CBSE Board class 12 Hindi antral ch-3
यह पाठ प्रभाष जोशी द्वारा रचित है, जिसमें मालवा प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, वहां की नदियों और सांस्कृतिक वैभव का सजीव चित्रण किया गया है। लेखक ने आधुनिक औद्योगिक विकास को "खाऊ-उजाड़ू सभ्यता" की संज्ञा दी है, जिसके कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है और सदियों पुरानी नदियाँ अब नालों में तब्दील हो रही हैं। वे बताते हैं कि कैसे मालवा की धरती पहले अपनी प्रचुरता और जल प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध थी, लेकिन अब पश्चिमी जीवनशैली के अंधानुकरण ने इसे विनाश की कगार पर खड़ा कर दिया है। इसमें नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल जैसी नदियों की वर्तमान स्थिति के माध्यम से वैश्विक तापन और पारिस्थितिक संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। इस आलेख का मुख्य उद्देश्य पाठकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देना है। यह रचना विकास के नाम पर हो रहे विनाश और प्रकृति के साथ हमारे बदलते संबंधों का एक गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यहाँ पाठ में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न उनके विकल्पों और उत्तरों के साथ दिए गए हैं: पाठ के अभ्यास प्रश्नों...