CBSE Board class 12 micro economics ch-4

यह पाठ पूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक बाजार की स्थिति में एक फर्म के व्यवहार और उसके लाभ के अधिकतमकरण के सिद्धांतों की व्याख्या करता है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि एक प्रतिस्पर्धी बाजार में फर्म कीमत स्वीकारक होती है, जहाँ वस्तु की कीमत बाजार की शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है। लेख में कुल संप्राप्ति, औसत संप्राप्ति और सीमांत संप्राप्ति की अवधारणाओं को गणितीय सूत्रों और रेखाचित्रों के माध्यम से समझाया गया है। लाभ को अधिकतम करने के लिए फर्म को तीन मुख्य शर्तों को पूरा करना आवश्यक है, जिसमें कीमत का सीमांत लागत के बराबर होना और न्यूनतम औसत परिवर्तनीय लागत से अधिक होना शामिल है। अंत में, यह स्रोत अल्पकाल और दीर्घकाल में एक फर्म के पूर्ति वक्र के निर्धारण और उत्पादन संबंधी निर्णयों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

यहाँ इस अध्याय के अभ्यास (प्रश्नावली) में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर और पाठ पर आधारित पाँच वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) प्रश्न दिए गए हैं:


पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के उत्तर


1. एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार की क्या विशेषताएँ हैं?

पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

बाज़ार में बड़ी संख्या में क्रेता और विक्रेता होते हैं ।

प्रत्येक फर्म एकरूप (समरूप) वस्तु का उत्पादन और बिक्री करती है, जिससे किसी भी फर्म के उत्पाद में भेद नहीं किया जा सकता ।

फर्मों का बाज़ार में स्वतंत्र प्रवेश एवं बहिर्गमन होता है ।

क्रेताओं और विक्रेताओं को बाज़ार में प्रचलित कीमतों और उत्पाद की पूर्ण जानकारी होती है ।


2. एक फर्म की संप्राप्ति, बाज़ार कीमत तथा उसके द्वारा बेची गई मात्रा में क्या संबंध है?

एक फर्म की कुल संप्राप्ति वस्तु की बाज़ार कीमत (p) और फर्म द्वारा निर्गत (बेची गई मात्रा - q) का गुणनफल होती है। इसे 'कुल संप्राप्ति = p × q' के रूप में परिभाषित किया जाता है ।


3. कीमत रेखा क्या है?

कीमत रेखा बाज़ार कीमत तथा एक फर्म के निर्गत स्तर के बीच के संबंध को दर्शाती है । पूर्ण स्पर्धा के अंतर्गत यह रेखा क्षैतिज (पूर्णतः लोचदार) होती है जो y-अक्ष को बाज़ार कीमत 'p' के बराबर ऊँचाई पर काटती है ।


4. एक कीमत-स्वीकारक फर्म का कुल संप्राप्ति वक्र, ऊपर की ओर प्रवणता वाली सीधी रेखा क्यों होती है? यह वक्र उद्गम से होकर क्यों गुज़रती है?

कुल संप्राप्ति समीकरण (TR = p × q) एक सीधी रेखा को दर्शाता है क्योंकि बाज़ार कीमत (p) स्थिर रहती है। इसलिए ज्यों-ज्यों निर्गत (q) बढ़ता है, कुल संप्राप्ति आनुपातिक रूप से बढ़ती है, जिससे वक्र ऊपर की ओर जाता है । जब फर्म का निर्गत शून्य होता है, तो कुल संप्राप्ति भी शून्य होती है, इसीलिए यह वक्र उद्गम (मूल बिंदु 0) से होकर गुज़रता है ।


5. एक कीमत-स्वीकारक फर्म का बाज़ार कीमत तथा औसत संप्राप्ति में क्या संबंध है?

एक कीमत-स्वीकारक फर्म के लिए औसत संप्राप्ति (AR) बाज़ार कीमत (p) के ठीक बराबर होती है (AR = TR/q = p×q/q = p) ।


6. एक कीमत-स्वीकारक फर्म की बाज़ार कीमत तथा सीमांत संप्राप्ति में क्या संबंध है?

एक कीमत-स्वीकारक फर्म के लिए सीमांत संप्राप्ति (MR) बाज़ार कीमत (p) के बराबर होती है (MR = P) ।


7. एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार में लाभ-अधिकतमीकरण फर्म की सकारात्मक उत्पादन करने की क्या शर्तें हैं?

लाभ अधिकतम होने के लिए तीन शर्तें पूर्ण होनी चाहिए:

कीमत (p), सीमांत लागत (MC) के बराबर हो (p = MC) ।

उस निर्गत स्तर पर सीमांत लागत ह्रासमान (घटती हुई) न हो ।

अल्पकाल में कीमत औसत परिवर्ती लागत से अधिक या बराबर हो (p ≥ AVC), और दीर्घकाल में कीमत औसत लागत से अधिक या बराबर हो (p ≥ AC) ।


8. क्या प्रतिस्पर्धी बाज़ार में लाभ-अधिकतमीकरण फर्म जिसकी बाज़ार कीमत सीमांत लागत के बराबर नहीं है, उसका निर्गत का स्तर सकारात्मक हो सकता है। व्याख्या कीजिए।

नहीं, सकारात्मक स्तर पर लाभ अधिकतमीकरण के लिए आवश्यक है कि बाज़ार कीमत, सीमांत लागत के बराबर हो (P = MC) । यदि कीमत सीमांत लागत से अधिक है, तो उत्पादन बढ़ाने से लाभ बढ़ेगा और यदि कीमत सीमांत लागत से कम है तो उत्पादन कम करने से लाभ बढ़ेगा। इसलिए अधिकतम लाभ केवल P=MC पर ही होता है ।


9. क्या एक प्रतिस्पर्धी बाज़ार में कोई लाभ-अधिकतमीकरण फर्म सकारात्मक निर्गत स्तर पर उत्पादन कर सकती है, जब सीमांत लागत घट रही हो। व्याख्या कीजिए।

नहीं, लाभ अधिकतमीकरण वाले निर्गत स्तर पर सीमांत लागत वक्र की प्रवणता नीचे की ओर (घटती हुई) नहीं हो सकती । यदि सीमांत लागत घट रही है, तो इसका अर्थ है कि उत्पादन थोड़ा और बढ़ाने पर सीमांत लागत घटेगी और लाभ में वृद्धि होगी, अतः यह अधिकतम लाभ का बिंदु नहीं हो सकता ।


10. क्या अल्पकाल में प्रतिस्पर्धी बाज़ार में लाभ-अधिकतमीकरण फर्म सकारात्मक स्तर पर उत्पादन कर सकती है, यदि बाज़ार कीमत न्यूनतम औसत परिवर्ती लागत से कम है। व्याख्या कीजिए।

नहीं, अल्पकाल में एक फर्म तब तक उत्पादन जारी रखती है जब तक कीमत न्यूनतम औसत परिवर्ती लागत (AVC) से अधिक या उसके बराबर होती है । यदि बाज़ार कीमत न्यूनतम औसत परिवर्ती लागत से कम है, तो फर्म की कुल संप्राप्ति, उसकी कुल परिवर्ती लागत को भी पूरा नहीं कर पाएगी, और वह शून्य उत्पादन (उत्पादन बंद) कर देगी [11, 13-15]।


11. क्या दीर्घकाल में स्पर्धी बाज़ार में लाभ-अधिकतमीकरण फर्म सकारात्मक स्तर पर उत्पादन कर सकती है? यदि बाज़ार कीमत न्यूनतम औसत लागत से कम है, व्याख्या कीजिए।

नहीं, दीर्घकाल में फर्म तभी उत्पादन करती है जब बाज़ार कीमत न्यूनतम दीर्घकालीन औसत लागत के बराबर या उससे अधिक हो । यदि बाज़ार कीमत न्यूनतम औसत लागत से कम है, तो फर्म की कुल लागत उसकी कुल संप्राप्ति से अधिक होगी (हानि होगी), इसलिए फर्म बहिर्गमन कर जाएगी और उत्पादन शून्य होगा [16, 18-21]।


12. अल्पकाल में एक फर्म का पूर्ति वक्र क्या होती है?

अल्पकाल में फर्म का पूर्ति वक्र अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र का वह भाग होता है जो न्यूनतम औसत परिवर्ती लागत (AVC) से ऊपर उठता है। न्यूनतम AVC से कम सभी कीमतों पर पूर्ति शून्य होती है ।


13. दीर्घकाल में एक फर्म का पूर्ति वक्र क्या होती है?

दीर्घकाल में एक फर्म का पूर्ति वक्र दीर्घकालीन सीमांत लागत वक्र का वह ऊपर उठता हुआ भाग होता है, जो न्यूनतम दीर्घकालीन औसत लागत (LRAC) के बराबर या उससे ऊपर होता है। इससे कम कीमतों पर पूर्ति शून्य होती है ।


14. प्रौद्योगिकी प्रगति एक फर्म के पूर्ति वक्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?

प्रौद्योगिकी प्रगति से उत्पादन क्षमता बढ़ती है, जिससे सीमांत लागत कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप फर्म का पूर्ति वक्र दाहिनी ओर शिफ्ट हो जाता है ।


15. इकाई कर लगाने से एक फर्म के पूर्ति वक्र को किस प्रकार प्रभावित करता है?

इकाई कर (Unit tax) लगाने से फर्म की उत्पादन लागत (सीमांत और औसत दोनों) बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप फर्म का पूर्ति वक्र बाईं ओर शिफ्ट हो जाता है [25-27]।


16. किसी आगत की कीमत में वृद्धि एक फर्म के पूर्ति वक्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?

आगत (जैसे श्रम की मज़दूरी) की कीमत में वृद्धि से उत्पादन की सीमांत लागत बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप पूर्ति वक्र बाईं ओर शिफ्ट हो जाता है ।


18. पूर्ति की कीमत लोच का क्या अर्थ है? हम इसे कैसे मापते हैं?

पूर्ति की कीमत लोच का अर्थ है वस्तु की कीमत में परिवर्तनों के कारण वस्तु की पूर्ति की गई मात्रा में होने वाली अनुक्रियाशीलता । इसे निम्नलिखित सूत्र से मापा जाता है:

पूर्ति की कीमत लोच ($e_s$) = ($\Delta Q / \Delta P$) × ($P / Q$) (जहाँ $Q$ पूर्ति की मात्रा और $P$ कीमत है) ।


संख्यात्मक प्रश्न (19 से 27 के हल)


19. (कीमत P = 10 रुपये)

मात्रा (Q): 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6

कुल संप्राप्ति (TR = P×Q): 0, 10, 20, 30, 40, 50, 60

सीमांत संप्राप्ति (MR): -, 10, 10, 10, 10, 10, 10

औसत संप्राप्ति (AR = TR/Q): -, 10, 10, 10, 10, 10, 10


20.

लाभ (कुल संप्राप्ति - कुल लागत): -5, -2, 0, 3, 5, 2, -3, -5

बाज़ार कीमत (कुल संप्राप्ति / मात्रा) = 5 रुपये


21. (कीमत P = 10 रुपये)

लाभ (10×Q - कुल लागत): -5, -5, -2, 3, 9, 12, 11, 7, -1, -11, -23

अधिकतम लाभ = 12 रुपये, जो निर्गत स्तर 5 इकाइयों पर प्राप्त होता है।


22. बाज़ार पूर्ति अनुसूची (SS1 + SS2 का योग)

बाज़ार पूर्ति: 0, 0, 0, 2, 4, 6, 8


23. बाज़ार पूर्ति (SS1 + SS2 का योग)

बाज़ार पूर्ति: 0, 0, 0, 1, 2.5, 4, 5.5, 7, 8.5


24. तीन समरूप फर्मों की बाज़ार पूर्ति (3 × फर्म-1 की पूर्ति)

बाज़ार पूर्ति: 0, 0, 6, 12, 18, 24, 30, 36, 42


25.

$P_1$ = 10, $TR_1$ = 50 ➔ $Q_1$ = 5

$P_2$ = 15, $TR_2$ = 150 ➔ $Q_2$ = 10

पूर्ति की कीमत लोच ($e_s$) = ($\Delta Q / \Delta P$) × ($P_1 / Q_1$) = (5 / 5) × (10 / 5) = 2


26.

$\Delta P$ = 20 - 5 = 15; $\Delta Q$ = 15; $e_s$ = 0.5

0.5 = (15 / 15) × (5 / $Q_1$) ➔ 0.5 = 5 / $Q_1$ ➔ आरंभिक निर्गत ($Q_1$) = 10 इकाइयाँ

अंतिम निर्गत ($Q_2$) = 10 + 15 = 25 इकाइयाँ


27.

$P_1$ = 10, $Q_1$ = 4; $\Delta P$ = 30 - 10 = 20; $e_s$ = 1.25

1.25 = ($\Delta Q$ / 20) × (10 / 4) ➔ $\Delta Q$ = 10

नई कीमत पर पूर्ति ($Q_2$) = 4 + 10 = 14 इकाइयाँ


---


पाँच वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न और उनके उत्तर


प्रश्न 1: पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार में फर्म का माँग वक्र (Demand Curve) कैसा होता है?

A) नीचे की ओर ढलान वाला

B) पूर्णतः बेलोचदार (ऊर्ध्वाधर सीधी रेखा)

C) पूर्णतः लोचदार (क्षैतिज सीधी रेखा)

D) ऊपर की ओर ढलान वाला

उत्तर: C) पूर्णतः लोचदार (क्षैतिज सीधी रेखा)


प्रश्न 2: एक कीमत-स्वीकारक (Price-Taker) फर्म के लिए 'औसत संप्राप्ति' (Average Revenue - AR) किसके बराबर होती है?

A) कुल लागत (Total Cost)

B) बाज़ार कीमत (Market Price)

C) कुल संप्राप्ति (Total Revenue)

D) सीमांत लागत (Marginal Cost)

उत्तर: B) बाज़ार कीमत (Market Price)


प्रश्न 3: अल्पकाल (Short Run) में कोई लाभ-अधिकतमीकरण फर्म उत्पादन तभी जारी रखती है, जब बाज़ार कीमत कम से कम किसके बराबर या उससे अधिक हो?

A) न्यूनतम औसत परिवर्ती लागत (Minimum AVC)

B) कुल स्थिर लागत (Total Fixed Cost)

C) न्यूनतम औसत कुल लागत (Minimum ATC)

D) सीमांत संप्राप्ति (Marginal Revenue)

उत्तर: A) न्यूनतम औसत परिवर्ती लागत (Minimum AVC)


प्रश्न 4: किसी फर्म के उत्पादन में 'प्रौद्योगिकी प्रगति' (Technological Progress) होने पर उसके पूर्ति वक्र (Supply Curve) पर क्या प्रभाव पड़ता है?

A) पूर्ति वक्र बाईं ओर शिफ्ट हो जाता है

B) पूर्ति वक्र दाहिनी ओर (नीचे की ओर) शिफ्ट हो जाता है

C) पूर्ति वक्र ऊर्ध्वाधर हो जाता है

D) पूर्ति वक्र में कोई बदलाव नहीं होता

उत्तर: B) पूर्ति वक्र दाहिनी ओर (नीचे की ओर) शिफ्ट हो जाता है


प्रश्न 5: सरकार द्वारा फर्म के उत्पाद पर 'इकाई कर' (Unit Tax) लगाने का पूर्ति वक्र पर क्या प्रभाव पड़ता है?

A) पूर्ति वक्र दाहिनी ओर शिफ्ट हो जाता है

B) पूर्ति वक्र क्षैतिज हो जाता है

C) पूर्ति वक्र नीचे की ओर खिसकता है

D) पूर्ति वक्र बाईं ओर शिफ्ट हो जाता है

उत्तर: D) पूर्ति वक्र बाईं ओर शिफ्ट हो जाता है

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट