Ncert class 5 Hindi- chapter 7- चतुर चित्रकार
Ncert class 5 Hindi- chapter 7- चतुर चित्रकार
राम नरेश त्रिपाठी द्वारा रचित यह कविता एक चतुर चित्रकार और एक आदमखोर शेर के बीच हुई रोचक भिड़ंत का वर्णन करती है। जब एक कलाकार सुनसान जंगल में चित्र बना रहा था, तब अचानक वहां एक शेर आ गया जिसे देखकर वह भयभीत हो गया। अपनी जान बचाने के लिए चित्रकार ने चतुराई का सहारा लिया और शेर को उसका चित्र बनवाने के बहाने अपनी ओर पीठ फेरकर बैठने के लिए राजी कर लिया। जैसे ही शेर दूसरी तरफ मुड़कर बैठा, कलाकार चुपके से नाव में सवार होकर वहां से सुरक्षित निकल भागा। अंत में, अपनी हार से झुंझलाया हुआ शेर उसे कायर कहता रहा, लेकिन चित्रकार ने उसे दूर से ही अपनी तुलिका और कागज रखने की सलाह दे डाली।
कहानी का संक्षेपण:
यह कहानी रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित है, जिसका शीर्षक चतुर चित्रकार' है।
इस कहानी का संक्षेपण निम्नलिखित है:
एक बार एक चित्रकार एक सुनसान जगह पर चित्र बना रहा था, तभी अचानक वहाँ एक शेर आ गया। शेर को देखकर चित्रकार बहुत डर गया, लेकिन जब उसने देखा कि शेर चुपचाप खड़ा है, तो उसने हिम्मत जुटाई और शेर से उसका सुंदर चित्र बनाने के लिए बैठने का आग्रह किया। शेर अपने अंगों को समेटकर चित्रकार के सामने बैठ गया।
जब चित्रकार ने शेर के आगे का चित्र पूरा कर लिया, तो उसने बड़ी चतुराई से शेर से पीठ घुमाकर बैठने को कहा। जैसे ही शेर पीठ फेरकर बैठा, चित्रकार चुपके से वहाँ से भाग निकला और पास की झील में खड़ी एक नाव लेकर तेजी से चम्पत हो गया। काफी देर तक प्रतीक्षा करने के बाद जब शेर ने पीछे मुड़कर देखा, तो उसे अपनी मूर्खता का एहसास हुआ। शेर ने झुंझलाहट में चित्रकार को 'डरपोक' कहते हुए अपनी कलम और कागज ले जाने को कहा, जिस पर चित्रकार ने जवाब दिया कि शेर उन सामानों को अपने पास रखे और जंगल में बैठकर चित्रकला का अभ्यास करे।
शिक्षा: यह कहानी हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थिति में घबराने के बजाय चतुराई और सूझबूझ से काम लेने पर किसी भी संकट से बचा जा सकता है।
यह कहानी बिल्कुल वैसी ही है जैसे एक छोटी मछली अपनी बुद्धिमानी से जाल में फंसने के बावजूद शिकारी को चकमा देकर गहरे पानी में सुरक्षित निकल जाती है।
1. कविता में शेर को यम राजा का मित्र क्यों कहा गया है?
कविता 'चतुर चित्रकार' में शेर को 'यम राजा का मित्र' इसलिए कहा गया है क्योंकि वह मृत्यु का प्रतीक है।
इस संज्ञा के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
प्राणों का संकट: यमराज को हिंदू धर्म में मृत्यु का देवता माना जाता है। शेर एक खूंखार और हिंसक जानवर है, जिसका सामना होने का अर्थ है साक्षात मृत्यु के करीब होना [1]।
चित्रकार का भय: जैसे ही चित्रकार ने शेर को देखा, उसके 'होश उड़ गए' और उसे नदी, पहाड़ या पेड़ों के सौंदर्य में कोई दिलचस्पी नहीं रही। यह डर इस बात का प्रमाण था कि शेर उसके जीवन का अंत कर सकता था।
सुनसान स्थान: शेर का एक सुनसान जगह पर अचानक आ जाना चित्रकार के लिए वैसा ही था जैसे यमराज का कोई दूत या मित्र प्राण हरने आ गया हो।
अतः, कवि रामनरेश त्रिपाठी ने शेर की भयानक और जानलेवा प्रकृति को दर्शाने के लिए उसे 'यमराज का मित्र' कहकर संबोधित किया है।
यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी गहराते तूफान को 'विनाश का साथी' कहा जाए, क्योंकि उसका आगमन अपने साथ तबाही और अंत का संदेश लेकर आता है।






2. शेर ने चित्रकार को नाव रोकने के लिए क्यों कहा?
कहानी के अनुसार, जब चित्रकार नाव लेकर झील में दूर निकल गया, तो शेर ने उसे नाव रोकने के लिए इसलिए कहा क्योंकि वह चित्रकार द्वारा दिए गए धोखे से अत्यंत झुंझलाया हुआ और खिसियाया हुआ था।
शेर ने नाव रोकने के लिए कहने के पीछे निम्नलिखित तर्क दिए:
सामान वापस करने का बहाना: शेर ने चित्रकार को कायर डरपोक' पुकारते हुए कहा कि वह अपनी कलम और कागज़ तो लेता जाए।
झुंझलाहट मिटाना: काफी देर तक पीठ घुमाकर इंतज़ार करने के बाद जब शेर को अपनी मूर्खता का अहसास हुआ, तो वह झुंझलाहट में चूर हो गया और अपनी खीझ मिटाने के लिए उसे वापस बुलाने लगा।
हालाँकि, चित्रकार उसकी बातों में नहीं आया और उसने शेर को सलाह दी कि वह उन चीज़ों को अपने पास ही रखे और जंगल में बैठकर चित्रकला का अभ्यास करे।
यह स्थिति वैसी ही थी जैसे हाथ से निकल गए शिकार को देख शिकारी गुस्से में चिल्लाकर अपनी हार को छिपाने का प्रयास करता है।

3. शेर चित्रकार की ओर ध्यान से क्यों देखने लगा था?
शेर चित्रकार की ओर ध्यान से इसलिए देखने लगा था क्योंकि चित्रकार ने उससे उसका सुंदर चित्र बनाने का प्रस्ताव रखा था।
जब चित्रकार ने शेर से बैठने का आग्रह किया, तब शेर अपने शरीर के अंगों को बटोरकर 'उकरू-मुकरू' होकर बैठ गया और बड़ी उत्सुकता से चित्रकार की ओर देखने लगा ताकि वह अपना चित्र बनवा सके। शेर को इस बात का कौतूहल था कि चित्रकार उसका चित्र किस प्रकार बना रहा है।
यह बिल्कुल वैसा ही था जैसे कोई व्यक्ति किसी फोटो स्टूडियो में बड़े चाव से कैमरे की ओर देखता है ताकि उसकी तस्वीर अच्छी आए।

4. चित्रकार ने शेर को क्या कहकर बुलाया?
कहानी के अनुसार, जब चित्रकार शेर का सामने वाला चित्र बना चुका था, तब उसने शेर को अपना मुँह दूसरी तरफ घुमाने के लिए 'जंगल के सरदार' कहकर संबोधित किया। इसके अतिरिक्त, शुरुआत में जब चित्रकार ने शेर से चित्र बनवाने का आग्रह किया था, तब उसने उसे सम्मान देते हुए 'आप' कहकर पुकारा था ।
अतः, चित्रकार ने अपनी जान बचाने और शेर को अपनी बातों में फँसाने के लिए जंगल के सरदार' जैसी सम्मानजनक उपाधि का प्रयोग किया ताकि वह उसे पीठ घुमाकर बैठने के लिए मना सके।
यह बिल्कुल वैसा ही था जैसे कोई व्यक्ति किसी शक्तिशाली शत्रु से बचने के लिए उसकी झूठी प्रशंसा करके उसे मीठी बातों में उलझा लेता है।

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5. शेर को देखकर चित्रकार की क्या दशा हुई?
शेर को देखते ही चित्रकार की स्थिति बहुत खराब हो गई थी और वह बुरी तरह डर गया था। स्रोतों के अनुसार उसकी दशा निम्नलिखित थी:
होश उड़ जाना: शेर को अचानक सामने पाकर चित्रकार के तुरंत होश उड़ गए।
उत्साह की समाप्ति: शेर को देखने से पहले वह बड़े उत्साह से चित्र बना रहा था, लेकिन उसे देखते ही चित्रकार के मन में नदी, पहाड़, पेड़ और पत्तों के सौंदर्य के प्रति जो जोश था, वह पूरी तरह खत्म हो गया।
भय के बाद साहस: शुरुआत में घबराने के बाद, जब चित्रकार ने देखा कि शेर चुपचाप खड़ा है, तब उसने थोड़ी हिम्मत जुटाई और शेर का सुंदर चित्र बनाने का प्रस्ताव रखा ताकि वह वहां से बच निकलने की योजना बना सके।
यह बिल्कुल वैसा ही था जैसे तेज तूफान को देखकर किसी नन्हे पौधे की पत्तियां कांपने लगती हैं और उसका सारा खिलापन डर में बदल जाता है।
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