Ncert class 5 Hindi- chapter 22- परीक्षा
Ncert class 5 Hindi- chapter 22- परीक्षा यह कथा आचार्य चरक द्वारा अपने शिष्यों की बुद्धिमत्ता और धैर्य की ली गई एक कठिन परीक्षा का वर्णन करती है। गुरु ने अपने शिष्यों को जंगल से ऐसी वनस्पतियाँ लाने को कहा जिनका कोई औषधीय उपयोग न हो। जहाँ अधिकांश विद्यार्थी बेकार समझकर घास-फूस और जहरीले फल ले आए, वहीं एक शिष्य खाली हाथ लौटा क्योंकि उसे कोई भी पौधा अनुपयोगी नहीं मिला। आचार्य ने उसी शिष्य को सफल घोषित किया क्योंकि वह समझ गया था कि प्रकृति की हर वस्तु मूल्यवान है। यह कहानी हमें सिखाती है कि आयुर्वेद में अज्ञानता के कारण ही हमें कोई वस्तु व्यर्थ लगती है, अन्यथा प्रकृति का हर अंश जीवन रक्षक गुणों से भरपूर है। केवल वही व्यक्ति एक सच्चा वैद्य बन सकता है जो सूक्ष्म दृष्टि और अटूट साहस रखता हो। कहानी का संक्षेपण: यह कहानी महान आयुर्वेद विद्वान आचार्य चरक द्वारा अपने शिष्यों की ली गई एक अनूठी परीक्षा के बारे में है। कहानी का संक्षेपण निम्नलिखित है: आचार्य चरक अपने शिष्यों को घने जंगल में जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों का गहन ज्ञान देते थे। वे मानते थे कि एक वैद्य को निडर होना चाहिए, क्योंकि उ...