Ncert class 5 Hindi- chapter 2- टिपटिपवा
Ncert class 5 Hindi- chapter 2- टिपटिपवा
यह कहानी **टिपटिपवा** नाम के एक काल्पनिक डर और गलतफहमी पर आधारित है। इस कहानी का संक्षेपण निम्नलिखित है।
गाँव में मूसलाधार बारिश के दौरान एक दादी अपनी टपकती हुई झोंपड़ी से परेशान होकर अपने पोते से कहती हैं कि उन्हें शेर या बाघ से इतना डर नहीं लगता जितना कि इस **'टिपटिपवा' (टपकते हुए पानी)** से लगता है। झोंपड़ी के पीछे छिपा एक बाघ यह सुन लेता है और डर जाता है कि टिपटिपवा ज़रूर कोई बहुत बड़ा और भयानक जानवर है जो शेर-बाघ को भी डरा देता है।
उसी समय **भोला** नाम का एक धोबी अपने खोए हुए गदहे को ढूँढ़ते हुए बारिश में भटक रहा था। पंडित जी के पास जाकर कोई समाधान न मिलने पर वह एक तालाब के पास पहुँचता है, जहाँ वह अंधेरे और बारिश के कारण घास में छिपे **बाघ को अपना गदहा समझ लेता है**। बाघ भी भोला को ही 'टिपटिपवा' समझकर डर के मारे चुपचाप उसके साथ चल देता है।
अंत में, भोला उस बाघ को घर लाकर **खूँटे से बाँध देता है**। सुबह जब गाँव वाले भोला के घर के बाहर गदहे की जगह एक **असली बाघ** को बँधा देखते हैं, तो वे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पाते और दंग रह जाते हैं।
यह कहानी हमें बताती है कि कैसे एक छोटी सी गलतफहमी बड़े से बड़े बलवान को भी डरा सकती है, जैसे एक शक्तिशाली बाघ सिर्फ एक शब्द 'टिपटिपवा' के डर से भीगी बिल्ली बन गया।




1. आप भी कहानी सुनने के लिए मचलते होंगे। आपको कहानी कौन सुनाता है?
हां, मै भी कहानियां सुनना बहुत पसंद करता हूं। मेरी दादी बहुत अच्छी-अच्छी कहानियां सुनाती है। मुझे जानवरों की कहानियां बहुत अच्छी लगती है। लेकिन जब मेरे अनिल भैया भी मेरे साथ होते हैं तब मैसेज डरावनी कहानियां भी सुनना पसंद करता हूँ। मै रोज रात को खाना खाकर सोने से पहले दादी मां से कहानी कहने को कहता हूँ। कभी-कभी दादी मना करती है पर फिर मान जाती है और कोई छोटा कहानी कह देती है।

2. 'टिपटिपवा' कौन है? बाघ उसका नाम सुनकर क्यों डर गया था?
दादी की झोंपड़ी की छत से **टपकता हुआ बारिश का पानी ही 'टिपटिपवा' है** । मूसलाधार बारिश के कारण दादी की छत से जगह-जगह 'टिप-टिप' करके पानी गिर रहा था, जिससे परेशान होकर उन्होंने इसे 'टिपटिपवा' का नाम दिया था।
बाघ दादी की झोंपड़ी के पीछे बैठकर बारिश से बचने की कोशिश कर रहा था, तभी उसने दादी को यह कहते सुना कि उन्हें **शेर या बाघ से उतना डर नहीं लगता जितना कि 'टिपटिपवा' से लगता है**। बाघ ने जब यह सुना तो वह बुरी तरह डर गया क्योंकि उसने सोचा:
* **बड़ा जानवर:** बाघ को लगा कि 'टिपटिपवा' कोई **बहुत बड़ा और भयानक जानवर** है, तभी तो दादी शेर और बाघ से भी ज्यादा उससे डरती हैं।
* **हमले का डर:** उसे डर सताने लगा कि इससे पहले कि वह रहस्यमयी जानवर (टिपटिपवा) बाहर आकर उस पर हमला करे, उसे वहां से भाग जाना चाहिए।
यही कारण था कि बाघ 'टिपटिपवा' का नाम सुनकर ही **दुम दबाकर भाग खड़ा हुआ** और बाद में जब धोबी (भोला) ने उसे लट्ठ से मारा, तो उसने भोला को ही वह भयानक 'टिपटिपवा' समझ लिया।
इसे एक **उदाहरण** से ऐसे समझ सकते हैं जैसे किसी अंधेरे कमरे में ज़मीन पर पड़ी एक साधारण रस्सी को कोई सांप समझकर डर जाए; यहाँ बाघ के लिए 'टिपटिपवा' शब्द उस 'रस्सी' की तरह था जिसे उसने अपनी कल्पना में एक भयानक 'सांप' मान लिया था।
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3. पंडित जी बारिश का जमा पानी कैसे उलीच रहे थे?
पंडित जी अपने घर में जमा बारिश के पानी को उलीच-उलीचकर बाहर फेंक रहे थे। वे सुबह से ही लगातार पानी उलीचने के काम में लगे हुए थे, जिसके कारण वे बहुत थक गए थे। जब भोला उनसे अपने खोए हुए गदहे के बारे में पूछने पहुँचा, तब भी वे इसी कार्य में व्यस्त थे और थकान की वजह से काफी झुंझलाए हुए थे।

4. कहानी में भोला किस पोथी को बाँचने की बात करता है?
दिए गए स्रोतों के अनुसार, जब भोला का गदहा खो गया था, तब वह अपनी पत्नी के कहने पर गाँव के पंडित जी के पास पहुँचा। वहाँ उसने पंडित जी से उनकी पोथी' (पंचांग या धार्मिक पुस्तक) बाँचकर यह बताने का आग्रह किया कि उसका गदहा कहाँ है।
भोला को विश्वास था कि पंडित जी बहुत ज्ञानी हैं और उनकी पोथी में सबके हाल की खबर रहती है। हालांकि, बारिश का पानी उलीचते-उलीचते थके हुए पंडित जी ने चिढ़कर जवाब दिया कि उनकी पोथी में उसके गदहे का पता-ठिकाना नहीं लिखा है।

5. दादी ने ऐसा क्यों कहा कि टिपटिपवा का डर शेर, बाघ से भी बड़ा होता है?
दादी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वे मूसलाधार बारिश और अपनी झोंपड़ी की छत से जगह-जगह टपकते हुए पानी (टिप-टिप) से बहुत ज्यादा परेशान और खीझ (irritated) चुकी थीं। उनके लिए उस समय सबसे बड़ी समस्या और डर वह टपकता हुआ पानी ही था, जिसे उन्होंने **'टिपटिपवा'** कहा था।
दादी के इस कथन के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
तात्कालिक परेशानी: दादी का पोता उनसे कहानी सुनने के लिए मचल रहा था, लेकिन दादी छत से गिरते पानी के कारण इतनी परेशान थीं कि उन्हें कहानी सुनाना भी दूभर लग रहा था। उन्होंने झुंझलाकर कहा कि अगर इस 'टिपटिपवा' से जान बचे, तभी तो वे कोई कहानी सुना पाएँगी। तुलनात्मक डर अपनी परेशानी की गंभीरता को बताने के लिए उन्होंने छत से टपकते पानी की तरफ देखकर कहा कि उन्हें शेर या बाघ का उतना डर नहीं लगता, जितना कि इस 'टिपटिपवा' का लगता है।
यही वह बात थी जिसे झोंपड़ी के पीछे छिपे बाघ ने सच मान लिया और वह अपनी अज्ञानता के कारण 'टिपटिपवा' को कोई ऐसा भयानक और बड़ा जानवर समझने लगा जो शेर-बाघ को भी डरा सकता है।
इसे एक **उदाहरण** से ऐसे समझ सकते हैं जैसे किसी व्यक्ति के लिए उसके सिर पर मंडराता मच्छर (जो उसे सोने नहीं दे रहा) उस समय जंगल के किसी दूर खड़े हाथी से कहीं ज्यादा बड़ा दुश्मन बन जाता है; दादी के लिए भी वह 'टिप-टिप' करता पानी उस वक्त शेर-बाघ से बड़ी मुसीबत था।

6. पंडित जी के घर जाते समय भोला ने मोटा लट्ठ साथ में क्यों लिया होगा?
जब भोला पंडित जी के घर के लिए निकला, तब वह सुबह से ही अपने खोये हुए गदहे को ढूँढ़ने के कारण बहुत परेशान था। हालांकि स्रोतों में सीधे तौर पर लट्ठ ले जाने का कारण नहीं बताया गया है, लेकिन कहानी के घटनाक्रम से इसके संभावित कारण समझे जा सकते हैं:
गदहे को नियंत्रित करने के लिए: भोला अपने गदहे की तलाश में था और ग्रामीण परिवेश में पशुओं को हाँकने या उन्हें काबू में करने के लिए अक्सर लट्ठ का प्रयोग किया जाता है।
तलाशी में सहायता: वह मूसलाधार बारिश में गदहे को जगह-जगह ढूँढ़ रहा था । लट्ठ का उपयोग ऊँची घास या झाड़ियों को हटाकर देखने के लिए किया जा सकता था, जैसा कि उसने बाद में तालाब के किनारे ऊँची घास के पास किया।
गुस्सा और हताशा: भोला सुबह से भीग रहा था और गदहा न मिलने के कारण वह गुस्से में भी था। जब उसे तालाब के किनारे बाघ (जिसे वह अपना गदहा समझ बैठा) मिला, तो उसने उसी मोटे लट्ठ से उस पर प्रहार किया ताकि उसे 'सबक' सिखा सके।
स्रोत संख्या में स्पष्ट उल्लेख है कि पत्नी की बात जँचने के बाद वह अपना मोटा लट्ठ उठाकर ही पंडित जी की ओर चल पड़ा था, जिससे पता चलता है कि वह गदहे को ढूँढ़ने और उसे वापस लाने की पूरी तैयारी के साथ निकला था।
**एक छोटा सा उदाहरण:** जैसे कोई चरवाहा अपनी भेड़ों को सही रास्ते पर रखने के लिए हमेशा अपने पास एक लाठी रखता है, वैसे ही भोला ने भी अपने गदहे को ढूँढ़ने और उसे वापस हांककर लाने के उद्देश्य से वह मोटा लट्ठ साथ लिया होगा।

7. भोला पंडित जी के पास क्यों गया?
भोला पंडित जी के पास इसलिए गया था क्योंकि उसका गदहा सुबह से गायब था। वह पूरे दिन बारिश में भीगते हुए उसे जगह-जगह ढूँढ़ता रहा, लेकिन जब वह कहीं नहीं मिला, तो उसकी पत्नी ने उसे पंडित जी से सलाह लेने का सुझाव दिया।
भोला की पत्नी का मानना था कि पंडित जी बहुत ज्ञानी हैं और उन्हें सबके आगे-पीछे के हाल की खबर रहती है। इसी विश्वास के साथ भोला पंडित जी के घर पहुँचा ताकि वे अपनी'पोथी' (पंचांग या धार्मिक पुस्तक) बाँचकर उसे यह बता सकें कि उसका खोया हुआ गदहा कहाँ मिलेगा।
संक्षेप में, भोला को उम्मीद थी कि पंडित जी अपनी विद्या और पोथी की मदद से उसके गदहे का पता-ठिकाना बता देंगे।
इसे एक **उदाहरण** से समझ सकते हैं कि जैसे कोई व्यक्ति अपनी किसी कीमती खोई हुई वस्तु को ढूँढ़ने के लिए किसी ऐसे विशेषज्ञ के पास जाता है जिसके पास सब कुछ जानने का कोई विशेष साधन या ज्ञान हो; भोला के लिए पंडित जी और उनकी पोथी वही माध्यम थे।
8. बाघ टिपटिपवा के डर से कहाँ छिप गया?
दादी की बातों से डरकर और 'टिपटिपवा' को कोई भयानक जानवर समझकर बाघ अपनी जान बचाने के लिए तालाब के किनारे उगी ऊँची-ऊँची घास में छिप गया था।
इस घटना का क्रम इस प्रकार था:
शुरुआती स्थान: सबसे पहले बाघ मूसलाधार बारिश से बचने के लिए दादी की झोंपड़ी के पीछे बैठा था।
डर का कारण: वहाँ उसने दादी को यह कहते सुना कि उन्हें शेर और बाघ से ज़्यादा डर 'टिपटिपवा' (टपकते पानी) से लगता है। बाघ ने अज्ञानतावश 'टिपटिपवा' को एक बड़ा और खतरनाक जानवर मान लिया।
पलायन और छिपना: हमले के डर से बाघ वहाँ से दुम दबाकर भागा और सुरक्षित स्थान की तलाश में तालाब के पास ऊँची घास में जाकर दुबक गया।
वहीं घास में छिपे होने के दौरान, अंधेरे और बारिश की वजह से धोबी (भोला) ने उसे अपना गदहा समझ लिया और उसे लट्ठ मारकर अपने साथ ले गया।
9. गाँववालों की आँखें खुली की खुली क्यों रह गईं?
सुबह जब गाँववाले सोकर उठे, तो उन्होंने देखा कि भोला के घर के बाहर खूँटे से एक गदहे की जगह एक असली बाघ बँधा हुआ है। यह नज़ारा देखकर उनकी आँखें खुली की खुली रह गईं क्योंकि बाघ एक अत्यंत हिंसक और खतरनाक जानवर होता है, जिसे कोई भी व्यक्ति इस तरह अपने घर के बाहर पालतू जानवर की तरह नहीं बाँधता।
गाँववालों के आश्चर्यचकित होने के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण थे:
असंभव दृश्य: किसी जंगली बाघ का इंसानी बस्ती में खूँटे से बँधे होना उनके लिए अकल्पनीय था।
बाघ का व्यवहार: वह बाघ बिना किसी विरोध के,भीगी बिल्ली बना चुपचाप खूँटे से बँधा हुआ था।
गलतफहमी का परिणाम: गाँववाले इस बात से अनजान थे कि भोला ने अंधेरे और बारिश के कारण उस बाघ को अपना गदहा समझ लिया था। बाघ भी 'टिपटिपवा' (जो कि वास्तव में टपकता पानी था) के डर से इतना भयभीत था कि उसने भोला को ही वह भयानक जानवर समझ लिया और उसके साथ चुपचाप चला आया।
संक्षेप में, एक खूँखार शिकारी का इस तरह पालतू जानवर की तरह बँधा होना ही गाँववालों की हैरानी का सबसे बड़ा कारण था।
इसे एक **उदाहरण** से ऐसे समझ सकते हैं जैसे कोई व्यक्ति सुबह उठकर देखे कि उसके पड़ोसी ने कुत्ते की जगह एक असली शेर को ज़ंजीर से बाँध रखा है; यह दृश्य किसी को भी हक्का-बक्का करने के लिए काफी है।
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