Ncert class 5 Hindi- chapter 5- म्यान का रंग

Ncert class 5 Hindi- chapter 5- म्यान का रंग

यह कहानी दो राजाओं, खड़ग सिंह और कड़क सिंह के बीच की पुरानी दुश्मनी के अंत को दर्शाती है, जिसका वास्तविक कारण वे स्वयं नहीं जानते थे। उनके बुद्धिमान मंत्रियों ने उन्हें एक पेड़ के पास बुलाकर एक ऐसी म्यान दिखाई जो एक तरफ से लाल और दूसरी तरफ से सफेद थी। अपनी-अपनी तरफ से अलग रंग देखने के कारण राजाओं के बीच फिर से विवाद शुरू हो गया और वे युद्ध के लिए तैयार हो गए। तभी मंत्रियों ने हस्तक्षेप कर उन्हें समझाया कि सत्य के दो पहलू होते हैं और वे दोनों अपनी जगह सही थे। इस घटना ने राजाओं को उनकी गलतफहमी का अहसास कराया और उनमें स्थायी मेल-मिलाप करा दिया। यह कथा सिखाती है कि विवेक और सूझबूझ से किसी भी बड़े संघर्ष को टाला जा सकता है।

कहानी का संक्षेपण:

यह कहानी दो राजाओं, खड़ग सिंह और कड़क सिंह की है, जिनके बीच बिना किसी ज्ञात कारण के पुश्तैनी दुश्मनी चली आ रही थी। इस बेवजह के तनाव से उनके मंत्री और सेनाएँ बहुत परेशान थे, इसलिए दोनों राज्यों के महामंत्रियों ने इस दुश्मनी को समाप्त करने के लिए एक चतुर योजना बनाई और राजाओं को सीमा पर स्थित एक पीपल के पेड़ के नीचे मिलने के लिए राजी किया।
मंत्रियों ने उस पेड़ की एक डाल पर पहले से ही एक बहुमूल्य म्यान लटका दी थी। जब राजा वहाँ पहुँचे, तो खड़ग सिंह ने उसे लाल रंग और रत्नों से जड़ा हुआ बताया, जबकि कड़क सिंह ने उसे सफेद और मोतियों वाला कहा। अपनी-अपनी बात पर अड़े रहने के कारण दोनों में विवाद इतना बढ़ गया कि उन्होंने एक-दूसरे पर हमला करने के लिए तलवारें निकाल लीं।
ठीक उसी समय महामंत्रियों ने सामने आकर उन्हें रोका और समझाया कि वे दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं, क्योंकि वह म्यान एक तरफ से लाल और दूसरी तरफ से सफेद थी। राजाओं को अहसास हुआ कि उनकी लड़ाई का कारण केवल एक गलतफहमी थी और वे बिना पूरी सच्चाई जाने एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे। अपनी गलती का अहसास होने पर उन्होंने भविष्य में कभी न लड़ने का प्रण लिया और इस तरह मंत्रियों की सूझबूझ से उनकी दुश्मनी हमेशा के लिए खत्म हो गई ।
यह स्थिति वैसी ही थी जैसे एक ही सिक्के के दो पहलू, जहाँ दोनों राजा अपनी-अपनी जगह सच देख रहे थे, बस उन्हें दूसरे के दृष्टिकोण को समझने की आवश्यकता थी।

1. खड़ग सिंह और कड़क सिंह के बीच दुश्मनी का कारण क्या था?

राजा खड़ग सिंह और कड़क सिंह के बीच दुश्मनी का कोई ठोस या स्पष्ट कारण नहीं था; वास्तव में, उनके बीच एक पुश्तैनी दुश्मनी चली आ रही थी।
सूत्रों के अनुसार, इस दुश्मनी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि:
दोनों ही राजाओं को अपनी दुश्मनी का वास्तविक कारण पता नहीं था। वे केवल इसलिए एक-दूसरे से झगड़ते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि इस पुरानी दुश्मनी को निभाना उनके लिए ज़रूरी है। उनकी सेनाएँ और मंत्री उनके इन बिना वजह के झगड़ों से बहुत परेशान रहते थे।
कहानी में बाद में उनके बीच युद्ध जैसी स्थिति एक गलतफहमी के कारण पैदा हुई थी। वे एक पीपल के पेड़ पर लटकी म्यान के रंग को लेकर आपस में भिड़ गए थे, क्योंकि खड़ग सिंह को वह म्यान लाल दिखाई दे रही थी और कड़क सिंह को सफेद। असल में, वह म्यान एक तरफ से लाल और दूसरी तरफ से सफेद थी, जिसे राजाओं ने केवल अपनी-अपनी तरफ से देखा था। 
अंततः, महामंत्रियों ने उन्हें समझाया कि लड़ाई अक्सर पूरी सच्चाई जाने बिना, केवल गलतफहमी के कारण होती है।

दोनों राजाओं के महामंत्री ने क्या योजना बनाई ताकि उनकी दुश्मनी खत्म हो?

दोनों राजाओं के महामंत्रियों ने उनकी पुश्तैनी दुश्मनी को समाप्त करने के लिए एक बहुत ही चतुर और मनोवैज्ञानिक योजना बनाई।
इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:-
मिलन स्थान का चयन: महामंत्रियों ने दोनों राजाओं को राज्यों की सीमा पर स्थित एक पीपल के पेड़ के नीचे मिलने के लिए राजी किया। 
म्यान का उपयोग: मंत्रियों ने उस पेड़ की एक डाल पर पहले से ही एक कीमती म्यान लटका दी थी। इस म्यान की विशेष बनावट ही उनकी योजना का मुख्य आधार थी।
दो पहलुओं वाला सत्य: वह म्यान एक तरफ से लाल रंग की और रत्नों से जड़ी थी, जबकि दूसरी तरफ से वह सफेद रंग की और मोतियों वाली थी। मंत्रियों ने इसे इस तरह लटकाया था कि पेड़ की एक तरफ खड़े खड़ग सिंह को वह लाल दिखे और दूसरी तरफ खड़े कड़क सिंह को वह सफेद दिखाई दे।
गलतफहमी का अहसास कराना: मंत्रियों का उद्देश्य यह था कि जब दोनों राजा अपनी-अपनी बात पर अड़कर लड़ने लगेंगे, तब वे सामने आकर उन्हें सच्चाई दिखाएंगे। उनका लक्ष्य राजाओं को यह समझाना था कि लड़ाई अक्सर पूरी सच्चाई न जानने और केवल अपने दृष्टिकोण को सही मानने के कारण होती है। 
जब राजाओं ने देखा कि म्यान वास्तव में दोनों रंगों की थी, तो उन्हें अपनी गलती और गलतफहमी का अहसास हुआ, जिससे उनकी वर्षों पुरानी दुश्मनी समाप्त हो गई । 
यह योजना हमें सिखाती है कि किसी भी विवाद में सिक्के के दो पहलू होते हैं और बिना पूरी जांच-परख किए किसी निष्कर्ष पर पहुँचना केवल विनाश का कारण बनता है।

पीपल के पेड़ पर क्या लटका हुआ था?

पीपल के पेड़ की एक डाल पर दोनों राज्यों के महामंत्रियों ने एक बहुमूल्य म्यान (sword's scabbard) लटका दी थी।
इस म्यान की कुछ विशेष विशेषताएँ थीं, जो कहानी के मोड़ के लिए महत्वपूर्ण थीं:
यह म्यान एक तरफ से लाल रंग की थी और रत्नों से जड़ी हुई थी। दूसरी तरफ से यह सफेद रंग की थी और इस पर मोती जड़े हुए थे।
मंत्रियों ने इसे जानबूझकर वहां लटकाया था ताकि दोनों राजा इसे अपने-अपने स्थान से देखें। चूँकि दोनों राजा पेड़ के अलग-अलग किनारों पर खड़े थे, इसलिए उन्हें म्यान के अलग-अलग रंग दिखाई दिए, जिससे उनके बीच विवाद उत्पन्न हुआ और अंततः उन्हें अपनी गलतफहमी का अहसास हुआ।
यह म्यान एक ही सिक्के के दो पहलुओं की तरह थी, जहाँ सच्चाई इस पर निर्भर थी कि आप उसे किस तरफ से देख रहे हैं।

खड़ग सिंह और कड़क सिंह ने म्यान के बारे में क्या कहा?

पीपल के पेड़ पर लटकी म्यान को देखकर दोनों राजाओं ने उसके रंग और बनावट के बारे में अलग-अलग बातें कहीं: 
खड़ग सिंह ने म्यान को देखते ही उसकी सुंदरता की तारीफ की और कहा कि यह लाल रंग की है और इसमें जड़े रत्न इसकी खूबसूरती को और अधिक बढ़ा रहे हैं। कड़क सिंह ने उनकी बात को काटते हुए कहा कि म्यान बहुमूल्य तो है, लेकिन वह सफेद रंग की है और उस पर मोती जड़े हुए हैं।
अपनी-अपनी बात पर अड़े होने के कारण दोनों राजाओं में बहस हो गई। खड़ग सिंह ने कड़क सिंह को झूठा कहा, जबकि कड़क सिंह ने यहाँ तक कह दिया कि शायद खड़ग सिंह अंधे हो गए हैं या फिर वे दुश्मनी छोड़ना ही नहीं चाहते। यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ने एक-दूसरे पर हमला करने के लिए अपनी तलवारें निकाल लीं।
यह स्थिति बिल्कुल एक ही सिक्के के दो पहलुओं जैसी थी, जहाँ दोनों राजा अपनी जगह सही थे, लेकिन वे केवल सत्य का वह हिस्सा देख पा रहे थे जो उनके सामने था।

5. दोनों राजाओं की लड़ाई को रोकने के लिए कौन आगे आया?

जब राजा खड़ग सिंह और कड़क सिंह म्यान के रंग को लेकर आपस में विवाद करने लगे और लड़ने के लिए अपनी तलवारें निकाल लीं, तब उन्हें रोकने के लिए दोनों राज्यों के महामंत्री सामने आए।
महामंत्रियों की भूमिका के बारे में मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
वे उस समय वहीं छिपे हुए थे और जैसे ही राजा एक-दूसरे पर वार करने के लिए आगे बढ़े, वे तुरंत बाहर निकल आए। उन्होंने राजाओं को समझाते हुए कहा कि लड़ने से पहले हर पहलू पर विचार कर लेना ही समझदारी है। उन्होंने ही राजाओं को यह सच्चाई दिखाई कि वह म्यान एक तरफ से लाल और दूसरी तरफ से सफेद थी, इसलिए दोनों अपनी-अपनी जगह सही थे। मंत्रियों ने उन्हें यह महत्वपूर्ण सीख दी कि लड़ाई अक्सर गलतफहमी और पूरी सच्चाई न जानने के कारण होती है।
महामंत्रियों की इसी सूझबूझ के कारण दोनों राजाओं को अपनी गलती का अहसास हुआ और उनकी पुश्तैनी दुश्मनी हमेशा के लिए समाप्त हो गई ।

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महामंत्रियों ने राजाओं को क्या समझाया?

जब राजा खड़ग सिंह और कड़क सिंह म्यान के रंग को लेकर एक-दूसरे पर वार करने के लिए आगे बढ़े, तब महामंत्रियों ने उन्हें रोकते हुए बहुत ही बुद्धिमानी से निम्नलिखित बातें समझाईं:
हर पहलू पर विचार करना: मंत्रियों ने कहा कि लड़ने से पहले किसी भी स्थिति के हर पहलू पर विचार कर लेना ही समझदारी है। दोनों का सत्य: उन्होंने राजाओं को बताया कि वे दोनों ही अपनी-अपनी जगह सही बोल रहे थे क्योंकि वह म्यान एक तरफ से लाल थी और दूसरी तरफ से सफेद। उन्होंने समझाया कि विवाद इसलिए हुआ क्योंकि दोनों ने म्यान को केवल अपनी तरफ से देखा था और उसे दोनों तरफ से देखने की कोशिश नहीं की थी।
लड़ाई का मूल कारण: महामंत्रियों ने यह स्पष्ट किया कि लड़ाई अक्सर गलतफहमी के कारण होती है। जाँच-परख का महत्व: उन्होंने राजाओं को अहसास कराया कि यदि वे बिना गुस्सा किए उस म्यान की सही ढंग से जाँच-परख कर लेते, तो उनके बीच युद्ध की नौबत ही नहीं आती।
महामंत्रियों की इन बातों को सुनकर राजाओं को अपनी गलती समझ में आ गई और उन्होंने भविष्य में कभी न लड़ने का प्रण लिया, जिससे उनकी पुश्तैनी दुश्मनी खत्म हो गई।
यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही थी जैसे एक ही सिक्के के दो पहलू, जहाँ दोनों अपनी जगह सच देख रहे थे, लेकिन पूर्ण सत्य को जानने के लिए सिक्के को पलट कर देखना आवश्यक था।

8. खड़ग सिंह और कड़क सिंह ने क्या प्रण किया?

जब राजा खड़ग सिंह और कड़क सिंह को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्हें अपने महामंत्रियों द्वारा समझाई गई बात समझ में आ गई, तब उन्होंने एक महत्वपूर्ण प्रण लिया।
स्रोतों के अनुसार, उस दिन के बाद दोनों राजाओं ने यह प्रण कर लिया कि वे भविष्य में कभी नहीं लड़ेंगे। उनकी वर्षों से चली आ रही पुश्तैनी दुश्मनी, जिसका कोई स्पष्ट कारण भी उन्हें पता नहीं था, महामंत्रियों की सूझबूझ और इस शपथ के साथ हमेशा के लिए समाप्त हो गई।
राजाओं को यह समझ आ गया था कि उनकी लड़ाई केवल एक गलतफहमी और किसी भी स्थिति के केवल एक पहलू को देखने के कारण हो रही थी। अपनी इस गलती को सुधारते हुए उन्होंने युद्ध का रास्ता छोड़कर शांति से रहने का निर्णय लिया।
यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे एक धुंधले दर्पण को साफ कर देना, जिससे सामने खड़ा व्यक्ति शत्रु नहीं बल्कि अपना ही प्रतिबिंब नजर आने लगता है; जैसे ही सच्चाई की रोशनी पड़ी, उनके मन का मैल और दुश्मनी का भाव दोनों मिट गए।
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