Ncert class 12 Hindi- chapter-6- एक लेख और एक पत्र

Ncert class 12 Hindi- chapter-6- एक लेख और एक पत्र

भगत सिंह द्वारा रचित 'एक लेख और एक पत्र' में मुख्य रूप से विद्यार्थियों की राजनीति में भूमिका और क्रांतिकारी जीवन के नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला गया है। इस पाठ का संक्षेपण निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
विद्यार्थी और राजनीति
 * राजनीतिक भागीदारी की आवश्यकता: भगत सिंह का मानना है कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ राजनीति का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। यदि वे इसमें हिस्सा नहीं लेंगे, तो देश का भविष्य अंधकारमय होगा क्योंकि कल देश की बागडोर उन्हीं के हाथों में होनी है।
 * शिक्षा प्रणाली की आलोचना: वे तत्कालीन शिक्षा को 'निकम्मी' मानते हैं जो केवल क्लर्क पैदा करती है। वे पंजाब की पिछड़ी राजनीतिक स्थिति का कारण वहां के विद्यार्थियों का राजनीति से दूर रहना और केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रहना बताते हैं।
 * व्यावहारिक ज्ञान: उनके अनुसार, केवल गणित या भूगोल रटना शिक्षा नहीं है। असली शिक्षा वह है जो देश की परिस्थितियों को समझने और सुधारने की योग्यता पैदा करे।
सुखदेव के नाम पत्र (क्रांतिकारी विचार और नैतिकता)
 * आत्महत्या बनाम शहादत: पत्र में भगत सिंह ने 'आत्महत्या' को एक घृणित अपराध और कायरता बताया है। उनके अनुसार, दुखों से भागने के लिए जीवन समाप्त करना गलत है, जबकि किसी महान आदर्श या देश के लिए हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ना 'आदर्श मृत्यु' है।
 * कष्ट सहने का महत्व: वे कहते हैं कि विपत्तियाँ व्यक्ति को पूर्ण बनाती हैं। जेल का जीवन और वहां के कष्ट व्यक्तिगत अनुभव और सामाजिक अध्ययन के लिए श्रेष्ठ अवसर प्रदान करते हैं।
 * क्रांतिकारी का उत्तरदायित्व: भगत सिंह का तर्क है कि क्रांतिकारियों को अपने द्वारा आमंत्रित किए गए संघर्ष के कष्टों को सहने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि क्रांति केवल बलिदानों और सतत कष्ट सहन से ही संभव है।
 * व्यक्तिगत भावनाओं का त्याग: वे लिखते हैं कि जब देश के भाग्य का निर्णय हो रहा हो, तो व्यक्तियों के भाग्य को पूरी तरह भुला देना चाहिए। उनकी अंतिम इच्छा यही थी कि उनका बलिदान देश के लोगों के दिलों में आजादी के प्रति अमिट छाप छोड़ जाए।

विद्यार्थियों को राजनोति में भाग क्यों लेना चाहिए ?

भगत सिंह के लेख 'विद्यार्थी और राजनीति' के आधार पर, विद्यार्थियों को राजनीति में भाग लेना चाहिए क्योंकि वे ही देश के भविष्य के कर्णधार हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
 * देश की बागडोर संभालना: आज के विद्यार्थी ही कल देश की बागडोर अपने हाथों में लेंगे, इसलिए उन्हें अभी से व्यावहारिक ज्ञान हासिल करना चाहिए।
 * सच्ची शिक्षा का उद्देश्य: भगत सिंह के अनुसार, वह शिक्षा 'निकम्मी' है जो केवल क्लर्की करने के लिए हासिल की जाए। सच्ची शिक्षा वह है जो देश की परिस्थितियों का ज्ञान दे और उनमें सुधार करने की योग्यता पैदा करे।
 * पंजाब का उदाहरण: वे पंजाब के राजनीतिक रूप से पिछड़ने का मुख्य कारण यहाँ की शिक्षा को मानते हैं, जहाँ विद्यार्थियों को राजनीति से दूर रहने के लिए मजबूर किया जाता है。
 * व्यावहारिक राजनीति की समझ: विद्यार्थियों को महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के भाषणों को सुनना चाहिए और देश की समस्याओं पर विचार करना चाहिए।
 * क्रांति और आजादी की आवश्यकता: इतिहास गवाह है कि सभी देशों को आजाद कराने में वहाँ के नौजवानों और विद्यार्थियों की ही मुख्य भूमिका रही है।
 * राष्ट्रीय कर्तव्य: जब देश में अन्याय हो रहा हो, तो विद्यार्थियों को केवल अपनी किताबों (जैसे गणित और भूगोल) तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर मैदान में कूदकर अपना जीवन देश सेवा में लगा देना चाहिए।
भगत सिंह का स्पष्ट संदेश था कि विद्यार्थियों को पढ़ना जरूर चाहिए, लेकिन साथ ही राजनीति का ज्ञान भी हासिल करना चाहिए ताकि वे देश के अस्तित्व को बचा सकें।

भगत सिंह की विद्यार्थियों से क्या अपेक्षाएँ हैं ?

भगत सिंह ने अपने लेख के माध्यम से विद्यार्थियों से निम्नलिखित अपेक्षाएँ व्यक्त की हैं:
 * राजनीति का ज्ञान हासिल करना: विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ-साथ राजनीति का भी गहरा ज्ञान हासिल करना चाहिए। भगत सिंह का मानना है कि केवल गणित और ज्योग्राफी रट लेना काफी नहीं है, बल्कि देश की परिस्थितियों को समझना भी शिक्षा का हिस्सा है।
 * देश की बागडोर संभालना: वे चाहते हैं कि विद्यार्थी आने वाले समय के लिए खुद को तैयार करें क्योंकि भविष्य में देश की बागडोर उन्हीं के हाथों में होनी है।
 * व्यावहारिक ज्ञान और सक्रियता: विद्यार्थी केवल किताबी कीड़ा न बनें, बल्कि व्यावहारिक राजनीति को समझें। जब देश को जरूरत हो, तो वे मैदान में कूदने और अपना जीवन देश की आजादी के लिए न्यौछावर करने का साहस रखें।
 * गुलामी की मानसिकता का त्याग: वे अपेक्षा करते हैं कि विद्यार्थी केवल क्लर्की करने के उद्देश्य से शिक्षा न लें और न ही सरकारी अधिकारियों की खुशामद करना सीखें।
 * क्रांतिकारी भावना: देश को ऐसे सेवकों की आवश्यकता है जो तन, मन और धन से देश पर अर्पित हो सकें। भगत सिंह के अनुसार, यह कार्य केवल वही नौजवान कर सकते हैं जो दुनियादारी के झंझटों में पड़ने से पहले देश के बारे में सोचना शुरू कर दें।
 * जागरूकता: विद्यार्थियों को अक्ल के अंधे बनने के बजाय अपने विवेक का उपयोग करना चाहिए और देश के अस्तित्व को बचाने के लिए एकजुट होना चाहिए।

भगत सिंह के अनुसार 'केवल कष्ट सहकर भी देश की सेवा की जा सकती है ?' उनके जीवन के आधार पर इसे प्रमाणित करें ।

भगत सिंह के अनुसार, कष्ट सहना केवल एक व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है, बल्कि यह देश सेवा का एक सशक्त माध्यम और क्रांतिकारी मार्ग का अनिवार्य हिस्सा है। उनके पत्र और जीवन दर्शन के आधार पर इसे निम्नलिखित तर्कों से प्रमाणित किया जा सकता है:
1. कष्ट सहना एक महान आदर्श है
भगत सिंह ने सुखदेव को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि नौजवान भारत सभा का मुख्य ध्येय ही "सेवा द्वारा कष्टों को सहन करना एवं बलिदान करना" था। उनका मानना था कि श्रेष्ठ और उत्कृष्ट आदर्श के लिए जीवन दे देना या कष्ट उठाना कभी व्यर्थ नहीं जाता।
2. कष्टों के माध्यम से जन-आंदोलन का जन्म
भगत सिंह ने स्वयं के जीवन से इसे प्रमाणित किया। उन्होंने जेल में कष्ट सहे और उनके साथी यतींद्रनाथ दास ने भूख हड़ताल के दौरान कष्ट सहते हुए अपने प्राण त्याग दिए। भगत सिंह के अनुसार:
 * उनके कष्ट सहन करने के कारण ही पूरे देश में एक विराट और सर्वव्यापी आंदोलन शुरू हुआ।
 * जेल की दयनीय दशा को सुधारने के लिए उन्होंने जो संघर्ष किया, उससे वे अपने लक्ष्य में सफल हुए।
3. चरित्र निर्माण और मानवता की सेवा
भगत सिंह का मानना था कि विपत्तियाँ व्यक्ति को पूर्ण बनाने वाली होती हैं। उनके अनुसार:
 * जेलों में रहकर ही कोई व्यक्ति अपराध और पाप जैसे सामाजिक विषयों का व्यावहारिक अध्ययन कर सकता है।
 * रूसी क्रांतिकारियों का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि जेलों में उनके द्वारा सहे गए कष्टों ने ही जारशाही का तख्ता पलटने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
4. सामूहिक जागृति के लिए व्यक्तिगत बलिदान
भगत सिंह के जीवन का सबसे बड़ा प्रमाण उनका मृत्युदंड को गले लगाना था। उनका मानना था कि यदि उनके फाँसी चढ़ने से देश के लोगों के दिलों में आजादी के अमिट चिह्न अंकित हो जाते हैं, तो वह मृत्यु 'सुंदर' होगी। वे अपनी मुक्ति के बजाय फांसी को प्राथमिकता देते थे ताकि यह आंदोलन अपनी चरम सीमा पर पहुँच सके।
निष्कर्ष:
भगत सिंह के लिए कष्ट सहना कायरता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और नैतिक जीत थी। उन्होंने सिद्ध किया कि एक बंदी क्रांतिकारी अपने कष्टों और बलिदान से सोए हुए राष्ट्र को जगा सकता है, जो कि प्रत्यक्ष युद्ध से भी अधिक प्रभावशाली सेवा है।

भगत सिंह ने कैसी मृत्यु को 'सुंदर' कहा है? वे आत्महत्या को कायरता कहते हैं, इस संबंध में उनके विचारों को स्पष्ट करें

भगत सिंह ने मृत्यु और आत्महत्या के बीच एक बहुत ही स्पष्ट और वैचारिक रेखा खींची है। उनके अनुसार 'सुंदर मृत्यु' वह है जो किसी महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए चुनी गई हो।
सुंदर मृत्यु क्या है?
भगत सिंह के अनुसार, निम्नलिखित परिस्थितियों में होने वाली मृत्यु को 'सुंदर' कहा जा सकता है:
 * आदर्शों के लिए बलिदान: एक श्रेष्ठ और उत्कृष्ट आदर्श के लिए अपना जीवन दे देना 'सुंदर मृत्यु' है।
 * देश सेवा का मार्ग: वह मृत्यु जो देश के लोगों के दिलों में आजादी की भावना के अमिट चिह्न अंकित कर दे, वह 'सुंदर' होती है।
 * फांसी को गले लगाना: भगत सिंह का मानना था कि जब आंदोलन अपनी चरम सीमा पर हो, तब फांसी दिया जाना एक गौरवपूर्ण अंत है।
 * अन्याय का विरोध: देश के भाग्य का निर्णय होते समय व्यक्तिगत भाग्य को भुलाकर, हंसते-हंसते शहादत प्राप्त करना ही आदर्श मृत्यु है।
 * यतींद्रनाथ दास का उदाहरण: उन्होंने अपने मित्र श्री यतींद्रनाथ दास की मृत्यु को 'स्पृहणीय' (प्रशंसनीय) कहा है, क्योंकि वह संघर्ष के दौरान हुई थी।
आत्महत्या को कायरता कहने के तर्क
भगत सिंह आत्महत्या को 'घृणित अपराध' और 'पूर्णतः कायरता' का कार्य मानते हैं। इसके पीछे उनके तर्क निम्नलिखित हैं:
 * दुखों से भागना: केवल कुछ शारीरिक या मानसिक दुखों और विपत्तियों से बचने के लिए अपने जीवन को समाप्त कर देना कायरता की निशानी है।
 * संघर्ष का त्याग: भगत सिंह के अनुसार, क्रांतिकारी होने का अर्थ ही विपत्तियों और कष्टों को सहना है। आत्महत्या करना इस संघर्ष से पीछे हट जाना है।
 * प्रतिक्रियावादी कार्य: वे आत्महत्या को एक 'प्रतिक्रियावादी कार्य' मानते हैं क्योंकि इससे जनता को कोई मार्गदर्शन नहीं मिलता, बल्कि यह निराशा पैदा करता है।
 * विश्वास की कमी: आत्महत्या वह व्यक्ति करता है जो अपने लक्ष्यों और अपनी विचारधारा पर अडिग रहने का धैर्य खो देता है।
 * मूल्य का दुरुपयोग: भगत सिंह का तर्क था कि हमें अपने जीवन का अधिक से अधिक मूल्य प्राप्त करना चाहिए और मानवता की सेवा करनी चाहिए, न कि उसे व्यर्थ में गंवाना चाहिए।
भगत सिंह ने स्पष्ट किया कि यद्यपि वे मृत्यु से नहीं डरते थे, लेकिन वे बिना किसी ठोस उद्देश्य के 'व्यर्थ में मरना' कदापि सहन नहीं कर सकते थे।
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भगत सिंह रूसी साहित्य को इतना महत्त्वपूर्ण क्यों मानते हैं ? वे एक क्रांतिकारी से क्या अपेक्षाएँ रखते हैं ?

भगत सिंह ने अपने पत्र में रूसी साहित्य की महत्ता और एक क्रांतिकारी के दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला है।
रूसी साहित्य का महत्त्व
भगत सिंह रूसी साहित्य को अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानते हैं क्योंकि वह केवल कल्पना पर आधारित नहीं, बल्कि जीवन की कठोर वास्तविकता से जुड़ा है:
 * वास्तविकता का चित्रण: रूसी साहित्य के प्रत्येक स्थान पर जो वास्तविकता मिलती है, वह हमारे (भारतीय) साहित्य में दिखाई नहीं देती।
 * कष्टों की सहृदयता: रूसी कहानियों में वर्णित कष्ट और दुखमयी स्थितियाँ पाठकों के भीतर दर्द की गहरी टीस और सहृदयता उत्पन्न करती हैं।
 * चरित्र की ऊँचाई: वे रूसी पात्रों के उन्माद और उनके चरित्र की असाधारण ऊँचाइयों के प्रशंसक थे, जिसका मुख्य कारण विपत्तियों को सहन करने का उल्लेख था।
 * क्रांतिकारी परिवर्तन का आधार: रूस में राजनीतिक बंदियों द्वारा जेलों में सहे गए कष्टों के कारण ही वहां जारशाही का तख्ता पलटने के बाद जेलों के प्रबंध में क्रांति लाई जा सकी।
एक क्रांतिकारी से अपेक्षाएँ
भगत सिंह के अनुसार एक सच्चे क्रांतिकारी में निम्नलिखित गुण और अपेक्षाएँ होनी चाहिए:
 * कष्टों के लिए तत्परता: क्रांतिकारी को सदैव उन विपत्तियों, चिंताओं और कष्टों को सहन करने के लिए तैयार रहना चाहिए जिन्हें उसने स्वयं अपने संघर्ष के माध्यम से आमंत्रित किया है।
 * दृढ़ विश्वास: एक क्रांतिकारी को अपने विश्वासों पर दृढ़तापूर्वक अडिग रहना चाहिए, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विकट क्यों न हों।
 * धैर्य और साहस: मृत्युदंड की प्रतीक्षा कर रहे क्रांतिकारियों को धैर्यपूर्वक उस दिन की प्रतीक्षा करनी चाहिए और फांसी को 'सुंदर मृत्यु' के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
 * व्यक्तिगत भावनाओं का बलिदान: जब देश के भाग्य का निर्णय हो रहा हो, तो क्रांतिकारी को अपने व्यक्तिगत भाग्य और प्रेम जैसी भावनाओं को पूरी तरह भुला देना चाहिए।
 * अध्ययन और स्वाध्याय: जेल के समय का उपयोग सामाजिक विषयों और स्वाध्याय के लिए करना चाहिए, क्योंकि कष्ट सहना स्वाध्याय का सर्वश्रेष्ठ भाग है।
 * कायरता का त्याग: एक क्रांतिकारी के लिए आत्महत्या जैसा कार्य घृणित और कायरतापूर्ण है; उसे अंत तक संघर्ष करने में विश्वास रखना चाहिए।
Q.1 भगत सिंह के अनुसार विद्यार्थियों को किसका ज्ञान हासिल करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर मैदान में कूद पड़ना चाहिए? (Tap to view answer) ▼
(A) केवल धार्मिक ग्रंथों का
(B) केवल व्यावसायिक शिक्षा का
(C) राजनीति का
(D) केवल संगीत और कला का
✅ Correct Answer: (C) राजनीति का
Q.2 भगत सिंह ने कैसी मृत्यु को 'सुंदर' कहा है? (Tap to view answer) ▼
(A) बीमारी से होने वाली मृत्यु
(B) आत्महत्या द्वारा हुई मृत्यु
(C) देश सेवा के बदले दी गई फाँसी (देश के लिए शहादत)
(D) दुर्घटना में हुई मृत्यु
✅ Correct Answer: (C) देश सेवा के बदले दी गई फाँसी (देश के लिए शहादत)
Q.3 भगत सिंह के अनुसार 'विपत्तियाँ' व्यक्ति को क्या बनाने वाली होती हैं? (Tap to view answer) ▼
(A) कमजोर
(B) पूर्ण
(C) डरपोक
(D) अहंकारी
✅ Correct Answer: (B) पूर्ण
Q.4 भगत सिंह ने 'आत्महत्या' को क्या माना है? (Tap to view answer) ▼
(A) एक साहसी कार्य
(B) अनिवार्य आवश्यकता
(C) एक घृणित अपराध और कायरता
(D) मोक्ष का द्वार
✅ Correct Answer: (C) एक घृणित अपराध और कायरता
Q.5 भगत सिंह के अनुसार हिंदुस्तान को इस समय कैसे देशसेवकों की जरूरत है? (Tap to view answer) ▼
(A) जो केवल भाषण देना जानते हों
(B) जो विदेशों में जाकर बस जाएँ
(C) जो तन-मन-धन देश पर अर्पित कर दें
(D) जो केवल क्लर्की का काम करें
✅ Correct Answer: (C) जो तन-मन-धन देश पर अर्पित कर दें
Q.6 भगत सिंह किस प्रकार की शिक्षा को 'निकम्मी' समझते हैं? (Tap to view answer) ▼
(A) जो वैज्ञानिक सोच पैदा करे
(B) जो सिर्फ क्लर्की करने के लिए हासिल की जाए
(C) जो देश सेवा की प्रेरणा दे
(D) जो विद्यार्थियों को राजनीति सिखाए
✅ Correct Answer: (B) जो सिर्फ क्लर्की करने के लिए हासिल की जाए
Q.7 "जब देश के भाग्य का निर्णय हो रहा हो, तो व्यक्तियों के भाग्य को पूर्णतया..." (Tap to view answer) ▼
(A) याद रखना चाहिए
(B) प्राथमिकता देनी चाहिए
(C) भुला देना चाहिए
(D) लिख लेना चाहिए
✅ Correct Answer: (C) भुला देना चाहिए
Q.8 भगत सिंह ने सुखदेव को लिखे पत्र में किस साहित्य को 'वास्तविकता' से भरपूर बताया है? (Tap to view answer) ▼
(A) अंग्रेजी साहित्य
(B) रूसी साहित्य
(C) फ्रांसीसी साहित्य
(D) संस्कृत साहित्य
✅ Correct Answer: (B) रूसी साहित्य
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