CBSE Board class 11 physics ch-5 work, energy and power
यह पाठ कक्षा 11 की भौतिकी के पांचवें अध्याय पर आधारित है, जो कार्य, ऊर्जा और शक्ति की अवधारणाओं को विस्तार से समझाता है। इसमें दैनिक जीवन की तुलना में भौतिक विज्ञान के नजरिए से कार्य की सटीक परिभाषा दी गई है और अदिश गुणनफल जैसे गणितीय आधारों पर चर्चा की गई है। स्रोत में कार्य-ऊर्जा प्रमेय का विश्लेषण किया गया है, जो यह दर्शाता है कि किसी वस्तु पर किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है। इसके अतिरिक्त, इसमें स्थितिज ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण और स्प्रिंग बल जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों को विभिन्न उदाहरणों और चित्रों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है। पाठ में संरक्षी और असंरक्षी बलों के बीच के अंतर को भी रेखांकित किया गया है। अंततः, यह सामग्री भौतिकी के इन मूलभूत नियमों को समझने के लिए एक व्यापक शैक्षणिक ढांचा प्रदान करती है।
पाठ 5: कार्य, ऊर्जा और शक्ति के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
यहाँ पाठ्यपुस्तक के अभ्यास (Exercises) में दिए गए मुख्य वैचारिक और सैद्धांतिक प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं (ध्यान दें कि कुछ संख्यात्मक प्रश्नों के लिए चित्र या ग्राफ़ की आवश्यकता होती है जो पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए यहाँ उन प्रश्नों को प्राथमिकता दी गई है जिन्हें पाठ के आधार पर स्पष्ट रूप से समझाया जा सकता है):
5.1 कार्य का चिह्न (धनात्मक या ऋणात्मक):
(a) कुएँ से बाल्टी निकालते समय व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य धनात्मक है, क्योंकि व्यक्ति द्वारा लगाया गया बल और बाल्टी का विस्थापन दोनों एक ही दिशा (ऊपर की ओर) में हैं।
(b) इस स्थिति में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक है, क्योंकि गुरुत्वीय बल नीचे की ओर लगता है जबकि विस्थापन ऊपर की ओर हो रहा है (कोण $180^\circ$ है)।
(c) आनत तल पर फिसलती वस्तु पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक है, क्योंकि घर्षण बल हमेशा वस्तु की गति (विस्थापन) की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
(d) खुरदरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिमान वस्तु पर लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक है, क्योंकि लगाया गया बल वस्तु के विस्थापन की दिशा में ही कार्य कर रहा है।
(e) दोलायमान लोलक को रोकने के लिए वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक है, क्योंकि प्रतिरोधी बल गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है ।
5.5 भौतिक परिदृश्यों के कारण:
(a) रॉकेट का बाह्य आवरण वायुमंडलीय घर्षण के कारण जल जाता है। इसके जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा रॉकेट की अपनी यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical energy) के व्यय पर प्राप्त होती है (असंरक्षी घर्षण बल के कारण यांत्रिक ऊर्जा का क्षय होता है)।
(b) धूमकेतु एक पूर्ण बंद कक्षीय पथ में सूर्य की परिक्रमा करता है। गुरुत्वाकर्षण बल एक संरक्षी (conservative) बल है, और किसी संरक्षी बल द्वारा एक पूर्ण बंद पथ में किया गया कुल कार्य हमेशा शून्य होता है ।
(c) वायुमंडलीय प्रतिरोध (असंरक्षी बल) के कारण उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती है। जैसे-जैसे यह पृथ्वी के करीब आता है, इसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा अत्यधिक ऋणात्मक (कम) हो जाती है। कुल ऊर्जा को संरक्षित रखने की प्रक्रिया में, क्षय हुई स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है, जिससे उपग्रह की चाल बढ़ जाती है ।
5.6 सही विकल्प:
(a) जब कोई संरक्षी बल किसी वस्तु पर धनात्मक कार्य करता है, तो वस्तु की स्थितिज ऊर्जा घटती है ($\Delta V = -W$) ।
(b) घर्षण के विरुद्ध किए गए कार्य का परिणाम हमेशा वस्तु की गतिज ऊर्जा में क्षय के रूप में होता है (ऊष्मा के रूप में) ।
(c) किसी बहुकण निकाय के कुल संवेग-परिवर्तन की दर निकाय के बाह्य बलों के अनुक्रमानुपाती होती है (न्यूटन का द्वितीय नियम) ।
(d) किन्हीं दो पिंडों के अप्रत्यास्थ संघट्ट में कुल रेखीय संवेग हमेशा संरक्षित रहता है ।
5.7 सत्य / असत्य कथन:
(a) असत्य। प्रत्यास्थ संघट्ट में संपूर्ण निकाय का कुल संवेग और कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है, प्रत्येक पिंड का अलग-अलग संवेग और ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती।
(b) असत्य। यदि निकाय पर कोई बाह्य असंरक्षी बल (जैसे घर्षण) कार्य कर रहा है, तो निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती है, वह ऊष्मा आदि में बदल जाती है ।
(c) असत्य। बंद पथ में किया गया कार्य केवल संरक्षी बलों (जैसे गुरुत्वाकर्षण या स्प्रिंग बल) के लिए शून्य होता है, असंरक्षी बलों के लिए नहीं ।
(d) सत्य। अप्रत्यास्थ संघट्ट में कुछ गतिज ऊर्जा विरूपण या ऊष्मा के रूप में क्षय हो जाती है, अतः अंतिम गतिज ऊर्जा प्रारंभिक गतिज ऊर्जा से कम होती है ।
5.8 कारण सहित उत्तर:
(a) नहीं। संघट्ट की अल्पावधि में (जब गेंदें संपर्क में होती हैं), गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती है क्योंकि ऊर्जा का कुछ भाग गेंदों के विरूपण के कारण स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है ।
(b) हाँ। संघट्ट की लघु अवधि के प्रत्येक क्षण में निकाय का कुल रेखीय संवेग पूरी तरह से संरक्षित रहता है ।
(c) अप्रत्यास्थ संघट्ट के लिए भी संवेग के लिए उत्तर हाँ (संवेग संरक्षित रहता है) और गतिज ऊर्जा के लिए उत्तर नहीं है ।
(d) यदि स्थितिज ऊर्जा केवल मध्य की दूरी पर निर्भर करती है, तो संबंधित बल एक संरक्षी बल है। संरक्षी बलों की उपस्थिति में होने वाला संघट्ट प्रत्यास्थ (Elastic) होगा ।
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इस पाठ पर आधारित पांच वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: भौतिकी में, यदि बल (F) और विस्थापन (d) परस्पर लंबवत ($90^\circ$ पर) हों, तो बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
A) अधिकतम
B) ऋणात्मक
C) शून्य
D) अनंत
उत्तर: C) शून्य। क्योंकि कार्य का सूत्र $W = F \cdot d = Fd \cos \theta$ है, और $\cos(90^\circ) = 0$ होता है ।
प्रश्न 2: कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी वस्तु पर लगाए गए कुल बल द्वारा किया गया कार्य उस वस्तु की किस भौतिक राशि में परिवर्तन के बराबर होता है?
A) स्थितिज ऊर्जा
B) गतिज ऊर्जा
C) यांत्रिक ऊर्जा
D) रेखीय संवेग
उत्तर: B) गतिज ऊर्जा। प्रमेय के अनुसार $K_f - K_i = W$ ।
प्रश्न 3: निम्नलिखित में से कौन सा बल असंरक्षी बल (Non-conservative force) का एक उदाहरण है?
A) गुरुत्वाकर्षण बल
B) स्प्रिंग बल
C) घर्षण बल
D) स्थिर वैद्युत बल
उत्तर: C) घर्षण बल। असंरक्षी बलों के कारण यांत्रिक ऊर्जा का क्षय होता है और बंद पथ में किया गया कार्य शून्य नहीं होता ।
प्रश्न 4: पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट (Perfectly inelastic collision) में क्या होता है?
A) गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है
B) दोनों पिंड संघट्ट के बाद आपस में सटकर एक साथ गति करते हैं
C) निकाय का संवेग शून्य हो जाता है
D) पिंड समान चाल से विपरीत दिशा में छिटक जाते हैं
उत्तर: B) दोनों पिंड संघट्ट के बाद आपस में सटकर एक साथ गति करते हैं। इसमें गतिज ऊर्जा का क्षय होता है लेकिन संवेग संरक्षित रहता है ।
प्रश्न 5: स्प्रिंग बल (Spring force) द्वारा किया गया कार्य किस पर निर्भर करता है?
A) केवल स्प्रिंग की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर
B) स्प्रिंग को खींचने में लगे समय पर
C) स्प्रिंग द्वारा तय किए गए विशिष्ट पथ की लंबाई पर
D) बाह्य बल की प्रकृति पर
उत्तर: A) केवल स्प्रिंग की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर। स्प्रिंग बल एक संरक्षी बल है, इसलिए इसका कार्य केवल सिरों के बिंदुओं पर निर्भर करता है, पथ पर नहीं ।
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