CBSE Board class 12 bhugol ch-1 human geography: nature and scope important question and answer
यह पाठ एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित कक्षा 12 की भूगोल की पाठ्यपुस्तक का पहला अध्याय है, जो मानव भूगोल की प्रकृति और विषय क्षेत्र को विस्तार से समझाता है। इसमें मुख्य रूप से प्रकृति और मानव के बीच के अटूट संबंधों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें पर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद जैसी प्रमुख विचारधाराओं पर चर्चा की गई है। स्रोत में तकनीकी विकास की भूमिका को स्पष्ट करते हुए यह बताया गया है कि कैसे मनुष्य ने प्राकृतिक नियमों को समझकर पर्यावरण की सीमाओं को कम किया है। इसके अतिरिक्त, मानव भूगोल को एक अंतर्विषयक क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान जैसे अन्य सामाजिक विज्ञानों से गहरा संबंध रखता है। पाठ में ग्रिफिथ टेलर द्वारा प्रतिपादित 'नवनिश्चयवाद' की अवधारणा के माध्यम से प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है। अंत में, विभिन्न तालिकाओं और मानचित्रों के माध्यम से मानव भूगोल के उप-क्षेत्रों और इसके ऐतिहासिक विकास के चरणों का व्यवस्थित विवरण प्रदान किया गया है।
दिए गए पाठ के आधार पर पाठ के प्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
1. बहुविकल्पीय प्रश्न
(i) निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक भूगोल का वर्णन नहीं करता?
उत्तर: (घ) प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप आधुनिक समय में प्रासंगिक नहीं। ,
(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक भौगोलिक सूचना का स्रोत नहीं है?
उत्तर: (ग) चंद्रमा से चट्टानी पदार्थों के नमूने। (नोट: स्रोत यात्रियों के विवरण, प्राचीन मानचित्र और महाकाव्यों को सूचना के रूप में दर्शाते हैं , )
(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक लोगों और पर्यावरण के बीच अन्योन्यक्रिया का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक है?
उत्तर: (ख) प्रौद्योगिकी।
(iv) निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव भूगोल का उपागम नहीं है?
उत्तर: (ख) मात्रात्मक क्रांति। ,
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2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: रेटजेल के अनुसार, "मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन है" । एलेन सी. सेम्पल के अनुसार, यह "अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील संबंधों का अध्ययन है" ।
(ii) मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम बताइए।
उत्तर: इसके प्रमुख उप-क्षेत्रों में व्यवहारवादी भूगोल, कल्याणकारी भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, लिंग भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल, चिकित्सा भूगोल, निर्वाचन भूगोल और सैन्य भूगोल शामिल हैं , ।
(iii) मानव भूगोल किस प्रकार अन्य सामाजिक विज्ञानों से संबंधित है?
उत्तर: मानव भूगोल की प्रकृति अत्यधिक अंतर्विषयक है। यह पृथ्वी तल पर मानवीय तत्वों को समझने के लिए समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और जनसांख्यिकी जैसे सहयोगी सामाजिक विज्ञानों के साथ घनिष्ठ संबंध (अंतरापृष्ठ) विकसित करता है , ।
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3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(i) मानव के प्राकृतिकरण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: मानव के प्राकृतिकरण की अवस्था को 'पर्यावरणीय निश्चयवाद' कहा जाता है । शुरुआत में, जब प्रौद्योगिकी का स्तर बहुत निम्न था और मानव का सामाजिक विकास आदिम अवस्था में था, तब वह प्रकृति के आदेशों के अनुसार खुद को ढालता था ।
इस अवस्था में मनुष्य प्रकृति की प्रचंडता से डरता था, उसकी पूजा करता था और उसे सुनता था । आदिम समाज प्राकृतिक पर्यावरण के साथ पूर्णतः सामंजस्य बनाकर रहता था और सतत पोषण के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर था ।
स्रोतों में दिया गया 'बेंदा' का उदाहरण इसी को दर्शाता है, जो जंगल की आत्मा को धन्यवाद देता है और जड़ी-बूटियों के लिए प्रकृति पर निर्भर है । संक्षेप में, जब प्रकृति एक शक्तिशाली बल और पूज्य मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है, तो उसे मानव का प्राकृतिकरण कहते हैं।
(ii) मानव भूगोल के विषय-क्षेत्र पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: मानव भूगोल का मुख्य सरोकार पृथ्वी को 'मानव के घर' के रूप में समझना और उन सभी तत्वों का अध्ययन करना है जिन्होंने मानव को पोषित किया है । इसका विषय-क्षेत्र बहुत व्यापक है और इसमें निम्नलिखित मुख्य बिंदु शामिल हैं:
अंतर्संबंधों का अध्ययन: यह भौतिक पर्यावरण और मानव-जनित सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्ययन करता है ।
मानवीय परिघटनाओं का वितरण: यह मानवीय क्रियाओं के स्थानिक वितरण और उनके घटित होने के कारणों का विश्लेषण करता है ।
सांस्कृतिक भूदृश्य: मानव द्वारा निर्मित घरों, गांवों, नगरों, सड़कों, रेलों, उद्योगों और खेतों का अध्ययन इसके अंतर्गत आता है, जो उसने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके बनाए हैं ।
विचारधाराएं: इसमें कल्याणपरक (शिक्षा, स्वास्थ्य), आमूलवादी (निर्धनता, असमानता) और व्यवहारवादी विचारधाराओं का समावेश है जो सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ को समझने में मदद करती हैं , ।
विभिन्न शाखाएं: यह जनसंख्या, आर्थिक गतिविधियों (कृषि, उद्योग, पर्यटन) और राजनीतिक भूगोल जैसे विविध क्षेत्रों तक फैला हुआ है , ।
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