Ncert class 10 Hindi- chapter-10- मछली (कहानी)
Ncert class 10 Hindi- chapter-10- मछली (कहानी)
यह कहानी विनोद कुमार शुक्ल द्वारा लिखित है, जिसमें दो बच्चे बाज़ार से खरीदी गई मछलियों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। घर के पिताजी मछलियाँ खाने के शौकीन हैं, जबकि बच्चे उन्हें कुएँ में पालकर उनके साथ खेलने का सपना देखते हैं। जब उन्हें पता चलता है कि मछलियाँ भोजन के लिए काटी जाएँगी, तो वे गहरे दुख और निराशा से भर जाते हैं। अंत में, एक बच्चा मछली को बचाने के लिए उसे लेकर कुएँ की ओर भागता है, जो बेजुबान जीवों के प्रति बच्चों की मासूमियत और प्रेम को दर्शाता है। यह पाठ घर के भीतर के तनाव, दीदी की पीड़ा और बच्चों के कोमल मन के संघर्ष को खूबसूरती से चित्रित करता है।
झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में क्यों घुस गए ?
झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में इसलिए घुस गए क्योंकि उस गली से उनका घर नजदीक पड़ता था। स्रोतों के अनुसार, बाजार का दिन होने के कारण अन्य रास्तों में बहुत अधिक भीड़ थी, और वे जल्द से जल्द घर पहुँचना चाहते थे।
बच्चों के दौड़ने के पीछे मुख्य कारण यह डर था कि मछलियाँ बिना पानी के झोले में ही न मर जाएँ। झोले में कुल तीन मछलियाँ थीं, जिनमें से एक पिताजी के खरीदते समय ही मर गई थी, लेकिन बाकी दो जीवित थीं और लेखक झोले में उनकी तड़प को महसूस कर पा रहा था। उनका इरादा इन मछलियों को घर ले जाकर कुएँ में डालने का था ताकि वे उन्हें पाल सकें और उनके साथ खेल सकें।
मछलियों को लेकर बच्चों की अभिलाषा क्या थी ?
मछलियों को लेकर बच्चों (लेखक और संतू) की मुख्य अभिलाषा यह थी कि वे पिताजी से एक मछली माँग लेंगे और उसे अपने घर के कुएँ में डाल देंगे। उनकी योजना थी कि वे मछली को कुएँ में पालकर बहुत बड़ा करेंगे।
उनकी इच्छाओं के बारे में स्रोतों में निम्नलिखित विवरण मिलते हैं:
खेलने की इच्छा: बच्चे चाहते थे कि जब भी उनका मन हो, वे मछली को बाल्टी से निकालकर उसके साथ खेलें और बाद में उसे फिर से कुएँ में डाल दें।
मछली को बचाने का प्रयास: जब बच्चों को पता चला कि मछलियाँ आज ही काट दी जाएँगी, तो वे उदास हो गए। उनकी अभिलाषा मछली को पालने की थी, इसीलिए संतू एक जीवित मछली को छीनकर कुएँ की तरफ भागा ताकि उसे मरने से बचा सके और कुएँ में डाल सके।
जिज्ञासा और लगाव: बच्चे मछलियों को छूकर देखना चाहते थे और उनकी आँखों में अपनी परछाई ढूँढने की कोशिश कर रहे थे, जो उनके प्रति उनके विशेष लगाव और कौतूहल को दर्शाता है।
मछलियाँ लिए बर आने के बाद बच्चों ने क्या किया ?
मछलियाँ लेकर घर पहुँचने के बाद बच्चों ने सबसे पहले नहानघर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। उनके द्वारा की गई मुख्य गतिविधियाँ निम्नलिखित थीं:
मछलियों को बाल्टी में डालना: उन्होंने पानी से भरी एक बाल्टी को आधा खाली किया और झोले की तीनों मछलियों को उसमें उड़ेल दिया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि मछलियाँ उछलकर बाहर न गिरें।
भीगे कपड़े सुखाना: बारिश में बुरी तरह भीग जाने के कारण, लेखक और संतू ने अपनी कमीजें उतारकर निचोड़ीं और केवल पेंट पहनकर, गीली कमीजों को गोद में दबाकर बाल्टी को घेरकर बैठ गए।
मछलियों के साथ खेलना और निरीक्षण: संतू शुरू में मछली को छूने से डर रहा था क्योंकि उसे लगा कि वह काट लेगी, लेकिन लेखक के प्रोत्साहन पर उसने उसे उंगली से छुआ। लेखक ने एक मछली को हाथ में उठाकर भी देखा, जो उसके हाथों से फिसल रही थी।
परछाई देखना: लेखक ने दीदी की बात को परखने के लिए एक मरी हुई मछली को फर्श पर निकाला और उसकी आँखों में अपनी परछाई देखने की कोशिश की। उसने संतू को भी मछली की आँखों में झाँकने के लिए कहा।
भविष्य की योजना: वे आपस में सलाह कर रहे थे कि वे पिताजी से एक मछली माँग लेंगे और उसे कुएँ में डालकर पालेंगे।
कपड़े बदलना: बाद में, दीदी के पास जाने पर उसने उन्हें भीगे कपड़ों में देखकर नाराजगी जताई और फिर प्यार से उनके कपड़े बदलवाए तथा संतू के बाल सँवारे।
मछली कटते देखना: अंत में, जब नौकर भग्गू मछलियाँ काटने लगा, तो वे खंभे के पास टिककर मछली का कटना देखने लगे।
मछली को छूते हुए संतू क्यों हिचक रहा था ?
मछली को छूते हुए संतू के हिचकने का मुख्य कारण उसका डर था। जब लेखक ने उसे मछली छूने के लिए प्रोत्साहित किया, तो संतू ने यह कहकर इनकार कर दिया कि "नहीं, काटेगी"। उसे इस बात का भय था कि मछली उसे काट लेगी।
लेखक के बार-बार यह समझाने पर कि "ये मछली नहीं काटती," संतू ने डरते-डरते बाल्टी में सबसे ऊपर वाली मछली को केवल एक उँगली से छुआ और डर के मारे तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया। उसकी हिचकिचाहट और घबराहट इतनी थी कि जब बाल्टी में मछली के उछलने से पानी के छींटे उस पर पड़े, तो वह चौंककर थोड़ा पीछे हट गया था। इसके अलावा, जब लेखक ने एक मरी हुई मछली को फर्श पर रखा, तब भी संतू डर के कारण उससे थोड़ी दूर हटकर ही बैठा था।
मछली के बारे में दीदी ने क्या जानकारी दी थी ? बच्चों ने उसकी परख कैसे की ?
दीदी ने मछली के बारे में यह मुख्य जानकारी दी थी कि जो मछली मर जाती है, उसकी आँखों में झाँकने से अपनी परछाई (छाया) नहीं दिखाई देती। इसके अलावा, दीदी ने यह भी बताया था कि घर की नाली में गई मछली शहर की बड़ी नाली से होते हुए तीन मील दूर मोहारा नदी में चली जाती है।
बच्चों ने दीदी की दी हुई जानकारी (परछाई वाली बात) की परख इस प्रकार की:
मछली को बाहर निकालना: लेखक ने बाल्टी में नीचे दबी हुई एक मुर्दा सी दिखने वाली मछली को बाहर निकाला और उसे नहानघर के फर्श पर रख दिया।
आँखों में झाँकना: लेखक ने पहले संतू को मछली की आँखों में झाँककर यह देखने के लिए कहा कि उसे अपनी परछाई दिखती है या नहीं। संतू के चुप रहने पर लेखक ने खुद उस मछली को अपने हाथों में उठाकर अपने चेहरे के बिल्कुल पास लाकर देखा।
परिणाम: लेखक को मछली की आँख में एक धुंधली-धुंधली परछाई दिखी, लेकिन वह पूरी तरह से यह समझ नहीं पा रहा था कि वह वास्तव में उसकी अपनी परछाई थी या मछली की आँखों का रंग ही वैसा हो गया था। उसे लगा कि शायद मछली में अभी थोड़ी जान बाकी है।
संतू क्यों उदास हो गया ?
संतू के उदास होने का मुख्य कारण यह था कि उसे पता चल गया था कि मछलियाँ आज ही काट दी जाएँगी।
स्रोतों के अनुसार, संतू की उदासी के पीछे निम्नलिखित भावनाएँ जुड़ी थीं:
मछली पालने की इच्छा: लेखक और संतू ने मन ही मन यह योजना बनाई थी कि वे पिताजी से एक मछली माँग लेंगे और उसे कुएँ में डालकर पालेंगे। वे चाहते थे कि मछली को बड़ा करें और जब मन हो, उसे बाल्टी में निकालकर उसके साथ खेलें।
मछली के कटने का डर: जब लेखक ने देखा कि माँ मछली के लिए मसाला पीस रही है, तो उसने संतू से कहा कि "मछली आज ही बनेगी"। इस पर संतू ने बड़े भोलेपन से पूछा कि क्या मछली अभी कट जाएगी, और लेखक के "हाँ" कहने पर संतू उदास हो गया।
उत्साह का खत्म होना: मछलियों के काटे जाने की बात सुनकर बच्चों के मन में कुएँ में मछली पालने का जो उत्साह था, वह बुझ गया। संतू मछलियों से लगाव महसूस कर रहा था, इसीलिए वह जीवित मछली के कटने की बात सुनकर दुखी हो गया था।
घर में मछली कौन खाता था और वह कैसे बनायी जाती थी ?
घर में मछली केवल पिताजी खाते थे। घर के अन्य सदस्यों को मछली खाना अच्छा नहीं लगता था; माँ को तो घर में मछली या गोश्त बनना भी पसंद नहीं था और उन्होंने बच्चों के मछली खाने पर सख्ती से मना कर दिया था।
मछली बनाने की प्रक्रिया और उसकी तैयारी का विवरण इस प्रकार है:
मछली काटना: मछली काटने की जिम्मेदारी घर के नौकर भग्गू की थी। इसके लिए घर में एक अलग से 'पाटा' (लकड़ी का तख्ता) था, जिसे केवल मछली बनाने वाले दिन ही बाहर निकाला जाता था।
प्रक्रिया:
1. भग्गू मछली को काटने से पहले उसे पत्थर पर कसकर दो-तीन बार पटकता था।
2. इसके बाद, मछली के पूरे शरीर पर अच्छी तरह राख मली जाती थी।
3. फिर उसे पाटे के ऊपर रखकर चाकू से उसकी गर्दन काट दी जाती थी।
मसाला तैयार करना: जहाँ एक तरफ भग्गू मछली काटता था, वहीं दूसरी तरफ माँ मछली के लिए मसाला पीसती थीं।
जब घर में मछली बनती थी, तो पूरे घर में उसकी गंध फैल जाती थी, जिसे लेखक ने कहानी के अंत में महसूस किया था।
दीदी कहाँ थी और क्या कर रही थी ?
दीदी अपने कमरे में थीं। उनके बारे में स्रोतों में निम्नलिखित जानकारी मिलती है:
शुरुआत में: जब संतू उन्हें बुलाने गया, तो उसने बताया कि दीदी सो रही हैं। बाद में जब लेखक ने कमरे में जाकर देखा, तो वे करवट लिए लेटी हुई थीं।
स्वस्थ न होना: दीदी ने लेखक और संतू को भीगे कपड़ों में देखकर पहले नाराजगी जताई, फिर प्यार से उनके कपड़े बदलवाए। उन्होंने लेखक से कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए वे कमरे में अकेली लेटना चाहती हैं और लेखक कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दे।
सिसक-सिसक कर रोना: जब बाहर मछलियाँ काटी जा रही थीं, तब लेखक को कमरे के अंदर से सिसकियों की आवाज सुनाई दी। दरवाजा खोलकर देखने पर लेखक ने पाया कि दीदी अपनी साड़ी को सिर तक ओढ़े हुए सिसक-सिसक कर रो रही थीं।
अंत में: कहानी के अंत में दीदी की सिसकियाँ और बढ़ गई थीं। घर के तनावपूर्ण माहौल और पिताजी के गुस्से को देखकर लेखक को ऐसा लगा कि शायद पिताजी ने दीदी को मारा है।
अरे-अरे कहता हुआ भग्गू किसके पीछे भागा और क्यों ?
भग्गू संतू के पीछे "अरे-अरे" कहता हुआ भागा।
उसके भागने के पीछे निम्नलिखित कारण थे:
मछली लेकर भागना: जब भग्गू मछलियाँ काट रहा था, तभी अचानक संतू एक जीवित मछली को उठाकर बाहर की तरफ तेजी से भागा।
कुएँ में डालने का डर: संतू उस मछली को कुएँ में डालना चाहता था ताकि उसे मरने से बचाया जा सके और उसे पाला जा सके।
पिताजी की डाँट का भय: भग्गू को डर था कि यदि संतू मछली को कुएँ में डाल देगा, तो उसे पिताजी की डाँट खानी पड़ेगी। इसी कारण भग्गू मछली छीनने के लिए उसके पीछे भागा और कुएँ के पास उसे पकड़ लिया।
मछली और दीदी में क्या समानता दिखलाई पड़ी ? स्पष्ट करें ।
'मछली' कहानी में लेखक ने मछली और दीदी के बीच गहरी समानताएँ दर्शायी हैं, जो उनकी शारीरिक अवस्था और मानसिक वेदना दोनों में झलकती हैं।
इनके बीच की प्रमुख समानताएँ निम्नलिखित हैं:
तड़प और सिहरन: लेखक ने दीदी की सिसकियों और मछली की तड़प के बीच सीधा संबंध स्थापित किया है। जब दीदी अपने कमरे में साड़ी ओढ़कर सिसक-सिसक कर रो रही थीं, तो हिचकी लेते समय उनका पूरा शरीर सिहर उठता था। लेखक को दीदी की यह सिहरन देखकर अंगोछे में लिपटी मछली के 'लहरने' (तड़पने) की याद आ गई। जिस प्रकार मछली जल के बिना तड़प रही थी, उसी प्रकार दीदी भी किसी अदृश्य पीड़ा से तड़प रही थीं।
विवशता और बेबसी: मछली और दीदी दोनों ही घर के भीतर अशक्त और विवश हैं। मछलियाँ पिताजी की इच्छा पर कटने के लिए लाई गई हैं और उनके भाग्य का फैसला नौकर भग्गू के हाथ में है। ठीक उसी प्रकार, दीदी भी घर की चारदीवारी में बंद हैं और पिताजी के गुस्से व अनुशासन का शिकार हैं। लेखक को संदेह होता है कि पिताजी ने दीदी को मारा है, क्योंकि उनकी सिसकियाँ पिताजी के चिल्लाने के साथ बढ़ गई थीं।
मौन सहनशीलता: मछली मूक प्राणी है जो बिना कुछ कहे अत्याचार सहती है। दीदी भी अपने कमरे में अकेले सिसक रही हैं, लेकिन अपनी पीड़ा को व्यक्त नहीं कर पा रही हैं। जब लेखक ने उनसे मछलियों के आने की बात की, तो वे पहले चुप रहीं और फिर उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया।
अस्तित्व का संकट: जहाँ एक तरफ मछलियों का अस्तित्व रसोई के पाटे पर समाप्त हो जाता है, वहीं दीदी का व्यक्तित्व भी घर के तनावपूर्ण और पुरुष-प्रधान माहौल में दबा हुआ प्रतीत होता है।
संक्षेप में, लेखक ने मछली को दीदी के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। दोनों ही घर में पीड़ित हैं और उनकी पीड़ा की अभिव्यक्ति एक समान 'सिहरन' के रूप में बाहर आती है।
पिताजी किससे नाराज थे और क्यों ?
पिताजी मुख्य रूप से नरेन और अपनी बेटी (दीदी) से नाराज थे।
उनकी नाराजगी के संबंध में स्रोतों में निम्नलिखित विवरण मिलते हैं:
नरेन के प्रति क्रोध: पिताजी नरेन से इतने अधिक नाराज थे कि उन्होंने नौकर भग्गू को दहाड़ते हुए आदेश दिया कि "अगर नरेन घर में घुसे तो साले के हाथ-पैर तोड़ बाहर फेंक देना"। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद जो भी होगा, उसे वे खुद भुगत लेंगे।
दीदी के प्रति नाराजगी: घर के भीतर पिताजी अत्यधिक गुस्से में दरवाजे के पास टहल रहे थे। लेखक ने महसूस किया कि पिताजी की नाराजगी का शिकार दीदी भी हुई थीं, क्योंकि वे अपने कमरे में सिसक-सिसक कर रो रही थीं और उनकी सिसकियाँ तब और बढ़ गई थीं जब पिताजी चिल्ला रहे थे। लेखक को यहाँ तक लगा कि पिताजी ने दीदी को मारा है।
यद्यपि स्रोतों में नरेन के प्रति इस तीव्र क्रोध का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि पिताजी उसे घर के भीतर देखना पसंद नहीं कर रहे थे। इसके अतिरिक्त, संतू द्वारा मछली लेकर भागने और कीचड़ में कपड़े खराब करने के कारण घर का माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था, जिससे पिताजी के गुस्से को और बढ़ावा मिला।
संतू के विरोध का क्या अभिप्राय है ?
'मछली' कहानी में संतू के विरोध का अभिप्राय बहुत गहरा है, जो केवल एक मछली को बचाने तक सीमित नहीं है। उसके विरोध के मुख्य अभिप्राय निम्नलिखित हैं:
हिंसा के विरुद्ध कोमल भावना: संतू का विरोध हिंसा और मृत्यु के प्रति एक बच्चे की स्वाभाविक अरुचि को दर्शाता है। जब उसे पता चला कि मछलियाँ आज ही काट दी जाएँगी, तो वह उदास हो गया। उसका जीवित मछली को लेकर कुएँ की तरफ भागना, वास्तव में उस क्रूरता को रोकने का एक प्रयास था जिसे वह सहन नहीं कर पा रहा था।
जीवन की रक्षा का संकल्प: संतू और लेखक की अभिलाषा मछली को मारकर खाने की नहीं, बल्कि उसे कुएँ में डालकर पालने की थी। संतू का विरोध उसकी उस इच्छा की रक्षा करना था जिसके तहत वह मछली को बाल्टी से निकालकर उसके साथ खेलना चाहता था।
वयस्क दुनिया के प्रति विद्रोह: घर में पिताजी का अनुशासन और नौकर भग्गू द्वारा मछली को पत्थर पर पटककर मारना, वयस्क दुनिया की कठोरता को दर्शाता है। संतू का मछली छीनकर भागना और उसे अपने पेट के पास छुपाकर जमीन पर 'पट' अड़ जाना, इस कठोर व्यवस्था के प्रति उसका मूक विद्रोह था।
संवेदना और सहानुभूति: संतू मछली के प्रति सहानुभूति रखता था। यद्यपि वह शुरू में उसे छूने से डर रहा था, लेकिन अंत में उसने उसी मछली को बचाने के लिए खुद को संकट में डाला। स्रोतों के अनुसार, उसका यह विरोध उस दमघोंटू माहौल के खिलाफ भी था जहाँ मछलियों की तरह ही दीदी भी भीतर ही भीतर तड़प रही थीं और रो रही थीं।
पवित्रता की रक्षा: दीदी ने संतू को बहुत प्यार से साफ कपड़े पहनाए थे और उसके बाल सँवारे थे। लेकिन मछली को बचाने के विरोध में उसने अपने कपड़ों और बालों की परवाह नहीं की और वे कीचड़ व मिट्टी से खराब हो गए। यह दर्शाता है कि उसके लिए एक जीव की जान बचाना अपनी बाहरी सुंदरता को बनाए रखने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था।
संक्षेप में, संतू का विरोध मासूमियत, जीव-दया और घर के भीतर व्याप्त तनावपूर्ण एवं हिंसक स्थितियों के प्रति एक अबोध बालक की असहमति** का प्रतीक है।
दीदी का चरित्र चित्रण करें ।
विनोद कुमार शुक्ल द्वारा रचित कहानी 'मछली' में दीदी एक अत्यंत प्रभावशाली, संवेदनशील और स्नेही पात्र के रूप में उभरती हैं। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
स्नेहशील और ममतामयी: दीदी अपने भाइयों (लेखक और संतू) से गहरा प्रेम करती हैं। जब वे बारिश में भीगकर घर आते हैं, तो वह पहले नाराज होती हैं लेकिन फिर प्यार से उन्हें समझाती हैं और उनके कपड़े बदलवाती हैं। वे संतू के गीले बालों को तौलिए से पोंछकर, उनमें तेल लगाती हैं और बड़े प्यार से उसके बाल सँवारती हैं। लेखक के अनुसार, घर में सभी उन्हें बहुत सुन्दर मानते हैं।
संवेदनशील और करुणामयी: दीदी का हृदय अत्यंत कोमल है। जब उन्हें पता चलता है कि मछलियाँ लाई गई हैं और उन्हें काटा जाएगा, तो वे उदास हो जाती हैं और अपनी तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर कमरे में अकेली लेट जाती हैं। वे मछलियों के काटे जाने की क्रूरता को सहन नहीं कर पातीं और कमरे के भीतर अपनी साड़ी को सिर तक ओढ़े सिसक-सिसक कर रोती हैं।
मछली के साथ प्रतीकात्मक समानता: लेखक ने दीदी और मछली के बीच एक गहरा संबंध दिखाया है। जिस प्रकार पानी से बाहर निकलने पर मछली तड़पती है, उसी प्रकार घर के भीतर दीदी भी किसी पीड़ा से तड़प रही हैं। हिचकी लेते समय उनका पूरा शरीर उसी प्रकार सिहर उठता था जैसे अंगोछे में लिपटी मछली 'लहरती' (तड़पती) है। वे घर की उस विवशता का प्रतीक हैं जहाँ उनकी अपनी कोई इच्छा नहीं चलती।
ज्ञान और कल्पना का स्रोत: बच्चों के लिए दीदी जानकारी का एक बड़ा स्रोत हैं। उन्होंने ही बच्चों को बताया था कि मरी हुई मछली की आँखों में परछाई नहीं दिखती। इसके अलावा, मछली के नाली से होते हुए तीन मील दूर 'मोहारा नदी' में पहुँचने की बात भी बच्चों को दीदी से ही पता चली थी।
विवश और पीड़ित पात्र: दीदी का चरित्र घर के भीतर की घुटन और पुरुष-सत्तात्मक दबाव को भी दर्शाता है। कहानी के अंत में जब पिताजी गुस्से में चिल्ला रहे होते हैं, तो दीदी की सिसकियाँ और बढ़ जाती हैं। लेखक को यहाँ तक संदेह होता है कि पिताजी ने दीदी को मारा है। वे अपनी पीड़ा को किसी से साझा नहीं कर पातीं और केवल अकेले में रोकर अपना दुःख व्यक्त करती हैं।
संक्षेप में, दीदी का चरित्र करुणा, स्नेह और मूक सहनशीलता का मिश्रण है, जो कहानी में मासूमियत और घरेलू कठोरता के बीच के संघर्ष को गहराई प्रदान करता है।
कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें ।
विनोद कुमार शुक्ल की कहानी 'मछली' का शीर्षक विषय-वस्तु और संवेदना की दृष्टि से पूर्णतः सार्थक और सटीक है। इस सार्थकता को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है:
कथानक का केंद्रबिंदु: पूरी कहानी 'मछली' के इर्द-गिर्द ही बुनी गई है। कहानी की शुरुआत बाजार से झोले में तीन मछलियाँ खरीदकर लाने से होती है और अंत घर में मछलियों के कट जाने और उनकी गंध के फैलने से होता है। कहानी की हर घटना—चाहे वह बच्चों का मछली को कुएँ में पालने का सपना हो, मछली की आँखों में अपनी परछाई देखना हो, या संतू का मछली लेकर भागना हो—मछली से ही जुड़ी है।
प्रतीकात्मक सार्थकता: कहानी में 'मछली' केवल एक जलचर जीव नहीं है, बल्कि वह घर की स्त्रियों (विशेषकर दीदी) की स्थिति का प्रतीक है। जिस प्रकार मछली पानी से बाहर निकलने पर बेबस होकर तड़पती है और अंततः काटी जाती है, उसी प्रकार दीदी भी घर की चारदीवारी और पिता के कड़े अनुशासन में घुट रही हैं। लेखक ने स्पष्ट रूप से दीदी की सिसकियों और मछली की तड़प के बीच समानता दिखाई है; हिचकी लेते समय दीदी का शरीर वैसे ही सिहरता है जैसे अंगोछे में लिपटी मछली 'लहरती' है।
बाल-मनोविज्ञान का चित्रण: शीर्षक बच्चों की संवेदनाओं को भी व्यक्त करता है। लेखक और संतू के लिए मछली खाने की वस्तु नहीं, बल्कि एक खिलौना और पालतू जीव है जिसे वे "कुएँ में डालकर बहुत बड़ी" करना चाहते हैं। संतू का मछली को बचाने के लिए उसे लेकर भागना और उसे अपने पेट के पास छुपा लेना, मासूमियत और क्रूरता के बीच के संघर्ष को दर्शाता है।
हिंसा और संवेदना का द्वंद्व: कहानी का शीर्षक उस गहरे दुख और हिंसा की ओर संकेत करता है जो एक साधारण घर के भीतर घटित होती है। जहाँ पिताजी के लिए मछली केवल भोजन है, वहीं बच्चों के लिए वह एक सहचर है और दीदी के लिए वह अपनी ही पीड़ा का प्रतिबिंब है।
परिवेश का निर्माण: कहानी के अंत में जब मछलियाँ काट दी जाती हैं, तो पूरे घर में उनकी गंध फैल जाती है। यह गंध केवल मछली की नहीं, बल्कि घर के भीतर व्याप्त तनाव, घुटन और मरती हुई संवेदनाओं की गंध बन जाती है।
निष्कर्षतः, 'मछली' शीर्षक न केवल कहानी की मुख्य वस्तु को दर्शाता है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक विवशताओं और मूक प्राणियों व स्त्रियों के प्रति समाज के दृष्टिकोण को भी गहराई से उजागर करता है। इसलिए यह एक अत्यंत प्रभावी और अर्थपूर्ण शीर्षक है।
कहानी का सारांश प्रस्तुत करें ।
विनोद कुमार शुक्ल द्वारा लिखित कहानी 'मछली' बाल-मनोविज्ञान, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक विवशताओं का एक संवेदनशील चित्रण है। कहानी का सारांश निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
1. मछलियों का आगमन और बच्चों की योजना:
कहानी की शुरुआत तब होती है जब लेखक और उसका छोटा भाई संतू बाजार से पिताजी द्वारा खरीदी गई तीन मछलियाँ झोले में लेकर घर भाग रहे हैं। झोले में एक मछली मर चुकी थी, जबकि दो जीवित थीं। बच्चों के मन में यह कोमल इच्छा थी कि वे पिताजी से एक मछली माँग लेंगे और उसे कुएँ में डालकर पालेंगे ताकि जब मन हो, उसके साथ खेल सकें।
2. परछाई की परख और वास्तविकता का बोध:
घर पहुँचकर वे मछलियों को नहानघर की बाल्टी में डाल देते हैं। लेखक दीदी द्वारा बताई गई इस बात की परख करता है कि मरी हुई मछली की आँखों में परछाई नहीं दिखती। उसे एक मछली की आँख में धुंधली परछाई दिखती है, जिससे उसे लगता है कि वह शायद अभी जीवित है। इसी बीच, जब उन्हें पता चलता है कि माँ मसाला पीस रही हैं और मछलियाँ आज ही काटी जाएँगी, तो उनका पालने का उत्साह उदासी में बदल जाता है।
3. दीदी का स्नेह और आंतरिक पीड़ा:
भीगे हुए बच्चों को देखकर दीदी पहले नाराज होती हैं, फिर बड़े प्यार से उनके कपड़े बदलवाती हैं और संतू के बाल सँवारती हैं। हालांकि, दीदी खुद उदास हैं और अपनी तबीयत खराब होने की बात कहकर कमरे में अकेले लेट जाती हैं। लेखक महसूस करता है कि दीदी कमरे के अंदर सिसक-सिसक कर रो रही हैं।
4. हिंसा के विरुद्ध विद्रोह (चरम बिंदु):
जब नौकर भग्गू मछली काटने की तैयारी करता है और एक मछली की गर्दन काट देता है, तब संतु अचानक एक जीवित मछली उठाकर बाहर की ओर भागता है। वह उसे कुएँ में डालकर बचाना चाहता है। भग्गू उसके पीछे भागता है और उसे पकड़ लेता है। इस छीना-झपटी में संतू के साफ कपड़े और बाल खराब हो जाते हैं।
5. घर का तनावपूर्ण वातावरण और अंत:
कहानी के अंत में घर का माहौल बहुत तनावपूर्ण हो जाता है। पिताजी नरेन नामक व्यक्ति पर अत्यधिक क्रोधित हैं और उसे घर न घुसने देने की धमकी देते हैं। दीदी के रोने की आवाजें तेज हो जाती हैं और लेखक को संदेह होता है कि पिताजी ने दीदी को मारा है। अंततः, मछलियाँ काट दी जाती हैं और पूरे घर में उनकी गंध फैल जाती है, जो कि मृत संवेदनाओं और घर की घुटन का प्रतीक है।
निष्कर्ष:
यह कहानी मछली के माध्यम से घर की स्त्रियों (दीदी) की मूक पीड़ा और विवशता को उजागर करती है। जिस प्रकार मछली जल के बिना बेबस है, उसी प्रकार दीदी भी घर के कठोर वातावरण में अपनी भावनाओं को दबाए हुए हैं।
टिपटिपवा pdf + notes + solutionहुआ यूं कि pdf + notes + solutionम्यान का रंग pdf + notes + solutionउपकार का बदला pdf + notes + solutionचतुर चित्रकार pdf + notes + solutionनमकू pdf + notes + solutionममता की मूर्ति pdf + notes + solutionएक पत्र की आत्मकथा notes + solutionकविता का कमाल notes + solutionमरता क्या न करता notes + solutionअंधेर नगरी pdf + notes + solutionईद pdf + notes + solutionपरिक्षा pdf + notes + solutionअसली चित्र pdf + notes + solutionहाॅकी का जादूगर pdf + notesहार जीत pdf + notes + solutionमंत्र pdf + notes + solutionभीष्म की प्रतिज्ञा pdf + notes + solutionसरजू भैया pdf + notes + solutionदादा दादी के साथ pdf + notes + solutionस्वार्थी दानव pdf + notes + solutionफसलों का त्योहार pdf + notes + solutionशेरशाह का मकबरा pdf + notes + solutionनचिकेता pdf + notes + solutionदानी पेङ pdf + notes + solutionवीर कुँवर सिंह pdf + notes + solutionसाईकिल की सवारी pdf + notes + solutionहिमशुक pdf + notes + solutionऐसे ऐसे pdf + notes + solutionईदगाह pdf + notes + solutionबालगोबिन भगत pdf + notes + solutionहुंडरू का जलप्रपात pdf + notes + soluठेस pdf + notes + solutionआशोक का शस्त्र-त्याग pdf + n + sतू न गई मेरे मन सेविक्रमशिला pdf + notes + solutionदीदी की डायरी pdf + notes + soluदीनबंधु निराला pdf + notes + solutionखेमा pdf + notes + solutionचिकित्सा का चक्कर p + n + sकहानी का प्लॉट pdf + notes + solutionनालंदाग्राम-गीत का मर्मलाल पान की बेगममूक फिल्मों से...अष्टावक्र pdf + notes + solutionरेल-यात्रा pdf + notes + solutionश्रम विभाजन और जाति प्रथा (निबंध)मछली (कहानी) pdf + notes + solutionनौबतखाने में इबादत (व्यक्तिचित्र)शिक्षा और संस्कृति (शिक्षाशास्त्र)बातचीत pdf + notes + solutionसंपूर्ण क्रांति pdf + notes + solutionअर्धनारीश्वर pdf + notes + solutionरोज pdf + notes + solutionएक लेख और एक पत्रओ सदानीरा pdf + notes + solutionप्रगीत और समाजसिपाही की माँ pdf + notes + solutionउसने कहा थाशिक्षा pdf + notes + solutionहंसते हुए मेरा अकेलापनजूठन pdf + notes + solutionतिरिछ pdf + notes + solution
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें