Ncert class 6 Hindi- chapter 18- शेरशाह का मकबरा

Ncert class 6 Hindi- chapter 18- शेरशाह का मकबरा

यह पाठ एक स्कूली शैक्षिक भ्रमण के माध्यम से शेरशाह सूरी के जीवन और उनके भव्य मकबरे का विस्तृत वर्णन करता है। विद्यार्थी अपने शिक्षकों के साथ सासाराम की यात्रा करते हैं, जहाँ वे महान शासक की वीरता, प्रशासनिक सुधारों और जन-कल्याणकारी कार्यों के बारे में सीखते हैं। पूर्णनाथ सर बच्चों को बताते हैं कि कैसे शेरशाह ने हुमायूँ को हराकर सूरी वंश की स्थापना की और ग्रैंड ट्रंक रोड जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं का निर्माण कराया। यह विवरण अफ़गान स्थापत्य कला की बारीकियों को उजागर करता है, जिसमें मकबरे के विशाल गुंबद और अष्टकोणीय संरचना की प्रशंसा की गई है। अंत में, यह स्रोत विद्यार्थियों को हमारी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उनके प्रति नागरिक उत्तरदायित्वों को समझने की प्रेरणा देता है।

शेरशाह सूरी के बचपन का नाम क्या था और उनके पिता का क्या नाम था?

स्रोतों के अनुसार, शेरशाह सूरी के बचपन का नाम फरीद खाँ था। उनके पिता का नाम हसन खाँ सूरी था, जो एक बड़े जागीरदार थे।
शेरशाह के बारे में स्रोतों से कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ निम्नलिखित हैं:
उनका बचपन सासाराम में बीता था।
उन्होंने अकेले ही एक शेर को मार गिराया था, जिसके बाद से उन्हें 'शेर खाँ' कहा जाने लगा।
वे बहुत ही विद्वान, बुद्धिमान और बहादुर व्यक्ति थे और उन्होंने कम उम्र से ही अपने पिता की जागीर की देखभाल करना शुरू कर दिया था।

शेरशाह का जन्म कब हुआ था और उन्हें 'शेर खाँ' क्यों कहा जाने लगा?

स्रोतों के अनुसार, शेरशाह का जन्म 1472 में हुआ था। उनके बचपन का नाम फरीद खाँ था। उन्हें 'शेर खाँ' इसलिए कहा जाने लगा क्योंकि उन्होंने अकेले ही एक शेर को मार दिया था। वे बहुत विद्वान, बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति थे और उनका सारा जीवन संघर्ष में बीता था।

शेरशाह ने किस मुगल बादशाह को हराकर दिल्ली की गद्दी पर कब्जा किया और सूरीवंश की स्थापना की?

स्रोतों के अनुसार, शेरशाह ने मुगल बादशाह हुमायूँ को पराजित करके दिल्ली की गद्दी पर कब्जा किया और सूरीवंश की स्थापना की।
इस विजय से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ निम्नलिखित हैं: यह युद्ध सन् 1540 ई. में कन्नौज में हुआ था। हुमायूँ को हराते समय शेरशाह की आयु 68 वर्ष थी। उनकी सेना में ज्यादातर सिपाही बिहार के थे। बादशाह बनने से पहले शेरशाह ने बाबर की सेना में नौकरी भी की थी और वे बहुत अनुभवी व्यक्ति थे।

कन्नौज की लड़ाई कब हुई थी और उस समय शेरशाह की आयु क्या थी?

स्रोतों के अनुसार, कन्नौज की लड़ाई सन् 1540 ई. में हुई थी। इस युद्ध के समय शेरशाह की आयु 68 वर्ष थी।
इस ऐतिहासिक युद्ध के बारे में स्रोतों में कुछ महत्वपूर्ण विवरण दिए गए हैं: इस युद्ध में शेरशाह ने मुगल बादशाह हुमायूँ को पराजित किया था। इस विजय के पश्चात ही उन्होंने दिल्ली की गद्दी पर कब्जा किया और सूरीवंश की स्थापना की। उनकी सेना की एक विशेषता यह थी कि इसमें ज्यादातर सिपाही बिहार के थे। उनकी जीत का श्रेय उनके हिम्मत, साहस और अनुभव को दिया जाता है, क्योंकि वे पहले बाबर की सेना में भी नौकरी कर चुके थे।

शेरशाह ने जनता की सेवा और कल्याण के लिए कौन-कौन से मुख्य कार्य किए?

शेरशाह सूरी ने यद्यपि केवल पाँच वर्षों तक शासन किया, लेकिन उन्होंने जनता की सेवा और कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए, जिन्हें बाद के राजाओं ने भी अपनाया। उनके द्वारा किए गए मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
यातायात और बुनियादी ढाँचा: शेरशाह ने कई सड़कों का निर्माण करवाया। इनमें सबसे प्रसिद्ध ग्रैण्ड ट्रंक रोड है, जो कोलकाता से पेशावर (पाकिस्तान) तक जाती है। यह उनके महान योगदानों में से एक माना जाता है। 
यात्रियों की सुविधा: सड़कों के किनारे यात्रियों के ठहरने के लिए उन्होंने जगह-जगह पर सराय बनवाईं। इसके साथ ही उन्होंने जगह-जगह कुएँ खुदवाए और सड़कों के किनारे छायादार वृक्ष लगवाए ताकि यात्रियों को सुविधा हो सके।
कृषि और राजस्व सुधार: उन्होंने राजस्व और लगान की व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार किए, जिससे किसानों को बहुत लाभ हुआ। किसानों की सहायता के लिए उन्हें बहुत आसानी से ऋण (loan) दिया जाता था।
डाक और संचार: शेरशाह ने डाक और संचार की व्यवस्था में भी व्यापक सुधार किए।
न्याय व्यवस्था: वे एक न्यायप्रिय बादशाह थे, जिस कारण उनकी जनता उनसे बहुत खुश रहती थी। 
उनके द्वारा किए गए ये सुधार और प्रशासनिक कार्य इतने प्रभावी थे कि उन्हें इतिहास में एक महान शासक के रूप में स्थापित करते हैं।

ग्रैण्ड ट्रंक रोड का निर्माण किसने करवाया था और यह कहाँ से कहाँ तक जाती है?

ग्रैण्ड ट्रंक रोड का निर्माण भारत के महान शासक शेरशाह सूरी ने करवाया था। यह सड़क कोलकाता से पेशावर (पाकिस्तान) तक जाती है।
स्रोतों के अनुसार, इस सड़क का निर्माण शेरशाह के महान योगदानों में से एक माना जाता है। उन्होंने न केवल इस विशाल सड़क का निर्माण कराया, बल्कि यात्रियों की सुविधा के लिए सड़क के किनारे निम्नलिखित कार्य भी किए: जगह-जगह पर सराय (ठहरने के स्थान) बनवाए। पीने के पानी के लिए कुएँ खुदवाए। राहगीरों को आराम देने के लिए सड़क के किनारे छायादार वृक्ष लगवाए।

शेरशाह के मकबरे का निर्माण किसने और किन परिस्थितियों में करवाया था?

स्रोतों के अनुसार, शेरशाह के मकबरे का निर्माण उनके पुत्र और उत्तराधिकारी इस्लाम शाह सूरी ने करवाया था।
इस मकबरे के निर्माण की परिस्थितियाँ और उससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं:
निर्माण का कारण: सन् 1545 ई. में कालिंजर के किले की घेराबंदी के दौरान एक विस्फोट में शेरशाह सूरी का देहांत हो गया था। उनकी मृत्यु के उपरांत ही उनके पुत्र ने इस मकबरे का निर्माण कार्य संपन्न कराया।
सौन्दर्य और बनावट: मकबरे को और अधिक सुंदर दिखाने के लिए इसके चारों ओर एक बहुत बड़ा तालाब खुदवाया गया। यह भवन एक ऐक ऊँचे चौकोर चबूतरे पर बनाया गया है।
वास्तुकला: यह मकबरा पत्थर से बना है और आठ भुजाओं (अष्टकोणीय) वाला है। इसकी तीन मंजिलें हैं और इसकी ऊँचाई 45 मीटर से भी अधिक है।
यह मकबरा अफगान शैली की वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है।

सासाराम स्थित शेरशाह का मकबरा किस वास्तुशैली (स्थापत्य कला) का नमूना है और यह कितनी मंजिलों का है?

सासाराम में स्थित शेरशाह का मकबरा अफगान शैली की वास्तुकला (स्थापत्य कला) का एक बेहतरीन नमूना है। 
स्रोतों के अनुसार, इस मकबरे की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
मंजिलें: यह मकबरा तीन मंजिलों का है।
आकार और बनावट: यह भवन आठ भुजाओं वाला है और पत्थर से बना है। इसे एक बहुत बड़े तालाब के बीच एक ऊँचे चौकोर चबूतरे पर निर्मित किया गया है। 
ऊँचाई और गुंबद: इसकी ऊँचाई 45 मीटर से भी अधिक है। इसका गुंबद अत्यंत विशाल है, जो ताजमहल के गुंबद से भी 13 फुट बड़ा है।
अन्य विशेषताएँ: मकबरे के ऊपरी भाग में कई खिड़कियाँ और जालियाँ बनाई गई हैं ताकि अंदर पर्याप्त रोशनी और हवा आ सके। इस मुख्य मकबरे में शेरशाह सूरी के अलावा उनके चौबीस साथी भी दफन हैं।

मकबरे के गुंबद की विशालता के बारे में क्या बताया गया है और इसकी तुलना किससे की गई है?

स्रोतों के अनुसार, शेरशाह सूरी के मकबरे के गुंबद की विशालता के संबंध में यह बताया गया है कि यह अत्यंत विशाल (बहुत बड़ा) है। इसकी ऊँचाई के बारे में जानकारी दी गई है कि यह मकबरा 45 मीटर से भी अधिक ऊँचा है।
इस मकबरे के गुंबद की तुलना विश्व प्रसिद्ध ताजमहल से की गई है। स्रोतों में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि शेरशाह के मकबरे का गुंबद ताजमहल के गुंबद से 13 फुट बड़ा है। यह स्थापत्य कला की दृष्टि से अफगान शैली का एक बेहतरीन नमूना माना जाता है।

शेरशाह के मकबरे में उनके अलावा कितने और साथी दफन हैं?

स्रोतों के अनुसार, सासाराम स्थित शेरशाह सूरी के मकबरे में उनके अलावा उनके चौबीस (24) साथी दफन हैं।
इस मकबरे से जुड़ी कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं: यह मकबरा अफगान शैली की वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है।
यह तीन मंजिलों वाला भवन है और पत्थर से बना है। इसका गुंबद इतना विशाल है कि यह ताजमहल के गुंबद से भी 13 फुट बड़ा है। यह मकबरा एक ऊँचे चौकोर चबूतरे पर बना है और इसके चारों ओर एक बहुत बड़ा तालाब है।

शेरशाह का मकबरा पाठ का नोट्स

प्रस्तुत पाठ 'शेरशाह का मकबरा' के आधार पर महत्वपूर्ण नोट्स निम्नलिखित हैं:
1. शेरशाह सूरी: जीवन परिचय जन्म: शेरशाह का जन्म सन् 1472 ई. में हुआ था।
बचपन का नाम: उनके बचपन का नाम फरीद खाँ था।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता का नाम हसन खाँ सूरी था, जो एक बड़े जागीरदार थे। 'शेर खाँ' की उपाधि: उन्होंने अकेले ही एक शेर को मार गिराया था, जिसके कारण उन्हें 'शेर खाँ' कहा जाने लगा।
व्यक्तित्व: वे एक अत्यंत विद्वान, बहादुर, बुद्धिमान और अनुभवी व्यक्ति थे।
2. सत्ता प्राप्ति और सूरीवंश की स्थापना कन्नौज का युद्ध (1540 ई.): शेरशाह ने मुगल बादशाह हुमायूँ को पराजित कर दिल्ली की गद्दी पर कब्जा किया और सूरीवंश की स्थापना की।
साहस का परिचय: हुमायूँ को हराते समय उनकी आयु 68 वर्ष थी। उनकी सेना में मुख्य रूप से बिहार के सिपाही शामिल थे।
अनुभव: बादशाह बनने से पहले उन्होंने बाबर की सेना में भी नौकरी की थी।
3. लोक-कल्याणकारी और प्रशासनिक कार्य
शेरशाह ने केवल पाँच वर्ष तक शासन किया, लेकिन जनता की सेवा के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए:
यातायात: उन्होंने ग्रैण्ड ट्रंक रोड का निर्माण करवाया, जो कोलकाता से पेशावर (पाकिस्तान) तक जाती है।
जन सुविधाएँ: सड़कों के किनारे यात्रियों के लिए सराय, पीने के पानी के लिए कुएँ और छायादार वृक्ष लगवाए।
सुधार: उन्होंने डाक, संचार, राजस्व और लगान व्यवस्था में व्यापक सुधार किए। किसानों की सहायता: किसानों को खेती के लिए आसानी से ऋण (loan) उपलब्ध कराया जाता था।
न्याय: वे एक न्यायप्रिय बादशाह थे।
4. शेरशाह का मकबरा (सासाराम)
निर्माण: शेरशाह की मृत्यु (1545 ई. में कालिंजर के किले में विस्फोट के कारण) के बाद उनके पुत्र और उत्तराधिकारी इस्लाम शाह सूरी ने इसका निर्माण करवाया।
स्थापत्य शैली: यह मकबरा अफगान शैली का एक बेहतरीन नमूना है।
बनावट और विशेषताएँ:
यह पत्थर से बना है और एक ऊँचे चौकोर चबूतरे पर स्थित है। यह तीन मंजिलों वाला और आठ भुजाओं वाला भवन है। इसकी ऊँचाई 45 मीटर से भी अधिक है। इसका विशाल गुंबद ताजमहल के गुंबद से 13 फुट बड़ा है। मकबरा एक बड़े तालाब के बीच में स्थित है, जिसमें जाने के लिए सीढ़ियाँ बनी हैं।
अन्य तथ्य: इस मकबरे में शेरशाह के अलावा उनके 24 साथी भी दफन हैं।
5. ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण यह मकबरा अब भारत की ऐतिहासिक धरोहरों की सूची में शामिल है। राज्य सरकार इसके रख-रखाव पर हर साल लाखों रुपये खर्च करती है। पाठ यह संदेश देता है कि ऐतिहासिक स्मारकों को साफ रखना और उनकी रक्षा करना सभी नागरिकों का कर्तव्य है।
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