Ncert class 5 Hindi- chapter 6- उपकार का बदला

Ncert class 5 Hindi- chapter 6- उपकार का बदला

यह कहानी सोमन नाम के एक निर्धन और वृद्ध व्यक्ति के बारे में है, जो भीषण गर्मी में हाथ के पंखे बेचकर अपनी जीविका चलाता था। एक दिन जब सोमन के पास खाने के लिए पैसे नहीं थे, तब उसने एक बंदर को अपनी स्थिति बताई जिसे वह अक्सर भोजन कराया करता था। वह बंदर सोमन की गठरी से दो पंखे उठाकर ले गया और उसके बदले में एक व्यक्ति के बगीचे से पपीता लाकर सोमन को दिया ताकि वह अपनी भूख मिटा सके। जब सोमन उसी रास्ते से गुजरा, तो उसे वह व्यक्ति मिला जिसने वे पंखे बंदर से वापस पाए थे और उन्होंने सोमन को उन पंखों की उचित कीमत भी चुकाई। अंततः, यह कथा मनुष्य और पशु के बीच के अतुलनीय प्रेम और एक-दूसरे के प्रति कृतज्ञता के भाव को बहुत ही सुंदरता से दर्शाती है। यह हमें सिखाती है कि निस्वार्थ भाव से किया गया उपकार कभी व्यर्थ नहीं जाता और प्रकृति हमें उसका फल अवश्य देती है।

कहानी का संक्षेपण:

रामदेव झा द्वारा लिखित कहानी "उपकार का बदला" एक गरीब और बूढ़े व्यक्ति सोमन तथा एक विवेकशील बंदर के बीच के अनूठे संबंध की कथा है।
कहानी का संक्षेपण निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
सोमन की दिनचर्या और दयालुता: सोमन गर्मियों में ताड़ के पंखे बेचकर अपना गुज़ारा करता था। दोपहर की तपिश में वह एक पेड़ के नीचे विश्राम करता और बाज़ार से खरीदे गए अपने साधारण भोजन (जैसे गुलगुले) का कुछ हिस्सा वहाँ रहने वाले एक बंदर को भी देता था। इस प्रकार, सोमन और बंदर के बीच एक सहज रिश्ता बन गया था। संकट का समय: एक दिन सोमन का एक भी पंखा नहीं बिका, जिसके कारण उसके पास खुद के खाने के लिए भी पैसे नहीं थे। उसने बंदर को अपनी विवशता बताई और खाली हाथ लेट गया। बंदर ने जब देखा कि सोमन भूखा है, तो वह उसकी गठरी से दो पंखे लेकर पास के एक डेरे (बंगले) की ओर भाग गया।
बंदर का 'बदला' (प्रत्युपकार): सोमन को लगा कि उसे नुकसान हुआ है, लेकिन कुछ देर बाद बंदर वहाँ एक बड़ा पपीता लेकर लौटा और उसे सोमन के पास रख दिया। बंदर के आग्रह पर सोमन ने पपीता काटकर आधा खुद खाया और आधा बंदर को दिया, जिससे उसकी भूख मिट गई। सोमन ने संतोष कर लिया कि बंदर ने पंखों की कीमत पपीते के रूप में चुका दी है।
ईमानदारी और पुरस्कार: शाम को जब सोमन उसी डेरे के पास से गुज़रा, तो वहाँ के मालिक ने उसे वे दो पंखे लौटाने चाहे जो बंदर वहाँ फेंक आया था। सोमन ने ईमानदारी दिखाते हुए पंखे लेने से इनकार कर दिया और बताया कि उसे पपीते के रूप में उनका मूल्य मिल चुका है। सोमन की इस सच्चाई और बंदर की समझदारी से प्रभावित होकर उस भद्र पुरुष ने सोमन को पाँच रुपये दिए और उसके पंखे भी उसे वापस कर दिए।
निष्कर्ष और अंतर्दृष्टि:
यह कहानी हमें सिखाती है कि परोपकार कभी व्यर्थ नहीं जाता। सोमन द्वारा बंदर को खिलाया गया भोजन बंदर के 'विवेक' को जगाता है, जो यह दर्शाता है कि कृतज्ञता का भाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है। साथ ही, सोमन की निस्वार्थ ईमानदारी यह रेखांकित करती है कि संतोष ही सबसे बड़ा धन है।
इसे एक लहर (Ripple effect) की तरह समझा जा सकता है: जैसे पानी में एक पत्थर फेंकने से लहरें दूर तक जाती हैं, वैसे ही सोमन की छोटी सी दयालुता ने पहले बंदर को प्रभावित किया और अंततः उस सज्जन व्यक्ति के माध्यम से सोमन को उसकी मेहनत और ईमानदारी का दोगुना फल प्राप्त हुआ।

कहानी में जो-जो हुआ उनके सामने सही का निशान लगाइए

(क) सोमन ताड़ के पंखे बेचता था।
सही ✔️
(ख) सोमन ने बंदर के बच्चे को गुलगुला दिया।
सही ✔️
(ग) बंदर सोमन के दो पंखे लेकर चला गया।
सही ✔️
(घ) बंदर सोमन के लिए पपीता लाया था।
सही ✔️
(ङ) बंदर पैसे के बदले पपीता लाया था।
सही ✔️
(च) सोमन छह रुपए जोड़े में पंखे बेचता था।
गलत ❌️

2. सोमन गुज़ारे के लिए क्या करता था?

सोमन एक गरीब और बुजुर्ग व्यक्ति था जो अपने और अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए छोटे-मोटे धंधे किया करता था।
स्रोतों के अनुसार, उसके मुख्य कार्यों का विवरण निम्नलिखित है:
ताड़ के पंखे बेचना: गर्मी के महीनों में सोमन का मुख्य पेशा ताड़ के पंखे बेचना था। वह पूरे दिन कचहरी, बाज़ार और विभिन्न मुहल्लों में घूम-घूमकर इन पंखों को बेचता था।
परिश्रम और दिनचर्या: वह कड़ी धूप में भी घूमता रहता था, लेकिन दोपहर के समय जब लोग आराम करते थे और पंखे नहीं बिकते थे, तब वह किसी पेड़ के नीचे विश्राम करता था। 
आय और व्यय: पंखे बेचकर जो पैसे उसे मिलते थे, उन्हीं में से कुछ पैसे निकालकर वह दोपहर के समय अपने लिए मुरही, फुटहा, कचड़ी या गुलगुले जैसा साधारण भोजन खरीदता था। कहानी के अनुसार, उसके पंखे चार रुपये प्रति जोड़ा के हिसाब से बिकते थे।
सोमन का जीवन उस कर्मठ राही की तरह था जो अपनी छोटी सी पूँजी (पंखों) के सहारे तपती दोपहर में भी सिर्फ इसलिए चलता रहता था ताकि शाम को उसके परिवार का चूल्हा जल सके।

3. सोमन को बंदर पर दया क्यों आ गई?

सोमन को बंदर पर दया आने का मुख्य कारण बंदर की भूख और उसकी देखने की स्थिति थी।
स्रोतों के अनुसार, इस घटना का विवरण इस प्रकार है:
बंदर की स्थिति: एक दोपहर जब सोमन पेड़ के नीचे बैठकर अपने नाश्ते की पोटली खोल रहा था, तब पास के बगीचे से एक मोटा-सा बंदर आकर उसके पास बैठ गया।
मूक प्रार्थना: वह बंदर सोमन की तरफ "टुकुर-टुकुर" देख रहा था। सोमन को लगा कि वह बंदर शायद भूखा है, और उसकी इसी लाचारी को देखकर सोमन का मन पिघल गया।
दयालुता का कार्य: इसी दयाभाव के कारण सोमन ने अपने भोजन में से दो गुलगुले बंदर की ओर फेंक दिए, जिसे बंदर ने लपककर खा लिया।
यही वह क्षण था जिसने सोमन और बंदर के बीच एक अनोखे रिश्ते की शुरुआत की, जो आगे चलकर बंदर द्वारा सोमन की मदद करने का आधार बना।
इसे एक साँझी भूख (Shared Hunger) की तरह समझा जा सकता है; जैसे एक थका हुआ मुसाफिर दूसरे प्यासे राही का दर्द बिना बोले ही समझ जाता है, वैसे ही सोमन ने बंदर की खामोश नज़रों में छिपी भूख को पहचान लिया और अपना भोजन उसके साथ बाँट लिया।

4. बंदर किसके बदले में पपीता लाया था?

बंदर सोमन की गठरी से निकाले गए दो ताड़ के पंखों के बदले में पपीता लाया था। 
कहानी के आधार पर इस घटना का विवरण इस प्रकार है:
पंखे ले जाना: जब सोमन ने भूख के कारण बंदर को बताया कि आज उसका एक भी पंखा नहीं बिका है और उसके पास खिलाने के लिए कुछ नहीं है, तब बंदर ने अचानक सोमन की गठरी से दो पंखे खींच लिए और उन्हें लेकर पास के एक डेरे की ओर भाग गया। 
पपीता लाना: बंदर ने उन पंखों को उस डेरे (बंगले) के बरामदे में फेंक दिया और वहाँ लगे पेड़ों से एक बड़ा अधपका पपीता तोड़कर सोमन के पास ले आया।
बंदर का विवेक: सोमन ने खुद यह स्वीकार किया कि बंदर ने उन पंखों के बदले में उसे पपीता दिया है ताकि उसका पेट भर सके। जब सोमन उस डेरे के मालिक से मिला, तो उसने भी पुष्टि की कि बंदर पंखों को वहीं छोड़कर पपीता तोड़ ले गया था।
यह घटना दिखाती है कि बंदर ने सोमन की पिछली दयालुता का ऋण चुकाने के लिए एक प्रकार का वस्तु-विनिमय (barter) किया, जहाँ उसने पंखों को पपीते की 'कीमत' के रूप में इस्तेमाल किया [4]। 
इसे एक ईमानदार व्यापार की तरह देखा जा सकता है; जैसे कोई ग्राहक वस्तु के बदले मूल्य चुकाता है, वैसे ही बंदर ने सोमन की भूख मिटाने के लिए उसके पंखों का उपयोग 'मुद्रा' के रूप में करके उसे भोजन उपलब्ध कराया।

5. भद्रपुरुष ने सोमन को दो पंखों के बदले कितने पैसे दिए।

कहानी के अनुसार, भद्रपुरुष ने सोमन को दो पंखों के बदले पाँच रुपये दिए।
इस घटना का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:
सोमन की ईमानदारी: जब भद्रपुरुष ने सोमन को बंदर द्वारा छोड़े गए पंखे वापस ले जाने को कहा, तो सोमन ने उन्हें लेने से इनकार कर दिया। उसने तर्क दिया कि बंदर ने उन पंखों के बदले उसे पपीता दे दिया था, जिससे उसकी भूख मिट गई और उसे पंखों का मूल्य मिल गया।
भद्रपुरुष का प्रभाव: भद्रपुरुष बंदर के विवेक और सोमन की निस्वार्थ सच्चाई से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि जब एक जानवर में इतनी समझ है, तो एक मनुष्य होने के नाते वे सोमन के पंखे मुफ्त में नहीं ले सकते।
पंखों की कीमत और भुगतान: सोमन ने बताया कि पंखों का जोड़ा चार रुपये में बिकता है। भद्रपुरुष ने उसकी मेहनत और ईमानदारी का सम्मान करते हुए अपनी जेब से पाँच रुपये का एक सिक्का निकाला और सोमन को दे दिया।
इस प्रकार, सोमन को न केवल अपने पंखों की उचित कीमत मिली, बल्कि उसकी ईमानदारी के कारण उसे एक अतिरिक्त रुपया भी पुरस्कार स्वरूप प्राप्त हुआ।

एक ज्ञान देने वाली कहानी देखें।

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