CBSE Board class 11 physics ch-7 gravitation and kepler's laws of planetary motion
यह पाठ कक्षा 11 की भौतिकी के सातवें अध्याय का अंश है, जो मुख्य रूप से गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों पर केंद्रित है। इसमें केप्लर के ग्रहों की गति के नियमों से लेकर न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम तक के ऐतिहासिक विकास और वैज्ञानिक आधार की व्याख्या की गई है। स्रोत में पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण (g) की गणना और ऊंचाई या गहराई के साथ इसमें होने वाले बदलावों को गणितीय रूप से समझाया गया है। इसके अतिरिक्त, यह गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा, पलायन चाल और खगोलीय पिंडों की गति के बीच के संबंधों पर भी प्रकाश डालता है। अंत में, इसमें भू-उपग्रहों की कार्यप्रणाली और उनकी कक्षीय गति के मूलभूत परिचय को शामिल किया गया है। यह सामग्री भौतिक विज्ञान के छात्रों के लिए गुरुत्वाकर्षण बल के व्यापक प्रभाव को समझने हेतु एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संसाधन है।
दिए गए पाठ (अध्याय 7: गुरुत्वाकर्षण) के अंत में दिए गए अभ्यास प्रश्नों (7.1 से 7.21) के संक्षिप्त उत्तर और पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) नीचे दिए गए हैं:
पाठ के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
7.1
(a) नहीं, गुरुत्वीय बल से किसी पिण्ड का परिरक्षण (shielding) संभव नहीं है, क्योंकि यह बल किसी माध्यम या आवरण से प्रभावित नहीं होता है ।
(b) नहीं, चाहे अंतरिक्ष स्टेशन छोटा हो या बड़ा, दोनों ही स्थिति में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की ओर मुक्त पतन (free fall) की अवस्था में होते हैं, इसलिए वे भारहीनता का ही अनुभव करेंगे ।
(c) किसी ग्रह का ज्वारीय प्रभाव उस ग्रह से दूरी के घन ($r^3$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, जबकि गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग ($r^2$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। चूँकि चंद्रमा पृथ्वी के बहुत करीब है, इसलिए कुल गुरुत्वाकर्षण बल कम होने के बावजूद इसका ज्वारीय प्रभाव सूर्य से अधिक होता है ।
7.2 सही विकल्प चुनें:
(a) बढ़ती तुंगता (ऊंचाई) के साथ गुरुत्वीय त्वरण घटता है ।
(b) बढ़ती गहराई के साथ गुरुत्वीय त्वरण घटता है ।
(c) गुरुत्वीय त्वरण पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता ।
(d) स्थितिज ऊर्जा के अंतर के लिए सूत्र –G Mm(1/r2 – 1/r1) अधिक यथार्थ है ।
7.3 केप्लर के तृतीय नियम ($T^2 \propto r^3$) के अनुसार, यदि नए ग्रह का परिक्रमण काल (T) पृथ्वी का आधा है, तो उसकी कक्षीय त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या की लगभग 0.63 गुनी होगी ।
7.4 केप्लर के नियम के सूत्र $M = 4\pi^2r^3 / GT^2$ का उपयोग करके आयो (Io) उपग्रह के आँकड़ों से बृहस्पति का द्रव्यमान निकाला जा सकता है, जो सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 1/1000 प्राप्त होता है ।
7.5 तारे का परिक्रमण काल $T = \sqrt{4\pi^2r^3 / GM}$ सूत्र से निकाला जा सकता है (जहाँ M आकाशगंगा का कुल द्रव्यमान है) ।
7.6 सही विकल्प चुनें:
(a) उपग्रह की कुल ऊर्जा इसकी गतिज ऊर्जा का ऋणात्मक होती है ।
(b) उपग्रह को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा स्थिर पिण्ड को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा से कम होती है (क्योंकि उपग्रह के पास पहले से कक्षीय गतिज ऊर्जा होती है) ।
7.7 पलायन चाल (a) पिण्ड के द्रव्यमान और (c) प्रक्षेपण की दिशा पर निर्भर नहीं करती है। लेकिन यह (b) प्रक्षेपण बिन्दु की अवस्थिति और (d) ऊँचाई पर निर्भर करती है ।
7.8 अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में घूमते धूमकेतु के लिए केवल (c) कोणीय संवेग और (f) कुल ऊर्जा नियत रहती है। बाकी सभी राशियाँ (चाल, गतिज ऊर्जा आदि) बदलती रहती हैं ।
7.9 अंतरिक्ष यात्री के लिए (b) चेहरे पर सूजन, (c) सिरदर्द और (d) दिक्-विन्यास समस्या दुखदायी लक्षण हो सकते हैं (रक्त के बहाव के कारण पैरों में नहीं बल्कि चेहरे पर सूजन आती है) ।
7.10 तीर (c) गुरुत्वीय तीव्रता की सही दिशा दर्शाएगा ।
7.11 बिंदु P पर गुरुत्वीय तीव्रता तीर (e) द्वारा दर्शाई जाएगी ।
7.12 गुरुत्वाकर्षण बल शून्य होने वाले बिंदु की दूरी सूर्य और पृथ्वी के बीच गुरुत्वाकर्षण बलों को बराबर ($GM_s/(r-x)^2 = GM_e/x^2$) करके निकाली जा सकती है ।
7.13 सूर्य का द्रव्यमान $M = 4\pi^2r^3 / GT^2$ सूत्र का प्रयोग करके निकाला जा सकता है ।
7.14 केप्लर के नियम $(r_s / r_e)^3 = (T_s / T_e)^2$ का प्रयोग करके सूर्य से शनि की दूरी निकाली जा सकती है ।
7.15 ऊंचाई पर गुरुत्वीय त्वरण के सूत्र $g' = g / (1 + h/R_e)^2$ से, $h = R_e/2$ रखने पर नया भार 63 N का 4/9 हो जाएगा, अर्थात 28 N होगा ।
7.16 गहराई के सूत्र $g' = g(1 - d/R_e)$ से, $d = R_e/2$ पर $g' = g/2$ हो जाएगा। अतः नया भार 250 N का आधा यानी 125 N होगा ।
7.17 से 7.20 (आंकिक प्रश्न): इन प्रश्नों के उत्तर यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत (प्रारंभिक ऊर्जा = अंतिम ऊर्जा) का उपयोग करके प्राप्त किए जा सकते हैं।
प्रश्न 7.19 में उपग्रह को बाहर निकालने के लिए खर्च होने वाली ऊर्जा कुल ऊर्जा की धनात्मक मात्रा ($+ GMm / 2(R+h)$) के बराबर होगी ।
7.21 दोनों गोलों के मध्य बिंदु पर गुरुत्वीय बल शून्य होगा क्योंकि दोनों भारी गोले समान और विपरीत दिशा में बल लगाएंगे। हालाँकि यह संतुलन अस्थायी होगा, क्योंकि थोड़ा सा भी विस्थापित होने पर कण उसी गोले की ओर खिंचता चला जाएगा ।
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पाठ पर आधारित 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: केप्लर का प्रथम नियम (कक्षाओं का नियम) क्या प्रतिपादित करता है?
A) सभी ग्रह वृत्ताकार कक्षा में गति करते हैं।
B) सभी ग्रह परवलयाकार कक्षा में गति करते हैं।
C) सभी ग्रह दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में गति करते हैं तथा सूर्य इसकी एक नाभि पर स्थित होता है।
D) ग्रह सीधी रेखा में गति करते हैं।
सही उत्तर: C
प्रश्न 2: सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक (G) का प्रचलित प्रायोगिक मान क्या है?
A) 9.8 m/s²
B) 6.67 × 10⁻¹¹ N m²/kg²
C) 3.14 N m²/kg²
D) 6.67 × 10¹¹ N m²/kg²
सही उत्तर: B
प्रश्न 3: पृथ्वी के पृष्ठ से नीचे 'd' गहराई पर जाने पर गुरुत्वीय त्वरण (g) के मान पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A) बढ़ता है
B) घटता है
C) समान रहता है
D) पहले बढ़ता है फिर घटता है
सही उत्तर: B
प्रश्न 4: पृथ्वी के पृष्ठ से प्रक्षेपित किसी पिण्ड के लिए आवश्यक न्यूनतम पलायन चाल (Escape speed) का मान लगभग कितना होता है?
A) 2.3 km/s
B) 9.8 km/s
C) 11.2 km/s
D) 3 × 10⁸ m/s
सही उत्तर: C
प्रश्न 5: वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा कर रहे किसी उपग्रह की कुल ऊर्जा की प्रकृति कैसी होती है?
A) धनात्मक (Positive)
B) शून्य (Zero)
C) ऋणात्मक (Negative)
D) अनंत (Infinite)
सही उत्तर: C
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