता महसूस नहीं होती, बल्कि वे छतें उन्हें नरम लगने लगती हैं ।
(ग) खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद आप दुनिया की चुनौतियों के सामने स्वयं को कैसा महसूस करते हैं?
उत्तर: कविता के अनुसार, जब बच्चे छतों के खतरनाक किनारों से गिरकर बच जाते हैं, तो वे पहले से भी अधिक निडर हो जाते हैं और सुनहले सूरज के सामने दोगुने उत्साह से आते हैं । अर्थात्, चुनौतियों का सामना करने के बाद आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है।
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कविता के आसपास
1. आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों को देखकर आपके मन में कैसे खयाल आते हैं? लिखिए
उत्तर: आसमान में रंग-बिरंगी उड़ती पतंगों को देखकर मन में आज़ादी और उत्साह के खयाल आते हैं। ऐसा लगता है मानो ये पतंगें हमारे सपनों और उमंगों का रूप हैं जो आसमान की असीम ऊँचाइयों को छूना चाहती हैं और उसके पार जाना चाहती हैं । (यह उत्तर कविता के संदर्भ के आधार पर दिया गया है)।
2. 'रोमांचित शरीर का संगीत' का जीवन के लय से क्या संबंध है?
उत्तर: जब बच्चे पूरी एकाग्रता के साथ पतंग उड़ाते हैं, तो उनके शरीर में एक अद्भुत लय और रोमांच पैदा होता है जो उन्हें छतों के किनारों से गिरने से बचाता है । इसी प्रकार जीवन में जब हम किसी कार्य में पूरी तरह से लीन हो जाते हैं, तो हमारे भीतर एक प्राकृतिक लय और संतुलन पैदा होता है जो हमें मुश्किलों से बचाता है।
3. 'महज़ एक धागे के सहारे, पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ' उन्हें (बच्चों को) कैसे थाम लेती हैं? चर्चा करें।
उत्तर: जब बच्चे पतंग उड़ाते समय छतों के खतरनाक किनारों तक पहुँच जाते हैं, तब पतंग की डोर का तनाव और उसकी ऊँचाई बच्चों के ध्यान को पूरी तरह अपनी ओर खींच लेती है। यही पतंग की ऊँचाई और धागे का सहारा बच्चों को रोमांचित अवस्था में संतुलित रखता है और गिरने से बचा लेता है ।
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पाँच वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) प्रश्न और उनके उत्तर
प्रश्न 1: 'पतंग' कविता के रचयिता निम्नलिखित में से कौन हैं?
A) जयशंकर प्रसाद
B) तुलसीदास
C) आलोक धन्वा
D) मैथिलीशरण गुप्त
उत्तर: C) आलोक धन्वा
प्रश्न 2: कवि ने सवेरे की तुलना किसके साथ की है?
A) सुनहले सूरज के साथ
B) खरगोश की आँखों के लाल रंग के साथ
C) खिली हुई कपास के साथ
D) लाल रंग की पतंग के साथ
उत्तर: B) खरगोश की आँखों के लाल रंग के साथ
प्रश्न 3: बच्चे जन्म से ही अपने साथ क्या लेकर आते हैं?
A) पतंग और धागा
B) चमकीली साइकिल
C) कपास (कोमलता)
D) मृदंग
उत्तर: C) कपास (कोमलता)
प्रश्न 4: दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज़ कवि ने किसे कहा है?
A) रंग-बिरंगी तितलियों को
B) आसमान के बादलों को
C) पतंग को
D) कपास के फूलों को
उत्तर: C) पतंग को
प्रश्न 5: कविता में 'भादो' का महीना बीतने के बाद किस ऋतु के आने का उल्लेख है?
A) वसंत ऋतु
B) ग्रीष्म ऋतु
C) वर्षा ऋतु
D) शरद ऋतु
उत्तर: D) शरद ऋतु
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