Ncert class 5 Hindi- chapter 16- मरता क्या न करता

Ncert class 5 Hindi- chapter 16- मरता क्या न करता

यह कहानी विष्णु पोट्टि नामक एक गरीब ब्राह्मण के बारे में है, जो अपनी आर्थिक तंगी के बावजूद अत्यधिक दानवीर कहलाने के शौक में प्रतिदिन मेहमानों को घर बुलाता था। उनकी पत्नी लक्ष्मी इस आदत से परेशान थी क्योंकि मेहमानों को खिलाने के कारण उसे स्वयं भूखा रहना पड़ता था। अपने पति को समझाने में विफल रहने के बाद, उसने एक चतुर योजना बनाई और मेहमानों को डरा दिया कि विष्णु उन्हें मूसल से पीटेंगे। जब मेहमान जान बचाकर भागे, तो विष्णु मूसल लेकर उनके पीछे उन्हें रोकने के लिए दौड़े, जिससे गाँव वालों को लगा कि वे सचमुच हिंसक हैं। इस बुद्धिमानी भरी चाल के कारण विष्णु के घर मेहमानों का आना बंद हो गया और लक्ष्मी को अंततः अपनी समस्या से मुक्ति मिल गई।

कहानी का संक्षेपण:

के. शिव कुमार द्वारा लिखित कहानी 'मरता क्या न करता' का संक्षेपण निम्नलिखित है:
केरल के एक गाँव में विष्णु पोट्टि नाम के एक बहुत ही गरीब व्यक्ति रहते थे, जिन्हें दानी कहलाने का बहुत शौक था। वे अपनी आर्थिक स्थिति की चिंता किए बिना रोज़ किसी न किसी को अपने घर भोजन पर ले आते थे। उनकी पत्नी लक्ष्मी को उनकी यह आदत पसंद नहीं थी क्योंकि मेहमानों को खिलाने के कारण उसे अक्सर भूखा रहना पड़ता था। जब विष्णु ने लक्ष्मी की बात नहीं मानी, तो उसने एक तरकीब सोची।
एक दिन जब विष्णु दो अजनबियों को भोजन के लिए घर लाए, तो लक्ष्मी ने उनके सामने मूसल की पूजा करने का नाटक किया। उसने मेहमानों को डराते हुए झूठ बोला कि उसके पति खाना खिलाने के बाद मेहमानों को इसी मूसल से पीटते हैं। यह सुनकर अतिथि डर के मारे वहाँ से भाग निकले।
जब विष्णु वापस आए, तो लक्ष्मी ने उनसे कहा कि मेहमान मूसल माँग रहे थे और न मिलने पर नाराज़ होकर चले गए। विष्णु अतिथि सेवा के भाव में मूसल लेकर उनके पीछे उन्हें देने के लिए दौड़े। मेहमानों ने जब विष्णु को हाथ में मूसल लेकर पीछे आते देखा, तो उन्हें लगा कि वे वास्तव में उन्हें मारने आ रहे हैं और वे अपनी जान बचाकर भागे। इस घटना के बाद गाँव में यह बात फैल गई कि विष्णु पोट्टि मेहमानों को मूसल से मारते हैं, जिसके कारण कोई भी उनके घर भोजन के लिए नहीं आया और लक्ष्मी को फिर कभी भूखा नहीं रहना पड़ा।
शिक्षा/उपमा:
लक्ष्मी की यह चतुराई उस स्थिति जैसी है जहाँ "सीधी उँगली से घी न निकले, तो उँगली टेढ़ी करनी पड़ती है।" उसने अपने पति के हठ को उन्हीं के सेवा भाव का सहारा लेकर एक गलतफहमी के जरिए खत्म कर दिया।

1. लक्ष्मी को विष्णु पोट्टि की कौन-सी आदत पसंद नहीं थी?

लक्ष्मी को विष्णु पोट्टि की हर रोज़ किसी न किसी को भोजन के लिए घर ले आने की आदत पसंद नहीं थी।
इस नापसंदगी के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण थे:
अत्यधिक गरीबी: विष्णु पोट्टि बहुत गरीब थे, लेकिन उन्हें 'दानी' कहलाने का शौक था। वे घर में भोजन की उपलब्धता की चिंता किए बिना ही रोज़ दो-एक लोगों को साथ ले आते थे।
लक्ष्मी का भूखा रहना: घर में जो भी थोड़ा-बहुत रूखा-सूखा भोजन जुटता था, वह उन दोनों के लिए भी पर्याप्त नहीं होता था। मेहमानों को खिलाने के लिए लक्ष्मी को अपना हिस्सा उन्हें देना पड़ता था, जिसके कारण वह अक्सर कई-कई दिनों तक भूखी रह जाती थी।
पड़ोसियों का व्यवहार: लक्ष्मी को घर चलाने के लिए पड़ोसियों से कभी चावल तो कभी सब्ज़ी उधार माँगनी पड़ती थी। पड़ोसी भी उससे नाराज़ रहते थे क्योंकि रोज़ मेहमानों को आते-जाते देख उन्हें विष्णु पोट्टि की गरीबी पर यकीन नहीं होता था और लक्ष्मी की मदद करने वाला कोई नहीं था।
अंततः, जब लक्ष्मी की सहनशक्ति समाप्त हो गई, तो उसने अपने पति से स्पष्ट कहा कि उसे अब यह सब और सहन नहीं होता और उन्हें लोगों को घर बुलाना बंद कर देना चाहिए।
उपमा:
विष्णु पोट्टि की यह आदत उस स्थिति की तरह थी जहाँ कोई व्यक्ति "अपना घर जलाकर तमाशा देखे"। वे दूसरों की सेवा और अपनी वाहवाही के चक्कर में अपनी पत्नी की बुनियादी जरूरतों और घर की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह अनदेखा कर रहे थे।

2. लक्ष्मी के पड़ोसी उससे क्यों नाराज रहते थे?

लक्ष्मी के पड़ोसी उनसे मुख्य रूप से इसलिए नाराज़ रहते थे क्योंकि लक्ष्मी को अपने पति द्वारा लाए गए मेहमानों को खिलाने के लिए अक्सर पड़ोसियों से चावल और सब्ज़ियाँ उधार माँगनी पड़ती थीं।
पड़ोसियों की इस नाराजगी और अविश्वास के निम्नलिखित कारण थे:
विरोधाभास: पड़ोसी रोज़ विष्णु पोट्टि के घर मेहमानों को आते और भोजन करते देखते थे। इस दृश्य को देखकर उन्हें इस बात पर बिलकुल विश्वास नहीं होता था कि लक्ष्मी और उसका परिवार वास्तव में गरीब हैं।
मदद की कमी: पड़ोसियों को लगता था कि यदि कोई परिवार रोज़ मेहमानों की सेवा कर सकता है, तो वह गरीब नहीं हो सकता। इसी गलतफहमी के कारण बेचारी लक्ष्मी की मदद करने वाला कोई नहीं था और उसे लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ती थी।
लक्ष्मी की यह स्थिति बहुत दयनीय थी क्योंकि वह पड़ोसियों से माँगकर मेहमानों का पेट भरती थी और खुद अक्सर कई-कई दिनों तक भूखी रह जाती थी।
उपमा:
लक्ष्मी की स्थिति उस सूखे कुएँ की तरह थी, जिसके बाहर 'मुफ्त पानी' का बोर्ड लगा था। लोग बाहर से भीड़ देखकर समझते थे कि कुआँ लबालब भरा है, जबकि वह दूसरों की प्यास बुझाने के लिए पड़ोस की बूंदों पर निर्भर था और खुद अंदर से पूरी तरह सूखा था।

3. लक्ष्मी ने विष्णु पोट्टि को क्या समझाया?

लक्ष्मी ने विष्णु पोट्टि को उनकी गरीबी और घर की वास्तविक स्थिति का आइना दिखाने की कोशिश की। उन्होंने विष्णु को निम्नलिखित मुख्य बातें समझाईं:
भोजन की उपलब्धता: लक्ष्मी ने कहा कि विष्णु हर रोज़ किसी न किसी को भोजन पर ले आते हैं, लेकिन वे कभी यह नहीं पूछते कि घर में सबके लिए खाना पूरा पड़ेगा भी या नहीं।
अत्यधिक गरीबी का हवाला: उन्होंने समझाया कि वे बहुत गरीब हैं और जो भी रूखा-सूखा भोजन वे जुटा पाते हैं, वह उन दोनों का पेट भरने के लिए भी पर्याप्त नहीं होता। ऐसे में रोज़-रोज़ दूसरों के लिए भोजन का प्रबंध करना असंभव है।
स्वयं का त्याग और पीड़ा: लक्ष्मी ने अपनी व्यथा प्रकट करते हुए बताया कि मेहमानों को खिलाने के चक्कर में उन्हें अपना हिस्सा छोड़ना पड़ता है और वे स्वयं कई-कई दिनों तक भूखी रह जाती हैं। 
स्पष्ट मनाही: अंत में उन्होंने विष्णु को दो-टूक शब्दों में कहा कि अब उनसे यह सब और सहन नहीं होता और उन्हें लोगों को घर बुलाना बंद कर देना चाहिए।
हालाँकि, इन सब बातों का विष्णु पोट्टि पर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने अगले दिन फिर मेहमानों को घर लाकर लक्ष्मी को अपनी चतुराई भरी योजना बनाने पर मजबूर कर दिया।
उपमा:
लक्ष्मी द्वारा विष्णु पोट्टि को दी गई यह समझाइश उस नाविक की चेतावनी की तरह थी जो डूबती नाव में और यात्री बिठाने से मना कर रहा हो, क्योंकि नाव का बोझ पहले से ही उसकी क्षमता से बाहर था।

4. दोपहर को दो अजनबियों को देख लक्ष्मी ने क्या किया?

दोपहर को जब लक्ष्मी ने विष्णु पोट्टि को दो अजनबियों के साथ घर आते देखा, तो वह पहले तो घबरा गई क्योंकि उसे लगा कि आज फिर उसे भूखा रहना पड़ेगा। लेकिन तुरंत ही उसने एक चतुराई भरी योजना बनाई और निम्नलिखित कदम उठाए:
मूसल की पूजा का नाटक: लक्ष्मी धान कूटने का मूसल उठा लाई और उसे दीवार के सहारे टिका दिया। उसने एक दीप जलाकर मूसल के आगे रखा, उसके चारों ओर कुछ फूल बिखेर दिए और अतिथियों के सामने हाथ जोड़कर ध्यानमग्न होकर बैठ गई।
अतिथियों में जिज्ञासा पैदा करना: उसने जानबूझकर ऐसी जगह पूजा की जहाँ से अतिथि उसे देख सकें। जब हैरान अतिथियों ने उससे मूसल की पूजा का कारण पूछा, तो उसने आँखों में आँसू भरकर इसे एक रहस्य बताया और उनसे वादा लिया कि वे यह बात उसके पति को नहीं बताएँगे।
भयानक झूठ बोलना: लक्ष्मी ने अजनबियों को डराने के लिए झूठ बोला कि उसके पति मेहमानों को खाना खिलाने के बाद इसी मूसल से खूब पीटते हैं और वे इसे अपना धर्म समझते हैं। उसने यह भी कहा कि वह मूसल की पूजा इसलिए कर रही है ताकि उसे इस 'पाप' का हिस्सा न बनना पड़े।
लक्ष्मी की इस हरकत का उद्देश्य अतिथियों के मन में डर पैदा करना था ताकि वे भोजन किए बिना ही वहाँ से भाग जाएँ और उसे अपना भोजन न खोना पड़े।
उपमा:
लक्ष्मी का यह व्यवहार खेत में खड़े उस बिजूके (scarecrow) की तरह था, जो वास्तव में किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता, लेकिन खतरे का भ्रम पैदा करके अपनी फसल (यहाँ उसका भोजन) की रक्षा करता है।

5. लक्ष्मी ने अतिथियों से ऐसा क्या कहा कि वे भाग खड़े हुए?

लक्ष्मी ने अतिथियों को डराने के लिए अपनी योजना के अनुसार एक भयानक झूठ बोला। उन्होंने अतिथियों से कहा कि उनके पति एक दानी व्यक्ति हैं और मेहमानों को घर बुलाकर भोजन तो कराते हैं, लेकिन भोजन कराने के बाद वे उन्हें इसी मूसल से खूब पीटते हैं।
लक्ष्मी ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए निम्नलिखित बातें कहीं:
उन्होंने अतिथियों को बताया कि उनके पति मेहमानों को पीटना ही अपना धर्म समझते हैं।
लक्ष्मी ने मूसल की पूजा करने का कारण यह बताया कि वे ऐसा इसलिए कर रही हैं ताकि उन्हें इस मारपीट के 'पाप' का हिस्सा न बनना पड़े।
उन्होंने अतिथियों से यह भी वादा लिया कि वे यह बात उनके पति को नहीं बताएँगे।
यह सुनकर अतिथि बुरी तरह चकरा गए और उन्हें लगा कि वहाँ से चुपचाप खिसक जाने में ही भलाई है, जिसके बाद वे अपनी जान बचाकर पीछे के दरवाज़े से भाग निकले।
उपमा:
लक्ष्मी की यह बात उस चेतावनी की तरह थी, जैसे किसी सुंदर बगीचे के बाहर लिखा हो कि "अंदर आना मना है, यहाँ शिकारी कुत्ते रहते हैं।" जिस तरह कोई व्यक्ति फूलों के लालच में आकर कुत्तों के डर से भाग जाता है, वैसे ही अतिथि भोजन का विचार छोड़कर अपनी सुरक्षा के लिए भाग खड़े हुए।

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