Ncert class 8 Hindi- chapter-13- दीदी की डायरी

Ncert class 8 Hindi- chapter-13- दीदी की डायरी

यह पाठ 'दीदी की डायरी' के माध्यम से हमें संजू नाम की एक छोटी लड़की से मिलवाता है, जिसे पुस्तकें पढ़ने का बहुत शौक है। महात्मा गांधी के सत्य के प्रयोगों से प्रेरित होकर वह स्वयं की डायरी लिखने का संकल्प लेती है और मार्गदर्शन के लिए अपनी बड़ी बहन की डायरी पढ़ती है। उसकी दीदी की डायरी के पन्ने पारिवारिक स्नेह, विद्यालय की पिकनिक और जापानी कहानी 'तोतो-चान' जैसे रोचक अनुभवों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं। साथ ही, यह डायरी स्त्री शिक्षा की बाधाओं, बाल विवाह जैसी सामाजिक समस्याओं और अंधविश्वासों पर भी कड़ा प्रहार करती है। लेखिका ने डायरी विधा का उपयोग करके मानवीय संवेदनाओं और किशोर मन के विचारों को बेहद सुंदरता से व्यक्त किया है। यह स्रोत हमें जीवन की छोटी-बड़ी घटनाओं को सहेजने और उनसे सीखने की प्रेरणा देता है।

संजू कैसी लड़की थी? उसे किस चीज़ का शौक था ?

स्रोतों के अनुसार, संजू एक हँसमुख और सयानी लड़की थी । वह अभी छोटी थी और आठवीं कक्षा में पढ़ती थी, लेकिन बातें बहुत समझदारी की करती थी । उसका स्वभाव बहुत खुशमिजाज था; वह खुद भी खूब हँसती थी और अपने चुटकुलों से दूसरों को भी खूब हँसाती थी ।
संजू को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था ।
पढ़ने की रुचि: उसे कहानियाँ, कविताएँ और कॉमिक्स आदि पढ़ना बहुत पसंद था । यह शौक उसे अपनी माँ की देखा-देखी लगा था । चाहे कक्षा में अच्छे नंबर आएँ या उसका जन्मदिन हो, उसे उपहार में पुस्तकें ही मिलती थीं, जिसके कारण उसके घर में एक छोटा सा पुस्तकालय बन गया था ।
डायरी लेखन: हाल ही में गांधी जी की पुस्तक 'सत्य के प्रयोग' पढ़ने के बाद उसे डायरी लिखने का भी शौक हुआ और उसने अपनी दीदी की तरह डायरी लिखना शुरू करने का फैसला किया ।

संजू को डायरी लिखने की प्रेरणा किससे मिली ?

स्रोतों के अनुसार, संजू को डायरी लिखने की प्रेरणा मुख्य रूप से महात्मा गांधी से मिली।

विस्तार से:
गांधी साहित्य: संजू ने गांधी जी की पुस्तक 'सत्य के प्रयोग' पढ़ी थी, जो उसे बहुत पसंद आई। जब उसे पता चला कि बापू ने अपने ये प्रयोग अपनी 'डायरी' में लिखे थे, तो उसने भी डायरी लिखने का संकल्प लिया ।
दीदी की भूमिका: जब संजू को समझ नहीं आया कि डायरी की शुरुआत कैसे करे, तो उसे याद आया कि उसकी दीदी भी डायरी लिखती हैं। दीदी ने उसे समझाया कि दिन भर की घटनाओं को ज्यों का त्यों लिख देना ही डायरी लेखन है और उन्होंने अपनी डायरी के कुछ पन्ने पढ़कर संजू का मार्गदर्शन भी किया ।
माता-पिता का सहयोग: संजू की माँ ने उसका हौसला बढ़ाया और पिताजी ने खुश होकर उसे एक सुंदर डायरी लाकर दी ।

'सत्य के प्रयोग' पुस्तक के रचयिता कौन हैं ?

स्रोतों के अनुसार, 'सत्य के प्रयोग' पुस्तक के रचयिता महात्मा गांधी (बापू) हैं ।
संजू ने गांधी साहित्य पढ़ने के दौरान यह पुस्तक पढ़ी थी, जिसे पढ़कर उसे पता चला कि बापू ने अपने ये प्रयोग अपनी डायरी में लिखे थे । इसी बात ने संजू को डायरी लिखने के लिए प्रेरित भी किया।

दीदी की डायरी पाठ का महत्वपूर्ण नोट्स

यहाँ पाठ 'दीदी की डायरी' के आधार पर विस्तृत नोट्स दिए गए हैं:

1. मुख्य पात्र: संजू
परिचय: संजू आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छोटी लेकिन सयानी लड़की है। वह स्वभाव से बहुत हँसमुख है और चुटकुले सुनाकर सबको हँसाती है ।
शौक: उसे किताबें (कहानियाँ, कविताएँ, कॉमिक्स) पढ़ने का बहुत शौक है। यह आदत उसे अपनी माँ से मिली है। उसे उपहार में भी किताबें ही मिलती हैं, जिससे उसके पास एक छोटा पुस्तकालय बन गया है ।
डायरी की प्रेरणा: महात्मा गांधी की पुस्तक 'सत्य के प्रयोग' पढ़ने के बाद उसे पता चला कि बापू डायरी लिखते थे। इससे प्रेरित होकर संजू ने भी डायरी लिखने का फैसला किया ।
दीदी की सीख: जब संजू को समझ नहीं आया कि शुरुआत कैसे करें, तो उसकी दीदी ने समझाया कि "दिन भर की घटनाओं को ज्यों का त्यों लिख देना ही डायरी है" ।

2. दीदी की डायरी के मुख्य अंश (1 जनवरी 97 - 7 जनवरी 97)
संजू ने मार्गदर्शन के लिए दीदी की डायरी के कुछ पन्ने पढ़े, जिनमें निम्नलिखित बातें दर्ज थीं:
1 जनवरी (कारीगरी): कॉलेज में कारीगरों को पत्थर तराशते और नक्काशी करते देखा ।
2 जनवरी (संवेदनशीलता):
शीला के घर एक पत्रिका में मजेदार चुटकुला पढ़ा।
घटना: माँ को मलेरिया था, इसलिए खाना भैया ने बनाया। सब्जी में नमक नहीं था, लेकिन दीदी ने चुपचाप खा लिया और तारीफ की ताकि भैया का दिल न दुखे ।
3 जनवरी (पिकनिक और विज्ञान):
पिकनिक पर प्राकृतिक सौंदर्य, झूले और नाच-गाने का आनंद लिया।
दीदी ने 'जादू' का खेल दिखाया (जो वास्तव में विज्ञान के चमत्कार थे)। संजू यह सीखना चाहती थी ।
4 जनवरी (शिक्षा और आज़ादी):
जापानी पुस्तक 'तोतो-चान' पढ़ी।
विचार: उस स्कूल की कहानी जहाँ रेल के डिब्बों में कक्षाएँ लगती थीं और बच्चों को पढ़ने की पूरी आज़ादी थी। दीदी सोचती हैं कि क्या हमें भी ऐसी आज़ादी मिल सकती है?
5 जनवरी (लड़की की शिक्षा/बाल विवाह):
दीदी बहुत उदास थीं क्योंकि उनकी सहेली नीलू की पढ़ाई छुड़वाकर उसकी शादी तय कर दी गई थी।
प्रश्न: दीदी के मन में सवाल उठता है कि लड़कियों को पढ़ने का पूरा अवसर क्यों नहीं मिलता? वे कब तक 'चौके-चूल्हे' में फँसी रहेंगी? ।
6 जनवरी (अंधविश्वास का विरोध):
स्कूल जाते समय रिक्शेवाले ने छींक दिया। दादी ने इसे 'अपशकुन' मानकर जाने से रोका।
परिणाम: दीदी नहीं रुकीं और स्कूल गईं। वहां नाटक में उनका अभिनय सराहा गया और पुरस्कार मिला।
निर्णय: दीदी ने तय किया कि वे अब शकुन-अपशकुन के फेर में नहीं पड़ेंगी ।
7 जनवरी (लिंग भेद):
दीदी का मन उदास था। वह सोचती हैं कि "सब लोग लड़कियों को ही क्यों डाँटते हैं?"

3. पाठ का उद्देश्य और सीख
यह पाठ डायरी लेखन विधा का परिचय देने के साथ-साथ कई सामाजिक मुद्दों को भी उठाता है:
1. डायरी लेखन: अपने अनुभवों को शब्द देने की कला।
2. सामाजिक कुरीतियाँ: लड़कियों की शिक्षा का महत्त्व और बाल विवाह का विरोध।
3. वैज्ञानिक दृष्टिकोण: अंधविश्वासों (जैसे छींकना) को नकारना।
4. संवेदनशीलता: परिवार के सदस्यों की भावनाओं का ख्याल रखना।
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