CBSE Board class 9 history ch-4

यह पाठ NCERT की कक्षा 9 की इतिहास पुस्तक का एक अंश है, जो मुख्य रूप से वनों, समाज और उपनिवेशवाद के अंतर्संबंधों पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि कैसे औपनिवेशिक शासन के दौरान जहाजों और रेलवे के विस्तार के लिए जंगलों की अंधाधुंध कटाई की गई, जिससे पारिस्थितिकी और स्थानीय समुदायों पर गहरा प्रभाव पड़ा। स्रोत यह स्पष्ट करते हैं कि अंग्रेजों ने 'वैज्ञानिक वानिकी' के नाम पर प्राकृतिक विविधता को नष्ट कर केवल व्यावसायिक रूप से उपयोगी पेड़ों को बढ़ावा दिया। इसके कारण आदिवासियों और चरवाहों की पारंपरिक जीवनशैली बाधित हुई, क्योंकि नए वन कानूनों ने उनके जंगलों में प्रवेश और संसाधनों के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। अंततः, यह लेख भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों में वन प्रबंधन के बदलते स्वरूप और उसके विरुद्ध हुए जन विद्रोहों का एक ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करता है।

इस पाठ में दिए गए मुख्य अभ्यास प्रश्नों और क्रियाकलापों के उत्तर नीचे दिए गए हैं, और उसके बाद आपके लिए पाँच वस्तुनिष्ठ (Multiple Choice) प्रश्न भी तैयार किए गए हैं।


पाठ के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर


प्रश्न 1: औपनिवेशिक काल के वन प्रबंधन में आए परिवर्तनों ने इन समूहों को कैसे प्रभावित किया:

झूम खेती करने वालों को: औपनिवेशिक वनरक्षकों की नज़र में झूम (घुमंतू) खेती का तरीका जंगलों के लिए नुकसानदेह था । उनका मानना था कि इससे रेलवे के लिए इमारती लकड़ी वाले पेड़ नहीं उगाए जा सकेंगे और जंगल में आग फैलने का खतरा रहता है । इसलिए सरकार ने झूम खेती पर रोक लगा दी, जिसके परिणामस्वरूप अनेक समुदायों को जंगलों से जबरन विस्थापित कर दिया गया, कुछ को अपना पेशा बदलना पड़ा और कुछ ने विद्रोह कर दिया ।

घुमंतू और चरवाहा समुदायों को: नए वन कानूनों के तहत स्थानीय लोगों द्वारा शिकार करने और पशुओं को चराने पर बंदिशें लगा दी गईं । मद्रास प्रेसीडेंसी के कोरावा, कराचा और येरुुकुला जैसे कई चरवाहे और घुमंतू समुदाय अपनी आजीविका से हाथ धो बैठे । इनमें से कुछ को 'अपराधी कबीले' कहा जाने लगा और वे सरकार की निगरानी में फैक्टरियों या खदानों में काम करने को मजबूर हो गए ।

लकड़ी और वन-उत्पादों का व्यापार करने वाली कंपनियों को: अंग्रेज़ों के आने के बाद वन-उत्पादों का व्यापार पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में आ गया । ब्रिटिश सरकार ने कई बड़ी यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों को विशेष इलाकों में वन-उत्पादों के व्यापार का एकाधिकार (इज़ारेदारी) सौंप दिया, जिससे इन कंपनियों को भारी मुनाफ़ा हुआ ।

बागान मालिकों को: यूरोप में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्राकृतिक वनों के विशाल हिस्सों को साफ कर दिया गया और औपनिवेशिक सरकार ने ये ज़मीनें बहुत सस्ती दरों पर यूरोपीय बागान मालिकों को सौंप दीं । इन इलाकों की बाड़ाबंदी करके चाय, कॉफ़ी और रबर के बागान विकसित किए गए ।

शिकार खेलने वाले राजाओं और अंग्रेज़ अफ़सरों को: वन कानूनों ने जहाँ आम लोगों को शिकार के परंपरागत अधिकार से वंचित किया, वहीं राजाओं और अंग्रेज़ अफ़सरों के लिए बड़े जानवरों का आखेट (शिकार) एक 'खेल' बन गया । अंग्रेज़ों का मानना था कि खतरनाक जानवरों को मारकर वे हिंदुस्तान को सभ्य बनाएंगे । बाघों और भेड़ियों को मारने पर इनाम दिए गए और अकेले जॉर्ज यूल नामक अंग्रेज़ अफ़सर ने 400 बाघों को मारा था ।


प्रश्न 2: बस्तर और जावा के औपनिवेशिक वन प्रबंधन में क्या समानताएँ हैं?

बस्तर (भारत) और जावा (इंडोनेशिया) के औपनिवेशिक वन प्रबंधन में निम्नलिखित समानताएँ थीं:

जहाज़ और रेलवे के लिए लकड़ी: दोनों ही जगहों पर औपनिवेशिक ताकतों (भारत में अंग्रेज़ और जावा में डच) को जहाज़ बनाने और रेलवे के लिए मज़बूत लकड़ी की ज़रूरत थी।

वैज्ञानिक वानिकी और वन कानून: दोनों जगहों पर वन प्रबंधन के लिए वन-सेवाएँ शुरू की गईं और ग्रामीणों की जंगल तक पहुँच को सीमित करने के लिए कठोर वन-कानून लागू किए गए ।

मुफ्त श्रम की व्यवस्था: बस्तर में कुछ गाँवों को इस शर्त पर आरक्षित वनों में रहने दिया गया कि वे वन विभाग के लिए पेड़ों की कटाई और ढुलाई का काम मुफ्त में करेंगे (जिन्हें 'वन ग्राम' कहा गया) । जावा में भी डचों ने 'ब्लैंडॉन्गडिएन्स्ट' (Blandongdiensten) नाम की बिल्कुल ऐसी ही व्यवस्था लागू की, जहाँ कर-माफी के बदले ग्रामीणों से मुफ्त श्रम लिया जाता था ।

विद्रोह: दोनों स्थानों पर स्थानीय समुदायों ने इन दमनकारी नीतियों का कड़ा विरोध किया। बस्तर में 1910 में गुंडा धूर के नेतृत्व में विद्रोह हुआ , और जावा में सुरोन्तिको सामीन ने वनों पर राजकीय मालिकाने पर सवाल खड़ा करते हुए आंदोलन किया ।


प्रश्न 3: सन् 1880 से 1920 के बीच वनाच्छादित क्षेत्र में 97 लाख हेक्टेयर की गिरावट आयी। इस गिरावट में निम्नलिखित कारकों की भूमिका बताएँ:

रेलवे: 1850 के दशक से रेलवे के प्रसार ने लकड़ी की भारी मांग पैदा की। इंजनों में ईंधन के लिए और पटरियों को जोड़े रखने के लिए स्लीपरों के रूप में लकड़ी चाहिए थी। एक मील लंबी पटरी के लिए 1760-2000 स्लीपरों की आवश्यकता होती थी, जिसके लिए अंधाधुंध पेड़ काटे गए ।

जहाज़ निर्माण: 1820 के दशक तक इंग्लैंड में ओक के जंगल लुप्त होने लगे थे, जिससे शाही नौसेना के लिए लकड़ी की कमी हो गई। इसके बाद भारत से भारी मात्रा में लकड़ी का निर्यात शुरू हो गया ।

कृषि-विस्तार: औपनिवेशिक सरकार जंगलों को अनुत्पादक मानती थी । बढ़ती आबादी का पेट भरने और राजस्व (Tax) बढ़ाने के लिए सरकार ने खेती की सीमाओं का तेज़ी से विस्तार किया और जंगलों को साफ करवाया ।

व्यावसायिक खेती: यूरोप में खाद्यान्न और उद्योगों के लिए कच्चे माल की ज़रूरत को पूरा करने के लिए जूट, कपास और गन्ने जैसी व्यावसायिक फसलों की मांग बढ़ी, जिसके लिए जंगलों को काटा गया ।

चाय-कॉफ़ी के बागान: औपनिवेशिक सरकार ने चाय, कॉफ़ी और रबर की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जंगलों के विशाल हिस्सों को साफ़ करके सस्ते दामों पर यूरोपीय बागान मालिकों को दे दिया ।

आदिवासी और किसान: आदिवासी और किसान अपनी आजीविका और ईंधन के लिए लकड़ी पर निर्भर थे । वे पारंपरिक रूप से 'झूम खेती' (Shifting Cultivation) करते थे जिसमें जंगल के कुछ हिस्सों को बारी-बारी से काटा और जलाया जाता था । हालाँकि, वन-विनाश में इनकी भूमिका औपनिवेशिक नीतियों की तुलना में बहुत कम थी।


प्रश्न 4: युद्धों से जंगल क्यों प्रभावित होते हैं?

पहले और दूसरे विश्वयुद्ध का जंगलों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा । भारत में वन विभाग ने युद्ध की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपनी कार्ययोजनाओं को स्थगित कर दिया और बेतहाशा पेड़ काटे । जावा में डचों ने जापानियों के कब्ज़े से पहले 'भस्म-कर-भागो नीति' (Scorched Earth Policy) अपनाई और सागौन के विशाल लट्ठों और आरा-मशीनों को जला दिया ताकि वे जापानियों के हाथ न लगें । इसके बाद जापानियों ने भी अपने युद्ध उद्योगों के लिए वनवासियों को जंगल काटने के लिए मजबूर किया और जंगलों का निर्मम दोहन किया ।


पाठ के अंतर्गत दिए गए क्रियाकलाप (Activity) के प्रश्न:

प्रश्न: जहाँ आप रहते हैं क्या वहाँ के जंगली इलाकों में कोई बदलाव आए हैं?

(यह आपके स्थानीय क्षेत्र पर निर्भर करता है, लेकिन एक सामान्य उत्तर इस प्रकार है) हाँ, बढ़ती आबादी की ज़रूरतों, खेती के विस्तार, और कारखानों तथा सड़कों के निर्माण के कारण हमारे आस-पास के जंगली इलाकों में भारी कमी आई है ।

प्रश्न: एक औपनिवेशिक वनपाल और एक आदिवासी के बीच जंगल में शिकार करने के मसले पर होने वाली बातचीत के संवाद लिखें।

वनपाल: तुम इस जंगल में क्या कर रहे हो? क्या तुम्हें नहीं पता कि वन कानूनों के तहत शिकार करना अब गैर-कानूनी है?

आदिवासी: साहब, हमारे पास खाने को कुछ नहीं है। हम पीढ़ियों से हिरन और तीतर जैसे छोटे जानवरों का शिकार करके अपना गुज़ारा करते आए हैं।

वनपाल: तुम्हें यह अधिकार अब नहीं है। पकड़े जाने पर तुम्हें अवैध शिकार के लिए दंडित किया जाएगा। अब बड़े जानवरों का शिकार केवल राजा और अँगरेज़ अफ़सर ही खेल के रूप में करेंगे।


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पाँच वस्तुनिष्ठ (Multiple Choice) प्रश्न (उत्तर सहित)


प्रश्न 1: भारत का पहला वन महानिदेशक (Inspector General of Forests) किसे नियुक्त किया गया था?

A. जॉर्ज यूल

B. डायट्रिच ब्रैंडिस

C. रिचर्ड हार्डिंग

D. डेविड स्पैंर

उत्तर: B. डायट्रिच ब्रैंडिस


प्रश्न 2: 1910 में बस्तर में अंग्रेज़ों के खिलाफ हुए विद्रोह का एक प्रमुख नेता किसे माना जाता है?

A. अल्लूरी सीताराम राजू

B. बिरसा मुंडा

C. गुंडा धूर

D. सिद्धू और कानू

उत्तर: C. गुंडा धूर


प्रश्न 3: जावा में डचों द्वारा लागू की गई 'ब्लैंडॉन्गडिएन्स्ट' (Blandongdiensten) व्यवस्था क्या थी?

A. चाय और कॉफ़ी के बागानों में खेती करने की प्रणाली

B. वन-ग्रामों को मुफ्त श्रम के बदले लगान-माफी देने की व्यवस्था

C. रेलवे ट्रैक बिछाने के लिए मज़दूरों की भर्ती

D. शिकार करने के लिए लाइसेंस देने की प्रक्रिया

उत्तर: B. वन-ग्रामों को मुफ्त श्रम के बदले लगान-माफी देने की व्यवस्था


प्रश्न 4: औपनिवेशिक काल में एक मील लंबी रेल की पटरी बिछाने के लिए लगभग कितने 'स्लीपरों' की आवश्यकता होती थी?

A. 1760 से 2000

B. 1000 से 1500

C. 500 से 1000

D. 2000 से 3000

उत्तर: A. 1760 से 2000


प्रश्न 5: औपनिवेशिक वन विभाग द्वारा शुरू की गई 'वैज्ञानिक वानिकी' (Scientific Forestry) में क्या किया जाता था?

A. जंगल के सभी पुराने पेड़ों को हमेशा के लिए संरक्षित किया जाता था।

B. विविध प्रजातियों वाले प्राकृतिक वनों को काटकर सीधी पंक्ति में एक ही किस्म के पेड़ लगाए जाते थे।

C. जंगलों को पूरी तरह से आदिवासियों के नियंत्रण में सौंप दिया जाता था।

D. केवल जड़ी-बूटियों और फलदार पेड़ों की खेती की जाती थी।

उत्तर: B. विविध प्रजातियों वाले प्राकृतिक वनों को काटकर सीधी पंक्ति में एक ही किस्म के पेड़ लगाए जाते थे।

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