Ncert class 5 Hindi- chapter 11- एक पत्र की आत्मकथा

Ncert class 5 Hindi- chapter 11- एक पत्र की आत्मकथा

यह कहानी एक पत्र की आत्मकथा के माध्यम से डाक व्यवस्था की पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल ढंग से समझाती है। शांति नाम की लड़की द्वारा गया से दिल्ली रहने वाले अपने भाई को राखी और संदेश भेजने से इस यात्रा की शुरुआत होती है। पत्र का सफर गाँव की पत्र-पेटी से शुरू होकर स्थानीय डाकघर, फिर गया के रेलवे मेल सर्विस (RMS) और अंत में रेलगाड़ी के जरिए दिल्ली तक पहुँचने का वर्णन करता है। इस दौरान पत्र के विभिन्न रंगों, डाक टिकट पर सील लगने और पते के आधार पर होने वाली छँटाई जैसे चरणों पर बारीकी से प्रकाश डाला गया है। यह लेख हमें सिखाता है कि कैसे एक छोटी सी चिट्ठी डाकिए और परिवहन प्रणाली की मदद से लंबी दूरी तय कर अपनों तक पहुँचती है। अंत में, रमेश को पत्र और राखी प्राप्त होने के साथ यह सुखद यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न होती है।

इस ललित निबंध का संक्षेपण

यह ललित निबंध "एक पत्र की आत्मकथा" के बारे में है, जो अपने जन्म से लेकर अपने गंतव्य तक पहुँचने की यात्रा का रोचक वर्णन करता है। इस निबंध का संक्षेपण निम्नलिखित है:
पत्र का जन्म और प्रारंभिक यात्रा:
इस पत्र का जन्म 03 अगस्त 2024 को गया जिले के धरमपुर गाँव में हुआ, जब शांति नाम की एक छात्रा ने दिल्ली में रहने वाले अपने चचेरे भाई रमेश के लिए राखी और संदेश लिखकर उसे एक लिफाफे में बंद किया। शांति की माँ ने इस पत्र को पास के कस्बे बिशनपुर की पत्र-पेटी में डाल दिया, जहाँ इसकी मुलाकात विभिन्न रंगों और आकार के अन्य पत्रों से हुई।
डाकघर की प्रक्रिया और छँटाई:
बिशनपुर डाकघर के डाकिए ने पत्र-पेटी से पत्र निकालकर उन पर ठप्पा (सील) लगाया और फिर उन्हें 'जिले' और 'जिले के बाहर' की श्रेणियों में बाँटा गया। दिल्ली के लिए होने के कारण, इस पत्र को आर.एम.एस. (रेलवे मेल सर्विस) के बोरे में डालकर गया स्टेशन भेजा गया। वहाँ एक बड़े कार्यालय में फिर से छँटाई हुई और इसे 'दिल्ली' लिखे हुए खाने (अलमारी) में रखा गया।
गंतव्य तक पहुँचना:
गया जंक्शन से रेलगाड़ी द्वारा 18 घंटे का सफर तय करने के बाद, पत्र दिल्ली स्टेशन पहुँचा। वहां से इसे लाल रंग की डाक बस के जरिए बड़े डाकघर ले जाया गया और फिर एक स्थानीय डाकिए ने इसे रमेश के घर पहुँचाया। रमेश अपनी बहन की भेजी राखी और पत्र पाकर बहुत खुश हुआ और उसने उस पत्र को अपनी अलमारी में अन्य पत्रों के साथ सुरक्षित रख लिया।
निष्कर्ष:
यह निबंध हमें डाक प्रणाली की जटिल लेकिन व्यवस्थित कार्यप्रणाली से अवगत कराता है कि कैसे एक छोटा सा कागज का टुकड़ा कई पड़ावों को पार करते हुए सही पते पर पहुँचता है।
यह पूरी प्रक्रिया एक मशाल दौड़ (Relay Race) की तरह है, जहाँ डाक विभाग के अलग-अलग कर्मचारी एक धावक की तरह पत्र को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते हैं, ताकि वह अंततः अपनी मंजिल तक पहुँच सके।

1. एक पत्र की आत्मकथा कौन कह रहा है और किसके बारे में कह रहा है?

इस ललित निबंध में स्वयं एक पत्र अपनी आत्मकथा कह रहा है। वह अपने स्वयं के जीवन, जन्म और अपनी लंबी यात्रा के बारे में बता रहा है।
इस आत्मकथा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
वक्ता (कहने वाला): यह एक पत्र है जिसका जन्म 03 अगस्त 2024 को गया जिले के धरमपुर गाँव में हुआ था। वह स्वयं को 'मैं' कहकर संबोधित करता है।
किसके बारे में: पत्र अपने बारे में और अपनी उस यात्रा के बारे में बता रहा है जो शांति (पत्र लिखने वाली छात्रा) के घर से शुरू होकर दिल्ली में रहने वाले उसके भाई रमेश के घर तक पहुँचने तक चली।
विषय-वस्तु: पत्र अपने जन्म की प्रक्रिया, डाक-पेटी में गिरने के अनुभव, डाकघर में हुई छँटाई, 'आर.एम.एस.' (रेलवे मेल सर्विस) के सफर और अंत में रमेश के पास पहुँचकर अलमारी में सुरक्षित रखे जाने तक के अनुभवों को साझा कर रहा है।
सरल शब्दों में कहें तो, यह पत्र एक यात्री की तरह है जो अपनी 'घर से गंतव्य तक' की पूरी रोमांचक यात्रा का विवरण दे रहा है।

2. हवाई जहाज़ से भेजे जाने वाले पत्र को आप कैसे पहचानेंगे?

स्रोतों के आधार पर, हवाई जहाज़ से भेजे जाने वाले पत्र को उसकी विशिष्ट बनावट से पहचाना जा सकता है। इसकी मुख्य पहचान निम्नलिखित है:
लिफ़ाफ़े का रंग और डिज़ाइन: हवाई जहाज़ से विदेश जाने वाले पत्र एक सफ़ेद रंग के लिफ़ाफ़े में होते हैं, जिस पर लाल और नीली धारियाँ बनी होती हैं।
गंतव्य (मंजिल): ऐसे पत्र अक्सर बहुत दूर के देशों, जैसे अमरीका, भेजे जाते हैं जिनके रास्ते में बड़े समुद्र पड़ते हैं।
परिवहन का तरीका: चूँकि इन्हें समुद्र पार करना होता है, इसलिए ये रेल या बस के बजाय हवाई जहाज़ से अपनी यात्रा पूरी करते हैं।
स्रोतों में यह भी बताया गया है कि हवाई जहाज़ के आविष्कार से पहले, ऐसे पत्रों को समुद्र में चलने वाले बड़े-बड़े जहाज़ों के माध्यम से भेजा जाता था।
जैसे किसी खिलाड़ी की विशेष वर्दी उसे बाकी लोगों से अलग दिखाती है, वैसे ही ये लाल-नीली धारियाँ पत्र के लिए एक विशेष 'वर्दी' की तरह हैं, जो यह संकेत देती हैं कि यह पत्र सड़क के रास्ते नहीं बल्कि बादलों के पार हवाई यात्रा पर जाने वाला है।

3. आर.एम.एस. का क्या अर्थ होता है?

स्रोतों के अनुसार, आर.एम.एस. (R.M.S.) का अर्थ 'रेलवे मेल सर्विस' (Railway Mail Service) होता है।
इसकी भूमिका और कार्यप्रणाली के बारे में स्रोतों में निम्नलिखित जानकारी दी गई है:
कार्यालय का स्थान: आर.एम.एस. का कार्यालय हर बड़े रेलवे स्टेश पर होता है।
डाक का एकत्रीकरण: यहाँ आसपास के क्षेत्रों से आने वाली सभी डाक (पत्रों और पार्सलों) को इकट्ठा किया जाता है।
छँटाई की प्रक्रिया: यहाँ पत्रों को उनकी दिशा के अनुसार (direction-wise) छाँटा जाता है ताकि उन्हें सही स्थान पर भेजा जा सके।
परिवहन: छँटाई पूरी होने के बाद, इन पत्रों को संबंधित ट्रेन (रेलगाड़ी) के माध्यम से उनके गंतव्य की ओर भेज दिया जाता है।
जैसे किसी बड़े बस टर्मिनल पर यात्री अलग-अलग जगहों से आते हैं और फिर अपनी मंजिल की दिशा के अनुसार अलग-अलग बसों में बैठ जाते हैं, वैसे ही आर.एम.एस. में पत्र इकट्ठे होते हैं और अपनी मंजिल के हिसाब से सही रेलगाड़ी का चुनाव करते हैं।

आर.एम.एस. कार्यालय में पत्रों के साथ क्या-क्या होता है?

आर.एम.एस. (रेलवे मेल सर्विस) कार्यालय में पत्रों के साथ होने वाली प्रक्रिया अत्यंत व्यवस्थित और महत्वपूर्ण होती है। स्रोतों के अनुसार, वहाँ पत्रों के साथ निम्नलिखित गतिविधियाँ की जाती हैं:
डाक का एकत्रीकरण: सबसे पहले, आसपास के क्षेत्रों से आने वाली सभी डाक को आर.एम.एस. कार्यालय में इकट्ठा किया जाता है। 
तेजी से छँटाई: एक बड़े कमरे में कई कर्मचारी मिलकर बोरों से निकाले गए पत्रों को मेजों पर उलट देते हैं और उनकी फुर्ती से छँटाई शुरू करते हैं।
दिशावार वर्गीकरण: पत्रों को उनकी मंजिल की दिशा (direction-wise) के अनुसार अलग किया जाता है। इसके लिए दीवार पर बनी छोटे-छोटे खानों वाली अलमारियों का उपयोग किया जाता है, जिनके ऊपर गंतव्य स्थानों के नाम (जैसे- 'दिल्ली') लिखे होते हैं।
पते के अनुसार वितरण: कर्मचारी प्रत्येक पत्र का पता पढ़ते हैं और उसे उस शहर के लिए निर्धारित विशिष्ट खाने में डाल देते हैं।
बोराबंदी और परिवहन: एक ही स्थान के लिए एकत्र हुए सभी पत्रों को दोबारा बोरों में भरकर बंद कर दिया जाता है और फिर उन्हें संबंधित रेलगाड़ी पर चढ़ा दिया जाता है।
संक्षेप में, आर.एम.एस. कार्यालय वह केंद्र है जहाँ पत्र अपनी आगे की लंबी यात्रा के लिए अपनी सही 'टोली' और 'सवारी' (ट्रेन) का चुनाव करते हैं।
इस प्रक्रिया को आप एक बड़े जंक्शन की तरह समझ सकते हैं, जहाँ अलग-अलग रास्तों से आने वाले यात्रियों को इकट्ठा किया जाता है और फिर उनकी मंजिल के आधार पर उन्हें सही प्लेटफॉर्म और सही ट्रेन की ओर निर्देशित किया जाता है।

5. डाक से भेजे जाने वाले पत्र पर डाक टिकट क्यों लगाते हैं?

स्रोतों के आधार पर, डाक से भेजे जाने वाले पत्र पर डाक टिकट लगाने और उसके बाद की प्रक्रिया के बारे में निम्नलिखित जानकारी मिलती है:
सत्यापन और सील: जब कोई पत्र डाकघर पहुँचता है, तो डाकिए द्वारा सबसे पहले उस पर लगे डाक टिकट पर एक भारी ठप्पे से 'सील' (Seal) लगाई जाती है। कहानी में पत्र स्वयं बताता है कि डाकिए के हाथ बड़ी तेज़ी से 'ठप-ठपा-ठप' की आवाज़ के साथ टिकटों पर सील लगा रहे थे।
अगली प्रक्रिया के लिए अनिवार्य: टिकट पर सील लगाने के बाद ही पत्रों को इकट्ठा करके दूसरी मेज पर ले जाया जाता है, जहाँ उन्हें उनके गंतव्य (जैसे जिले के अंदर या जिले के बाहर) के अनुसार छाँटा जाता है।
स्रोतों से बाहर की जानकारी:
मैं आपको यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरे पास उपलब्ध स्रोतों में टिकट लगाने के मूल कारण (जैसे शुल्क का भुगतान) का विस्तार से वर्णन नहीं है, लेकिन सामान्य जानकारी के अनुसार (जिसे आप स्वतंत्र रूप से सत्यापित कर सकते हैं), डाक टिकट इस बात का प्रमाण होता है कि आपने डाक सेवा का शुल्क चुका दिया है। टिकट पर सील इसलिए लगाई जाती है ताकि उस टिकट का दोबारा उपयोग न किया जा सके।
एक सरल उदाहरण:
इसे आप एक सिनेमा हॉल की टिकट की तरह समझ सकते हैं। जैसे गेट पर खड़ा कर्मचारी आपकी टिकट को थोड़ा फाड़ देता है या उस पर निशान लगा देता है ताकि यह पता चल सके कि आपने पैसे दे दिए हैं और आप उस टिकट का दोबारा इस्तेमाल नहीं कर सकते, वैसे ही डाकघर में टिकट पर सील लगाई जाती है।

6. पत्र पर लगे डाक टिकट पर सील क्यों लगाया जाता है?

स्रोतों के अनुसार, जब पत्र को डाक-पेटी से निकालकर बिशनपुर डाकघर लाया गया, तब वहाँ के डाकिए ने एक भारी ठप्पे से पत्र पर लगे डाक टिकट पर सील (Seal) लगाई।
इस प्रक्रिया के बारे में स्रोतों में निम्नलिखित विवरण दिया गया है:
प्रक्रिया: डाकिए ने बोरों से पत्रों को मेज पर उलट दिया और बहुत तेज़ी से उन पर लगे टिकटों पर ठप्पा लगाना शुरू किया। 
अगला चरण: टिकट पर सील लगाने की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पत्रों को इकट्ठा किया गया और अगली मेज पर छँटाई के लिए भेजा गया।
स्रोतों से बाहर की जानकारी:
मैं आपको यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरे पास उपलब्ध स्रोतों में सील लगाने के उद्देश्य का विस्तार से वर्णन नहीं है। सामान्य जानकारी के अनुसार (जिसे आप स्वतंत्र रूप से सत्यापित कर सकते हैं), डाक टिकट पर सील इसलिए लगाई जाती है ताकि उस टिकट को 'निरस्त' (cancel) किया जा सके और उसका दोबारा उपयोग न हो सके। यह इस बात को प्रमाणित करता है कि उस पत्र के लिए डाक शुल्क का भुगतान किया जा चुका है।
इसे आप एक सिनेमा हॉल की टिकट की तरह समझ सकते हैं। जैसे गेट पर खड़ा कर्मचारी प्रवेश के समय आपकी टिकट को थोड़ा फाड़ देता है या उस पर निशान लगा देता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसी टिकट का इस्तेमाल कोई दोबारा न कर ले, वैसे ही डाकघर में टिकट पर सील लगाई जाती है।

7. भेजे जाने के दौरान विभिन्न स्थानों पर पत्रों की छँटाई की जाती है क्यों?

पत्रों के गंतव्य तक पहुँचने की यात्रा में छँटाई (Sorting) सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। स्रोतों के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर पत्रों की छँटाई निम्नलिखित कारणों से की जाती है:
स्थानीय और बाहरी डाक को अलग करने के लिए: सबसे पहले स्थानीय डाकघर (जैसे बिशनपुर) में यह देखा जाता है कि पत्र जिले के भीतर का है या जिले के बाहर का। इससे यह तय होता है कि पत्र को स्थानीय स्तर पर बाँटना है या उसे आर.एम.एस. (Railway Mail Service) के माध्यम से दूर भेजना है।
दिशा के निर्धारण के लिए: आर.एम.एस. कार्यालयों में आसपास की सभी डाक इकट्ठी की जाती है और उन्हें दिशावार (direction-wise) छाँटा जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि एक ही दिशा में जाने वाले सभी पत्रों को एक साथ संबंधित रेलगाड़ी से भेजा जा सके।
विशिष्ट गंतव्य तक पहुँचाने के लिए: बड़े स्टेशनों (जैसे गया) के आर.एम.एस. कार्यालय में पत्रों को उनके पते के आधार पर अलग-अलग खानों वाली अलमारियों में डाला जाता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली जाने वाले सभी पत्रों को 'दिल्ली' लिखे हुए खाने में रखा जाता है ताकि उन्हें एक ही बोरे में बंद करके सही गंतव्य की ओर भेजा जा सके।
व्यवस्थित वितरण के लिए: गंतव्य शहर (जैसे दिल्ली) पहुँचने के बाद, बड़े डाकघर में फिर से छँटाई होती है ताकि स्थानीय डाकिया उन्हें अपने क्षेत्र के अनुसार थैले में रखकर सही घर तक पहुँचा सके।
संक्षेप में, यदि यह छँटाई न हो, तो पत्रों के खो जाने या गलत पते पर पहुँचने की संभावना बढ़ जाएगी।
इसे आप नदियों के संगम की तरह समझ सकते हैं; जैसे अलग-अलग दिशाओं से आने वाली छोटी-छोटी धाराएँ एक बड़े केंद्र पर मिलती हैं और फिर अपनी ढलान और दिशा के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में बहती हैं, वैसे ही डाक प्रणाली में छँटाई के माध्यम से पत्रों को उनकी सही मंजिल की 'धारा' में मोड़ दिया जाता है।

आपको यह भी पढना है:-

×
×
टिपटिपवा pdf + notes + solution हुआ यूं कि pdf + notes + solution म्यान का रंग pdf + notes + solution उपकार का बदला pdf + notes + solution चतुर चित्रकार pdf + notes + solution नमकू pdf + notes + solution ममता की मूर्ति pdf + notes + solution एक पत्र की आत्मकथा notes + solution कविता का कमाल notes + solution मरता क्या न करता notes + solution अंधेर नगरी pdf + notes + solution ईद pdf + notes + solution परिक्षा pdf + notes + solution असली चित्र pdf + notes + solution हाॅकी का जादूगर pdf + notes हार जीत pdf + notes + solution मंत्र pdf + notes + solution भीष्म की प्रतिज्ञा pdf + notes + solution सरजू भैया pdf + notes + solution दादा दादी के साथ pdf + notes + solution स्वार्थी दानव pdf + notes + solution फसलों का त्योहार pdf + notes + solution शेरशाह का मकबरा pdf + notes + solution नचिकेता pdf + notes + solution दानी पेङ pdf + notes + solution वीर कुँवर सिंह pdf + notes + solution साईकिल की सवारी pdf + notes + solution हिमशुक pdf + notes + solution ऐसे ऐसे pdf + notes + solution ईदगाह pdf + notes + solution बालगोबिन भगत pdf + notes + solution हुंडरू का जलप्रपात pdf + notes + solu ठेस pdf + notes + solution आशोक का शस्त्र-त्याग pdf + n + s तू न गई मेरे मन से विक्रमशिला pdf + notes + solution दीदी की डायरी pdf + notes + solu दीनबंधु निराला pdf + notes + solution खेमा pdf + notes + solution चिकित्सा का चक्कर p + n + s कहानी का प्लॉट pdf + notes + solution नालंदा ग्राम-गीत का मर्म लाल पान की बेगम मूक फिल्मों से... अष्टावक्र pdf + notes + solution रेल-यात्रा pdf + notes + solution श्रम विभाजन और जाति प्रथा (निबंध) मछली (कहानी) pdf + notes + solution नौबतखाने में इबादत (व्यक्तिचित्र) शिक्षा और संस्कृति (शिक्षाशास्त्र) बातचीत pdf + notes + solution संपूर्ण क्रांति pdf + notes + solution अर्धनारीश्वर pdf + notes + solution रोज pdf + notes + solution एक लेख और एक पत्र ओ सदानीरा pdf + notes + solution प्रगीत और समाज सिपाही की माँ pdf + notes + solution उसने कहा था शिक्षा pdf + notes + solution हंसते हुए मेरा अकेलापन जूठन pdf + notes + solution तिरिछ pdf + notes + solution

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Online calculator find percentage number in your exam marks

Ncert class 12 Hindi- chapter-12- तिरिछ