Ncert class 5 Hindi- chapter 12- कविता का कमाल

Ncert class 5 Hindi- chapter 12- कविता का कमाल

यह कहानी मदन नाम के एक निर्धन और बेफिक्र लड़के के बारे में है, जो अपनी माँ के कहने पर पैसे कमाने के लिए घर से निकलता है। रास्ते में वह विभिन्न प्राकृतिक दृश्यों और घटनाओं को देखकर एक अजीबोगरीब कविता की रचना करता है, जिसे वह राजदरबार में सुनाता है। हालांकि कविता का कोई स्पष्ट अर्थ नहीं था, लेकिन जब राजा रात में इसे दोहराते हैं, तो महल में चोरी करने आए अपराधियों को लगता है कि उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया गया है। मदन की इस अजीब कविता के डर से चोर अपना गुनाह कबूल कर लेते हैं और शाही खजाना लुटने से बच जाता है। अंत में, राजा मदन की बुद्धिमत्ता और भाग्य से प्रसन्न होकर उसे पुरस्कृत करते हैं, जिससे उसकी और उसकी माँ की गरीबी दूर हो जाती है। यह कथा दर्शाती है कि कभी-कभी साधारण और निरर्थक दिखने वाली चीजें भी बड़े संकट टाल सकती हैं।

कहानी का संक्षेपण:

"कविता का कमाल" कहानी का संक्षेपण निम्नलिखित है:
यह कहानी मदन नाम के एक गरीब लड़के की है, जो अपनी विधवा माँ के साथ रहता था। जब उसकी माँ ने उसे पैसे कमाने के लिए घर से निकाला, तो उसे राजदरबार में होने वाले एक कवि सम्मेलन के बारे में पता चला, जहाँ सबसे अच्छी कविता सुनाने वाले को सौ अशर्फियाँ इनाम में मिलने वाली थीं।
मदन कवि नहीं था, लेकिन उसने रास्ते में देखी गई चीज़ों के आधार पर अपनी कविता की पंक्तियाँ बनाईं:
एक कुत्ते को ज़मीन खोदते देख उसने कहा— "खुदुर, खुदूर का खोदत है?" एक भैंस को पानी पीते देख— "सुरुर, सुरुर का पीबत है?" एक चिड़िया को झाँकते देख— "ताक झाँक का खोजत है? हम जानत, का ढूँढ़त है!" एक साँप को रेंगते देख— "सरक, सरक कहाँ भागत है? जानत हो, हम देखत हैं? हमसे ना बच सकत है!" अंत में, राजमहल का रास्ता बताने वाले व्यक्ति के नाम पर आख़िरी पंक्ति जोड़ी— "धन्नूशाह, भाई भन्नूशाह! राजमहल में मदन ने यही विचित्र कविता सुनाई। यद्यपि किसी को इसका अर्थ समझ नहीं आया, फिर भी मूर्ख दिखने के डर से सबने प्रशंसा की। उसी रात, राजा अपनी छत पर यही कविता दोहरा रहे थे। संयोग से, धन्नूशाह और उसके साथी चोर उसी समय खज़ाने में सेंध लगा रहे थे। 
राजा की आवाज़ में कविता की पंक्तियाँ सुनकर चोरों को लगा कि वे पकड़े गए हैं, क्योंकि कविता की हर पंक्ति उनकी हरकतों (जैसे मिट्टी खोदना, पानी पीना और खिसकना) से मेल खा रही थी। डर के मारे धन्नूशाह ने राजा के पैर पकड़कर अपना अपराध स्वीकार कर लिया। राजा ने खज़ाना बचाने के लिए मदन की कविता को चमत्कार माना और उसे धन-दौलत से मालामाल कर दिया, जिससे मदन और उसकी माँ की गरीबी दूर हो गई।
सरल शब्दों में कहें तो, मदन की कविता एक 'अनजाने जाल' की तरह थी, जिसमें चोर अपनी ही गतिविधियों के कारण खुद-ब-खुद फँस गए।

1. राजा का खजाना लूटने से बच गया, कैसे?

राजा का खजाना मदन नाम के एक लड़के की विचित्र कविता और एक बड़े संयोग की वजह से लुटने से बच गया। इसकी पूरी प्रक्रिया निम्नलिखित थी:
कविता का पाठ: जिस रात चोर खजाने में सेंध लगा रहे थे, उसी रात राजा को नींद नहीं आ रही थी और वे अपने महल की छत (छज्जे) पर खड़े होकर मदन की कविता को जोर-जोर से दोहरा रहे थे। 
चोरों की गतिविधियों से मिलान: मदन की कविता की पंक्तियाँ उस समय खजाने के पास मौजूद चोरों की हरकतों से बिल्कुल मेल खा रही थीं:
जब चोर जमीन खोद रहे थे, तब राजा ने कहा—"खुदुर, खुदूर का खोदत है?"।
जब चोरों के सरदार धन्नूशाह ने पानी पिया, तब राजा बोले—"सुरुर, सुरुर का पीबत है?"।
जब चोर डरकर इधर-उधर देखने लगे, तो राजा की अगली पंक्ति थी— "ताक झाँक का खोजत है? हम जानत, का ढूँढ़त है!"।
नाम का खुलासा और आत्मसमर्पण: जब चोर वहाँ से खिसकने की कोशिश करने लगे, तो राजा ने कविता की अंतिम पंक्तियाँ पढ़ीं— "सरक, सरक कहाँ भागत है? जानत हो, हम देखत हैं? हमसे ना बच सकत है! धन्नूशाह, भाई भन्नूशाह!"।
परिणाम: अपना नाम सुनकर चोरों का सरदार धन्नूशाह बुरी तरह डर गया। उसे लगा कि राजा उसे देख रहे हैं और सब कुछ जानते हैं। पकड़े जाने के डर से उसने राजा के पैर पकड़ लिए और अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिससे खजाना लुटने से बच गया। 
अंत में, राजा ने मदन को उसकी इस "चमत्कारी" कविता के लिए ढेर सारे सोने-चाँदी के इनाम से नवाज़ा।
इसे एक 'अदृश्य आईने' की तरह समझा जा सकता है; चोरों को लगा कि राजा की बातें उनकी हरकतों का आईना दिखा रही हैं, जबकि राजा तो बस अनजाने में एक कविता दोहरा रहे थे।

2. माँ ने तंग आकर मदन से क्या कहा?

मदन की माँ और मदन बहुत गरीब थे और उनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं था, इसके बावजूद मदन अपना सारा समय खेल-कूद में बर्बाद कर देता था। एक दिन मदन की इस आदत से तंग आकर उसकी माँ ने उससे कहा, "अब मैं तुझे बैठाकर नहीं खिला सकती। जा, कुछ पैसे कमाकर ला"।
माँ की इसी बात को सुनकर मदन पैसे कमाने के इरादे से घर से बाहर निकला, जिसके बाद उसे राज दरबार में होने वाले कवि सम्मेलन और उसमें मिलने वाले इनाम के बारे में पता चला।

3. मदन को कविता रचने की प्रेरणा किन-किन चीज़ों से मिली?

मदन को कविता रचने की प्रेरणा राजदरबार में होने वाले कवि सम्मेलन और उसमें मिलने वाले सौ अशर्फ़ियों के इनाम से मिली। मदन स्वभाव से कवि नहीं था, लेकिन उसने रास्ते में देखी गई निम्नलिखित चीज़ों और घटनाओं को अपनी कविता का आधार बनाया:
जमीन खोदता कुत्ता: मदन ने सबसे पहले पंजों से जमीन खोदते हुए एक कुत्ते को देखा, जिससे उसे अपनी कविता की पहली पंक्ति मिली— "खुदूर, खुदूर का खोदत है?"।
पानी पीती भैंस: एक तालाब के पास पानी पीती भैंस को देखकर उसने दूसरी पंक्ति रची— "सुरुर, सुरुर का पीबत है?"।
झाँकती हुई चिड़िया: पेड़ की डाल पर पत्तियों के बीच से इधर-उधर झाँकती एक चिड़िया को देखकर उसने अगली पंक्तियाँ बनाईं— "ताक झाँक का खोजत है? हम जानत, का ढूँढ़त है!"।
रेंगता हुआ साँप: रास्ते में 'सर्र' की आवाज़ के साथ रेंगते साँप को देखकर मदन ने यह पंक्तियाँ जोड़ीं— "सरक, सरक कहाँ भागत है? जानत हो, हम देखत हैं? हमसे ना बच सकत है!"।
रास्ता बताने वाला व्यक्ति: अंत में, जब मदन ने राजमहल का रास्ता पूछा, तो उस व्यक्ति ने अपना नाम "धन्नूशाह, भाई भन्नूशाह" बताया। मदन को यह शब्द इतने अच्छे लगे कि उसने इन्हें ही अपनी कविता की आखिरी पंक्ति बना लिया।
इस प्रकार, मदन की कविता उसकी कल्पना के बजाय उसके अवलोकन (Observation) का परिणाम थी, जहाँ उसने अपने आसपास की सामान्य गतिविधियों को ही कविता के शब्दों में पिरो दिया था।

4. धन्नूशाह को महल का रास्ता इतनी अच्छी तरह क्यों मालूम था?

धन्नूशाह को महल का रास्ता इतनी अच्छी तरह इसलिए मालूम था क्योंकि वह वास्तव में एक चोर था और उसी रात अपने साथियों के साथ राजा के खजाने में सेंध लगाने (चोरी करने) की योजना बना रहा था। 
जब मदन ने उससे रास्ता पूछा, तो उसने बड़े आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिया था, "मुझे नहीं तो और किसे मालूम होगा?"। मदन ने उस समय उसकी बातों से यह अनुमान लगाया कि वह राजमहल का कोई कर्मचारी होगा, लेकिन असल में वह चोरी करने के इरादे से वहाँ की भौगोलिक स्थिति से वाकिफ था। उसके इस राज का खुलासा तब हुआ जब वह उसी रात अपने साथियों के साथ महल के खजाने की दीवार खोदते हुए पकड़ा गया। 
इसे इस तरह समझा जा सकता है जैसे कोई शिकारी अपने शिकार के ठिकाने का रास्ता बहुत अच्छी तरह जानता है; धन्नूशाह के लिए महल का रास्ता उसकी जीविका (चोरी) का हिस्सा था, इसलिए उसे वह रास्ता रटा हुआ था।

5. मदन को कविता रचने की जरूरत क्यों पड़ी?

मदन को कविता रचने की जरूरत मुख्य रूप से अपनी गरीबी दूर करने और धन कमाने के लिए पड़ी। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
आर्थिक तंगी: मदन और उसकी विधवा माँ बहुत गरीब थे और उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं था।
माँ की चेतावनी: मदन अपना सारा समय खेल-कूद में बिताता था, जिससे तंग आकर उसकी माँ ने उसे साफ कह दिया कि वह उसे बैठाकर नहीं खिला सकती और उसे पैसे कमाकर लाने के लिए घर से निकाल दिया।
बड़ा इनाम: जब मदन पैसे कमाने का रास्ता सोच रहा था, तभी उसे राजदरबार में होने वाले कवि सम्मेलन की घोषणा सुनाई दी, जिसमें सबसे अच्छी कविता सुनाने वाले को सौ अशर्फ़ियाँ इनाम में मिलने वाली थीं। 
यद्यपि मदन कवि नहीं था, लेकिन सौ अशर्फ़ियों के इस बड़े अवसर को देखकर उसने सोचा कि रास्ते में कुछ न कुछ सूझ ही जाएगा और इसी जरूरत ने उसे कविता रचने के लिए प्रेरित किया। 
इसे एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है: जैसे प्यास लगने पर इंसान कुआँ खोदने की कोशिश करता है, वैसे ही गरीबी और माँ की डाँट ने मदन को एक ऐसा काम (कविता रचना) करने पर मजबूर कर दिया जो उसने पहले कभी नहीं किया था।

6. राजा ने मदन को शाबाशी व इनाम क्यों दिया?

राजा ने मदन को शाबाशी और इनाम इसलिए दिया क्योंकि मदन की विचित्र कविता की वजह से राजमहल का खजाना लुटने से बच गया था।
इस पुरस्कार के पीछे के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
खजाने की सुरक्षा: जिस रात चोर खजाने में सेंध लगा रहे थे, राजा अपनी छत पर खड़े होकर मदन की कविता दोहरा रहे थे। कविता की पंक्तियाँ (जैसे "खुदूर-खुदूर का खोदत है?", "सुरुर-सुरुर का पीबत है?") संयोग से उन चोरों की हरकतों से बिल्कुल मेल खा गईं। 
चोरों का आत्मसमर्पण: जब कविता में चोरों के सरदार 'धन्नूशाह' का नाम आया, तो उसे लगा कि राजा ने उसे देख लिया है और वे सब कुछ जानते हैं। पकड़े जाने के डर से धन्नूशाह ने राजा के पैर पकड़ लिए और अपना जुर्म कबूल कर लिया।
कविता का चमत्कार: जब राजा ने सिपाहियों से छानबीन करवाई, तो उन्हें पता चला कि खजाना सचमुच लुटने वाला था। राजा ने इस पूरी घटना को "मदन की कविता का कमाल" माना, क्योंकि यदि वह कविता न होती, तो चोर पकड़े नहीं जाते।
इसी कृतज्ञता के कारण राजा ने मदन को शाबाशी दी और उसे सोने-चाँदी के धन से मालामाल कर दिया, जिससे उसकी और उसकी माँ की गरीबी हमेशा के लिए दूर हो गई।

सही गलत का चुनाव कीजिए।

(क) मदन अपनी विधवा माँ के साथ गाँव में रहता था।
सहीः स्रोतों के अनुसार, मदन नाम का एक लड़का अपनी विधवा माँ के साथ गाँव में रहता था और वे बहुत गरीब थे।
(ख) राजमहल में एक संगीत प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा था।
गलतः स्रोतों के अनुसार, राजदरबार में कवि सम्मेलन हो रहा था, संगीत प्रतियोगिता नहीं,।
(ग) मदन चलते-चलते एक नदी के पास पहुँचा।
गलतः स्रोतों के अनुसार, मदन चलते-चलते एक तालाब के पास पहुँचा था, जहाँ उसने एक भैंस को पानी पीते हुए देखा था।
(घ) मदन को राजा ने सोने-चाँदी से मालामाल कर दिया।
सही: कहानी के अंत में, जब राजा का खजाना चोरी होने से बच गया, तो उन्होंने मदन को शाबाशी दी और उसे सोने- चाँदी से मालामाल कर दिया।

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