CBSE Board class 12 Hindi aroh ch-6
यह पाठ महान छायावादी कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के जीवन और उनकी सुप्रसिद्ध कविता 'बादल राग' का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करता है। लेखक के अनुसार, निराला का व्यक्तित्व और साहित्य संघर्ष, क्रांति और जिजीविषा का प्रतीक है, जो समाज के वंचित वर्ग की आवाज़ बनते हैं। यहाँ बादलों को मात्र प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि विप्लव और सामाजिक परिवर्तन लाने वाले एक वीर नायक के रूप में चित्रित किया गया है। कविता यह स्पष्ट करती है कि जहाँ बादलों का गर्जन शोषक वर्ग के लिए भय पैदा करता है, वहीं शोषित किसान और आम आदमी के लिए यह नवनिर्माण और आशा का संगीत है। अंततः, यह संकलन निराला की काव्य-शैली, उनके मानवीय दृष्टिकोण और प्रतीकात्मक भाषा के माध्यम से प्रकृति और जन-जीवन के गहरे अंतर्संबंधों को उजागर करता है।
यहाँ आपके द्वारा उपलब्ध कराए गए पाठ (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी की कविता "बादल राग") के आधार पर पाठ में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) प्रश्न दिए गए हैं:
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के उत्तर ('अभ्यास' से)
कविता के साथ
1. 'अस्थिर सुख पर दुख की छाया' पंक्ति में दुख की छाया किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर: इस पंक्ति में 'दुख की छाया' से तात्पर्य क्रांति या विप्लव के उस भय से है जो पूँजीपतियों और शोषक वर्ग पर हमेशा मँडराता रहता है । इसे ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि शोषक वर्ग ने जो सुख-संपत्ति एकत्रित की है, वह अस्थिर है। उन्हें हमेशा यह डर सताता रहता है कि शोषित वर्ग (आम आदमी) उनके खिलाफ कभी भी क्रांति कर सकता है और उनके सुख को छीन सकता है ।
2. 'अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर' पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया गया है?
उत्तर: इस पंक्ति में बड़े-बड़े पूँजीपतियों, शोषकों और समाज के शक्तिशाली व अहंकारी लोगों की ओर संकेत किया गया है । जिस प्रकार बादलों से गिरने वाली बिजली (वज्रपात) से बड़े-बड़े ऊँचे पहाड़ और विशाल पेड़ नष्ट हो जाते हैं, उसी प्रकार क्रांति आने पर बड़े-बड़े शोषकों और शक्तिशाली लोगों का पतन हो जाता है ।
3. 'विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते' पंक्ति में 'विप्लव-रव' से क्या तात्पर्य है? 'छोटे ही हैं शोभा पाते' ऐसा क्यों कहा गया है?
उत्तर: 'विप्लव-रव' का तात्पर्य क्रांति के शोर या विनाश की गर्जना से है । 'छोटे ही हैं शोभा पाते' ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि जब भी समाज में क्रांति होती है, तो उसका लाभ हमेशा आम आदमी, शोषित, मजदूर और वंचित वर्ग (छोटे पौधों के समान) को ही मिलता है, जबकि बड़े शोषकों (ऊँचे पेड़ों) का नाश हो जाता है ।
4. बादलों के आगमन से प्रकृति में होने वाले किन-किन परिवर्तनों को कविता रेखांकित करती है?
उत्तर: बादलों के आगमन से प्रकृति में भयंकर गर्जना होती है, मूसलाधार बारिश होने लगती है और वज्रपात होता है जिससे विशाल पर्वत और ऊँचे पेड़ क्षत-विक्षत हो जाते हैं । इसके विपरीत, धरती के भीतर सोए हुए बीज और अंकुर नए जीवन की आशा में अपना सिर उठाकर बादलों की ओर देखने लगते हैं, और छोटे पौधे खिलखिलाकर हँसने लगते हैं मानो वे हाथ हिलाकर बादलों को बुला रहे हों ।
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व्याख्या कीजिए
1. तिरती है समीर-सागर पर अस्थिर सुख पर दुख की छाया-- / जग के दग्ध हृदय पर निर्दय विप्लव की प्लावित माया--
व्याख्या: कवि निराला जी कहते हैं कि हवा रूपी सागर पर बादलों की छाया ऐसे तैर रही है जैसे शोषकों के अस्थिर सुख पर हमेशा दुख और क्रांति का डर मँडराता रहता है । गर्मी से तपे और दुखों से जले हुए इस संसार के हृदय पर बादल विनाशकारी बाढ़ के रूप में अपनी निर्दयी माया फैलाते हैं । यह वास्तव में शोषकों के लिए विनाश और शोषितों के लिए नए जीवन का संकेत है ।
2. अट्टालिका नहीं है रे / आतंक-भवन / सदा पंक पर ही होता / जल-विप्लव-प्लावन
व्याख्या: कवि कहते हैं कि पूँजीपतियों के ऊँचे-ऊँचे महल केवल रहने के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे आतंक के भवन हैं जहाँ से वे गरीबों का शोषण करते हैं । क्रांति रूपी जल की बाढ़ हमेशा कीचड़ (पंक) यानी शोषित और गरीब वर्ग पर ही आती है, जिससे उस कीचड़ में उत्पन्न होने वाले छोटे कमल (आम लोग) प्रसन्न होकर छलक उठते हैं ।
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कला की बात
1. पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। आपको प्रकृति का कौन-सा मानवीय रूप पसंद आया और क्यों?
उत्तर: मुझे छोटे पौधों का मानवीय रूप सबसे अधिक पसंद आया, जहाँ वे "हिल-हिल खिल-खिल / हाथ हिलाते, तुझे बुलाते" के रूप में चित्रित किए गए हैं । यह बिंब बहुत सुंदर है क्योंकि यह दिखाता है कि जब क्रांति आती है तो कमजोर और शोषित वर्ग किस प्रकार नवजीवन की आशा में उल्लास से भर उठता है ।
2. कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है? संबंधित वाक्यांश को छाँटकर लिखिए।
उत्तर: कविता में निम्नलिखित स्थानों पर रूपक अलंकार है:
समीर-सागर (समीर रूपी सागर)
रण-तरी (युद्ध रूपी नौका)
जीवन के पारावार (जीवन रूपी समुद्र)
3. इस कविता में बादल के लिए 'ऐ विप्लव के वीर!', 'ऐ जीवन के पारावार!' जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। ... इन संबोधनों का क्या औचित्य है?
उत्तर: ये संबोधन बादलों के दो अलग-अलग स्वरूपों को स्पष्ट करते हैं। एक ओर 'ऐ विप्लव के वीर' कहकर बादल को क्रांति और विनाश के अग्रदूत के रूप में दिखाया गया है जो पुराने रूढ़िवादी ढाँचे को तोड़ता है । वहीं दूसरी ओर 'ऐ जीवन के पारावार' कहकर उसे किसानों और वंचितों को नव-जीवन और आशा देने वाले रक्षक के रूप में स्थापित किया गया है ।
4. कवि बादलों को किस रूप में देखता है? कालिदास ने मेघदूत काव्य में मेघों को दूत के रूप में देखा। आप अपना कोई काल्पनिक बिंब दीजिए।
उत्तर: कवि निराला बादलों को क्रांति के अग्रदूत, बदलाव लाने वाले और नव-निर्माण के राग के रूप में देखते हैं ।
मेरा काल्पनिक बिंब: मैं बादलों को एक 'न्यायप्रिय योद्धा' के रूप में देखता हूँ, जो अपनी गर्जना से अन्यायियों को डराता है और अपनी बारिश रूपी करुणा से तपती धरती और प्यासे जीवों की रक्षा करता है। (यह जानकारी स्रोतों पर आधारित मेरी स्वतंत्र कल्पना है)।
5. कविता को प्रभावी बनाने के लिए कवि विशेषणों का सायास प्रयोग करता है जैसे- अस्थिर सुख। ... ऐसे अन्य विशेषणों को कविता से छाँटकर लिखें...
उत्तर:
निर्दय विप्लव: यह क्रांति की भयंकरता को दर्शाता है ।
दग्ध हृदय: यह संसार और आम जनता की पीड़ा और कष्टों को गहराई से व्यक्त करता है ।
रुद्ध कोष / क्षुब्ध तोष: यह शोषकों की रुकी हुई संपत्ति और उनके भीतर के असंतोष को दर्शाता है ।
जीर्ण बाहु, शीर्ण शरीर: यह विशेषण किसान की अत्यंत कमजोर, शोषित और दयनीय शारीरिक अवस्था का सजीव और मार्मिक चित्र प्रस्तुत करता है ।
पाँच वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) प्रश्न (उत्तर सहित)
प्रश्न 1. 'बादल राग' कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) तुलसीदास
(ख) सुमित्रानंदन पंत
(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
(घ) कबीरदास
उत्तर: (ग) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
प्रश्न 2. कवि ने 'बादल राग' कविता में बादल का आह्वान किस रूप में किया है?
(क) एक साधारण ऋतु के रूप में
(ख) शांतिदूत के रूप में
(ग) क्रांति के रूप में
(घ) प्रकृति के विनाशक के रूप में
उत्तर: (ग) क्रांति के रूप में
प्रश्न 3. 'रुद्ध कोष है, क्षुब्ध तोष' पंक्ति में 'रुद्ध' शब्द का क्या अर्थ है?
(क) खुला हुआ
(ख) रुका हुआ
(ग) क्रोधित
(घ) अशांत
उत्तर: (ख) रुका हुआ
प्रश्न 4. 'विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते' पंक्ति में 'छोटे' से कवि का क्या आशय है?
(क) छोटे बच्चे
(ख) शोषित वर्ग, किसान और मजदूर
(ग) छोटे जानवर
(घ) छोटी इमारतें
उत्तर: (ख) शोषित वर्ग, किसान और मजदूर
प्रश्न 5. बादलों की गर्जना सुनकर कौन अपना मुँह और आँखें ढँक लेता है?
(क) कृषक (किसान)
(ख) छोटे पौधे
(ग) धनी और शोषक वर्ग
(घ) बच्चे
उत्तर: (ग) धनी और शोषक वर्ग

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