CBSE Board class 12 micro economics ch-5
प्रस्तुत पाठ पूर्ण प्रतिस्पर्धा के अंतर्गत बाज़ार संतुलन की अवधारणा का विस्तृत विवरण प्रदान करता है। इसमें समझाया गया है कि किस प्रकार मांग और पूर्ति की शक्तियाँ मिलकर एक ऐसी साम्यावस्था स्थापित करती हैं, जहाँ खरीदारों की इच्छा और विक्रेताओं की योजनाएँ एक समान हो जाती हैं। लेखक ने संतुलन कीमत और मात्रा के निर्धारण को रेखाचित्रों और गणितीय उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया है, जिसमें अधि-मांग और अधि-पूर्ति जैसी स्थितियों का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह स्रोत श्रम बाज़ार में मजदूरी के निर्धारण और मांग-पूर्ति वक्रों में आने वाले बदलावों के प्रभावों पर भी प्रकाश डालता है। अंततः, एडम स्मिथ के 'अदृश्य हाथ' के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए यह बताया गया है कि बाज़ार स्वयं को असंतुलन से संतुलन की ओर कैसे ले जाता है।
पाठ में दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
1. बाज़ार संतुलन की व्याख्या कीजिए।
संतुलन एक ऐसी स्थिति है जहाँ बाज़ार में सभी उपभोक्ताओं तथा फर्मों की योजनाएँ सुमेलित हो जाती हैं और बाज़ार रिक्त हो जाता है, अर्थात् बाज़ार पूर्ति, बाज़ार माँग के बराबर होती है ।
2. हम कब कहते हैं कि बाज़ार में किसी वस्तु के लिए अधिमाँग है?
जब किसी दी गई कीमत पर बाज़ार माँग, बाज़ार पूर्ति से अधिक होती है, तो उसे बाज़ार में अधिमाँग कहा जाता है ।
3. हम कब कहते हैं कि बाज़ार में किसी वस्तु के लिए अधिपूर्ति है?
जब किसी दी गई कीमत पर बाज़ार पूर्ति, बाज़ार माँग से अधिक होती है, तो उसे बाज़ार में अधिपूर्ति कहा जाता है ।
4. क्या होगा यदि बाज़ार में प्रचलित मूल्य है? (a) संतुलन कीमत से अधिक (b) संतुलन कीमत से कम
(a) यदि कीमत संतुलन कीमत से अधिक है, तो बाज़ार में अधिपूर्ति होगी ।
(b) यदि कीमत संतुलन कीमत से कम है, तो बाज़ार में अधिमाँग होगी ।
5. फर्मों की एक स्थिर संख्या के होने पर पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार में कीमत का निर्धारण किस प्रकार होता है?
फर्मों की स्थिर संख्या होने पर बाज़ार संतुलन कीमत उस बिंदु पर निर्धारित होती है, जहाँ बाज़ार माँग वक्र और बाज़ार पूर्ति वक्र एक-दूसरे को प्रतिच्छेदित (काटते) करते हैं ।
6 & 7. निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन की अनुमति होने पर फर्में कीमत के किस स्तर पर पूर्ति करती हैं और संतुलन मात्रा कैसे निर्धारित होती है?
जब निर्बाध प्रवेश और बहिर्गमन होता है, तो कोई भी फर्म न तो अधिसामान्य लाभ कमाती है और न ही हानि उठाती है। इसलिए, संतुलन कीमत हमेशा फर्मों की न्यूनतम औसत लागत के बराबर होती है ($p = \text{न्यूनतम औसत लागत}$) [4-6]। इसी कीमत पर बाज़ार माँग द्वारा यह निर्धारित होता है कि बाज़ार में संतुलन मात्रा कितनी होगी ।
8. फर्मों की संतुलन संख्या किस प्रकार निर्धारित होती है?
फर्मों की संतुलन संख्या ($n_0$) ज्ञात करने के लिए, कुल संतुलन मात्रा ($q_0$) को एक अकेली फर्म की पूर्ति मात्रा ($q_{0f}$) से भाग दिया जाता है ($n_0 = q_0 / q_{0f}$) ।
9. उपभोक्ताओं की आय में (a) वृद्धि (b) कमी का संतुलन पर प्रभाव:
(a) आय में वृद्धि होने पर (सामान्य वस्तु के लिए) माँग वक्र दायीं ओर शिफ्ट हो जाता है, जिससे संतुलन कीमत तथा मात्रा दोनों में वृद्धि होती है ।
(b) आय में कमी होने पर माँग वक्र बायीं ओर शिफ्ट होगा, जिससे संतुलन कीमत और मात्रा दोनों घटेंगी ।
10, 11 & 13. संबंधित वस्तुओं (जूते-मोजे, कॉफी-चाय, स्थानापन्न वस्तुएं x और y) की कीमतों में परिवर्तन का प्रभाव:
स्रोतों के अनुसार संबंधित वस्तुओं की कीमत बदलने पर माँग वक्र शिफ्ट होता है ।
यदि वस्तु x की स्थानापन्न वस्तु (y) की कीमत बढ़ती है (जैसे कॉफी की कीमत बढ़ना), तो लोग वस्तु x (जैसे चाय) की अधिक माँग करेंगे। इससे वस्तु x का माँग वक्र दायीं ओर शिफ्ट होगा और संतुलन कीमत तथा मात्रा दोनों में वृद्धि होगी । जूते और मोजे पूरक हैं, जूतों की कीमत बढ़ने पर मोजों की माँग बायीं ओर शिफ्ट होगी, जिससे मोजों की कीमत और मात्रा घटेगी ।
12. उत्पादन में प्रयुक्त आगतों की कीमतों में परिवर्तन का प्रभाव:
आगत की कीमत में वृद्धि होने से फर्मों की सीमांत लागत बढ़ जाती है, जिससे पूर्ति वक्र बायीं ओर शिफ्ट हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप बाज़ार कीमत में वृद्धि होती है तथा उत्पादित मात्रा कम हो जाती है ।
14. स्थिर फर्मों vs निर्बाध प्रवेश/बहिर्गमन की स्थिति में माँग वक्र के स्थानांतरण का प्रभाव:
स्थिर फर्मों की स्थिति में माँग वक्र के शिफ्ट होने से संतुलन कीमत और मात्रा दोनों में परिवर्तन होता है । परंतु निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन वाले बाज़ार में, संतुलन कीमत हमेशा न्यूनतम औसत लागत के बराबर होने के कारण अपरिवर्तित रहती है, और सारा प्रभाव केवल संतुलन मात्रा और फर्मों की संख्या पर (समान दिशा में) पड़ता है ।
15 & 16. माँग तथा पूर्ति वक्र दोनों के एक साथ शिफ्ट होने का प्रभाव:
(a) समान दिशा में (जैसे दोनों दायीं ओर): संतुलन मात्रा निश्चित रूप से बढ़ती है, लेकिन कीमत में वृद्धि, कमी या स्थिरता दोनों वक्रों के शिफ्ट के परिमाण पर निर्भर करती है ।
(b) विपरीत दिशा में (जैसे माँग बायीं ओर, पूर्ति दायीं ओर): संतुलन कीमत निश्चित रूप से घटती है, लेकिन मात्रा पर प्रभाव शिफ्ट के परिमाण पर निर्भर करता है ।
17. वस्तु बाज़ार और श्रम बाज़ार के माँग और पूर्ति वक्र में भिन्नता:
वस्तुओं के बाज़ार में माँग उपभोक्ताओं द्वारा और पूर्ति फर्मों द्वारा की जाती है। इसके विपरीत, श्रम बाज़ार में श्रम की पूर्ति घर-परिवार (श्रमिक) करते हैं तथा श्रम की माँग फर्मों द्वारा की जाती है ।
18 & 19. श्रम बाज़ार में मज़दूरी और इष्टतम मात्रा का निर्धारण:
मज़दूरी दर उस बिंदु पर निर्धारित होती है जहाँ श्रम माँग और श्रम पूर्ति वक्र एक-दूसरे को प्रतिच्छेदित करते हैं । फर्म इष्टतम श्रम का उपयोग उस बिंदु तक करती है जहाँ श्रम का सीमांत संप्राप्ति उत्पाद, मज़दूरी दर (w) के बराबर होता है ।
20. भारत में उच्चतम निर्धारित कीमत के उदाहरण और परिणाम:
सरकार आवश्यक वस्तुओं जैसे गेहूँ, चावल, मिट्टी का तेल, चीनी आदि पर उच्चतम कीमत निर्धारित करती है । चूँकि यह कीमत संतुलन कीमत से कम होती है, इसके परिणामस्वरूप बाज़ार में अधिमाँग (Shortage) उत्पन्न होती है। इससे निपटने के लिए सरकार को राशन व्यवस्था लागू करनी पड़ती है, उपभोक्ताओं को लंबी कतारों में लगना पड़ता है और कालाबाज़ारी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
22. 15 रुपये से कम पर वस्तु x की बाज़ार पूर्ति शून्य क्यों है?
क्योंकि निर्बाध प्रवेश/बहिर्गमन की स्थिति में फर्में न्यूनतम औसत लागत से कम कीमत पर उत्पादन नहीं करेंगी, अन्यथा उन्हें हानि होगी । अतः 15 रुपये फर्म की न्यूनतम औसत लागत है।
23. गणीतीय प्रश्न का हल:
(a) $p = 20$ फर्म की न्यूनतम औसत लागत को दर्शाता है ।
(b) निर्बाध प्रवेश के कारण बाज़ार में संतुलन कीमत हमेशा न्यूनतम औसत लागत के बराबर यानी 20 रुपये होगी ।
(c) संतुलन मात्रा: $q^D = 700 - 20 = 680$ इकाइयाँ। एक फर्म की पूर्ति: $q_{0f} = 8 + 3(20) = 68$ इकाइयाँ। फर्मों की संख्या: $680 / 68 = 10$ फर्में ।
24. गणीतीय प्रश्न का हल (नमक बाज़ार):
(a) $1000 - p = 700 + 2p \Rightarrow 3p = 300 \Rightarrow p=100$ (कीमत)। संतुलन मात्रा $q=900$ [31-33]।
(b) आगत महँगी होने पर नया पूर्ति वक्र: $400 + 2p = 1000 - p \Rightarrow 3p = 600 \Rightarrow p=200, q=800$। आगत महँगी होने से संतुलन कीमत बढ़ गई और मात्रा घट गई ।
25. अपार्टमेंट के लिए किराया नियंत्रण का प्रभाव:
किराया नियंत्रण 'उच्चतम निर्धारित कीमत' का एक रूप है जो संतुलन कीमत से नीचे तय किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप अपार्टमेंट के बाज़ार में अधिमाँग उत्पन्न होगी, अर्थात् रहने के लिए घर ढूँढने वालों की संख्या उपलब्ध अपार्टमेंट्स से बहुत अधिक हो जाएगी और लोगों को घर मिलने में कठिनाई होगी ।
पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर और विकल्पों के साथ):
प्रश्न 1. बाज़ार संतुलन की स्थिति में निम्नलिखित में से क्या होता है?
(A) बाज़ार माँग, बाज़ार पूर्ति से अधिक होती है
(B) बाज़ार पूर्ति, बाज़ार माँग से अधिक होती है
(C) बाज़ार माँग, बाज़ार पूर्ति के बराबर होती है
(D) बाज़ार में फर्मों की संख्या शून्य हो जाती है
उत्तर: (C) बाज़ार माँग, बाज़ार पूर्ति के बराबर होती है ।
प्रश्न 2. यदि बाज़ार में प्रचलित कीमत 'संतुलन कीमत' से कम है, तो बाज़ार में कौन सी स्थिति उत्पन्न होगी?
(A) अधिपूर्ति (Excess Supply)
(B) अधिमाँग (Excess Demand)
(C) शून्य माँग (Zero Demand)
(D) संतुलन (Equilibrium)
उत्तर: (B) अधिमाँग (Excess Demand) ।
प्रश्न 3. निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन वाले पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार में संतुलन कीमत हमेशा किसके बराबर होती है?
(A) फर्मों की अधिकतम औसत लागत
(B) फर्मों की कुल लागत
(C) फर्मों की न्यूनतम औसत लागत
(D) फर्मों की सीमांत संप्राप्ति
उत्तर: (C) फर्मों की न्यूनतम औसत लागत ।
प्रश्न 4. सरकार द्वारा आवश्यक वस्तुओं (जैसे गेहूँ, चावल) को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए बाज़ार कीमत से कम पर जो ऊपरी सीमा तय की जाती है, उसे क्या कहते हैं?
(A) न्यूनतम निर्धारित कीमत (Price Floor)
(B) उच्चतम निर्धारित कीमत (Price Ceiling)
(C) बाज़ार संतुलन कीमत
(D) एकाधिकार कीमत
उत्तर: (B) उच्चतम निर्धारित कीमत (Price Ceiling) ।
प्रश्न 5. श्रम बाज़ार और वस्तु बाज़ार में मुख्य अंतर क्या है?
(A) श्रम बाज़ार में परिवार माँग करते हैं और फर्में पूर्ति करती हैं
(B) श्रम बाज़ार में परिवार पूर्ति करते हैं और फर्में माँग करती हैं
(C) दोनों बाज़ारों में फर्में ही पूर्ति करती हैं
(D) दोनों बाज़ारों में सरकार पूर्ति करती है
उत्तर: (B) श्रम बाज़ार में परिवार पूर्ति करते हैं और फर्में माँग करती हैं ।

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