CBSE Board class 11 physics ch-6 system of particles and rotational motion

यह पाठ कणों के निकाय और घूर्णी गति के मूलभूत सिद्धांतों की व्याख्या करता है। इसमें द्रव्यमान केंद्र (Center of Mass) की अवधारणा को स्पष्ट किया गया है, जो जटिल पिंडों की गति को समझने के लिए एक मुख्य बिंदु के रूप में कार्य करता है। लेखक शुद्ध स्थानांतरण गति और घूर्णी गति के बीच के अंतर को उदाहरणों के माध्यम से समझाते हैं और दृढ़ पिंड (Rigid Body) की परिभाषा निर्धारित करते हैं। पाठ में इस बात पर जोर दिया गया है कि किसी निकाय का कुल रेखीय संवेग उसके द्रव्यमान केंद्र के वेग से संबंधित होता है और केवल बाह्य बल ही इसकी गति को प्रभावित करते हैं। अंत में, घूर्णी गति के विश्लेषण के लिए आवश्यक सदिश गुणनफल (Vector Product) जैसे गणितीय उपकरणों का परिचय दिया गया है।

यहां दिए गए पाठ के स्रोतों के आधार पर अभ्यास में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर और पाँच वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं।


नोट: दिए गए स्रोतों में भौतिकी की अवधारणाएं (जैसे बल आघूर्ण, कोणीय संवेग, जड़त्व आघूर्ण आदि) दी गई हैं, लेकिन अभ्यास के संख्यात्मक प्रश्नों (6.8 से 6.20) को हल करने के लिए उपयोग किए गए कुछ विशिष्ट गणितीय सूत्र, त्रिकोणमिति, ऊर्जा संरक्षण के नियम और ऋणात्मक द्रव्यमान की अवधारणा बाहरी स्रोतों (सामान्य भौतिकी ज्ञान) से ली गई हैं।


पाठ के अभ्यास प्रश्नों (6.1 से 6.20) के उत्तर:


6.1 एकसमान द्रव्यमान घनत्व वाले नियमित पिंडों (गोले, बेलन, छल्ले और घन) का द्रव्यमान केंद्र उनके ज्यामितीय केंद्र पर होता है । किसी पिंड का द्रव्यमान केंद्र आवश्यक रूप से पिंड के भीतर होना अनिवार्य नहीं है; उदाहरण के लिए, एक छल्ले (वलय) का द्रव्यमान केंद्र उसके बाहर (मध्य के रिक्त स्थान में) होता है ।

6.2 HCl अणु का द्रव्यमान केंद्र: सूत्र $X = \frac{m_1 x_1 + m_2 x_2}{m_1 + m_2}$ का उपयोग करते हुए, यदि H परमाणु को मूल बिंदु पर मानें तो, $X = \frac{m \times 0 + 35.5m \times 1.27}{m + 35.5m} = \frac{35.5 \times 1.27}{36.5} \approx \textbf{1.235 Å}$ (हाइड्रोजन परमाणु से दूरी) ।

6.3 बच्चे का ट्रॉली पर दौड़ना निकाय के भीतर लगने वाला एक आंतरिक बल है। चूंकि निकाय पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं कर रहा है, इसलिए निकाय (ट्रॉली + बच्चा) के द्रव्यमान केंद्र की चाल अपरिवर्तित ($v$) ही रहेगी [6-8]।

6.4 दो सदिशों $a$ और $b$ के सदिश गुणन ($a \times b$) का परिमाण $ab \sin\theta$ होता है । एक त्रिभुज का क्षेत्रफल $\frac{1}{2} \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई} = \frac{1}{2} a b \sin\theta$ होता है, जो स्पष्टतः $a \times b$ के परिमाण का आधा है।

6.5 $(b \times c)$ एक ऐसा सदिश देता है जिसका परिमाण समांतर चतुर्भुज (आधार) के क्षेत्रफल के बराबर होता है और दिशा तल के लंबवत होती है । इसका सदिश $a$ के साथ अदिश गुणन करने पर आधार का क्षेत्रफल ऊँचाई ($a \cos\theta$) से गुणा हो जाता है, जो समांतर षट्फलक का आयतन देता है।

6.6 कोणीय संवेग $l = r \times p$ । $l = (x\hat{i} + y\hat{j} + z\hat{k}) \times (p_x\hat{i} + p_y\hat{j} + p_z\hat{k})$ का सारणिक हल करने पर: $l_x = yp_z - zp_y$, $l_y = zp_x - xp_z$, $l_z = xp_y - yp_x$ । यदि कण केवल $x-y$ तल में चल रहा है, तो $z=0$ और $p_z=0$ होगा, जिससे $l_x=0$ और $l_y=0$ हो जाएंगे। इस प्रकार, केवल $z$-घटक ($l_z$) ही शेष बचेगा ।

6.7 दोनों कण समांतर रेखाओं पर विपरीत दिशाओं में चल रहे हैं। उनका कुल कोणीय संवेग $L = r_1 \times p_1 + r_2 \times p_2$ । विपरीत वेगों के कारण, कुल कोणीय संवेग का मान $mvd$ आता है, जो दोनों के बीच की दूरी ($d$) पर निर्भर है, लेकिन मूल बिंदु की स्थिति पर निर्भर नहीं करता ।

6.8 आघूर्णों के सिद्धांत और बलों के संतुलन के आधार पर [15-17], रस्सियों के तनावों के क्षैतिज व ऊर्ध्वाधर घटकों को संतुलित करने पर, छड़ का गुरुत्व केंद्र बाएँ सिरे से लगभग 0.72 m की दूरी पर आता है ।

6.9 कार का भार $W = 1800 \times 9.8$ N है। घूर्णी संतुलन ($\Sigma\tau = 0$) का उपयोग करने पर: पिछले पहियों पर बल = $\frac{1800 \times 9.8 \times 1.05}{1.8} = 10290$ N (प्रत्येक पर 5145 N)। अगले पहियों पर बल = $17640 - 10290 = 7350$ N (प्रत्येक पर 3675 N) ।

6.10 समान द्रव्यमान ($M$) और त्रिज्या ($R$) के लिए, ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण ($I = \frac{2}{5}MR^2$) , खोखले बेलन ($I = MR^2$) से कम होता है। $\tau = I \alpha$ के अनुसार, जिस पिंड का जड़त्व आघूर्ण कम होता है उसका कोणीय त्वरण अधिक होगा। अतः ठोस गोला अधिक कोणीय चाल प्राप्त करेगा ।

6.11 ठोस सिलिंडर का जड़त्व आघूर्ण $I = \frac{1}{2}MR^2 = \frac{1}{2} \times 20 \times (0.25)^2 = 0.625 \text{ kg m}^2$ । गतिज ऊर्जा $K = \frac{1}{2}I\omega^2 = \frac{1}{2} \times 0.625 \times (100)^2 = \textbf{3125 J}$ । कोणीय संवेग $L = I\omega = 0.625 \times 100 = \textbf{62.5 J s}$ ।

6.12 (a) कोणीय संवेग संरक्षण के नियम ($I_1\omega_1 = I_2\omega_2$) से: नई कोणीय चाल $\omega_2 = \frac{I_1}{(2/5)I_1} \times 40 = \textbf{100 rev/min}$ । (b) नई गतिज ऊर्जा $K_2 = \frac{1}{2}I_2\omega_2^2$, प्रारंभिक गतिज ऊर्जा की 2.5 गुना हो जाती है। यह वृद्धि बच्चे द्वारा हाथों को सिकोड़ने में किए गए कार्य के कारण होती है ।

6.13 खोखले सिलिंडर का जड़त्व आघूर्ण $I = MR^2 = 3 \times (0.4)^2 = 0.48 \text{ kg m}^2$ । बल आघूर्ण $\tau = F \times R = 30 \times 0.4 = 12 \text{ N m}$ । कोणीय त्वरण $\alpha = \frac{\tau}{I} = \frac{12}{0.48} = \textbf{25 rad s}^{-2}$ । रैखिक त्वरण $a = \alpha R = 25 \times 0.4 = \textbf{10 m s}^{-2}$ ।

6.14 घूर्णी गति में शक्ति का सूत्र $P = \tau\omega$ होता है । अतः आवश्यक शक्ति $P = 180 \times 200 = \textbf{36000 W}$ या 36 kW होगी ।

6.15 अवशिष्ट डिस्क का गुरुत्व केंद्र, ज्यामिति व द्रव्यमान वितरण के आधार पर मूल केंद्र से बायीं ओर (कटे हुए भाग के विपरीत) R/6 की दूरी पर स्थित होगा ।

6.16 आघूर्णों के सिद्धांत के अनुसार, 45 cm के परितः आघूर्ण शून्य होगा: $10 \text{g} \times (45 - 12) = M \times (50 - 45)$। इसे हल करने पर मीटर छड़ का द्रव्यमान $M = \textbf{66 g}$ प्राप्त होता है ।

6.17 (a) ऊर्जा संरक्षण के कारण दोनों तलों की तली पर गोले की चाल समान होगी। (b) व (c) हाँ, कम ढाल वाले तल पर उसे अधिक समय लगेगा क्योंकि कम ढाल पर नीचे की ओर कार्य करने वाला रैखिक त्वरण कम होता है ।

6.18 कुल कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन । छल्ले के लिए कुल गतिज ऊर्जा $K = \frac{1}{2}Mv^2 + \frac{1}{2}I\omega^2 = Mv^2$ (चूँकि छल्ले के लिए $I=MR^2$ है) । अतः $W = 100 \times (0.2)^2 = \textbf{4 J}$ ।

6.19 दिया गया है: घूर्णन गतिज ऊर्जा = $\frac{2}{3} \times$ स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा । $\frac{1}{2}I\omega^2 = \frac{2}{3} \times (\frac{1}{2}mv^2)$ । सूत्र में मान रखने पर औसत कोणीय वेग $\omega \approx \textbf{6.7 \times 10^{12} rad/s}$ प्राप्त होता है।

6.20 ऊर्जा संरक्षण का उपयोग करने पर: (a) बेलन आनत तल पर $h = \frac{3v^2}{4g} \approx \textbf{1.9 m}$ की ऊर्ध्वाधर ऊँचाई (तल के अनुदिश 3.8 m) तक ऊपर चढ़ेगा। (b) उसे वापस लौटने में कुल लगभग 1.53 s का समय लगेगा ।


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5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर और विकल्पों के साथ)


प्रश्न 1: किसी कण पर कार्य करने वाले बल आघूर्ण ($\tau$) को किस सदिश गुणनफल द्वारा परिभाषित किया जाता है?

A) $\tau = F \times r$

B) $\tau = r \times p$

C) $\tau = r \times F$

D) $\tau = r \cdot F$

सही उत्तर: C) $\tau = r \times F$


प्रश्न 2: जब कणों के किसी निकाय पर आरोपित कुल बाह्य बल आघूर्ण शून्य होता है, तो निकाय की कौन सी भौतिक राशि नियत (संरक्षित) रहती है?

A) रैखिक संवेग

B) गतिज ऊर्जा

C) स्थितिज ऊर्जा

D) कोणीय संवेग

सही उत्तर: D) कोणीय संवेग


प्रश्न 3: किसी सममित और एकसमान (lekax) पिंड, जैसे छल्ले या डिस्क, का द्रव्यमान केंद्र कहाँ स्थित होता है?

A) पिंड के सबसे भारी हिस्से पर

B) उसके ज्यामितीय केंद्र पर

C) पिंड की परिधि पर

D) हमेशा पिंड की सतह के बाहर

सही उत्तर: B) उसके ज्यामितीय केंद्र पर


प्रश्न 4: किसी ठोस गोले का उसके व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण ($I$) क्या होता है? (गोले का द्रव्यमान M और त्रिज्या R है)

A) $MR^2$

B) $\frac{1}{2} MR^2$

C) $\frac{2}{5} MR^2$

D) $\frac{1}{4} MR^2$

सही उत्तर: C) $\frac{2}{5} MR^2$


प्रश्न 5: रैखिक गति में जो भूमिका द्रव्यमान ($M$) निभाता है, एक अचर अक्ष के परितः घूर्णी गति में वही भूमिका कौन सी राशि निभाती है?

A) कोणीय संवेग

B) बल आघूर्ण

C) परिभ्रमण त्रिज्या

D) जड़त्व आघूर्ण

सही उत्तर: D) जड़त्व आघूर्ण

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