Ncert class 8 Hindi- chapter-9- आशोक का शस्त्र त्याग
Ncert class 8 Hindi- chapter-9- आशोक का शस्त्र त्याग
यह एकांकी सम्राट अशोक के हृदय परिवर्तन और उनके द्वारा हिंसा के त्याग की ऐतिहासिक घटना पर आधारित है। वर्षों तक चले कलिंग युद्ध के विनाशकारी परिणामों को देखकर अशोक ग्लानि से भर जाते हैं, विशेषकर जब राजकुमारी पद्मा के नेतृत्व में स्त्रियों की सेना युद्धभूमि में उनके सामने खड़ी होती है। अशोक औरतों पर शस्त्र न चलाने के अपने आदर्शों के कारण युद्ध न करने का संकल्प लेते हैं और पद्मा के तर्कों से प्रभावित होकर अपनी तलवार त्याग देते हैं। अंततः, सम्राट बौद्ध धर्म की शरण में जाते हैं और जीवन भर अहिंसा, प्रेम और लोक-कल्याण के मार्ग पर चलने की शपथ लेते हैं। यह रचना युद्ध की निरर्थकता को दर्शाते हुए शांति और करुणा के महत्व को प्रतिपादित करती है।
सम्राट अशोक के मुख पर चिंता क्यों थी और कलिंग का युद्ध कितने वर्षों से चल रहा था?
सम्राट अशोक के मुख पर चिंता का मुख्य कारण यह था कि चार वर्षों से युद्ध चलने और दोनों ओर से लाखों लोगों के मारे जाने या घायल होने के बावजूद, कलिंग को अभी तक जीता नहीं जा सका था और मगध की सेना असफल थी ।
कलिंग का युद्ध चार वर्षों से चल रहा था ।
संवाददाता ने अशोक को कलिंग के महाराज के बारे में क्या सूचना दी और यह भी बताया कि जीत अभी अधूरी क्यों है?
संवाददाता ने सम्राट अशोक को यह समाचार दिया कि कलिंग के महाराज लड़ाई में मारे गए हैं ।
उसने यह भी बताया कि जीत अभी अधूरी है क्योंकि कलिंग दुर्ग के फाटक आज भी बंद हैं, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि कलिंग पूरी तरह जीत लिया गया है ।
कलिंग दुर्ग के फाटक बंद होने की खबर सुनकर उत्तेजित अशोक ने सेनापति को क्या आदेश दिया?
कलिंग दुर्ग के फाटक बंद होने की खबर सुनकर उत्तेजित होकर सम्राट अशोक ने संवाददाता के माध्यम से सेनापति को यह आदेश भिजवाया कि अगले दिन सेना का संचालन वे (अशोक) स्वयं करेंगे ।
उन्होंने यह भी प्रतिज्ञा की कि कल या तो कलिंग दुर्ग के फाटक खुल जाएँगे या फिर मगध की सेना वापस चली जाएगी ।
जब कलिंग दुर्ग का फाटक खुला, तो अशोक और उनके सैनिकों ने सामने किसे खड़ा देखा, जिससे वे मंत्रमुग्ध रह गए?
जब कलिंग दुर्ग का फाटक खुला, तो अशोक और उनके सैनिकों ने शस्त्र-सज्जित स्त्रियों की एक विशाल सेना को बाहर आते देखा ।
इस सेना का नेतृत्व कलिंग महाराज की कन्या पद्मा कर रही थीं, जो पुरुष वेश में साक्षात् चंडी (देवी) जैसी प्रतीत हो रही थीं । स्त्रियों की इस सेना को युद्ध के लिए तैयार खड़ा देखकर अशोक और उनके सैनिक मंत्रमुग्ध और चकित रह गए ।
पद्मा के ललकारने पर भी अशोक ने युद्ध करना स्वीकार क्यों नहीं किया ?
पद्मा द्वारा बार-बार ललकारने और 'पिता का हत्यारा' कहने पर भी सम्राट अशोक ने युद्ध करना इसलिए स्वीकार नहीं किया क्योंकि पद्मा एक स्त्री थीं और उनके साथ खड़ी पूरी सेना भी स्त्रियों की ही थी।
स्रोतों के अनुसार, इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
शास्त्रों की आज्ञा: अशोक ने स्पष्ट किया कि स्त्रियों पर शस्त्र उठाना शास्त्रों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा, "मैं स्त्रियों पर शस्त्र नहीं चलाऊँगा... शास्त्र की आज्ञा है राजकुमारी" ।
नैतिकता और पश्चाताप: अशोक ने स्वयं से कहा कि वे स्त्री-वध का पाप नहीं करेंगे, भले ही उन्हें विजय न मिले । जब पद्मा ने उन्हें युद्ध के लिए उकसाया, तो उन्होंने अपनी तलवार फेंक दी और सदा के लिए युद्ध त्यागने का निर्णय ले लिया। उन्होंने पद्मा के सामने सिर झुकाकर कहा कि वे अपराधी हैं और अपना सिर कटवा सकते हैं, लेकिन अपनी प्रतिज्ञा तोड़कर हथियार नहीं उठाएंगे ।
पद्मा को अशोक से बदला लेने का अच्छा अवसर था, तब भी उसने अशोक को जीवित क्यों छोड़ दिया?
पद्मा के पास अशोक से बदला लेने का अच्छा अवसर था, लेकिन उसने अशोक को जीवित इसलिए छोड़ दिया क्योंकि अशोक ने अपने शस्त्र त्याग दिए थे और वे निहत्थे थे।
इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
निहत्थों पर वार न करना: जब अशोक ने अपनी तलवार फेंक दी और सिर झुकाकर मृत्यु स्वीकार कर ली, तो पद्मा ने कहा, "स्त्रियाँ भी निहत्थों पर वार नहीं करेंगी" । क्षत्रिय धर्म और मानवीय नैतिकता का पालन करते हुए उसने एक निहत्थे व्यक्ति को मारना उचित नहीं समझा।
प्रतिज्ञा का मान: अशोक ने प्रतिज्ञा ली थी कि वे अब कभी हथियार नहीं उठाएंगे। पद्मा ने उन्हें जीवनदान देते हुए कहा कि वे अपनी इस प्रतिज्ञा की रक्षा के लिए जीवित रहें ।
आशोक का शस्त्र-त्याग पाठ का महत्वपूर्ण नोट्स
यहाँ 'अशोक का शस्त्र-त्याग' एकांकी के विस्तृत नोट्स दिए गए हैं:
पाठ का नाम: अशोक का शस्त्र-त्याग
लेखक: वंशीधर श्रीवास्तव
मुख्य विषय: अहिंसा, शांति और सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन ।
प्रमुख पात्र
1. सम्राट अशोक: मगध के सम्राट, जो शुरू में विजय की लालसा रखते हैं लेकिन बाद में अहिंसा का मार्ग अपनाते हैं।
2. पद्मा: कलिंग महाराज की कन्या (राजकुमारी), जो वीरांगना है और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए स्त्रियों की सेना का नेतृत्व करती है।
3. संवाददाता: अशोक को युद्ध के समाचार देने वाला।
4. बौद्ध भिक्षु: अशोक को अहिंसा की दीक्षा देने वाले।
घटनाक्रम (सारांश)
1. प्रथम दृश्य: अशोक की चिंता और प्रतिज्ञा
कलिंग का युद्ध चार वर्षों से चल रहा था, जिसमें लाखों लोग मारे गए थे, फिर भी मगध की जीत अधूरी थी ।
संवाददाता ने समाचार दिया कि कलिंग के महाराज मारे गए हैं, लेकिन कलिंग दुर्ग के फाटक अभी भी बंद हैं ।
इस पर उत्तेजित होकर अशोक ने प्रतिज्ञा की कि अगले दिन वे स्वयं सेना का संचालन करेंगे और या तो दुर्ग के फाटक खुलवा देंगे या सेना वापस ले जाएंगे ।
2. द्वितीय दृश्य: पद्मा से सामना और हृदय परिवर्तन
अगले दिन जब दुर्ग का फाटक खुला, तो वहां से शस्त्र-सज्जित स्त्रियों की विशाल सेना निकली। इसका नेतृत्व पुरुष वेश में राजकुमारी पद्मा कर रही थीं ।
पद्मा ने अपनी सेना (बहिनों और वीर-पत्नियों) को ललकारा कि जिन्होंने उनके पिता, भाई और पति की हत्या की है, उनसे लोहा लो और जननी जन्मभूमि की रक्षा करो ।
अशोक ने स्त्रियों पर शस्त्र उठाने से मना कर दिया क्योंकि यह शास्त्रों के विरुद्ध है ।
पद्मा ने अशोक को "पिता का हत्यारा" कहा और तर्क दिया कि जिस शास्त्र ने लाखों माताओं की गोद सूनी कर दी, उसे फूंक देना चाहिए। उसने अशोक को युद्ध के लिए ललकारा ।
अशोक ने अपनी तलवार फेंक दी और सदा के लिए युद्ध न करने का निर्णय लिया। उन्होंने पद्मा के सामने सिर झुकाकर कहा कि वह उनका सिर काट ले, पर वह हथियार नहीं उठाएंगे ।
पद्मा ने यह कहकर अशोक को छोड़ दिया कि "स्त्रियाँ भी निहत्थों पर वार नहीं करेंगी" और अपनी सेना के साथ वापस चली गईं ।
3. तृतीय दृश्य: अशोक की नई प्रतिज्ञा
अशोक और उनके सरदारों ने पीले वस्त्र धारण कर लिए ।
बौद्ध भिक्षु के समक्ष अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया ।
अशोक द्वारा ली गई प्रतिज्ञाएँ:
1. अहिंसा ही मेरा धर्म होगा ।
2. मैं सबसे प्रेम करूँगा और करुणा का सदाव्रत सबको मिलेगा ।
3. प्रजा की भलाई और प्राणियों को सुख पहुँचाना ही लक्ष्य होगा ।
4. सब धर्मों को समान दृष्टि से देखूँगा ।
अंत में सभी ने "बुद्धं शरणं गच्छामि" का मंत्रोच्चार किया ।
महत्वपूर्ण बिंदु और संदेश
सच्ची विजय: पाठ यह संदेश देता है कि हिंसा से प्राप्त विजय स्थायी नहीं होती, प्रेम और अहिंसा से ही दिलों को जीता जा सकता है।
नारी शक्ति: पद्मा का चरित्र नारी की वीरता और नेतृत्व क्षमता का अद्भुत उदाहरण है, जिसने सम्राट अशोक जैसे विजेता को भी नतमस्तक कर दिया।
शस्त्र vs शास्त्र: अशोक पहले 'शस्त्र' (हथियार) पर भरोसा करते थे, लेकिन पद्मा के तर्कों और पश्चाताप के बाद उन्होंने 'शास्त्र' (धर्म और अहिंसा) का मार्ग चुना।
टिपटिपवा pdf + notes + solutionहुआ यूं कि pdf + notes + solutionम्यान का रंग pdf + notes + solutionउपकार का बदला pdf + notes + solutionचतुर चित्रकार pdf + notes + solutionनमकू pdf + notes + solutionममता की मूर्ति pdf + notes + solutionएक पत्र की आत्मकथा notes + solutionकविता का कमाल notes + solutionमरता क्या न करता notes + solutionअंधेर नगरी pdf + notes + solutionईद pdf + notes + solutionपरिक्षा pdf + notes + solutionअसली चित्र pdf + notes + solutionहाॅकी का जादूगर pdf + notesहार जीत pdf + notes + solutionमंत्र pdf + notes + solutionभीष्म की प्रतिज्ञा pdf + notes + solutionसरजू भैया pdf + notes + solutionदादा दादी के साथ pdf + notes + solutionस्वार्थी दानव pdf + notes + solutionफसलों का त्योहार pdf + notes + solutionशेरशाह का मकबरा pdf + notes + solutionनचिकेता pdf + notes + solutionदानी पेङ pdf + notes + solutionवीर कुँवर सिंह pdf + notes + solutionसाईकिल की सवारी pdf + notes + solutionहिमशुक pdf + notes + solutionऐसे ऐसे pdf + notes + solutionईदगाह pdf + notes + solutionबालगोबिन भगत pdf + notes + solutionहुंडरू का जलप्रपात pdf + notes + soluठेस pdf + notes + solutionआशोक का शस्त्र-त्याग pdf + n + sतू न गई मेरे मन सेविक्रमशिला pdf + notes + solutionदीदी की डायरी pdf + notes + soluदीनबंधु निराला pdf + notes + solutionखेमा pdf + notes + solutionचिकित्सा का चक्कर p + n + sकहानी का प्लॉट pdf + notes + solutionनालंदाग्राम-गीत का मर्मलाल पान की बेगममूक फिल्मों से...अष्टावक्र pdf + notes + solutionरेल-यात्रा pdf + notes + solutionश्रम विभाजन और जाति प्रथा (निबंध)मछली (कहानी) pdf + notes + solutionनौबतखाने में इबादत (व्यक्तिचित्र)शिक्षा और संस्कृति (शिक्षाशास्त्र)बातचीत pdf + notes + solutionसंपूर्ण क्रांति pdf + notes + solutionअर्धनारीश्वर pdf + notes + solutionरोज pdf + notes + solutionएक लेख और एक पत्रओ सदानीरा pdf + notes + solutionप्रगीत और समाजसिपाही की माँ pdf + notes + solutionउसने कहा थाशिक्षा pdf + notes + solutionहंसते हुए मेरा अकेलापनजूठन pdf + notes + solutionतिरिछ pdf + notes + solution
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें