Ncert class 7 Hindi- chapter-15- ऐसे-ऐसे

Ncert class 7 Hindi- chapter-15- ऐसे-ऐसे

यह नाटक विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित है, जिसमें मोहन नाम के एक छोटे बालक की बहानेबाजी का मनोरंजक चित्रण किया गया है। मोहन अपने स्कूल का काम पूरा न होने के कारण पेट में दर्द होने का नाटक करता है और उसे रहस्यमयी ढंग से "ऐसे-ऐसे" नाम देता है। इस स्थिति से उसके माता-पिता अत्यंत चिंतित हो जाते हैं और उसकी जांच के लिए वैद्य जी तथा डॉक्टर को बुलाते हैं, जो इसे कब्ज या बदहजमी मानकर दवा देते हैं। अंत में, मोहन के मास्टर जी आकर उसकी इस असलियत को पकड़ लेते हैं कि यह शारीरिक दर्द नहीं बल्कि काम से बचने का डर है। यह कथा बच्चों के मनोविज्ञान और उनके द्वारा बनाए जाने वाले मासूम बहाने को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत करती है।

माँ मोहन के 'ऐसे-ऐसे' कहने पर क्यों घबरा रही थी?

माँ मोहन के 'ऐसे-ऐसे' कहने पर इसलिए घबरा रही थीं क्योंकि वह समझ नहीं पा रही थीं कि यह किस प्रकार का दर्द या बीमारी है। मोहन अपने दर्द का स्पष्ट कारण बताने के बजाय बस यही रट लगाए हुए था कि पेट में 'ऐसे-ऐसे' हो रहा है, जिससे माँ को किसी अनहोनी का डर सताने लगा था ।

माँ की घबराहट के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
नई और अज्ञात बीमारी का डर: माँ को लगा कि 'ऐसे-ऐसे' कोई नई और खतरनाक बीमारी है। जब पड़ोसिन ने आकर कहा कि "इतनी नई-नई बीमारियाँ निकली हैं, देख लेना यह भी कोई नया दर्द होगा", तो माँ और भी ज्यादा डर गईं कि कहीं यह कोई लाइलाज रोग न हो ।
गंभीर समस्या की आशंका: माँ के मन में डर इतना बैठ गया था कि डॉक्टर के आने पर उन्होंने काँपकर पूछा कि कहीं मोहन के पेट में 'फोड़ा' तो नहीं है ।
मोहन की हालत: मोहन दर्द से कराह रहा था, पसीने से लथपथ था और बार-बार 'हाय-हाय' कर रहा था। माँ का कहना था कि इस दर्द ने "लड़के का बुरा हाल कर दिया" है ।
संक्षेप में, बीमारी का पता न चलने और 'ऐसे-ऐसे' जैसे अस्पष्ट शब्दों ने माँ को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि उनके बेटे को कोई बहुत बड़ी तकलीफ है।

ऐसे-ऐसे पाठ का महत्वपूर्ण नोट्स

यहाँ पाठ 'ऐसे-ऐसे' के मुख्य बिंदुओं के आधार पर तैयार किए गए नोट्स हैं:

पाठ: ऐसे-ऐसे (एकांकी)
लेखक: विष्णु प्रभाकर

1. मुख्य पात्र (Characters)
मोहन: एक विद्यार्थी (उम्र लगभग 8-9 वर्ष, तीसरी कक्षा का छात्र)।
दीनानाथ: एक पड़ोसी।
माँ: मोहन की माँ।
पिता: मोहन के पिता।
मास्टर: मोहन के शिक्षक।
अन्य: वैद्य जी, डॉक्टर तथा एक पड़ोसिन।

2. कथानक (Plot Summary)
यह एकांकी एक ऐसे बच्चे (मोहन) के बारे में है जो स्कूल का गृहकार्य (homework) पूरा न होने के डर से पेट दर्द का बहाना बनाता है।

3. प्रमुख घटनाक्रम (Key Events)
मोहन का पेट दर्द: मोहन बार-बार पेट पकड़कर कराहता है और कहता है कि पेट में 'ऐसे-ऐसे' हो रहा है। वह बेचैन होकर बिस्तर पर लेटा है ।
माता-पिता की चिंता:
पिता बताते हैं कि मोहन ने सिर्फ केला और संतरा खाया था, कुछ 'अंट-शंट' नहीं खाया ।
माँ बहुत घबरा जाती हैं। उन्हें लगता है कि 'ऐसे-ऐसे' कोई नई और खतरनाक बीमारी है। वे घरेलू उपचार (गर्म पानी की बोतल से सेंक) करती हैं ।
वैद्य और डॉक्टर की जाँच:
वैद्य जी: नब्ज देखकर बताते हैं कि 'वात' का प्रकोप है और पेट साफ नहीं है (कब्ज)। वे चूर्ण की पुड़िया देते हैं ।
डॉक्टर: जीभ और पेट देखकर बताते हैं कि बदहजमी और गैस है। वे दवा मंगवाते हैं ।
मास्टर जी का आगमन और रहस्य खुलना:
मास्टर जी मोहन को देखने आते हैं। वे मोहन का चेहरा देखकर ही समझ जाते हैं कि यह कोई बीमारी नहीं है ।
वे मोहन से पूछते हैं, "स्कूल का काम तो पूरा कर लिया है?" मोहन चुप रहता है और फिर इनकार में सिर हिलाता है ।
मास्टर जी माता-पिता को बताते हैं कि मोहन के पेट में 'ऐसे-ऐसे' दर्द नहीं है, बल्कि यह 'स्कूल का काम न करने का डर' है ।
निष्कर्ष (Conclusion):
मास्टर जी मोहन को काम पूरा करने के लिए दो दिन की छुट्टी देते हैं।
यह सुनते ही मोहन का दर्द गायब हो जाता है और वह तुरंत उठ खड़ा होता है।
मोहन की असलियत जानकर माता-पिता हैरान रह जाते हैं (ठगे-से रह जाते हैं) और फिर हँस पड़ते हैं ।

4. महत्वपूर्ण बिंदु
'ऐसे-ऐसे' का अर्थ: पाठ में 'ऐसे-ऐसे' वास्तव में कोई बीमारी नहीं थी, बल्कि यह बहानेबाजी के लिए इस्तेमाल किया गया शब्द था।
माँ का डर: माँ मोहन की हालत और अस्पष्ट बीमारी के नाम से इतना डर गई थीं कि उन्होंने पूछा कि कहीं पेट में 'फोड़ा' तो नहीं है ।
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