Ncert class 6 Hindi- chapter 11- सरजू भैया
Ncert class 6 Hindi- chapter 11- सरजू भैया
प्रस्तुत पाठ रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा रचित एक संस्मरणात्मक रेखाचित्र है, जो सरजू भैया नामक एक परोपकारी और निस्वार्थ व्यक्ति के जीवन पर केंद्रित है। लेखक ने उनके विशिष्ट शारीरिक गठन और उनकी अत्यधिक उदारता का सजीव वर्णन किया है, जिसके कारण उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति और स्वास्थ्य दोनों ही खो दिए। सरजू भैया गाँव के हर छोटे-बड़े काम के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, परंतु उनकी इसी सरलता और भोलेपन का फायदा उठाकर लोग अक्सर उन्हें ठग लेते हैं। अपनी गरीबी और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद, उनका हँसमुख स्वभाव और दूसरों की सेवा करने का जज्बा उन्हें एक वंदनीय व्यक्तित्व बनाता है। अंततः, यह लेख एक ऐसे मानवीय रत्न की त्रासदी और महानता को दर्शाता है जो दूसरों के लिए जीते हुए स्वयं को विस्मृत कर बैठा है।

सरजू भैया पाठ का संक्षेपण
रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा रचित 'सरजू भैया' पाठ एक ऐसे व्यक्ति का मार्मिक चित्रण है, जो अपनी निस्वार्थ सेवा, परोपकार और सादगी के लिए जाना जाता है। इस पाठ का संक्षेपण निम्नलिखित बिंदुओं में किया जा सकता है:
शारीरिक बनावट और व्यक्तित्व: सरजू भैया अत्यधिक लम्बे और दुबले-पतले व्यक्ति हैं, जिनकी हड्डियाँ और नसें साफ दिखाई देती हैं। हालांकि वे देखने में 'भूखमरे' जैसे लगते हैं, लेकिन वास्तव में वे अत्यंत जिंदादिल, मिलनसार और हँसोड़ स्वभाव के हैं। लेखक और उनके बीच बड़े-छोटे भाई का आत्मीय संबंध है।
परोपकारी स्वभाव और आर्थिक गिरावट: सरजू भैया के पिता एक संपन्न किसान और साहूकार थे। पिता की मृत्यु के बाद सरजू भैया ने पारिवारिक व्यवसाय (लेन-देन) को इसलिए चौपट कर दिया क्योंकि वे सूदखोरों की तरह कठोर नहीं बन सके। उन्होंने जरूरतमंदों की मदद की और कर्ज वसूलते समय लोगों की विवशता देखकर अपना मूलधन भी छोड़ दिया। दूसरों के काम (बीमार के लिए वैद्य लाना, बाजार से सौदा लाना, गवाही देना आदि) में व्यस्त रहने के कारण उन्होंने अपनी खेती और घर की परवाह नहीं की, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई।
सरलता का शोषण: उनकी अत्यधिक सरलता के कारण लोग उन्हें ठगने का प्रयास करते हैं। एक बार आर्थिक तंगी के समय उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति से कर्ज लिया जो कभी स्वयं उनका कर्जदार था। उस व्यक्ति ने धोखे से सरजू भैया के अँगूठे का निशान एक कागज पर ले लिया और अब उन्हें अदालत में घसीटने की धमकी दे रहा है।
पारिवारिक स्थिति और चिंता: सरजू भैया की केवल बेटियाँ हैं और उनकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। लेखक का परिवार और गाँव के अन्य लोग उनके वंश के डूबने को लेकर चिंतित हैं और उन्हें दूसरी शादी करने की सलाह देते हैं, जिसे वे हँसी-मजाक में टाल देते हैं।
निष्कर्ष: सरजू भैया एक ऐसे 'नर-रत्न' हैं जिनका पूरा जीवन दूसरों की सेवा में बीता है, भले ही इसके बदले उन्हें शारीरिक कष्ट और आर्थिक हानि उठानी पड़ी हो।
Q.1 'सरजू भैया' पाठ के लेखक कौन हैं?
(A) प्रेमचंद
(B) रामवृक्ष बेनीपुरी
(C) महादेवी वर्मा
(D) फणीश्वरनाथ रेणु
✅ उत्तर: (B) रामवृक्ष बेनीपुरी
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सरजू भैया को जिन्दादिल क्यों कहा गया है?
सरजू भैया को 'जिन्दादिल' उनके सकारात्मक स्वभाव और विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराते रहने की क्षमता के कारण कहा है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
* हर परिस्थिति में मुस्कुराहट: सरजू भैया का शरीर भले ही बीमारियों या अभावों के कारण 'हड्डियों का ढाँचा' जैसा दिखता था, लेकिन वे अत्यंत मिलनसार, मजाकिया और हँसोड़ व्यक्ति थे।
* दिल खोलकर हँसना: जब वे हँसते थे, तो वे अपनी सारी पीड़ा भूलकर बेतहाशा हँसते थे। उनकी हँसी इतनी जीवंत थी कि उनके शरीर का हर अंग हिलने-डुलने लगता था, मानो अंग-अंग हँस रहा हो।
* दुखों पर विजय: यद्यपि उनके जीवन में कई परेशानियाँ थीं—जैसे बाढ़ और भूकंप से खेती-घर का नष्ट होना, कर्ज का बोझ और पत्नी की मृत्यु—फिर भी उन्होंने अपने स्वभाव की जिंदादिली को खोने नहीं दिया।
* परोपकार में आनंद: वे अपनी फटेहाली की चिंता किए बिना दूसरों की मदद करने में खुशी महसूस करते थे। गाँव के किसी भी व्यक्ति के काम के लिए वे दिन-रात दौड़ने को तैयार रहते थे, जो उनके उत्साही व्यक्तित्व को दर्शाता है।
* चुहल और विनोद: लेखक की पत्नी (रानी) के साथ उनका हंसी-मजाक करना और अपनी शादी की बात पर ठठाकर हँस पड़ना यह साबित करता है कि वे जीवन के छोटे-छोटे क्षणों में आनंद ढूँढना जानते थे।
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लेन-देन के व्यवसाय में सरजू भैया क्यों सफल नहीं हो सकते थे?
लेन-देन (सूदखोरी) के व्यवसाय में सरजू भैया की असफलता के मुख्य कारण कहानी में इस प्रकार बताए गए हैं:
* कोमल और दयालु हृदय: सरजू भैया का हृदय उनके शरीर की तरह ही विशाल और उदार था। जब भी कोई दुखी व्यक्ति अपनी विपदा लेकर उनके पास आता, तो वे एक देवता की तरह उसे धन दे देते थे।
* वसूली में सख्ती का अभाव: जब कर्ज वसूलने का समय आता और कर्जदार आँखों में आँसू लेकर गिड़गिड़ाता, तो सरजू भैया का दिल पसीज जाता था। वे उनसे सख्ती से पैसा वापस नहीं माँग पाते थे।
* मूलधन का डूब जाना: उनकी इसी अत्यधिक उदारता के कारण ब्याज तो दूर की बात है, कुछ ही समय में उनका मूलधन (Main amount) भी शून्य हो जाता था।
* कठोरता की कमी: लेखक के अनुसार, लेन-देन या सूदखोरी के व्यवसाय के लिए व्यक्ति को अपना 'आदमीपन' खोकर जोंक, खटमल या चीलर की तरह निर्दयी बनना पड़ता है। सरजू भैया स्वभाव से अत्यंत सरल और 'बमभोला' थे, इसलिए वे कभी 'चीलर' (खून चूसने वाला) नहीं बन सकते थे।
* परोपकारी स्वभाव: वे दूसरों के उपकार के चक्कर में न केवल अपना शरीर सुखा रहे थे, बल्कि अपनी संपत्ति का भी भारी नुकसान कर रहे थे।
संक्षेप में, उनका "देवता जैसा स्वभाव" ही व्यापारिक दृष्टिकोण से उनकी सबसे बड़ी कमजोरी थी, जिसके कारण वे अपने पिता द्वारा छोड़े गए अच्छे-खासे लेन-देन के काम को चौपट कर बैठे।
अपनी शादी की बात सुनकर सरजू भैया ठठाकर क्यों हँस पड़े ? सही उत्तर में ✔️ चिह्न लगाइए ।
यह समझकर कि लोग उनसे हँसी कर रहे हैं? | ❌️ |
|---|---|
सरजू भैया स्वयं हँसी कर रहे थे। | ❌️ |
दूसरी शादी की संभावना पर वह बहुत प्रसन्न हो उठे थे। | ❌️ |
वह हँस कर बात टालना चाहते थे। | ✔️ |
चतुर, फुर्तीले और काम-काजू आदमी होते हुए भी सरजू भैया सुखी संपन्न क्यों नहीं रह सके ?
सरजू भैया के चतुर और फुर्तीले होने के बावजूद सुखी-संपन्न न रह पाने के पीछे उनके स्वभाव और जीवन की कुछ विशेष परिस्थितियाँ जिम्मेदार थीं:
* अत्यधिक परोपकारी स्वभाव: सरजू भैया चतुर और काम-काजू तो थे, लेकिन उन्हें दूसरों के काम से ही फुर्सत नहीं मिलती थी। वे पूरे गाँव का बोझ अपने सिर पर उठाए रखते थे।
* स्वयं के कार्यों की उपेक्षा: परोपकार के चक्कर में उन्होंने न केवल अपने शरीर को सुखा लिया, बल्कि अपने खेतों और घर की ओर पूरा ध्यान नहीं दे पाए।
* लेन-देन में असफलता: वे स्वभाव से इतने कोमल थे कि कर्ज वसूलते समय किसी को गिड़गिड़ाते देख पसीज जाते थे। इसके कारण उनका मूलधन भी शून्य हो जाता था।
* प्राकृतिक आपदाएँ: उनके पिता एक अच्छे किसान थे और धन-धान्य से संपन्न थे, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद बाढ़ ने उनकी खेती और भूकंप ने उनके घर को तबाह कर दिया।
* भोलापन और ठगा जाना: उनकी सरलता का फायदा उठाकर लोग उन्हें ठगने की चेष्टा करते थे। एक बार जरूरत पड़ने पर एक महाजन ने उनकी विवशता का लाभ उठाकर उनसे सादे कागज पर अँगूठा लगवा लिया और बाद में उन्हें कानूनी कार्रवाई की धमकी दी।
* पारिवारिक चिंताएँ: उनकी पाँच बेटियाँ थीं और उनकी पत्नी की मृत्यु भी बेटा पाने का अरमान लिए हो गई थी। बेटियों की शादी और भविष्य की चिंता ने भी उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ नहीं होने दिया।
इन्हीं कारणों से, उनके भीतर कार्यक्षमता होने के बाद भी वे फटेहाली और शारीरिक कमजोरी का शिकार रहे।
सरजू भैया ने सादे कागज पर अँगूठे का निशान क्यों बनाया ?
सरजू भैया के चतुर और फुर्तीले होने के बावजूद सुखी-संपन्न न रह पाने के पीछे उनके स्वभाव और जीवन की कुछ विशेष परिस्थितियाँ जिम्मेदार थीं:
* अत्यधिक परोपकारी स्वभाव: सरजू भैया चतुर और काम-काजू तो थे, लेकिन उन्हें दूसरों के काम से ही फुर्सत नहीं मिलती थी। वे पूरे गाँव का बोझ अपने सिर पर उठाए रखते थे।
* स्वयं के कार्यों की उपेक्षा: परोपकार के चक्कर में उन्होंने न केवल अपने शरीर को सुखा लिया, बल्कि अपने खेतों और घर की ओर पूरा ध्यान नहीं दे पाए।
* लेन-देन में असफलता: वे स्वभाव से इतने कोमल थे कि कर्ज वसूलते समय किसी को गिड़गिड़ाते देख पसीज जाते थे। इसके कारण उनका मूलधन भी शून्य हो जाता था।
* प्राकृतिक आपदाएँ: उनके पिता एक अच्छे किसान थे और धन-धान्य से संपन्न थे, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद बाढ़ ने उनकी खेती और भूकंप ने उनके घर को तबाह कर दिया।
* भोलापन और ठगा जाना: उनकी सरलता का फायदा उठाकर लोग उन्हें ठगने की चेष्टा करते थे। एक बार जरूरत पड़ने पर एक महाजन ने उनकी विवशता का लाभ उठाकर उनसे सादे कागज पर अँगूठा लगवा लिया और बाद में उन्हें कानूनी कार्रवाई की धमकी दी।
* पारिवारिक चिंताएँ: उनकी पाँच बेटियाँ थीं और उनकी पत्नी की मृत्यु भी बेटा पाने का अरमान लिए हो गई थी। बेटियों की शादी और भविष्य की चिंता ने भी उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ नहीं होने दिया।
इन्हीं कारणों से, उनके भीतर कार्यक्षमता होने के बाद भी वे फटेहाली और शारीरिक कमजोरी का शिकार रहे।
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