Ncert class 8 Hindi- chapter- 7- ठेस
Ncert class 8 Hindi- chapter- 7- ठेस
यह अंश फणीश्वरनाथ रेणु की प्रसिद्ध कहानी 'ठेस' से लिया गया है, जो मिथिलांचल की लोकसंस्कृति और एक स्वाभिमानी कलाकार, सिरचन, के जीवन को दर्शाता है। गाँव के लोग सिरचन को कामचोर और चटोर समझते हैं, परंतु वास्तव में वह एक अत्यंत कुशल कारीगर है जो केवल सम्मान का भूखा है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे घर की महिलाओं के कड़वे वचनों से आहत होकर वह अपना अधूरा काम छोड़ देता है, क्योंकि एक कलाकार के लिए आत्मसम्मान भौतिक सुखों से ऊपर होता है। अंत में, अपनी ममता और मानवीय संवेदना के कारण वह मानू दीदी के लिए स्वयं उपहार लेकर स्टेशन पहुँचता है, जो उसके उदार हृदय का परिचय देता है। यह पाठ श्रम के प्रति आदर और रिश्तों की संवेदनशीलता को बड़ी मार्मिकता से प्रस्तुत करता है।
गाँव के किसान सिरचन को क्या समझते थे ?
फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'ठेस' के आधार पर, गाँव के किसान सिरचन के बारे में निम्नलिखित राय रखते थे:
बेकार और बेगार: गाँव के लोग सिरचन को केवल 'बेकार' ही नहीं, बल्कि 'बेगार' समझते थे । इसका अर्थ है कि वे उसे किसी काम का नहीं या बोझ मानते थे।
कामचोर और मुफ्तखोर: लोग उसे 'मुफ्तखोर' और 'कामचोर' कहकर संबोधित करते थे । खेती-बारी के समय उसकी गिनती मजदूरों में नहीं की जाती थी क्योंकि लोगों का मानना था कि जब तक वह काम शुरू करेगा, दूसरे मजदूर आधा काम खत्म कर चुके होंगे ।
चटोर: सिरचन को लोग 'चटोर' भी समझते थे । उनका मानना था कि बढ़िया खाने-पीने (जैसे घी, मलाई वाला दूध, तली हुई तरकारी) के लिए वह काम करता है और अगर खाने में कमी हुई तो वह काम अधूरा छोड़ देता है ।
हालाँकि किसान उसे खेती के लिए अनुपयुक्त मानते थे, लेकिन वे जानते थे कि कारीगरी के कामों (जैसे चिक, शीतलपाटी, मोढ़े बनाना) में उसके जैसा कोई दूसरा नहीं है, भले ही वे अब इन कामों को 'बेकाम का काम' समझने लगे थे ।
इस कहानी में आये हुए विभिन्न पात्रों के नाम लिखिए ?
फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'ठेस' में आए हुए विभिन्न पात्रों के नाम निम्नलिखित हैं:
मुख्य पात्र:
1. सिरचन: यह कहानी का नायक है, जो गाँव का एक कुशल कारीगर है, जिसे लोग अब 'बेकार' समझने लगे हैं ।
2. लेखक (मैं / बबुआ जी): कहानी का वाचक, जिसे सिरचन 'बबुआ जी' कहकर संबोधित करता है ।
3. मानू: लेखक की सबसे छोटी बहन, जिसकी शादी के बाद पहली बार विदाई हो रही है और जिसके लिए सिरचन उपहार लाता है ।
लेखक के परिवार के अन्य सदस्य:
4. माँ: लेखक और मानू की माँ, जो सिरचन से काम करवाती हैं और उसका पक्ष भी लेती हैं ।
5. चाची: लेखक की चाची, जो सिरचन के पान खाने पर उसे ताना मारती हैं ।
6. मँझली भाभी: लेखक की मँझली भाभी, जिनका सिरचन के साथ खाने को लेकर विवाद होता है और वे उसे बुरा-भला कहती हैं ।
7. बड़ी भाभी: लेखक की बड़ी भाभी ।
गौण पात्र (जिनका उल्लेख कहानी में आया है):
8. पंचानन्द चौधरी का छोटा लड़का: ब्राह्मण टोली का वह लड़का जिसे सिरचन ने एक बार अपमानित किया था ।
9. भज्जू महाजन की बेटी: महाजन टोले की लड़की जो सिरचन की बात सुनकर तिलमिला उठी थी ।
10. मानू का दूल्हा: जिसने चिट्ठी लिखकर शीतलपाटी और चिक की मांग की थी ।
सिरचन को पान का बीड़ा किसने दिया था ?
कहानी 'ठेस' के अनुसार, सिरचन को पान का बीड़ा मानू (लेखक की सबसे छोटी बहन) ने दिया था ।
इस घटना का संदर्भ निम्नलिखित है:
जब मानू पान सजाकर बाहर बैठकखाने में भेज रही थी, तब उसने चुपके से एक पान का बीड़ा सिरचन को दिया ।
पान देते समय मानू ने सिरचन को ढाढ़स बंधाते हुए कहा कि यह काम-काज का घर है, जहाँ पाँच तरह के लोग पाँच किस्म की बात करेंगे, इसलिए उसे किसी की बात पर कान नहीं देना चाहिए ।
आपके विचार से सिरचन का महत्त्व कम क्यों हो गया?
कहानी 'ठेस' के स्रोतों के आधार पर, सिरचन का महत्त्व कम होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. कारीगरी को 'बेकाम का काम' समझना:
गाँव के लोगों का दृष्टिकोण बदल गया है। वे सिरचन द्वारा बनाई जाने वाली शीतलपाटी, चिक और मोढ़े जैसी कलात्मक वस्तुओं को अब 'बेकाम का काम' (व्यर्थ का काम) समझने लगे हैं । पहले उसकी मड़ैया के पास बड़े-बड़े लोगों की गाड़ियाँ खड़ी रहती थीं, लेकिन अब गाँव वाले उसे केवल तभी याद करते हैं जब उन्हें कोई विशेष वस्तु बनवानी हो, अन्यथा उसे बेकार समझते हैं ।
2. खेती के काम में अयोग्यता:
गाँव एक कृषि-प्रधान समाज है और सिरचन खेती-बारी के काम में बहुत धीमा है। वह पगडंडी पर भी तौल-तौलकर पाँव रखता है। जब तक वह खुरपी उठाता है, तब तक दूसरे मजदूर एक-तिहाई काम खत्म कर चुके होते हैं। इसलिए किसान उसे 'बेगार' (बोझ) मानते हैं और उसे मजदूरी के लिए नहीं बुलाते ।
3. स्वभाव और तुनकमिजाजी:
सिरचन स्वभाव से 'मुँहजोर' है और बात में जरा भी कड़वाहट (झाल) बर्दाश्त नहीं करता । यदि उसे खाने में कमी लगे या कोई उसे ताना मारे, तो वह काम अधूरा छोड़कर चला जाता है ("काम की चिकनाई खत्म")। इस कारण लोग उसे भरोसेमंद नहीं मानते और उसे काम देने से कतराते हैं ।
4. 'चटोर' होने की छवि:
गाँव वाले उसे 'चटोर' (स्वादलोलुप) समझते हैं। उनका मानना है कि वह केवल घी, दूध और तली हुई तरकारी के लालच में काम करता है। यदि भोजन उसकी पसंद का न हो, तो वह काम में मन नहीं लगाता। इस छवि के कारण भी उसका सम्मान कम हो गया है ।
5. पारिवारिक दुर्दशा:
सिरचन ने स्वयं स्वीकार किया है कि उसकी पत्नी की मृत्यु के बाद उसकी यह दुर्दशा हुई है। वह कहता है, "मेरी घरवाली जिंदा रहती तो मैं ऐसी दुर्दशा भोगता?" पत्नी के जाने के बाद वह अकेला पड़ गया और शायद इसीलिए उसका स्वभाव और जीवनशैली बदल गई, जिससे समाज में उसका महत्त्व घट गया ।
सिरचन चिक और शीतलपाटी स्टेशन पर ले जाकर मानू को देता है। इससे उसकी किस विशेषता का पता चलता है?
सिरचन द्वारा स्टेशन पर जाकर मानू को चिक और शीतलपाटी देने की घटना से उसके चरित्र की निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का पता चलता है:
1. मानवीयता और स्नेह (स्नेही हृदय):
यह घटना दर्शाती है कि सिरचन का हृदय कोमल और स्नेह से भरा है। भले ही घर की महिलाओं (चाची और भाभी) ने उसका अपमान किया था, लेकिन मानू के प्रति उसका लगाव कम नहीं हुआ। वह दौड़ता हुआ स्टेशन आता है और मानू को 'दीदी' कहकर संबोधित करता है। वह कहता है, "यह मेरी ओर से है... सब चीज है दीदी" । यह दिखाता है कि वह रिश्तों को अहमियत देता है।
2. स्वाभिमानी और निर्लोभी (त्याग की भावना):
सिरचन लालची नहीं है। जब मानू उसे 'मोहर छापवाली धोती' का दाम (पैसे) देने लगती है, तो सिरचन "जीभ को दाँत से काटकर" दोनों हाथ जोड़ देता है और पैसे लेने से इनकार कर देता है । गाँव वाले उसे 'चटोर' या खाने-पीने का लालची समझते थे , लेकिन इस व्यवहार ने सिद्ध कर दिया कि वह धन का भूखा नहीं है, बल्कि सम्मान और प्रेम का भूखा है।
3. सच्चा कलाकार (कला के प्रति समर्पण):
लेखक जब सिरचन द्वारा लाई गई चीजों को देखते हैं, तो पाते हैं कि "ऐसी कारीगरी, ऐसी बारीकी, रंगीन सुतलियों के फंदों का ऐसा काम" उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था । इससे पता चलता है कि अपमानित होकर काम छोड़ देने के बावजूद , उसने अपनी कला में कोई कमी नहीं छोड़ी। उसने अपना सर्वश्रेष्ठ हुनर उस उपहार में लगा दिया था।
4. संवेदनशीलता:
सिरचन को पता था कि मानू की ससुराल में चिक और शीतलपाटी की मांग है और इसके बिना उसे ताने सुनने पड़ सकते हैं । उसे 'ठेस' लगी थी , फिर भी उसने मानू के वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए अपनी नाराजगी भुला दी और समय पर स्टेशन पहुँचकर उपहार सौंपे।
ठेस पाठ का महत्वपूर्ण नोट्स
कहानी 'ठेस' (लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु) के आधार पर तैयार किए गए नोट्स यहाँ दिए गए हैं:
1. पाठ परिचय
लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु .
प्रकार: आंचलिक कहानी (मिथिलांचल की लोकसंस्कृति पर आधारित) .
मुख्य विषय: कलाकार के मन की संवेदनशीलता, श्रम के प्रति सम्मान, और मानवीय रिश्तों की गहराई .
2. मुख्य पात्र: सिरचन (चरित्र चित्रण)
कुशल कारीगर: सिरचन एक जातिगत कारीगर है। वह शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े और मूँज की रस्सियाँ बनाने में माहिर है .
गाँव वालों की राय:
खेती-बारी के लिए उसे 'बेकार' और 'बेगार' समझा जाता है क्योंकि वह काम बहुत धीरे करता है .
लोग उसे 'चटोर' (स्वादलोलुप), 'कामचोर' और 'मुफ्तखोर' कहते हैं .
स्वभाव:
वह 'मुँहजोर' है, लेकिन कामचोर नहीं।
वह खाने-पीने का शौकीन है (घी, मलाई वाला दूध, तली हुई तरकारी) .
वह स्वाभिमानी है। खाने या व्यवहार में कमी होने पर वह काम छोड़ देता है। उसे 'ठेस' जल्दी लगती है .
पारिवारिक स्थिति: उसकी पत्नी और बच्चों की मृत्यु हो चुकी है, जिसके बाद से वह अकेला है और उसकी यह दुर्दशा हुई है .
3. अन्य प्रमुख पात्र
मानू: लेखक की सबसे छोटी बहन, जिसकी विदाई हो रही है। सिरचन को उससे विशेष स्नेह है .
लेखक (बबुआ जी): कहानी के वाचक, जो सिरचन की कला को समझते हैं।
माँ: लेखक की माँ, जो सिरचन के नखरे उठाती हैं क्योंकि उन्हें काम करवाना है .
मँझली भाभी: लेखक की भाभी, जो सिरचन को ताना मारती हैं और मिठाई (बुंदिया) फेंककर देती हैं .
चाची: जो सिरचन द्वारा पान/जर्दा माँगने पर उसका अपमान करती हैं .
4. कहानी की मुख्य घटनाएँ
1. मानू की विदाई की तैयारी: मानू के ससुराल से 'चिक' और 'शीतलपाटी' की मांग आती है। माँ सिरचन को काम पर बुलाती हैं और उसे 'मोहर छापवाली धोती' देने का वादा करती हैं .
2. सिरचन का अपमान:
काम करते समय सिरचन को 'बुंदिया' (मिठाई) मँझली भाभी ने फेंककर दी, जिससे उसे बुरा लगा .
बाद में, जब सिरचन ने चाची से 'गमकौआ जर्दा' माँगा, तो चाची ने उसे भला-बुरा कहा और 'चटोर' कहकर अपमानित किया .
3. काम अधूरा छोड़ना: चाची की कड़वी बातें सुनकर सिरचन को 'ठेस' लगी। उसने काम अधूरा छोड़ दिया और चला गया। लेखक के मनाने पर भी वह नहीं लौटा .
4. स्टेशन पर विदाई (क्लाइमेक्स):
लेखक और मानू स्टेशन पर थे। मानू अधूरी चिक लेकर जा रही थी।
तभी सिरचन दौड़ता हुआ आया। उसने रात-दिन एक करके शीतलपाटी, चिक और कुश की आसनी तैयार की थी और उपहार के रूप में लाया था .
5. निष्कर्ष: मानू ने उसे धोती के दाम देने चाहे, लेकिन सिरचन ने हाथ जोड़कर मना कर दिया। लेखक ने देखा कि उस कारीगरी में सिरचन का पूरा दिल लगा हुआ था .
5. कहानी का संदेश
कलाकार का सम्मान: एक कलाकार केवल धन का भूखा नहीं होता, वह सम्मान और प्रेम का आकांक्षी होता है।
वाणी का प्रभाव: कड़वी बातें (जैसे चाची और भाभी की) किसी के मन को गहरी 'ठेस' पहुँचा सकती हैं।
मानवीयता: सिरचन का उपहार देना यह सिद्ध करता है कि मानवीय रिश्ते और स्नेह, गरीबी और अपमान से ऊपर होते हैं।
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