CBSE Board class 12 Hindi aroh ch-5
यह पाठ मुख्य रूप से प्रसिद्ध कवि शमशेर बहादुर सिंह के जीवन और उनकी विशिष्ट काव्य शैली पर केंद्रित है। इसमें उनकी प्रसिद्ध कविता 'उषा' को प्रस्तुत किया गया है, जो सूर्योदय के ठीक पहले के गतिशील प्राकृतिक सौंदर्य को ग्रामीण प्रतीकों के माध्यम से दर्शाती है। लेखक ने बताया है कि कैसे शमशेर जी ने चित्रकला और कविता के मेल से नए प्रयोग किए और अपनी रचनाओं में बिंबों का अनूठा प्रयोग किया है। पाठ में ग्रामीण परिवेश के उदाहरणों जैसे राख से लीपे हुए चौके और स्लेट पर खड़िया के माध्यम से सुबह के आकाश की बदलती छटा का वर्णन है। अंत में, जयशंकर प्रसाद और अज्ञेय की रचनाओं के साथ तुलना करके इस कविता की शिल्पगत विशेषताओं को और गहराई से समझाया गया है। यह स्रोत शमशेर बहादुर सिंह को एक ऐसे प्रयोगधर्मी रचनाकार के रूप में स्थापित करता है जो प्रकृति की गति को शब्दों में बांधने की कला जानते थे।
यहाँ आपके द्वारा दिए गए स्रोतों के आधार पर पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (बहुविकल्पीय) दिए गए हैं:
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1: कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि 'उषा' कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र है?
उत्तर: 'उषा' कविता में कवि ने गाँव की सुबह का वर्णन करने के लिए ग्रामीण परिवेश से जुड़े बिल्कुल नए और जीवंत उपमानों का प्रयोग किया है। इनमें 'राख से लीपा हुआ चौका', 'काली सिल जरा से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो' और 'स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने' प्रमुख हैं । ये सभी उपमान गाँव के दैनिक जीवन (जैसे रसोई की साफ-सफाई या बच्चों की स्लेट) से लिए गए हैं । जैसे-जैसे भोर का समय आगे बढ़ता है, आसमान के रंग नीले से राख जैसे, फिर लाल केसर की तरह और अंत में सफेद उजाले में बदलते हैं, जो प्रकृति की पल-पल बदलती गति और गाँव की सुबह की शुरुआत के गतिशील रूप (गतिशील शब्दचित्र) को दर्शाते हैं ।
प्रश्न 2: भोर का नभ / राख से लीपा हुआ चौका / (अभी गीला पड़ा है)
नयी कविता में कोष्ठक, विराम चिह्नों और पंक्तियों के बीच का स्थान भी कविता को अर्थ देता है। उपर्युक्त पंक्तियों में कोष्ठक से कविता में क्या विशेष अर्थ पैदा हुआ है? समझाइए।
उत्तर: उपर्युक्त पंक्तियों में "(अभी गीला पड़ा है)" को कोष्ठक में रखा गया है। यह कोष्ठक कविता को एक अतिरिक्त और गहरा अर्थ प्रदान करता है । यह भोर के समय आसमान में छाई हुई ओस की नमी और ताजगी को स्पष्ट करता है। जिस प्रकार राख से लीपा हुआ गीला चौका साफ, पवित्र और नम होता है, उसी प्रकार भोर का आसमान भी प्रदूषण-रहित, निर्मल और ओस के कारण गीला (ताजा) प्रतीत होता है ।
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पाँच वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) प्रश्न और उनके उत्तर
प्रश्न 1: शमशेर बहादुर सिंह स्वयं को किन दो भाषाओं का 'दोआब' मानते थे?
(क) हिंदी और अंग्रेज़ी
(ख) उर्दू और फ़ारसी
(ग) संस्कृत और हिंदी
(घ) उर्दू और हिंदी
उत्तर: (घ) उर्दू और हिंदी
प्रश्न 2: 'उषा' कविता में भोर के नीले आसमान की तुलना सबसे पहले किस उपमान से की गई है?
(क) नीले समुद्र से
(ख) नीले शंख से
(ग) नीले कमल से
(घ) नीले वस्त्र से
उत्तर: (ख) नीले शंख से
प्रश्न 3: 'राख से लीपा हुआ चौका' किस समय के आसमान का दृश्य दर्शाता है?
(क) सूर्यास्त का
(ख) दोपहर का
(ग) भोर का (उषाकाल का)
(घ) रात का
उत्तर: (ग) भोर का (उषाकाल का)
प्रश्न 4: निम्नलिखित में से किस घटना के कारण 'उषा का जादू' टूटता हुआ प्रतीत होता है?
(क) सूर्योदय होने पर
(ख) बादल छाने पर
(ग) तारे टूटने पर
(घ) रात होने पर
उत्तर: (क) सूर्योदय होने पर
प्रश्न 5: शमशेर बहादुर सिंह को इनमें से किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था?
(क) ज्ञानपीठ पुरस्कार
(ख) साहित्य अकादमी और कबीर सम्मान
(ग) सरस्वती सम्मान
(घ) पद्म श्री
उत्तर: (ख) साहित्य अकादमी और कबीर सम्मान

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